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देसी भाभी किरायेदार

मेरा नाम अजय है और मैं महाराष्ट्र के ही एक छोटे से जिले में रहता हूँ| मुझे sports और gym करने का काफी ज्यादा शौक है| school की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब मैं अपनी college की पढ़ाई की शुरुआत करने जा रहा हूँ| जैसे- जैसे मैं बड़ा होता जा रहा हूँ मेरी sex इच्छा भी काफी जोरों से बढ़ती जा रही है, और ऐसा हो भी क्यों नहीं??, ये सब तो जवानी में होना एक आम बात होती है|

आज मैं आपको अपने एक sex अनुभव से जुड़ी एक SEX STORY कहानी से परिचित करवाने जा रहा हूँ जो मेरे साथ अभी हाल ही बित चुकी है| हम जहां रहते है वह काफी चहल-पहल वाली जगह है| हमारा घर तीन मंज़िलें वाला एक विशाल घर है, जहां हम रहते है| हमारा घर के  उपर मौजूद मंज़िलें काफी समय से खाली पड़ी हुई है क्योंकि मेरे पिताजी को अनजान लोगों को घर देना बिलकुल भी पसंद नहीं है|

एक बार एक भाभी हमारे यहाँ घर देखने के लिए आई थी, पापा ने तुरंत ही उन्हें घर देने से मना कर दिया|मैं वहां से गुजरते हुए यह सब देख रहा था| तभी मेरा ध्यान अचानक से उस भाभी की तरफ गया|भाभी एक गोर-चिकने बदन और खूबसूरत लचीले शरीर की मालकिन थी| भाभी का कद मुझसे भी ज्यादा था और उनके बूब्स काफी ज्यादा उभरे हुए नजर आ रहे थे| उनकी आँखों के बारे में क्या कहूँ, एक बार जिसे देख ले वो तो वहीँ पर घायल हो जाए|

मैं कुछ देर के लिए पापा के पास रुका और मैंने पापा को समझाया कि हमारा घर काफी समय से खाली पडा है जिसका हमे अब-तक कोई फायदा नहीं मिला है| अगर यह वहां पर  रह लेंगे तो हमें कुछ पैसे भी मिल जायेंगे और इन्हें घर भी मिल जाएगा|

भाभी की नजरे मुझ पर बार-बार पड रही थी, और बातों ही बातों में मुझे यह भी पता चला कि उनकी शादी को अभी कुछ 2 साल ही हुए है| अगले ही दिन भाभी सीधा हमारे ऊपर वाली मंज़िल पर बने घर में शिफ्ट हो जाती है| भाभी की मेरी माँ से भी अच्छी पहचान हो जाती है वो अक्सर नीचे हमारे यहाँ मिलने-जुलने के लिए आ जाया करती थी| इस बिच मैं भाभी को बार-बार touch करता था, उन्हें हाथ लगाने की कोशिश भी किया करता था| उनको याद कर के रोज बाथरूम में मूठ मारना तो एक आम बात हो गयी थी, मेरे लिए|

जैसे ही भाभी के पति सुबह काम के लिए निकलते थे, मैं रोज उनके घर चले जाता था| इस बिच हम एक दूसरे से काफी हँसी-मज़ाक कर लिया करते थे|अब तक भाभी यह समझ चुकी थी कि मेरे दिमाग में क्या चल रहा है और रोज़ाना बातों ही बातों में वो भी मुझे तैयार लग रही थी|

अब मुझे भाभी की काफी ज्यादा तलब लग चुकी थी| रोज़ाना की तरह जब मैं बाथरूम में बैठकर मूठ मार रहा था तब मैंने ठान लिया था कि अब किसी ना किसी तरह भाभी के साथ संभोग करना ही होगा|

अगले ही दिन मैं भाभी से मिलने के लिए उनके घर जाता हूँ और देखता हूँ कि भाभी खाना बना रही है|खाना बनाते हुए मेरा ध्यान भाभी की गोल-मटोल और उभरी हू गांडो की तरफ जाता है| भाभी को देखते से ही मेरा ओजार उभार पकड लेता है| फिर में सीधा जाकर अपने पेंट में से दिख रहे उभरते हुए ओजार को ऐसे ही पेंट के अंदर से भाभी की गोल-मटोल गांडो में ले जाकर चिपका देता हूँ|

भाभी एक के बाद एक मुझसे सवाल पूछने लगती है और कहती है – ये तुम क्या कर रहे हो अजय

मैं भाभी से कहता हूँ – बस भाभी मुझसे अब और इंतजार नहीं हो रहा है मैं काफी समय से इस दिन का इंतजार कर रहा हूँ अब मुझे और मत रोको|

इतना कहकर मैं सीधा भाभी की गर्दन को चूमने लगता हूँ और थोड़ी ही देर में भाभी की भी साँसे तेज होने लगती है और अब वो भी खुद को उत्तेजित होने से रोक नहीं पाती है|

भाभी सीधा मेरी पेंट के ऊपर आ रहे है ओजार के उभार को अपने हाथों से ही मसलने लगती है| और इसी बिच मैं भी अपने हाथों से भाभी की कमीज़ की पीछे की चेन खोल देता हूँ और उनकी गौरी नंगी पीठ को अपने कड़क हाथों के सहारे मसलने लगता हूँ| कुछ ही देर बाद भाभी उनकी कमीज़ निकालकर जमीन पर फेंक देती है और बस ब्रा में ही मेरे सामने खड़ी हो जाती है| मैं अब भाभी के होठों को चूमता हुआ सीधा उनकी ब्रा के ऊपर से ही उनके बूब्स को मसलना शुरू कर देता हूँ| मेरे मसलने के कारण एक बूब्स उनकी ब्रा से निकल कर बाहर आ जाता है जिसे देखकर मैं और भी ज्यादा उत्तेजित हो जाता हूँ और उनके निप्पल को आम की तरह चुसना शुरू कर देता हूँ|

धीरे से अब मैंने उनकी सलवार को भी उतार दिया था और अब भाभी केवल लाल कलर की पेंटी में थी| मैंने बिना देरी किये अपने हाथों को भाभी की योनी के अंदर डाल दिया और उनकी योनी के अंदर अपनी उंगलिया घुसा दि| मैं देख पा रह था कि भाभी को काफी ज्यादा मजा आ रहा है उनके मुंह से लगातार आह-आह-आह की आवाजें निकल रही थी जो की मेरा उत्साह और भी ज्यादा बढ़ा रही थी|

कुछ ही देर में मेने और किसी चीज़ का इंतजार ना करते हुए सीधा भाभी को किचन में ज़मीन पर ही सुला दिया था| फिर उनकी ब्रा को अपने हाथों से खींचकर बाहर फेंक दिया, और अपने हाथों से उनके दोनों बूब्स को मसलते हुए मेने जोर-जोर से चूसना शुरू कर दिया था|

धीरे-धीरे में उनके बदन को चूमता हुआ नीचे की तरफ बड़ रहा था|मैंने नीचे की तरफ झुक कर भाभी के योनी के ऊपर उनके बीज को चाटना शुरू कर दिया था| जिससे अब भाभी भी उत्तेजना की चरम सीमा पर पहुँच चुकी थी और अंतिम कार्यवाही का बिलकुल भी इंतजार नहीं कर पा रही थी और मेरे सर पर हाथ फेरें जा रही थी|

भाभी ने मुझसे कहा – अजय मैं अब बिलकुल भी इंतजार नहीं कर सकती हूँ तुम अब मेरी गुफा में अपना ओजार डालो अभी के अभी, मैंने बिलकुल वैसा ही किया और पान के flavour का condom अपने ओजार में लगाकर सीधा आगे की कार्यवाही के लिए तैयार हो गया था|

मेने पहले तो भाभी की योनी को ऊपर से नीचे की और मसला और धीरे से अपने ओजार को बस टोपे तक भाभी की योनी में घुसा दिया| मेरे मोटे ओजार से के थोड़े से ही घुसने पर भाभी के मुंह से आह की तेज आवाज़ आ गयी| फिर देने अगले प्रयास में सीधा ही अपना ओजार एक ही झटके में भाभी की योनी में घुसा दिया जिसके बाद वे झटपटा गयी और मुझे पीछे के तरफ धक्का देने लगी, लेकिन मेने इसे पूरी तरह से नजर अंदाज़ कर के जोर -जोर से भाभी की योनी में झटके देने लगा, थोडा बहुत दर्द सहने के बाद अब उनको भी अच्छा महसूस होने लगा था|

अब मेरा ध्यान सीधा उनकी गांडो की तरफ जा रहा था जो मस्त लचीली थी| लेकिन भाभी ने मुझे गांड पेलने के लिए मना कर दिया था| अब मैं बिलकुल भी नहीं रुक सकता था क्योंकि इन्ही गंडों को पेलने के लिए मैं कब से तरस रहा था|मेने तुरंत ही भाभी को पीछे की तरफ घोड़ी बनाया और अपने ओजार को एक ही झटके में भाभी की गांड में आधा उतार दिया| भाभी अब जोर-जोर से  आह-आह चिल्लाने लगी और ओजार को बाहर निकालने की विनती करने लगी, लेकिन में यहाँ भी नहीं रुका और मेने सीधा दुसरे झटके में ही अपने ओजार को पूरा भाभी की गांड में उतार दिया| अब तक भाभी की आँखों में आंसूं आने लगे थे, लेकिन मेंने उन्हें थोड़ा संभाला और उनके बूब्स को मसलते हुए धीरे-धीरे उनकी गांडो को पेलने लगा| अब वह  भी मेरे साथ जमकर मजा ले रही थी|

भाभी करीब दो साल तक हमारे यहाँ किरायदार रही और फिर वह कुछ ही दिनों में दूसरे शहर में जाकर shift हो गयी, लेकिन अभी भी हम रोज phone पर एक दूसरे से बातें किया करते है|