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गांव की मौसी की चूत की ठुकाई

हेलो दोस्तों, कैसे है आप सब, भगवन की दुआ से सब ही अच्छे होंगे। दोस्तों मेरा नाम मनीष है और यह मेरी पहली कहानी है। सबसे पहले मैं अपने बारे में आपको बता दू। मेरी उम्र २३ साल है फ़ीट लम्बा शरीर, रंग गोरा और रहता जयपुर में हु। अब तक काफी लड़कियां और आंटियों के साथ सेक्स कर चूका है। मुझे आंटी और भाभियाँ ज़्यादा पसंद है। 

यह कहानी मेरी एक मौसी की है जो भरतपुर गाओं में रहती है। उनके दो बच्चे भी है उनका शरीर काफी ही अच्छा और आज भी वो किसी जवान लड़की से कम नहीं। यह कहानी दिसंबर के महीने की है। मैं उनके घर अक्सर जाता रहता हु। मेरी पहली उन पर कोई गलत नज़र नहीं थी। लेकिन एक दिन मैंने उन्हें बाथरूम में गलती से नहाते हुए देख लिया। उस दिन से मेरी नीयत खराब हो गयी। घर में और कोई भी नहीं था, सब बहार अपने काम पर थे। मुझे मौसी की गांड और बूब्स एकदम साफ़ नज़र रहे थे। मैं उस वक़्त मौसी को देखता ही रह गया उनकी कमर और उनका गोरा बदन। मैं यह सोच रहा था की इस बदन को मसलने में कितना मज़ा आएगा। मैं कुछ २० मिनट तक मौसी को खड़े होकर देखता रहा। 

इतने ही देर में दरवाज़े की घंटी बजी तो मैंने देखा की दूध वाला आया है। मेरे पीछे मौसी भी गयी थी जल्दी से कपडे पहनकर बहार गयी। भाभी दूध लेने के लिए नीचे बैठ गयी तो उनके ब्लाउज के हुक खुले हुए थे जिससे उनकी चूचियों दिख रही थी। मैं काफी गौर से देख रहा था तो मौसी ने मुझे देख लिया। उन्होंने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लगी। मैं डर गया और वो दूध लेकर अंदर किचन में चली गयी। मैंने सोचा यह बहुत अच्छा वक़्त है शायद मौसी भी तैयार है। लेकिन मुझे डर भी था की कही बात उलटी पद जाये। मम्मी पापा को पता चल गया तो बहुत बड़ी दिक्कत होगी। मौसी किचन में ही थी। 

अब मैं किसी बहाने से किचन में गया, उनकी उभरी हुई गांड साड़ी में और ज़्यादा बड़ी लग रही थी। मैंने उनके पीछे गया और धीरे धीरे अपने लंड को रगड़ते हुए बातें करने लगा। मेरी मौसी, सुजाता साथ दे रही थी। वो भी अपने गांड को पीछे करते हुए मुझे और मज़े दे रही थी। ऐसे करते करते कुछ १५ मिनट हो गए, मैं एक हाथ से उनकी कमर को खींचा और उनकी चूचियों को मसलने लगा। उफ्फफ्फ्फ़ मौसी की कमर बिलकुल मोती और नरम। ऐसी कमर मैंने पहले कभी नहीं देखी। मौसी ने भी मुझे पीछे से कसकर पकड़ लिया और मैं उनके गले को ज़ोर ज़ोर से चुम रहा था। मौसी बिलकुल मदहोश हो चुकी थी। मैं किचन का बहार का दरवाज़ा बंद कर दिया, क्यूंकि कोई बहार से देख लेता तो पन्गा हो जाता। 

मौसी अब अपने हातों से मेरे लंड को मसल रही थी। अब वक़्त गया था की मौसी को कमरे में लेकर जाये। मैंने मौसी को उठाया और पास वाले बच्चो के रूम में लेकर गया और कमरा बंद कर दिया। सबसे पहले मैंने उनका ब्लाउज उतारा, ऐसी चूचियां तो किसी रंडी की भी नहीं होती। कम से कम मौसी की चूचियों का साइज ४० होगा। जाते ही मैंने दोनों चूचियों के ऊपर अपना मुँह रख दिया और मौसी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया। मैं मौसी की चूचियों को खूब ज़ोर से दबा रहा था, मैं कर रहा था खा जाऊ। मौसी अब भी मेरे लंड को सेहला रही थी। 

मौसी ने कहाअपना पैट उत्तारदो

मैंने अपने सारे कपडे निकल दिया और साथ में मौसी की साड़ी को भी उतार दिया। अब हम दोनों बिस्तर पर बिलकुल नंगे थे। मैंने कम से कम मौसी की चूचियों को आधा घंटा चूसा। 

आखिर में मौसी ने कहादर्द हो रहा है मुझे, कुछ देर शांत हो जाओ

अब मैं उठा और दोनों चूचियों को बीच अपने लंड को घुसा दिया। मैं चूचियों को अपने लंड से पेल रहा था। मौसी को भी काफी मज़ा रहा था। मौसी भी थोड़ा थोड़ा मेरे लंड को अपने मुँह में ले रही थी। 

मौसी ने कहामुझे तुम्हारा लंड चूसना है

मौसी ने मुझे लेता दिया और मौसी ने अब मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया। ऐसे लंड की चुसाई आज तक किसी और ने नहीं करी। मेरा पूरा इंच लम्बा लंड अपने गले में उतार लिया और बिना किसी दिक्कत के। मुझे दर्द भी हो रहा था लेकिन उस दर्द में भी मज़ा था। मौसी शायद लंड की बहुत प्यासी थी। उन्होंने बिना रुके १५ मिनट से ज़्यादा मेरे लंड को चूसा बिना रुके। जब मैं झड़ भी गया तो भी वो नहीं मानी। कुछ देर बाद वो उठी और उन्होंने अपनी गांड मेरी तरफ करदी और फिर से लंड को सहलाने लगी। मैं समज की मुझे गांड चाटनी है। मैं भी जीब से मस्त गांड की सफाई करदी। मैं जीब देकर मौसी की गांड को चाट रहा था। 

दूसरी तरफ मौसी ने मेरे लंड को चूस चूस कर लाल कर दिया। जब मुझसे दर्द सहा नहीं गया। 

मैंने कहादर्द हो रहा है

मौसी ने मेरे लंड को आखिर में छोड़ ही दिया। मौसी ने मेरे लंड को हल्का सा मसलना शुरू किया जिससे मेरे दर्द को सुकून मिल गया। मौसी मेरे ऊपर लेट गयी और हम दोनों किश करने लग गए। मैं मौसी के होटों को काट रहा था और साथ में उनके पुरे चेहरे पर अपनी जीभ भी फेर रहा था। मौसी की कम नहीं बिलकुल ज़ोरदार वाली किश करने लग गयी जिससे मेरे पसीने छूटने लगे। अब वक़्त गया था चुदाई का। 

मैंने मौसी की टांगों को फैलाया और अपने लंड को रगड़ना शुरू किया। मौसी अब बिलकुल होश खोने वाली थी। मैं एक हल्का सा धक्का लगाया और पूरा लंड अंदर घुसाया। अब तो जो मैंने मौसी को पेलना शुरू किया। मैंने सोच लिया था की जल्दी से अपना वीयर नहीं छोडूंगा। मैंने मौसी को अपनी बाहों में बहकर पेला और उनकी टांगों को भी उठाकर छोड़ा। तकरीबन २० मिनट की चुदाई के बाद मैंने अपना वीयर छोड़ ही दिया। 

मौसी जल्दी से उठी और मेरे पुरे वीयर को पी गयी और मेरे लंड को फिर मसलने लगी। मुझे सुकून मिल रहा था क्यूंकि इतनी ज़ोरदार चुदाई के बाद मेरे लंड में दर्द हो रहा था

मौसी ने कहाउल्टा लेट जाओ, मैं बदन दबती हु

क्या पल था एक नंगी और सेक्सी औरत तुम्हारा बदन दबा रही हो। उफ़ मेरा क्या नसीब है। 

साथ में उनका वो लंड चूसना, सच में पागल कर देती है जब वो मेरा लंड चुस्ती है। 

अब जब भी मौका मिलता है मैं खूब मौसी को पेलता हु। आपको कैसी लगी यह कहानी ज़रूर बताना।