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पड़ोस की बहन के साथ सेक्स कहानी पार्ट 2

बिहारी: यह क्या कह रही है साली, लौडे के नशे मे यह भी भूल गई कि अगर वीरेंदर को ज़िंदा छोड़ दिया तो क्या अंजाम हो सकता है. 

बीना: उसे तो मैं ऐसा गुलाम बनाउन्गी कि वो कुत्ते की तरह हर तरफ मेरी गान्ड के पीछे ही रहेगा. 

बिहारी: देख ले साली मैं तो अपना हिस्सा और लौंडिया लेकर यहाँ से निकल जाउन्गा पर तुझे तो यहीं रहना है. कैसे कर पाएगी यह सब कुछ. मेरी बात मान जब तक दिल चाहे वीरेंदर के लौडे से चुद ले पर उसे सच पता लगने पर उसकी मौत ही हमे चैन से जीने देगी. 

बीना: चल यार तेरे लिए यह भी मान लिया, आख़िर तो तू मेरे पास है ही. 

बिहारी: बस अब जल्दी से आशना की चूत मे वीरेंदर ठप्पा लगा दे उसके बाद तो मैं उसे ब्लॅकमेल करके उसकी गान्ड पर सबसे पहले अपनी मुहर लगाउन्गा. 

बीना: तुम सब मर्दो को गान्ड मे इतनी दिलचस्पी क्यूँ होती है. अभी वीरेंदर भी काफ़ी खुश हो गया था जब मैने उसे अपनी गान्ड देने की बात कही थी. 

बिहारी: यह बात तू नहीं समझेगी. बड़ी गान्ड वाली औरत को कुतिया बनाकर चोदने मे जो मज़ा है वो तो शायद स्वर्ग मे भी नहीं मिले. 

बीना: चल अब जल्दी से मेरी चूत की प्यास भुजा दे मुझे काफ़ी देर हो गई है. 

बिहारी उसे हाल से उठाके घर के बाहर ले गया. शाम होने को आई थी. अंधेरा होने लगा था, शायद 5:00-5:30 बजे का टाइम था. आसमान मे बदल छा गये थे, काफ़ी घने थे. आज शायद जम कर बारिश होने वाली थी. मौसम भी काफ़ी ठंडा हो गया था. 

बीना: बाहर कहाँ ले जा रहा है.

बिहारी: आज हम बाहर लॉन मे प्यार करेंगे. 

बीना: पागल हो गया है क्या, इतनी ठंड मे तो मेरी कुलफी ही जम जाएगी. 

बिहारी: तू चिंता ना कर, अपनी कुलफी से मैं तेरी भट्टी मे आग लगा दूँगा. 

बीना ना ना करती रही पर बिहारी ने उसे लॉन मे पड़े एक टेबल पर रखा और अपने कपड़े उतारने लगा. देखते ही देखते बिहारी बिल्कुल नंगा हो गया. बीना ने उसका आकड़ा हुए लंड देखा तो हैररानी से उसे पूछा “क्या खाते हो तुम हर वक्त तुम्हारा खड़ा रहता है”.

बिहारी: दूध पीता हूँ औरतो का वो भी डाइरेक्ट मम्मो से. 

बीना: लेकिन मेरे मम्मों में तो दूध है नहीं. 

बिहारी: तेरी तो चूत के रस मे ही इतना नशा है कि मम्मो तक आने का दिल ही नहीं करता. 

बीना: चल अब जल्दी से मेरे भी कपड़े उतार और दिखा दे अपना दम.

बिहारी ने फॉरन उसके कपड़े उतार कर एक चेर पर रख दिए. बिहारी बीना की टाँगों मे बैठ कर उसकी चूत का रास्पान करने लगा. 

कुछ देर बाद बीना बोली: जल्दी से चोद दे मेरे रज्जा, अब और मत तडपा.

बिहारी उठा और बीना की दोनो टाँगे अपने कंधे पर रख कर अपना 7″ का मूसल बीना की चूत मे पेल दिया. बिहारी बीना की चूत की गर्मी से ही सिहर उठा. 

बिहारी: आआहह, साली क्या गरम चूत पाई है तूने. 

बीना: तेरा लौडा ही तो इसकी गर्मी बढ़ाता है. 

बिहारी तेज़ धक्को से उसकी चुदाई कर रह था. थोड़ी ही देर मे बीना की सांस फूलने लगी. 
बिहारी बिल्कुल किसी कुत्ते की तरह बिना रुके ताबड तोड़ धक्के लगाए जा रहा था. 

बीना: धीरे कर साले, कल भी तुझे ही चोदनी है यह चूत. इतनी बुरी हालत भी मत कर कि अभय को शक हो जाए. 

बिहारी: भाड़ मे गया अभय, अभी तो मेरे नीचे है तू तो बस मेरा सोच. 

बीना को साँस लेने में भी प्राब्लम हो रही थी. 
बीना: अच्छा सुन तो.

बिहारी रुक गया और उसे देखने लगा. 

बीना: तुझे मेरी गान्ड पसंद है? 

बिहारी: अब मेरे पास इतना टाइम नहीं है कि तैल लेने अंदर जाउ और फिर तेरी गान्ड मारू और यह कहते ही उसने फिर से ज़ोरदार तरीके से बीना की चुदाई शुरू कर दी. 

बीना: मेरी बात का जवाब तो दे. 

बिहारी: हां मुझे तेरी गान्ड पसंद है

बीना: तो फिर तू मुझे कुतिया बना कर चोद ना अभी. 

बिहारी की आँखों मे चमक आ गई.
बिहारी: चल बन जा कुतिया, मज़ा आ जाएगा. 

बिहारी उपर से हटा तो बीना टेबल से नीचे उतरी और अपने घुटने ज़मीन पर टिका कर टेबल पर झुक गई जिस से उसकी गान्ड एक दम फैल कर बिहारी की आँखों के आगे आ गयी. बीना की गान्ड बिहारी की कमज़ोरी थी या यूँ कह लीजिए कि औरत की भरपूर मांसल गान्ड बिहारी की कमज़ोरी थी. बिहारी ने बीना की गान्ड के पीछे पोज़िशन सेट करके अपने लंड उसकी चूत से भिड़ा दिया लेकिन वो रास्ता भटक गया. उसने दोबारा कोशिश की मगर फिर से असफल रहा.

बीना: क्या हुआ रज्जा, गान्ड देख कर चोदना भूल गये या लंड मे दम नहीं रहा. 

बिहारी: कुतिया बनी है तो औकात मे रह. दम की बात करती है, तेरे पूरे खानदान की चूतें एक दिन मे ठोक डालूं ऐसा दम है मेरे लंड मैं. यह साला टेबल काफ़ी छोटा है, ठीक से निशाना नहीं लग रहा. 

बीना: तो ये ले, ऐसा कह कर बीना ने अपने हाथ ज़मीन पर रख दिए और कुतिया की तरह गान्ड हिलाने लगी. 

बिहारी ने उसकी कमर मे पीछे से हाथ रखकर दबाया तो उसकी गान्ड पीछे को निकल आई और बिहारी को चूत का रास्ता दिखने लगा. बिहारी ने लंड को चूत के मुहाने पर सेट किया और एक तगड़ा शॉट मारा और बीना चिल्लाती हुई ज़मीन पर गिर पड़ी.

बीना: आराम से मेरे रज्जा अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.

ताबड तोड़ धक्कों के साथ बिहारी बीना की चूत चोदने लगा. बीना ने धीरे धीरे अपने हाथ और घुटने फिर से ज़मीन पर टिका दिए. बिहारी उसकी गान्ड को दोनो साइड से पकड़ कर उसकी ताबड़तोड़ चुदाई कर रहा था. बीना के मूह से सिसकारियाँ निकल कर दूर कहीं गुम हो रही थी. बिहारी ने अपने लेफ्ट हॅंड के अंगूठे को बीना की गान्ड के सुराख मे डाला तो बीना सिहर उठी और चरमोत्कश के शिखर पर पहुँच गई.

करीब 10 मिनिट तक बीना को इस अवस्था मे चोदकर बिहारी बोला: चल अब बैठ जा, आज तुझे मेरे लंड का पानी पिलाउन्गा. बिहारी ने पहले भी कई बार बीना से ऐसा करने के लिए कहा था पर बीना ने उसे सॉफ कह दिया कि यह काम उसे पसंद नहीं. बीना लंड चूसने मे काफ़ी माहिर थी पर वीर्य कभी भी वो मूह मे गिरने नहीं देती. बीना जानती थी कि बिहारी आज नहीं मानेगा. आख़िर उसने उसके दुश्मन वीरेंदर का वीर्य भी तो पिया था. 

बीना उठ कर टेबल पर बैठ गई. बीना ने अपना मूह खोला और बिहारी ने अपना लंड सीधा उसके मूह मे उतार दिया. बिहारी ने अपना पूरा लंड बीना के गले तक डाल दिया. 

बीना को उबकी आने लगी तो बिहारी ने लंड थोड़ा बाहर निकाल कर उसे रिलॅक्स होने का टाइम दिया. बीना जानती थी कि अगर बिहारी जल्दी नहीं झडा तो बीना के लिए मुश्किल हो जाएगी . बीना ने बिहारी के लंड से उसका हाथ हटा कर अपने हाथ रख दिए और उसे चूसने लगी. बीना अपनी जीभ उसके लंड पर फिराने लगी और अपने हाथ से उसका लंड मुठियाने भी लगी. इस दोहरी चोट से बिहारी निहाल हो गया और उसके लंड ने बीना के मूह मे वीर्य की बौछार कर दी. 

बीना ने बिहारी का लंड मूह मे फसाए ही बिहारी की तरफ देखा कि शायद उसे तरस आ जाए पर बिहारी ने उसे आँख के इशारे से पी जाने को कहा. 

जहाँ तक हो सकता था बीना ने उसे मूह मे इकट्ठा होने दिया और फिर इसके बाद उउल्क, उउल्क उउल्क की आवाज़ करते हुए बिहारी के टट्टो का रस उसके गले से होता हुआ उसके पेट मे चला गया. 

बीना, जिसने कि आज तक कभी वीर्य का स्वाद भी नहीं चखा था, आज कुछ ही समय मे दूसरी बार उसके ना चाहते हुए भी उसे सारा माल गटकना पड़ा. बिहारी ने खींच कर अपना लंड बीना के मूह से निकाला तो उसके लंड से अभी भी वीर्य निकल रहा था. बिहारी ने सीधा उसके लाल सुर्ख होंठों पर वीर्य की बूँदें गिरा कर बीना को उन्हें भी पी जाने को कहा. 

बीना को बिहारी के लंड से निकली वीर्य को देख कर घिंन आने लगी पर वो अपना मन मार कर उसे भी पी गई और चाट चाट कर उसके लंड को एकदम सॉफ कर दिया.

अपने अपने कपड़े पहन कर बिहारी घर में और बीना हॉस्पिटल चली गई. जाते जाते बीना ने उसे आगे के लिए क्या करना है बता दिया था.

रात का खाना बिहारी ने बनाया. रात के करीब नौ बजे वीरेंदर और आशना डाइनिंग हाल मे पहुँच गये थे. आशना का अभी भी नींद के मारे बुरा हाल था पर वीरेंदर काफ़ी ताज़गी महसूस कर रह था और ऐसा हो भी क्यूँ ना. एक तो पहली बार उसने किसी औरत के साथ ओरल सेक्स किया था और वो भी बीना जैसी हसीन और एक्सपरशेन्स्ड औरत के साथ जिसके जिस्म को वीरेंदर हमेशा निहारता रहता था और चोर नज़रो से उसके जिस्म के कटावो की झलक देखता रहता था. उसपर बीना ने यह वादा भी कर दिया था कि वो कुछ ही दिनो मे उस से चुदवायेगी भी. वीरेंदर तो जैसे हवा मे उड़ रहा था. वीरेंदर जानता था कि बीना जैसी कामुक औरत ज़्यादा देर तक उसके लंड बिना ना रह सकेगी. उसने बीना की आँखों मे उसके लंड के लिए सॉफ भूख देखी थी और यह सच भी था. 

वहीं आशना भी वीरेंदर के खिले हुए चेहरे से अंजान ना थी. उसे लगा कि शायद भैया इस लिए खुश हैं कि कल रात को उन्होने पहली बार मास्टरबेट किया और अब काफ़ी हल्का महसूस कर रहे होंगे. वो समझ सकती थी कि मास्टरबेशन के बाद दिमाग़ से कितना बोझ हट जाता है. आशना इस बात से परेशान थी कि अगर आज रात को वीरेंदर को अपने बाथरूम मे उसकी पैंटी ना दिखी तो वीरेंदर को पता लग जाएगा कि आशना ने उसकी चोरी पकड़ ली है. तो क्या फिर से आज रात वीरेंदर उसके कमरे मे आने की हिम्मत कर सकेगा. अगर नहीं भी आएगा तो कल सुबह वो मुझ से कैसे नज़रें मिला पाएगा जब उसे पता लगेगा कि मैने अपनी ब्रा-पैंटी उसके बाथ-रूम से ले ली हैं. आशना इसी उधेड़बुन मे खोई थी कि उसकी प्लेट खाली हो गई. उसने चौंक कर पहले प्लेट की तरफ देखा और फिर वीरेंदर की तरफ देखा जो कि मुस्कुराते हुए उसे ही देख रहा था.

वीरेंदर: क्या सोच रही हो?. 

आशना: कुछ नहीं. आशना ने पानी का ग्लास उठा लिया और मूह से लगाया ही था कि वीरेंदर ने उस से पूछा. 

वीरेंदर: तुमने मेरी बात का जवाब नहीं दिया .

आशना ने हैरानी से उसे देखा और इशारे से ही पूछा ” किस बात का”. 

वीरेंदर: क्या तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?. 

आशना को पानी पीते पीते हे ठन्स्का लगा और खांसने लगी. 

वीरेंदर जल्दी से अपनी जगह से उठकर उसके पास गया और उसकी पीठ थपथपाने लगा. थोड़ी देर के बाद आशना जब नॉर्मल हुई तो उसने वीरेंदर की ओर देखकर कहा “इट’स ओके”. वीरेंदर की समझ मे नहीं आया कि यह उसके सवाल का जवाब था या उसे पीठ थपथपाने से रोकने का इशारा. वीरेंदर उस से इस बारे मे पूछ पाता उस से पहले ही बिहारी हाल मे आया और खाली बर्तन समेटने लगा. 

वीरेंदर: बिहारी, सुबह मुझे जल्दी जगा देना, बहुत दिन हो गये हैं कसरत किए हुए. सुबह जिम का लॉक भी खोल देना. कल से फिर से कसरत शुरू कर दूँगा. 

बिहारी: लेकिन छोटे मालिक आप तो शाम को कसरत करते हो तो कल सुबह क्यूँ. 

वीरेंदर: सोच रहा हूँ कि कल थोड़ी देर ऑफीस हो आउ और डॉक्टर. आशना को भी घुमा लाउ. हॉस्पिटल की ड्यूटी करते करते बोर हो जाती होंगी.

आशना ने चमकती आँखों से वीरेंदर को देखा. सबसे ज़्यादा हैरान तो बिहारी था क्यूंकी पहली बार 12 सालो में वीरेंदर ने कहीं घूमने की सोची थी. 

बिहारी: ठीक है मालिक मैं आपको सुबह 6:00 बजे तक उठा दूँगा. यह कह कर बिहारी बर्तन लेकर किचन मे चला गया. 

आशना ने वीरेंदर की तरफ देखा जो कि उसके उपर चलने का इशारा करता है. आशना उठी और जैसे ही सीडीयाँ चढ़ने लगी उसे आभास हुआ कि वीरेंदर ने उसे आगे जाने के लिए इसलिए बोला है ताकि वो खुद उसके पीछे आ सके और उसके नितंबो को लहराता हुआ देख सके. आशना ने जान भुज कर अपने नितंबो को और ज़्यादा मटकाते हुए सीडीयाँ चढ़ना शुरू कर दिया. वीरेंदर का तो जैसे कलेजा ही मूह को आ गया और उसी वक़्त उसके लिंग ने उसे अपने होने का अहसास कराया. 

अपने नितंबो पर वीरेंदर की नज़र को महसूस करते ही आशना को भी एक अजीब सा नशा छाने लगा. बिहारी ने वीरेंदर और आशना के खाने में ज़रूरत के हिसाब से डोज मिला दी थी. किचन के दरवाज़े पर खड़ा बिहारी उन दोनो को उपर जाते हुए देख कर मुस्कुरा रहा था. 

बिहारी(मन मे सोचते हुए): वीरेंदर तू इसकी चूत पर एक बार ठप्पा तो लगा, कसम से इसकी गान्ड मैं ही सबसे पहले ठोकुन्गा. 

आशना , वीरेंदर के रूम के पास पहुँच कर रुक गई. वीरेंदर ने तेज़ी से अपना चेहरा दूसरी तरफ मोड़ लिया ताकि आशना को पता ना लगे कि वो उसकी बलखाती हुई कमर के नीचे भारी गान्ड देख रह था. 

आशना : गुड नाइट. 

वीरेंदर: इतनी जल्दी!. 

आशना: मुझे बहुत नींद आ रही है, मैं तो चली सोने. 

वीरेंदर: कुछ देर अंदर चलो बैठ कर बातें करते हैं. 

आशना: अच्छा तुम चलो मैं थोड़ी देर बाद आती हूँ. मूह हाथ धो लूँ, बहुत नींद आ रही है. 

वीरेंदर: मेरे रूम में भी वॉश रूम है. 

आशना, वीरेंदर की तरफ देखते हुए बोलती है: पर वहाँ मेरे कपड़े थोड़े हैं, मुझे चेंज भी करना है. यह बात बोलते हुए आशना वीरेंदर की आँखों में देखती है कि शायद वीरेंदर को रात की चुराई हुई पैंटी की याद आ जाए मगर वीरेंदर के चेहरे पर कोई भाव ना देख कर उसे बहुत हैरानी हुई. आशना मन मैं सोचे लगी “कहीं कोई डर कोई पछतावा ही नहीं है जनाब के चेहरे पर”. 

कुछ देर बाद आशना वीरेंदर के रूम मे एक नाइटसूट पहनकर बैठी हुई थी. आशना ने इस वक़्त ब्रा पहनी थी क्यूंकी नाइट सूट की शर्ट फ्रंट बटन्स वाली थी और वो शर्ट उसके बूब्स पर काफ़ी टाइट थी. आशना अगर ब्रा नहीं पहनती तो एक तो उसके निपल्स और दूसरा उसके बूब्स का काफ़ी हिस्सा नज़र आता. वीरेंदर ने जब आशना को देखा तो देखता ही रह गया. लाल सिल्की नाइटसूट में वो सेक्स की देवी लग रही थी. वीरेंदर का मन किया कि वो उसे अपनी बाहों मे उठा ले और उसके होंठों का रस चूस ले मगर उसे इतनी हिम्मत ना हुई.

आशना भी नहीं जानती थी कि उसे क्या हो रहा है. वो क्यूँ यह ड्रेस पहन कर वीरेंदर के कमरे मे आई. आशना पर अफ़रोडियासिक पाउडर ने अपना असर दिखना शुरू कर दिया था जो कि बिहारी ने उसके खाने मे मिला दिया था. उसके तन बदन मे आग भड़क गई थी. वीरेंदर का तो पहले से ही बुरा हाल था. आशना का जिस्म गरम होने लगा, उसने अपने सीने पर रखी चुन्नी उतार कर एक साइड पर रख दी और वीरेंदर से बातेंकरने लगी. वीरेंदर बेशर्मी से उसके सीने को साँस के साथ उपर नीचे होते देख रहा था. आशना भी जान भुज कर अंजान बनी हुई थी. आशना के जिस्म की आग इस कदर भड़क उठी थी कि उसकी पैंटी गीली होने लगी थी. 

आशना ने सोचा कि अगर यहीं बैठी रही तो कुछ ग़लत ना हो जाए इसलिए वो भारी मन से वहाँ से उठी और वीरेंदर को बोला: अब चलती हूँ, बहुत देर हो गई है. मुझे नींद आ रही है. 

वीरेंदर का दिल टूट सा गया. वीरेंदर: आशना क्या तुम मुझसे नाराज़ हो? 

आशना ने चौंक कर वीरेंदर की तरफ देखा. उसे लगा कि वीरेंदर ने बाथरूम मे ज़रूर चेक कर लिया है कि वहाँ उसकी पैंटी नहीं है जबकि वीरेंदर को लग रहा था कि उसने आशना को प्रपोज़ करके उसका दिल दुखाया है. 

आशना को समझ मे नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले मगर जाते जाते उसने कह दिया: “तुम बहुत गंदे हो” और वीरेंदर की तरफ पीठ करके वो मुस्कुराती हुई बाहर निकल गई. 

वीरेंदर अगर उसकी मुस्कुराहट देख लेता तो शायद वो चैन की नींद सो जाता मगर आशना की मुस्कुराहट तो वो नहीं देख पाया. हां आशना की यह बात के “तुम बहुत गंदे हो”उसके अंदर एक डर पैदा कर गई. उसे लगा कि शायद दोपहर को उसके और बीना के बीच जो कुछ हुआ आशना को ज़रूर पता लग गया होगा. वीरेंदर के दिल में ना जाने कब तक बुरे ख़याल आते रहे और यही सोचते हुए ना जाने कब उसे नींद ने अपनी आगोश मे ले लिया. 

वहीं आशना जब वीरेंदर के कमरे से अपने कमरे मे आई तो वो मुस्कुराती हुई अंदर आई और जैसे ही दरवाज़ा बंद करने लगी उसके दिल मे आया कि दरवाज़ा बंद ना करे. उसने सोचा कि देखते हैं वीरेंदर आज उसके रूम में आता है या नहीं..उसने रूम का नाइट लॅंप ऑन कर दिया ताकि अगर वीरेंदर रूम में आए तो वो जानबूझ कर आँखे बंद रख कर भी कन्फर्म कर सके. आशना ने सोचा कि लाइट जलाए रखने से उसे नींद भी नहीं आएगी और अगर वीरेंदर उसके रूम मैं आता है तो वो आँखे बंद करके सोने का नाटक करेगी और वीरेंदर की चोरी पकड़ी भी जाएगी. उसने जल्दी से अपनी पैंटी और ब्रा उतार कर ज़मीन पर फैंक दी और खुद नाइट सूट पहन कर रज़ाई मे घुस जाती है. दिन भर तेज़ धूप रहने के बावजूद भी रात को काफ़ी ठंड हो गई थी. शरीर तो उसका पहले से ही काफ़ी गरम हो रखा था और रज़ाई का टेंपॅरेचर बढ़ते ही उसकी आँखे बोझल होती चली गईं.काफ़ी कोशिशो के बाद भी उसे पता ही ना लगा कि वो कब सो गई.

उधर बिहारी किचन का काम ख़तम करके अपने कमरे मे आ चुका था.रात को बीना की चुदाई, फिर सुबह से गॅरेज का काम उपर से आशना की पैंटी को अपने माल से भरना और फिर अभी कुछ ही घंटो पहले बीना की फिर से चुदाई करने से वो काफ़ी थका सा महसूस कर रहा था. हालाँकि बिहारी एक ताकतवर मर्द था पर था तो इंसान ही. अपने कमरे मे आते ही उसने दो पेग लगाए और खाना खा लिया. बीना के आने मे अभी लगभग एक घंटा बचा था. बिहारी ने अपने कमरे की एलसीडी ओं की और चॅनेल बदल बदल कर देखने लगा. काफ़ी देर तक अलग अलग चॅनेल्स बदलने के बाद उसे नींद आने लगी. बिहारी बेड पर लेट गया और बीना का इंतज़ार करने लगा. एक तो दिन भर की थकान और उसपर शराब का नशा, उसे पता ही नहीं लगा कि वो कब सो गया. रात को उसकी नींद खुली तो वो हडबडा कर उठ गया. सपने में वो आशना की चूत चाट रहा था. उठते ही उसे अपने मूह पर कुछ गीला गीला लगा. उसने होंठों के साइड पर हाथ लगाया तो उसने पाया के सोते हुए उसकी लार टपक रही थी. 

बिहारी: साली ने सपने में ही मेरी लार टपका दी, जब सच में चूत चटवाएगी तो साली की सारी लार चूस चूस कर बहाल कर दूँगा. तभी उसका ध्यान दीवार घड़ी की तरफ गया. घड़ी 4:30 बजे का टाइम बता रही थी. बिहारी एक दम बेड से खड़ा हो गया और अपना मोबाइल निकाल कर उसे ऑन किया. मोबाइल ऑन होते ही उसने बीना का नंबर. मिलाया. काफ़ी देर तक बेल जाती रही मगर बीना ने फोन नहीं उठाया. बिहारी ने फोन बेड पर पटक दिया. 

बिहारी: साली छीनाल, मुझे आने का वादा कर के खुद साली मज़े से सो रही होगी. बिहारी गुस्से मे बड़बड़ाता हुआ बाथरूम की तरफ बढ़ा कि दरवाज़े पर पहुँचा ही था कि उसका फोन बजा “बीड़ी जलाइए ले जिगर से पिया, जिगर मा बड़ी आग है”. बिहारी ने लपक कर फोन बेड से उठाया और बीना का नंबर. देख कर ऑन कर दिया. 
बिहारी: कहाँ रह गई तू कुतिया, रास्ते में कोई कुत्ता मिल गया क्या?बिहारी ने फोन उठाते ही बोल दिया. 

उधेर से आवाज़ आई. कॉन बदतमीज़ है.

इतना सुनते ही बिहारी हे होश उड़ गये. सामने से किसी लड़की की आवाज़ सुन कर बिहारी एक दम हैरान रह गया. उसने अपने मोबाइल स्क्रीन पर एक बार फिर से नंबर. देखा और फिर मोबाइल को कान से लगा कर बोला, यह कमला का नंबर. नहीं है क्या? 

सामने वाली लड़की ने रॉंग नंबर. बोल कर फोन काट दिया. बिहारी की तो सांस ही फूल गई थी. फोन काट ते ही उसने गहरी सांस ली और फिर सोचने लगा जिस लड़की की आवाज़ इतनी मीठी थी उसकी चूत कितनी मीठी होगी. बिहारी ने एक बार फिर से नंबर, डाइयल कर दिया. काफ़ी देर बाद भी किसी ने फोन नहीं उठाया. बिहारी ने एक बार फिर से नंबर. डाइयल किया. इस बार एक बेल बजते ही फोन पिक हुआ. 

बिहारी: हेलो कॉन है. बिहारी के कानो में बीना की आवाज़ आई, “कुतिया बोल रही हूँ बोल क्या काम है”. 

बिहारी: पहले फोन किसने उठाया था. 

बीना: मेरे नर्सिंग होम की नर्स है, बोल क्या काम है. 

बिहारी: साली मुझे आने का वादा कर के सो गई थी क्या. 

बीना: एक एमर्जेन्सी आ गई थी. ऑप्रेट करना बहुत ज़रूरी था. अभी फ्री हुई हूँ. बाहर आई तो रागिनी(नर्स) ने मुझे बताया कि एक शराबी बार बार फोन कर रहा है और गंदी गंदी बातें कर रहा है. 

बिहारी: उस मैना का नाम रागिनी है? 

बीना: मैना नहीं चिड़िया बोल. 

बिहारी वो कैसे? 

बीना: कुछ दिन पहले अपने प्रेमी के साथ घर से उड़ कर आई है. अभी अभी अट्ठारह को पार किया है. प्रेम के चक्कर मे घर से तो निकल आई पर उसके प्रेमी ने इसे धोखा देकर इसके सारे पैसे और गहने ले लिए और इसे देल्ही रेलवे स्टेशन पर ही छोड़ दिया. वहाँ से यह घर तो जा नहीं सकती थी तो किस्मत इसे मुझ तक ले आई. याद है जिस दिन वीरेंदर हॉस्पिटल मे अड्मिट हुआ था उसी दिन अभय को टूर पर जाना था और मैं उसे ड्रॉप करने रेलवे स्टेशन तक गई थी. 

बिहारी: हां, हां याद है. 

बीना: मुझे यह वहीं मिली थी. इसे देख कर ही मैं पहचान गई थी कि यह लड़की घर से भागी हुई है. इस को नौकरी का झांसा देकर मैं इसे अपने साथ ले आई और अब यह यहीं मेरे क्लिनिक मे काम कर रही है. 

बिहारी: झांसा???. 

बीना: पहले मैने यही सोचा था की इस लड़की को वीरेंदर की ज़िंदगी में लाउन्गी और यह हमारे एहसानो के तले दबी ही होगी तो हमारी बात टालेगी भी नहीं. वैसे भी इसका कोई सहारा तो था नहीं तो अगर यह वीरेंदर का सहारा बन जाती तो हमारा भी काम हो जाता. 

बिहारी: तो फिर प्लान क्यूँ बदल दिया. 

बीना: अगले ही दिन आशना के अचानक आ जाने के बाद मैं एक दम बोखला गई थी उस वक़्त मेरा दिमाग़ काम करना बंद कर गया था, कोई प्लान सूझ ही नहीं रहा था. क्यूंकी वीरेंदर की आधी जायदाद की मालकिन अचानक ना जाने कहाँ से आ गई और यह भी तय था कि आशना के होते हुए ना तो हम वीरेंदर की जायदाद हड़प सकते थे और ना ही आशना से उसके हिस्से की मगर जब आशना ने कहा कि वो वीरेंदर से उसकी बेहन बनकर नहीं मिल सकती तो मैने प्लान मे चेंज कर दिया. 

सबसे बड़ी बात कि आज वीरेंदर ने खुद कहा है कि वो अपने हिस्से की जायदाद अपनी होने वालीी बीवी यानी कि आशना के नाम कर देगा. उसे नहीं पता कि ऐसा करने से आशना सारी प्रॉपर्टी की मालकिन बन जाएगी और वीरेंदर को रास्ते से हटा कर हम आशना को ब्लॅकमेल करके सारी जायदाद अपने नाम कर देंगे. 

वीरेंदर: क्या वो ऐसा करेगी?. 

बीना: मेरे चोदु राजा, हमेशा लंड से ना सोचो कभी कभी दिमाग़ का भी इस्तेमाल किया करो. सोचो क्या कोई भी लड़की यह चाहेगी के समाज को यह पता लगे कि वो अपने ही भाई की बीवी है. 

बिहारी: साली तू बहुत बड़ी खिलाड़ी है, कहीं मुझे ही धोखा तो नहीं देगी. 

बीना: वीरेंदर का लंड तो मैं खो ही दूँगी, तेरे जैसे लंड वाले को तो संभाल के ही रखूँगी कुत्ते. एक दूसरे पर शक़ करना अपने आप पर शक़ करना होगा. 

बिहारी: इस चिड़िया की आवाज़ से तो लगता है कि इसकी चूत भी इतनी ही मीठी होगी जितनी इसकी आवाज़ है. 

बीना: हीरे की पहचान तो ज़ोहारी ही कर सकता है. 

बिहारी: तो फिर इस हीरे को तराशने के लिए मेरे पास कब ला रही हो. 

बीना: अभी बच्ची है, अभी कुछ सावन और देख लेने दो उसके बाद तो तुझे ही गिफ्ट करने वाली हूँ इसे. 

बिहारी: यहाँ मेरा लंड खड़ा है और तुझे अभी इसे और सावन दिखाने हैं, क्या पता इसके प्रेमी ने इसे सोहलवें सावन मे ही सब कुछ दिखा दिया हो. 

बीना: इतना उतावला ना हो कुछ करती हूँ और हां सुन अभी सो जा आज बहुत थक गई हूँ अब सोने जा रही हूँ, तू भी सो जा और रागिनी के नाम पर मूठ ना मारना. हो सका तो जल्द ही तुझे तुम्हारा गिफ्ट भी दे दूँगी. ज़्यादा मूठ मारेगा तो इस कली को पहली ही बार में तसल्ली कैसे करवाएगा. 

बिहारी: बड़ा दम है इस लौडे में, तू उसे तैयार तो कर मैं अपनी तलवार तैयार रखूँगा. 

बीना: वो तो मेरी मुट्ठी में है, तू फिकर ना कर. कल सुबह किसी बहाने से मैं वहाँ आ जाती हूँ फिर मिलकर कुछ प्लान करते हैं. 

बिहारी: कल वीरेंदर आशना को घुमाने जा रहा है. तू 10:00 बजे तक आ जाना, फिर तेरी चूत चाट चाट कर दिमाग़ हल्का करके कुछ सोचता हूँ. 

बीना: यह तो बहुत बढ़िया होगा. बहुत टाइम हो गया तुझसे चिल्ला चिल्ला कर और तेरी गलियाँ सुनकर चुदवाये हुए. 

बिहारी: तू कल आ तो सही फिर देख कैसे तेरी चूत और गान्ड के चीथड़े उड़ाता हूँ. 

बीना: मैं ज़रूर आउन्गी मेरे रज्जा. यह कहकर बीना ने फोन काट दिया. 

बिहारी ने घड़ी पर टाइम देखा तो सुबह के 5:00 बजने वाले थे.

बिहारी: अब साला सोना भी बेकार है. आज सुबह सुबह साहबज़ादे को उठाना भी है. फिर उठते ही अगर चाइ का कप ना मिला तो सुबह सुबह लेक्चर भी सुनना पड़ सकता है. अब कुछ है भी नहीं करने को, क्या किया जाए. तभी बिहारी के दिमाग़ मे एक बात आई “चल उपर चलकर देख ज़रा क्या आज भी आशना नंगी सोई है क्या”. बिहारी ने अपना फोन स्विच ऑफ किया और उसे अपनी अलमारी में रखकर उपर की ओर चल दिया. बिहारी(मन मे सोचते हुए): साली ने बहुत तडपाया है आज पूरा दिन, इसको तो मैं ऐसे घुमा घुमा कर चोदने वाला हूँ कि साली को चक्कर आ जाएँ. यही सोचते हुए बिहारी उपर पहुँचा और सबसे पहले वीरेंदर का दरवाज़ा चेक किया जो कि अंदर से लॉक था. बिहारी दबे पावं आशना के कमरे के पास पहुँचा. दरवाज़े को धक्का देकर देखा तो वो खुलता चला गया. 

अंदर का नज़ारा देखते ही बिहारी की आँखें चमक उठी. रूम मे फैली रोशनी से वो आशना को सोए हुए देख सकता था. आशना का पूरा शरीर रज़ाई के अंदर था. बिहारी आगे बढ़ा तो उसकी नज़र ज़मीन पर पड़ी आशना की वाइट पैंटी और ब्रा पर पड़ी. 

बिहारी: यह साली रोज़ ऐसे ही नंगी होकर दरवाज़ा खोलकर सोएगी तो मेरा तो दिमाग़ ही सटाक जाएगा. बिहारी ने आहिस्ता से आशना की पैंटी उठाई और उसे सूँघा. कुँवारी चूत की महक से ही बिहारी के लौडे ने बग़ावत कर दी और पाजामे मे तन्कर बाहर आने की ज़िद करने लगा. बिहारी ने अपने पाजामे का नाडा ढीला किया और पाजामे को उतार दिया, अंडरवेर तो वो पहनता ही नहीं था. इस वक्त बिहारी के शरीर का सारा खून उसके लंड मे बह रह था. इतना अकड़ गया था कि उसे पकड़ कर कोई झूल भी जाता तो वो झुकता नहीं. आशना जैसी हसीन लड़की के सामने नंगा होना ही बिहारी के लिए बहुत बड़ी बात थी फिर चाहे वो सोई हुई क्यूँ ना हो. बिहारी ने आशना की पैंटी अपने लौडे पर लपेटी और उसके चेहरे को देखते हुए मूठ मारने लगा.

बिहारी ने काफ़ी कोशिश की कि वो आशना के नंगे शरीर को देख सके मगर उसे रज़ाई हटा कर देखने की हिम्मत ना हुई. अपने ख़यालो में ही उसके नंगे शरीर की कल्पना कर बिहारी मूठ मारे जा रहा था. बिहारी जैसा ताकतवर और तजुर्बेकार मर्द भी कुछ ही मिंटो मे आशना ने नंगे जिस्म की कल्पना से अपने अंदर उबाल महसूस करने लगा और झड कर अपने लावा को आशना की पैंटी मे उडेलने लगा. पैंटी को अच्छी तरह अपने वीर्य से तर करके उसने आशना की ब्रा और पैंटी एक टेबल पर अच्छे से रख दी और खुद अपना पाजामा लेकर आशना के रूम का दरवाज़ा बंद कर नंगा ही नीचे आ गया. नीचे आते ही वो धडाम से अपने बेड पे गिर गया और आशना के चेहरे को याद करने लगा. 

करीब 6:00 बजे आशना के मोबाइल का अलार्म बजा. आशना ने अलसाए हुए अलार्म बंद किया और एक अंगड़ाई ली. बीच अंगड़ाई में ही वो झटके से उठी और सीधा फर्श पर नज़र डाली. आशना के चेहरे पर हैरानी और मुस्कुराहट दोनो का मिश्रण देखते ही बनते था. अपनी पैंटी वहाँ ना पाकर वो काफ़ी खुश थी और हैरान थी कि वीरेंदर कब रूम मे आया उसे तो पता ही नहीं लगा. बड़ी गहरी नींद ने दबोच लिया था उसे. इस बार उसका वीरेंदर को रंगे हाथो पकड़ने का प्लान फैल हो गया था. आशना ने उठ कर सबसे पहले दरवाज़ा लॉक किया और रूम की लाइट ऑन कर दी. लाइट ऑन करके जैसे ही वो मूडी उसकी आँखे फटी की फटी रह गई. एक टेबल पर रखी उसकी ब्रा और पैंटी देख कर उसकी तो सांस हे अटक गई. वो समझ गई के भैया ने रात को उसके कमरे मे ही मास्टरबेट करके इन्हें यहाँ रख दिया. आशना इस ख़याल से ही शरमा गई कि उसके भैया ने उसके सामने ही मास्टरबेट कर दिया. आशना को यकीन ना हुआ कि उसके भैया ने उसे देख कर मास्टरबेट किया है. आशना ने जल्दी से पैंटी उठाई तो वीर्य की कुछ बूंदे पैंटी से टपक कर एक लंबा सा धागा बना कर नीचे की ओर गिर पड़ी. 

आशना: इसका मतलब भैया अभी सुबह ही आए होंगे, तभी तो यह इतनी गीली है. एक तरह से देखा जाए तो वो काफ़ी खुश थी कि वीरेंदर अब नॉर्मल ज़िंदगी की राह पर चल पड़ा है. चाहे वो अपनी बेहन के कारण हो पर उसकी बीमारी का इलाज तो हो ही रहा है और दूसरी तरफ आशना यह सोच रही थी कि वीरेंदर को यह बताना बहुत ज़रूरी हो गया है कि वो उसकी बेहन है. कहीं ऐसा ना हो जाए कि बहुत देर होज़ाये. अभी तक आशना खुद भी डिसाइड नहीं कर पाई थी कि वो वीरेंदर की मदद किस हद तक करेगी. उसने बस यही सोचा था कि वीरेंदर को एग्ज़ाइटेड किया जाए ताकि वो अपने स्पर्ंस रिलीस करने पर मजबूर हो जाए लेकिन उसके आगे बढ़ने के लिए वो शायद सोच भी नहीं सकती थी. वो जानती थी कि वीरेंदर उस से प्यार करने लगा है, लेकिन वो यह नहीं जानता था कि जिस लड़की से वो प्यार कर बैठा है वो उसकी बेहन है. इस लिए आशना चाहती थी कि उनका रीलेशन बस यहाँ तक ही रहे, इस से आगे बढ़े तो वो अपने आप को कभी माफ़ नहीं कर पाएगी. 

उसने डिसाइड कर लिया कि जैसे हे वीरेंदर भैया ठीक हो जाएँगे, वो उनके लिए कोई अच्छी सी लड़की देख कर उनकी शादी करवा देगी और उनकी ज़िंदगी से ऐसे निकल जाएगी जैसे वो अब तक थी. उसने मन मे ठान लिया कि जब तक हो उसे वीरेंदर की दोस्त बनकर रहना होगा और अगर वीरेंदर आगे बढ़ने की कोशिश करेगा तो कोई भी बहाना बना कर उसकी ज़िंदगी से हमेशा के लिए चली जाएगी. वो अब इस कदर फस गई थी कि वीरेंदर को नहीं बता सकती थी कि वो उसकी बेहन है. अपने दिमाग़ मे सारी प्लॅनिंग करने के बाद उसने अपनी पैंटी उठाई और उसे भी वहाँ रख दिया जहाँ दूसरी पैंटी को रखा था. वो अपने दिमाग़ मे उठे इस सवाल का जवाब नहीं दे पा रही थी कि जब उसे यहाँ से जाना ही है तो वो क्यूँ यह पॅंटीस संभाल कर रख रही है. 

उसने इस सवाल को अपने दिमाग़ से झटका और बाथरूम मे घुस गई. करीब 6:30 बजे तक वो बिल्कुल तैयार थी. उसने पिंक ब्रा और वोही पुरानी वाली पैंटी अपनी ड्रेस के अंदर पहन ली थी. आज आशना ने लोंग येल्लो स्वेटर-शर्ट पहनी थी जिस पर वाइट कलर्स का फ्लवर पॅटर्न था और नीचे गरम कपड़े की फ्लेक्सिबल वाइट कलर की चूड़ीदार पजेयमी पहनी थी. शर्ट उसके घुटनो के उपर तक थी और साइड्स से बिल्कुल बंद थी. शर्ट उसके वक्षों और नितंबो पर काफ़ी कसी हुई थी और उसकी फिगर को और भी अट्रॅक्टिव बना रही थी. नीचे पहनी पजेयमी भी उसकी जाँघो पर काफ़ी टाइट थी पर फ्लेक्सिबल होने के कारण उसके जिस्म से ऐसी चिपक गई थी जैसे कि उसकी स्किन. ठीक 6:30 बजे आशना तैयार होकर रूम से बाहर निकली तो देखा के बिहारी हाथ मैं तेरी लिए दो कप चाइ लेकर उपर आ रहा है. 

आशना के कदम वहीं ठिठक गये और फिर उसने सारे ख्यालों को झटकते हुए बिहारी को आवाज़ लगाई.

आशना: काका यह ट्रे मुझे देदो और जिम का लॉक खोल दो, वीरेंदर जी को मैं चाइ दे देती हूँ. 

बिहारी उसकी आवाज़ सुनकर एक दम उपर की तरफ देखने लगा जहाँ आशना खड़ी थी. सुबह सुबह उसे इतना फ्रेश देख कर तो एक पल के लिए बिहारी के मन ही डोल गया. कर्ली बाल उसपर पानी की बूँदें और फिर उसपर एकदम उजली हुई ड्रेस देख कर बिहारी सोचने लगा के अगर कोई स्वर्ग की अप्सरा भी यहाँ आ जाए तो आशना से जलने लगे.

बिहारी: हां, हां बिटिया, यह लो. 

आशना: थॅंक यू काका. बिहारी का मन प्रसन्न होगया. 

बिहारी: लगता है इसने मुझे माफ़ कर दिया है. आख़िर करती क्यूँ ना?. दौलत का लालच तो अच्छे अच्छों को हो जाता है. पैसे चीज़ ही ऐसा है. बिहारी मन मे अपनी जीत की खुशी लेकर पीछे बने जिम का लॉक खोलने चल देता है. 

आशना भी हैरान थी कि आज बिहारी की नज़रो में उसे गंदगी नहीं दिखी. क्यूंकी अक्सर बिहारी की नज़र उसपर पड़ते ही वो जान जाती कि बिहारी उसके कॉन से हिस्से को देख रहा है पर आज तो बिहारी ने उसके चेहरे से नीचे देखा ही नहीं और ना मेरे मुड़ने का इंतज़ार किया ताकि वो मुझे पीछे से घूर सके. 

आशना(मन में सोचते हुए): शराब इंसान को क्या बना देती है, शायद शराब के नशे में बिहारी काका उस दिन सब भूल गये. फिर उसे बिहारी पर दया भी आई कि कैसे एक नौकर अपनी उमर और इज़्ज़त की परवाह ना करते हुए एक लड़की से उसके मालिक से शारीरिक संबंध बनाने को कह रहा था ताकि उसका मालिक ठीक हो जाए. आशना ने सोचा शायद बिहारी काका ने वीरेंदर को शादी करने पर मजबूर किया होगा पर वीरेंदर ही नहीं माना होगा. इस लिए काका को यह सब करना पड़ा. 

अपने दिल मैं बिहारी को माफ़ करके आशना वीरेंदर के रूम की तरफ चल दी. आशना ने नॉक किया तो वीरेंदर की आवाज़ आई. काका: बस दो मिनिट, बाथरूम मे था, कपड़े पहन रहा हूँ. आशना हैरान रह गई कि वीरेंदर खुद ही टाइम पर उठ गया है. थोड़ी देर बाद वीरेंदर ने दरवाज़ा खोला तो सामने खड़ी आशना के मुस्कुराते हुए चेहरे को देख कर हैरान रह गया. उस वक़्त आशना सचमुच किसी अप्सरा के कम नहीं लग रही थी. गोल चेहरा, बड़ी बड़ी हिरनी जैसे आँखे, चमकता हुआ बेदाग गोरा चेहरा, शीलनी गुलाबी होंठ और सिर के बालों पर कही कहीं पानी की बूंदे, वीरेंदर तो मंत्रमुग्ध होकर उसे देखता ही रहा. 

आशना(मन मैं सोचते हुए): शायद जनाब का दिल रात को मेरे सोए चेहरे को देख कर भरा नहीं जो अब यहीं बुत बन गये. 

आशना: ज़मीन पर आइए राजकुमार वीरेंदर शर्मा. 

वीरेंदर एक दम हड़बड़ा गया और बोला: तुम तो तैयार भी हो गई. 

आशना: मैं तो कब की तैयार हूँ, जनाब हैं कि अभी तक सो रहे थे. 

वीरेंदर: नहीं ऐसा है कि रात को नींद अच्छी नहीं आई, बार बार नींद टूट रही थी. 

आशना कमरे मे अंदर आ जाती है और ट्रे टेबल पर रख देती है. आशना सोचने लगती है “जनाब को रात को नींद कहाँ से आएगी, चोर जो है मन में”. सो जाते तो वो कैसे कर सकते थे जो दो दिन से कर रहे हैं. 

वीरेंदर आशना को चुप देखता हुए सोचता कि वो आशना से किस तरह माफी माँगे और उसे कैसे यकीन दिलाए कि बीना के साथ जो भी किया उसपर उसका कोई कंट्रोल नहीं था. उसके साथ अक्सर होता है जब भी उसके लिंग में तनाव आता है और वो जानवर बन जाता है. वीरेंदर को पता था कि आशना इस बात को नहीं मानेगी और ना ही कभी समझ पाएगी. वो तो उसे ही ग़लत मानेगी क्यूंकी डॉक्टर. बीना तो उसकी मोम की फ्रेंड है और अब वो भी उनको माँ की तरह ही मानती है. 

फिर भी वीरेंदर ने हिम्मत करके कहा: आशना मुझे तुमसे कुछ बात करनी है. 

आशना चौंक कर अपने ख़यालो से बाहर आती है. आशना ने चाइ का कप वीरेंदर को दिया और एक खुद ले लिया. 

आशना: पहले मुझे अपना जिम दिखाओ. दोपहर को जब घूमने जाएँगे तो जितनी मर्ज़ी बातें कर लेना. आशना को लगा कि शायद वीरेंदर उस से कल के सवाल का जवाब माँगेगा इसलिए उसने उसे टाल दिया. आशना का जवाब सुनकर वीरेंदर का मन थोड़ा हल्का हुआ. उसे लगा कि शायद आशना उसे माफ़ कर देगी. उसने मन मे ठान लिया कि आज कुछ भी हो जाए आशना से माफी माँग कर वो उसे प्रपोज़ कर ही देगा.

चाइ पीने के बाद दोनो जिम मे पहुँच गये. वीरेंदर ने बिहारी को नाश्ते मे आलू के परान्ठे बनाने के लिए बोल दिया और बिहारी सीधा किचन मे चला गया लेकिन इस बार वो जैसे ही आशना के पास से सिर झुका कर निकला उसने मूड कर पीछे से आशना की लहराती और बलखाती हुई गान्ड को देख कर हवा मे एक चुम्मि उछाल दी. 

बिहारी जैसे ही आशना के पास से सिर झुका कर गुज़रा तो आशना के दिल मे उसके लिए इज़्ज़त और भी बढ़ गई. उसने मन में सोचा कि बेकार ही उसने बिहारी के बारे मैं ग़लत सोचा.उसे क्या मालूम था कि बिहारी जैसा कमीना आदमी कभी सुधर ही नहीं सकता. 

आशना: वीरेंदर आपने तो अपने लिए आलू के परान्ठे बनाने के लिए बोल दिया पर मैं क्या खाउन्गी. 

वीरेंदर: क्यूँ?? तुम परान्ठे नहीं खाती क्या??. 

आशना: परान्ठे! ईयीई. कितना फॅट होता है उनमे. मैं मोटी हो जाउन्गी. 

वीरेंदर: अगर थोड़ी सी मोटी हो भी गई तो ज़्यादा अच्छी लगोगी. 

आशना: जी नहीं मैं तो ऐसे ही ठीक हूँ, पहले ही काफ़ी मोटी हूँ. 

यह सुनते ही वीरेंदर ने आशना के पेट की तरफ देखा और बोला: इतनी पतली कमर है तुम्हारी और तुम कहती हो कि तुम मोटी हो. 

आशना: पतली !!! अरे पहले तो यह 22″ थी अब शायद 24″ की तो हो ही गई होगी. 

वीरेंदर:मैं नहीं मानता, 20″-22″ से तो बिल्कुल भी ज़्यादा नहीं लगती. 

आशना ने वीरेंदर को अपनी कमर की तरफ घूरते हुए पाया तो उसने शरमा कर दूसरी तरफ मूह फेर लिया. 

आशना: अच्छा चलो अब, जल्दी से एक्सररसाइज़ कर लो और तैयार होकर नाश्ता कर लो, फिर पूरा दिन मुझे घुमाना भी तो है. 

आशना-वीरेंदर दोनो जिम पहुँचे. जिम क्या, हर तरह की बड़ी बड़ी मशीनो से घिरा एक बहुत बड़ा हॉल था. पूरा हाल काफ़ी वेंटिलेटेड और हाइगियेनिक था. इतनी मशीन्स देखने के बाद तो आशना हैरान रह गई. 

आशना: आप सारी मशीन्स यूज़ करते हो. 

वीरेंदर: अभी 10-12 दिन पहले तो मैं 2-3 घंटे डेली वर्काउट कर ही लेता था. 

आशना: बाप रे, इतना टाइम? किसी बॉडी बिल्डिंग चॅंपियन्षिप में हिस्सा लेना है क्या.

वीरेंदर(ठहाका मारते हुआ): बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की कभी सोची नहीं पर अब तुमने आइडिया दिया है तो ज़रूर सोचूँगा. 

आशना: जी नहीं, आप बस अपनी सेहत का ख़याल रखें और कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं है. 

वीरेंदर: मेरी सेहत का ख़याल तो तुम्हें ही रखना है. 

आशना ने चौंक कर वीरेंदर की तरफ देखा तो वीरेंदर झट से बात पलट कर बोला: क्यूँ?? डॉक्टर. ही तो अपने पेशेंट्स की सेहत का ख़याल रखते हैं. 

आशना बस मुस्कुरा दी और आँखें झुका कर हां मे हामी भरी. 

वीरेंदर: तुमने तो नहा भी लिया वरना मैं तुम को भी दो तीन एक्सरसाइज़ज़ सिखा ही देता. 

आशना: ना बाबा ना, इतनी भारी मशीनो को तो दूर से ही प्रणाम. मैं तो फिट रहने के लिए कभी कभी योगा कर लेती हूँ. 

वीरेंदर: ओह हो तो मेडम जी “बाबा रामदेव ” जी की फॅन हैं. 

आशना यह सुन कर हँसने लगी. 

आशना: आपको देख कर लगता नहीं था कि आप इतनी बातें बनाना भी जानते हैं. 

वीरेंदर: बातें बनाना तो बहुत आती हैं इस बंदे को मगर कभी कोई मिला ही नहीं सुनने वाला. 

आशना: वाला या वाली?? 

वीरेंदर: कुछ भी समझ लो. 

आशना: अच्छा, चलो अब मैं आ ही गई हूँ तो सारी बातें मुझे ही बता देना.

वीरेंदर: जो हुकुम सरकार. 

आशना: अच्छा तुम एक्सररसाइज़ कर लो मैं किचन मे जाकर अपने लिए कुछ लाइट सा बना लेती हूँ. तुम भी जल्दी से आ जाना. 

वीरेंदर: बस आधे घंटे मैं बंदा आपके सामने हाज़िर होगा. बड़े दिन बाद एक्सररसाइज़ करनी है तो थोड़ा ही करूँगा ताकि बॉडी थोड़ी खुल जाए. 

आशना जिम से सीधा किचन मे आ गई. बिहारी काका किचन मे बाय्ल्ड पटेटोज को मेश कर रहे थे. 

आशना: काका क्या कर रहे हो. 

काका ने बिना उसकी तरफ देखे जवाब दिया. काका: दबा रहा हूँ……….. मेरा मतलब आलू उबाल गये हैं इन्हे मसल रहा हूँ.

आशना ने एक बार बिहारी की बात पर गौर किया और फिर सिर झटक कर उसकी बात कान से निकाल दी. 

आशना: देसी घी में बनाना वीरेंदर के लिए परान्ठे. इतनी कसरत करते हैं तो शरीर को घी भी तो चाहिए और वैसे भी बीमारी की वजह से काफ़ी कमज़ोर भी हो गये हैं. 

बिहारी: बहुत घी है उनके अंदर, तभी तो इतनी कसरत करनी पड़ती है उन्हे. 

आशना बिहारी की बात सुनकर सोच में पड़ जाती है. उसे लगता है शायद बिहारी जानता नहीं कि किसी के साथ कैसी बात की जाती है, वो उसे गँवार समझ कर उस की डबल मीनिंग बातों को लाइट्ली लेने लगती है. 

काका: वीरेंदर ने शादी क्यूँ नहीं की, अब तो उनकी उमर भी काफ़ी हो गई है. 

बिहारी: पता नहीं बिटिया, पर जब से छोटे मालिक के परिवार के साथ वो हादसा हुआ है वो काफ़ी टूट गये हैं. पहले तो फिर भी मेरी बात सुनते थे पर जब मैने उनको शादी के लिए ज़ोर देना शुरू किया तो वो मुझसे भी कम ही बात करते है. अब तो ऐसा है कि वीरेंदर बाबू सिर्फ़ कम होने पर ही मुझसे बात करते हैं. 

आशना: लेकिन इस से तो कोई हल नहीं निकलेगा. 

बिहारी: मैं जानता हूँ बिटिया. इसी लिए उस दिन परेशान होकर नशे मे तुमसे ऐसी बात कर बैठा. मालिक की यह हालत अब मुझसे देखी नहीं जाती. मुझे तो यह लगता है कि वीरेंदर बाबू शायद ही कभी शादी करेंगे. 

आशना: ऐसा क्यूँ??. 

बिहारी: सुना है कि वीरेंदर बाबू किसी लड़की से प्यार करते थे, उस लड़की ने इन्हे धोखा दे दिया तब से वीरेंदर बाबू अकेले ही जिए जा रहे हैं और अंदर ही अंदर घुटे जा रहे हैं. 

आशना: काका, क्या अपने उस लड़की को देखा था? 

बिहारी: अब इतना याद तो नहीं लेकिन यहीं पास में ही रहती थी. काफ़ी छोटी थी जब मैने उसे देखा था. फिर वो अपनी पढ़ाई करने कहीं चली गयी और उसके बाद तो कहीं मिली भी होगी तो मैं नहीं जानता. आशना बिहारी की बातें सुनकर अंदाज़ा लगाती है कि बिहारी को इस मामले में ज़्यादा पता नहीं होगा. 

आशना: लेकिन कभी ना कभी तो उन्हे शादी करनी ही पड़ेगी ना. आज नहीं तो कल उन्हे सहारे की ज़रूरत तो पड़ेगी ना. 

बिहारी: मैने लाख समझाया पर वीरेंदर बाबू है कि टस से मस नहीं होते. इसी लिए उस दिन वीरेंदर बाबू को तुमसे अच्छी तरह से बात करते देखा तो मैं रह नहीं पाया और तुम्हारे सामने इस तरह का प्रस्ताव रखा. मैं जानता हूँ कि किसी भी लड़की के लिए इस तरह का प्रस्ताव मानना बहुत मुश्किल है. मगर मैं समझता हूँ कि एक औरत को चाहिए ही क्या. दो वक़्त की रोटी और रहने को छत. मुझे पता है कि तुम बहुत महत्वाकान्छि लड़की हो मगर मैं यह भी जानता हूँ कि वीरेंदर बाबू का ख़याल तुमसे ज़्यादा और कोई नहीं रख सकता. 

आशना, बिहारी की इस बात से चौंक जाती है. आशना: वो कैसे?. 

बिहारी ने बात संभालते हुए कहा डॉक्टर. जी ने बताया के तुमने खुद ज़िद करके वीरेंदर बाबू की देख-भाल करने के लिए अपना नाम उन्हे सुझाया है. भगवान करे तुम एक बहुत अच्छी डॉक्टर. बनो.

आशना सोचती है कि डॉक्टर. बीना को शायद बिहारी से झूठ बोलना पड़ा होगा ताकि बिहारी को कोई शक़ ना हो. 

आशना: वो तो ठीक है काका पर हमे कुछ तो करना ही होगा. 

बिहारी: देखो बिटिया, इतने सालो मे वीरेंदर बाबू की ज़िंदगी में कोई लड़की नहीं आई तो इतना तो तय है कि वीरेंदर बाबू किसी भी लड़की को अपने पास फटकने भी नहीं देंगे.तुम इस घर में इसलिए हो क्यूंकी तुम एक डॉक्टर. हो, तो फिर बताओ भला वीरेंदर बाबू की ज़िंदगी मे तुम्हारे सिवा कोई लड़की कैसे आ सकती है. 

आशना को भी बिहारी की बातों मे सच्चाई लगी. 

बिहारी: बेटी मेरी बात ग़लत ज़रूर है पर इसके अलावा मुझे कोई और रास्ता नज़र नहीं आता. हो सके तो मेरी बातों को अब ठंडे दिमाग़ से सोचना. 

तभी वीरेंदर घर में एंटर होता है. वीरेंदर: काका ऑरेंज जूस लाओ, बहुत पसीना निकल रहा है. 

आशना ने किचन से ऑरेंज जूस ग्लास मे डाल कर हाल मे बैठे वीरेंदर की तरफ बढ़ाया जो की आँखें बंद करके चेर पर टेक लगाए बैठा था. आशना के प्रफ्यूम की खुश्बू से उसने आँखें खोली तो सामने आशना को खड़ा पा कर मुस्कुराते हुए बोला. लगता है आप ने मेरी आदतें बिगाड़ने की ठान ही ली है. 

आशना: मैं कुछ समझी नहीं. 

वीरेंदर: डॉक्टर. आप भूल रही हैं कि आप बस कुछ दिन ही मेरी देखभाल के लिए आई हैं, सोचिए जब आप चली जाएँगी तो मेरा क्या होगा. यह सुनकर आशना को वास्तविकता का आभास हुआ. वो तो वाकई यहाँ कुछ दिनो के लिए ही आई है. 

आशना: अच्छा तो अब आप मुझे जल्दी से यहाँ से भेजना चाहते हैं. 

वीरेंदर:क्यूँ, आप नहीं जाना चाहती क्या?

वीरेंदर के इस सवाल से आशना के दिल की धड़कनें बढ़ गई और उसे कुछ जवाब देते ना बना.

आशना ने बात बदलते हुए कहा. बाद की बात बाद मे करेंगे मिस्टर. वीरेंदर, आप जल्दी से फ्रेश होकर नीचे आ जाइए, काका ने आपका नाश्ते की तैयारी पूरी कर दी है. जल्दी से जाइए और जल्दी से आकर गरम गरम नाश्ता कर लीजिए. 

वीरेंदर: आज तो हमे आपके हाथ के परान्ठे ही खाने हैं. बना दोगि तो पेट भर कर खा लेंगे वरना आज तो पूरा दिन उपवास और इतना कह कर वीरेंदर सीडीयाँ चढ़ने लगा. 

आशना जूस का खाली ग्लास उठाकर किचन की तरफ चल दी. किचन के बाहर खड़े मंद मंद मुस्कुराते हुए बिहारी काका को देख कर उसके कदम वही रुक गये. 

बिहारी: लगता है अब मेरी नौकरी ख़तरे में आ गई है.चलो भाई हम कोई और काम कर लेते हैं. आज तो आप ही बना कर खिला दो वीरेंदर बाबू को देसी घी के परान्ठे. आशना सिर झुकाए किचन मे घुस गई. 

बिहारी ने दरवाज़े के पास खड़े होकर ही कहा”आज इतने सालों बाद छोटे मालिक खुश दिख रहे हैं, भगवान इनकी खुशी को नज़र ना लगाए”. बिहारी चला गया अपना जाल बिछाकर और आशना भी मुस्कुराती और शरमाती हुई वीरेंदर के लिए देसी घी के परान्ठे बनाने लगी.आशना सोच रही थी कि अगर भैया इसी मे खुश हैं तो भगवान ऐसा करना कि उनकी खुशी को सच में नज़र ना लगाना. 

सुबह लिए हुए सारे डिसिशन आशना को बेबुनियाद लगने लगे और वो एक प्रेमिका की तरह अपने प्यार के लिए दिल लगा कर नाश्ता तैयार करने लगी. वीरेंदर ने उंगलियाँ चाट चाट कर परान्ठे खाए और आशना की खूब तारीफ की. आशना ने अपने लिए नाश्ते में दूध और बिस्किट लिए. वीरेंदर की तारीफ से आशना का चेहरा शरम से गुलाबी हो गया था. वो वीरेंदर से ढेर सारी बातें करना चाहती थी मगर जैसे ही वो वीरेंदर की तरफ देखती शरम से उसकी आँखें झुक जाती. आशना ने कई बार हिम्मत करके वीरेंदर को कुछ कहने के लिए उसके चेहरे की तरफ देखा पर हर बार वो शरमा जाती. नाश्ता करने के बाद वीरेंदर तैयार होने उपर चला गया और आशना भी अपने रूम मे जाकर अपने मेकप को फाइनल टच देने लगी. 

करीब 9:45 पर दोनो इकट्ठे ही सीडीयों से उतर रहे थे. वीरेंदर ब्लू जीन्स और ब्लॅक ब्लेज़र मैं काफ़ी स्मार्ट लग रहा था. अंदर से पहनी हुई वाइट टी-शर्ट भी उसपर काफ़ी जच रही थी . आशना ने आँखों ही आँखों मे वीरेंदर की लुक्स की तारीफ की.

बिहारी काका ने आशना की तरफ देख कर उसके आगे हाथ जोड़ कर उस से प्रार्थना की, जैसे कह रहे हों कि “सब ऐसा ही चलने दे”, जिसे आशना ने अपनी दोनो आँखे झुका कर स्वीकार किया.जैसे ही आशना -वीरेंदर बाहर निकले, बिहारी खुशी से झूम उठा. 

बिहारी: साली बहुत भोली है रे यह तो इसकी लेने मैं बहुत मज़ा आने वाला है. काश वीरेंदर इसकी गान्ड छोड़ दे मेरे लिए. मैं तो अभी से परेशान हूँ कि यह तो चीख चीख कर सारा घर उठा लेगी. बिना तैल के ही चोदुन्गा मैं तो इसकी गदराई मांसल गान्ड.

वीरेंदर गाड़ी निकाल कर गेट पर पहुँचा जहाँ आशना उसका वेट कर रही थी. आशना के पास पहुँच कर वीरेंदर ने गाड़ी की ब्रेक लगाई और गियर न्यूट्रल करके हॅंडब्रेक लगा दी. वो झट से अपनी खिड़की खोल कर बाहर निकला और आशना की तरफ जाकर उसकी तरफ का डोर खोल दिया. 

वीरेंदर: राजकुमारी जी अपने पावं इस नाचीज़ की गाड़ी पर रखकर इसे बेशक़ीमती बना दीजिए. 

आशना को वीरेंद्र की यह हरकत बहुत रोमांचित कर गई. वो मुस्कुरा कर गाड़ी मे बैठ गई और सोचने लगी कि वो तो पहले ही इस गाड़ी मे बैठ चुकी है जब वीरेंदर हॉस्पिटल मे था. वीरेंदर भी जल्दी से गाड़ी मे बैठ गया और आशना की तरफ देख कर बोला: तो कहाँ चलें?? 

आशना ने वीरेंदर की तरफ हैरानी से देखा और बोली: मुझे क्या पता?. मैं तो इस शहर में नयी हूँ. 

वीरेंदर उसकी बात सुनकर चौंक गया. 

आशना भी अपनी ग़लती ताड़ गई और झट से बोली: मेरा मतलब, पूरा दिन डॉक्टर. बीना के साथ हॉस्पिटल में रहकर मुझे ज़्यादा घूमने का मोका ही नहीं मिला इस शहर मे, मैं क्या बताऊ. 

वीरेंदर: तो फिर क्या किया जाए, घुमा तो मैं भी नहीं हूँ काफ़ी अरसे से. बस ऑफीस से घर और घर से ऑफीस. 

आशना: तो पहले आपके ऑफीस ही चलते हैं. 

वीरेंदर: थ्ट्स ग्रेट. तो चलो पहले वहीं चलते हैं, ऑफीस का काम भी देख लूँगा और फिर कहीं घूम भी लेंगे. इतना कह कर वीरेंदर ने गाड़ी ऑफीस की तरफ दौड़ा दी. 

आशना ने गाड़ी का सीडी प्लेयर ऑन किया तो जगजीत सिंग की ग़ज़ल बजने लगी “प्यार का पहला खत लिखने में वक़्त तो लगता है, नये परिंदो को उड़ने में वक़्त तो लगता है” 

आशना(वीरेंदर की तरफ देखते हुए): आपको ग़ज़ले पसंद हैं. 

वीरेंदर: तन्हाई मैं यही तो सहारा बनती हैं. इतना सुनकर आशना खामोश हो गई. 

थोड़ी देर बाद आशना ने सीडी पिलेइर बंद कर दिया. 

वीरेंदर ने सवालिया नज़रों से उसे देखा तो आशना बोली: अब आप तन्हा नहीं हैं और यह कह कर उसने अपने चेहरा सामने करके निगाहें झुका ली. कुछ देर गाड़ी में खामोशी छाइ रही. तभी वीरेंदर का मोबाइल बजा “कहता है पल पल तुमसे”. वीरेंदर ने फोन की तरफ देखा तो बीना का नंबर. था. वीरेंदर के दिमाग़ में फॉरन कल वाली बात दौड़ गई. उसने ठान लिया था कि वो अब कभी बीना से बात नहीं करेगा. आख़िर आशना ने उसे माफ़ कर दिया है तो उसके लिए इतना ही काफ़ी था. (वीरेंदर यही समझता था कि आशना को उसके और बीना के बारे मे पता लग गया है).

आशना: कितनी देर से फोन बज रहा है उठाते क्यूँ नहीं. 

वीरेंदर:वो घड़ी चलाते वक़्त फोन पर बात करूँगा तो चालान हो जाएगा. 

आशना उसे देख कर मुस्कुरा दी और बोली लाओ मुझे दे दो.

वीरेंदर एक दम पशोपेश मे पड़ गया. अगर आशना ने बीना से बात कर ली तो उसका आज का दिन खराब हो जाएगा. अभी वो यह सब सोच ही रहा था कि फोन कट गया. वीरेंदर ने चैन की सांस ली और फोन डॅशबोर्ड पर रख दिया. अभी वीरेंदर की साँसें नॉर्मल भी नहीं हुई थी कि एक बार फिर से फोन बज उठा. आशना ने झट से फोन उठाया और पिक कर के अपने कानों से लगा लिया. वीरेंदर का कलेजा एक दम मूह को आ गया. 

आशना: हेलो………. जी हां………वो गाड़ी चला रहे हैं, आप बता दीजिए मैं उन्हें मेसेज दे देती हूँ……………. थोड़ी देर बाद आशना ने फोन कट किया.आशना ने वीरेंदर की तरफ देखा, वीरेंदर को तो हार्ट अटॅक आने वाला था. पसीने की बूँदें उसके माथे पर उभर आई थी. इस से पहले कि वो कुछ बोलता, 

आशना बोल पड़ी: यह क्या हो रहा है? 

वीरेंदर को तो मानो काटो तो खून नहीं. 

वीरेंदर ना हिम्मत जुटा कर पूछ ही लिया: क्या? 

आशना: वकील साहब का फोन था, उन्होने कहा कि तुमने आज की अपायंटमेंट ली है दोपहर 1:00 बजे की.

इतना सुनते ही वीरेंदर की जान में जान आई. 

वीरेंदर:हां,हां वो याद आया आज तो उनसे मिलने जाना है, वो, वो मैं तो भूल ही गया था. 

आशना: आप ठीक तो हैं, पसीना क्यूँ आ रहा है आपको. 

वीरेंदर: नहीं वो शायद बहुत दिन बाद गाड़ी चला रहा हूँ ना इसलिए शायद, वीरेंदर ने बात संभालते हुए कहा. 

आशना: गाड़ी ही चला रहे हो कोई बैल गाड़ी नहीं और इतना कह कर हंस दी. 

वीरेंदर भी थोड़ा नॉर्मल हो गया. 

आशना: वकील साहब से क्या काम है?? 

वीरेंदर: तुम सवाल बहुत पूछती हो, तुमसे जो शादी करेगा बेचारा ज़िंदगी भर तुम्हारे सवालो के जवाब ही देता फ़िरेगा. 

इतना सुनते ही आशना शरमा गई. वीरेंदर ने आशना को शरमाते हुए देखा तो बोला “वैसे वो बड़ा ख़ुसनसीब भी होगा”. आशना ने झट से नज़र उठाकर उसकी ओर देखा. 

वीरेंदर ने नज़रें सामने करके जवाब दिया: तुम जैसी लड़की तो किसी की भी ज़िंदगी संवार दे. 

आशना ने बात टालते हुए पूछा: आपने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया, आप वकील साहब से क्यूँ मिलना चाहते हैं? 

वीरेंदर आशना के ज़िद्दी स्वहबाव से हैरान रह गया. 

वीरेंदर: कोर्ट मॅरेज करनी है. 

आशना ने हैरानी से वीरेंदर की तरफ देखा. 

आशण ने काँपते होठों से पूछा: लड़की कॉन है? 

वीरेंदर: फिर से सवाल. 

आशना ने वीरेंदर की आँखों में देख कर पूछा”लड़की कॉन है”. 

एक बार तो आशना का चेहरा देख कर वीरेंदर भी खो गया. 

वीरेंदर: लड़की नहीं मिली अभी तक कोई. 

आशना ने मुस्कुराते हुए कहा”क्या”? 

वीरेंदर: लड़की नहीं मिली अभी तक पर लगता है अब जल्दी ही मिल जाएगी. वीरेंदर ने उसे चिडाने के लिए कहा: क्या तुम मेरे लिए लड़की ढुंढोगी.

इतना सुनते ही आशना के दिल को धक्का लगा. वो खुश भी थी कि वीरेंदर शादी करना चाहता है लेकिन उसे दिल ही दिल मैं कही दुख भी हो रहा था कि वो खुद उसे ही अपने लिए लड़की ढूँडने के लिए बोल रहा है. आशना के चेहरे के भावों को देखता हुए वीरेंदर समझ नहीं पा रहा था कि आशना के दिल मैं क्या चल रहा है. उसे तो लगा कि शायद इस बात की रियेक्शन से पता लग जाएगा कि वो उस से प्यार करती है या नहीं मगर उसके चेहरे पर आते जाते भावों को वो समझ नहीं पा रहा था.

वहीं आशना यह सोच कर परेशान थी कि वो वीरेंदर को किसी और का होने भी नहीं देना चाहती हूँ और उसे बिना सच बताए अपना कर उसकी और अपनी नज़रों मैं गिरना भी नहीं चाहती थी. पता नहीं क्यूँ पर आशना के मन में यह बैठ गया था कि वीरेंदर को उसके अलावा कोई समझ ही नहीं सकता और ना ही कभी कोई उसे खुश रख पाएगा उसके बिना. 

लेकिन वो इस सच को भी नहीं नकारना चाहती थी के वीरेंदर उसका बड़ा भाई है. इसी सोच मैं कब ऑफीस आ गया, उसे पता ही नही चला. उसकी तंद्रा तो तब टूटी जब वीरेंदर ने घड़ी की ब्रेक लगाई और एंजिन ऑफ किया. आशना ने हड़बदा कर सीट बेल्ट खोली और डोर खोलकर घड़ी से नीचे उतर गई. सामने एक बड़ी सी बिल्डिंग और उस पर एक बड़ा सा बोर्ड लगा था “शर्मा एलेक्ट्रॉनिक’स वर्ल्ड”.आशना वीरेंदर का इंतज़ार किया बिना ही बिल्डिंग में दाखिल होने लगी. वीरेंदर गाड़ी को पार्क करके शोरुम के सामने आया तो देखा आशना अंदर जा चुकी थी. 

वीरेंदर: यह लड़की भी ना, अजीब ही है. इसके मन मैं क्या है कैसे पता करूँ. यह सोचते सोचते वीरेंदर अंदर दाखिल हुआ. 

सामने आशना खड़ी होकर एक एक चीज़ को बड़े ध्यान से देख रही थी. वीरेंदर को देख कर उसका मेनेज़र फॉरन उसके पास आया और वो दोनो बातों में बिज़ी हो गये. आशना सारे शोरुम को बड़े गौर से देख रही थी. ग्राउंड फ्लोर को अच्छी तरह से देखने के बाद वो सेकेंड और थर्ड फ्लोर पर चली गई. उसे वीरेंदर की होश ही नहीं थी. इतनी आधुनिक एलेक्ट्रॉनिक चीज़ें उसने कभी देखी ही नहीं थी. वो हर एक एक्विपमेंट को देख कर हैरान थी. उसे लगा वो किसी और ही दुनिया मैं आ गई है. चलते हुए उसकी नज़र एक पिंक लॅपटॉप पर पड़ी तो उसे छुए बगैर वो रह ना सकी. नीचे बैठा वीरेंदर उसे अपने सामने लगी सीसीटीवी स्क्रीन पर देख रहा था. उसने मेनेज़र को उस लॅपटॉप को पॅक करवाकर गाड़ी में रखने को कहा. उसके बाद तो आशना ने जिस चीज़ को हाथ लगाया वो गाड़ी में पॅक होती गई. गाड़ी में लॅपटॉप,डिजिटल कॅमरा, मोबाइल, एक बहुत ही खूबसूरत झूमर और पता नहीं क्या क्या लोड हो चुका था. करीब दो घंटे तक आशना पूरा स्टोर देखती रही और उसकी ब्यवस्था को मन मे बसती रही. उसके बाद आशना ग्राउंड फ्लोर पर आई तो वीरेंदर के कॅबिन मे चली आई. 

आशना: तुम जहाँ बैठे हो और मैं कब से तुम्हारा वेट कर रही थी कि तुम मुझे अपना शोरुम दिखाओगे. 

वीरेंदर: वो थोड़ा काम देखने लग गया था. 

आशना: अभी कुछ दिन नो काम, बस आराम. 

वीरेंदर: जो हुकुम. 

वीरेंदर: बैठो मैने चाइ मँगवाई है, आती ही होगी. चाइ पीकर निकेलते हैं, रास्ते मे वकील से भी मिल लेंगे. 

आशना: लड़की से बात हो गई क्या? 

वीरेंदर: हो जाएगी, जल्दी क्या है. 

आशना: बिल्कुल जल्दी है, आप मुझे उसका नंबर. दीजिए मैं अभी उस से बात करती हूँ. 

वीरेंदर: नंबर???.मेरे पास तो उसका नंबर. भी नहीं है.

आशना: ऐसा कैसे हो सकता है, तुम शादी करने वाले हो लेकिन जिस लड़की से तुम्हें शादी करनी है उस लड़की का नंबर. भी नहीं पता. 

वीरेंदर: उस से फोन पर बात करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी. 

आशना: अच्छा तो जनाब फेस- टू-फेस बात कर चुके हैं उस लड़की से. 

वीरेंदर:फेस टू फेस ही बात हुई है उस से, मोबाइल नंबर. का तो मैने सोचा भी नहीं.

आशना: यह तो कोई बात नहीं हुई, उस बेचारी से कभी कभी फोन पर भी बात कर ही लिया करो. 

वीरेंदर: नंबर से याद आया, मेरे पास तो तुम्हारा नंबर. भी नहीं है. 

आशना वीरेंदर के इस तरह की बात से शरमा जाती है. 

आशना: मेरा नंबर. क्या करोगे, उसी का नंबर. लो जिस से तुम शादी करने वाले हो. 

वीरेंदर:तुम अपना नंबर तो दो, उसका नंबर. लेके मैं तुम्हें दे दूँगा तुम खुद ही उस से बात कर लेना. 

यह सुनकर आशना को एक बार फिर झटका लगा, उसके दिल मैं आया कि शायद वीरेंदर किसी और ही लड़की के बारे मे बात कर रहा हो. 

वीरेंदर: अब जल्दी से दे दो. 

तभी पीयान चाइ लेकर आ गया. चाइ के दो कप और कुछ स्नॅक्स रखने के बाद पीयान चला गया. आशना ने एक कप उठाकर वीरेंदर की तरफ बढ़ाया “यह लीजिए”. 

वीरेंदर: दीजिए. इतना कह कर वीरेंदर आशना की तरफ देखने लगा. 

आशना: अब क्या है? 

वीरेंदर: नंबर. दीजिए. 
आशना ने उसे अपना नंबर. नोट करवाया.वीरेंदर ने उसे अपने मोबाइल मे फीड कर लिया. 

आशना: अब उस लड़की से नंबर. लेके मुझे भी देना ताकि मैं उस से बात करके आपकी शादी की बात आगे चला सकूँ. 

वीरेंदर: अब तो उसका नंबर. मिल ही गया समझो. 

वीरेंदर के ऐसा कहने से एक बार फिर से आशना कन्फ्यूज़ सी हो गई. आशना वीरेंदर के मन को समझ नहीं पा रही थी और वीरेंदर भी इतने सालों से बुरे दौर से गुजरने के बाद अपने एमोशन्स को आशना के सामने रख नहीं पा रह था. 

आशना भी एक बार कन्फ्यूज़ हो कर रह गई कि आख़िर उसे करना क्या चाहिए. वो जानती थी कि वीरेंदर के साथ रहके तो वो कभी भी सही निर्णय नहीं ले पाएगी. एक तो वीरेंदर की हालत और फिर घर पर बिहारी काका का दबाव. वो दवाब मे आकर ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहती थी जिस से कि बाद मे उसे सारी उम्र पछताना पड़े. वो एक इनडिपेंडेंट लड़की थी, आज तक अपने सारे डिसिशन उसने खुद ही लिए. लेकिन इस बार उसकी हिम्मत भी जवाब देने लगी थी, आख़िर इतने नाज़ुक मामले में कॉन अपने होश नहीं खो देता. आशना को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे. एक बार के लिए उसके दिमाग़ मे आता कि उसे वीरेंदर को छोड़ कर चला जाना चाहिए और फिर वीरेंदर की हालत, उसका अकेलापन देखकर वो अपने मन मे परिवेर्तन लाते हुए सोचती “क्या हुआ अगर यह ग़लत है तो, अपने भाई के भले के लिए ही तो कर रही हूँ”. इसी पशोपेश मे वो काफ़ी परेशान हो गई थी. 

आशना-वीरेंदर चाइ पी कर वकील साहब के घर की ओर निकल गये. करीब 1:15 बजे उनकी गाड़ी वकील साहब के चेंबर के सामने खड़ी थी. आशना ने सामने बोर्ड पर नज़र डाली जहाँ लिखा था “सीनियर आड्वोकेट बी.एस. त्रिवेदी आंड असोसीयेट्स”. 

वीरेंदर ने घड़ी रोक कर आशना से कहा: तुम यहीं बैठो मैं अभी आता हूँ. 

आशना: मैं भी चलती हूँ ना. 

वीरेंदर: अभी तुम्हारी ज़रूरत नहीं है.

आशना:तो मेरी ज़रूरत कब पड़ेगी??? यह पूछते हुए आशना का दिल धड़क रहा था.

वीरेंदर: जब तुम्हे विटनेस के रूप मे पेश करूँगा तब तुम चल सकती हो. 

वीरेंदर के इस मज़ाक ने आशना के मासूम दिल पर सूइयां चुभा दी और उसे लगा कि वीरेंदर उस के साथ सच मे फ्लर्ट कर रहा है. उसे लगा कि शायद वीरेंदर किसी और ही लड़की से प्यार करता है और उसी से शादी करना चाहता है. आशना मन मे सोचते हुए ही अपने आप से बातें करती रहती है, कभी वो वीरेंदर के लिए खुश होती तो कभी उसका मन खिन्न हो उठता. उसके सिर मे काफ़ी दर्द होने लगा. वो आँखें बंद करके सीट के साथ टेक लगा कर बैठ गई और पिछले दिनो हुए घटनाक्रम एक के बाद एक उसकी आँखों के सामने चलने लगे. अचानक आशना को कुछ याद आया. आशना ने जेब से मोबाइल निकाला और एक नंबर. डाइयल किया. कुछ देर बाद एक अलसाई सी आवाज़ आई: हेलो.

आशना: हाई प्रिया!!! 

वहाँ से एक दम चोन्कने की आवाज़ आई: आशना तू, कहाँ मर गई थी तू, तुझे पता है मैने कितनी बार तुझे कॉल करने की कोशिश की लेकिन तेरा फोन लगता ही नहीं था, अब तू कहाँ है. मुझे अभी आकर मिल और बता यह सब क्या हो रहा है. 

आशना: मेरी माँ, साँस तो ले और मुझे भी बोलने का मोका दे. 

आशना: पहले यह बता तू अभी कहाँ है? 

प्रिया: रूम मैं हूँ यार, कल नाइट की फ्लाइट थी अभी अभी सोई हूँ तूने कॉल कर दिया.

आशना: अच्छा चल ठीक तू सो जा और हां हो सके तो वेडनेसडे को लीव ले लेना, मैं वेडनेसडे को आ रही हूँ, फिर मिलकर ही तुझे सब बताउन्गी. 

प्रिया: बाइ, जल्दी आना मुझे तुझ से काफ़ी बातें करनी हैं. 

आशना: ओके, बाइ टके केर और आशना ने फोन काट दिया. 

प्रिया से बात करके आशना थोड़ा हल्का महसूस कर रही थी, प्रिया उसी के साथ फ्लाइट-अटेंडेंट थी और वो दोनो रूम पार्ट्नर भी थे. दोनो मे काफ़ी अंडरस्टॅंडिंग थी.आशना को जहाँ अभी एरलाइन्स जाय्न किए हुए केवल 7 महीने ही हुए थे वहीं प्रिया उस से 4 साल सीनियर थी. आशना और प्रिया एक दूसरे ही हर राज़ से वाकिफ़ थीं. आशना के भाई के बारे मे प्रिया के अलावा और कोई नहीं जानता था तो वहीं आशना भी जानती थी कि प्रिया ने इतने सालों मैं क्या कुछ किया है. प्रिया आशना की नेचर के बिल्कुल विपरीत, खुले अंदाज़ वाली मदमस्त हसीना और सेक्स को एंजाय करने वाली लड़की थी. इन दोनो मैं इतनी कैसी पट गई वो यह दोनो कभी समझ ही नहीं पाई. प्रिया का अफेर एरलाइन्स के ही पाइलट के साथ था. जब भी कभी प्रिया का ऑफ होता तो वो दोनो उस छुट्टी का खूब फ़ायदा लेते. आशना हमेशा अपनी ड्यूटीस उसी दिन रखवाती जिस दिन प्रिया ऑफ रखती. वो दोनो को मिलने का खूब मोका देती थी. 

प्रिया के बारे मैं सोचते सोचते आशना को वक़्त का पता ही ना लगा. उसे होश तो तब आया जब वीरेंदर गाड़ी मे बैठा और उसे देख कर बोला “मेरे बारे मे इतना मत सोचो, कहीं अपना दिल ना खो बैठो”. आशना का चेहरा एकदम सुर्ख हो गया लेकिन फिर भी वो बोली “अपने दिल को ही समझा रही हूँ लेकिन यह कुछ मानने को तैयार ही नहीं”. 

वीरेंदर, इतना सुनते ही खुश हो गया. वीरेंदर: काश यह भी तुम्हारी तरह ज़िद पर अड़ जाए तो अपना तो कल्याण हो जाएगा. 

आशना ने ज़ोर से ठहाका लगाया और बोली: सोच लो ऐसे ज़िद्दी दिल को संभाल पाओगे.

वीरेंदर: हमे संभालने का ज़िम्मा आपका है तो आपके लिए इतना तो कर ही सकता हूँ. धीरे धीरे दोनो एक नये रिश्ते के करीब आ रहे थे. 

आशना का मन किया कि अभी वीरेंदर को बाहों मे जकड ले मगर उस के दिमाग़ पर भाई का रिश्ता अभी भी भारी था. 

आशना ने मोबाइल मे टाइम देखा “ओह गॉड, 2:30 बज गये, इतना टाइम लगा दिया तुमने. घर से घुमाने लाए थे और आधा दिन तो तुम्हें काम मे ही लग गया. क्या कर रहे थे अंदर? 

वीरेंदर: वो कुछ पपर्स वकील साहब को तैयार करवाने के लिए बोला था तो उन्हे ही स्टडी करने मे टाइम लग गया. सारे पेपर्स स्टडी करके साइन कर दिए हैं, अपना काम तो हो गया. 

आशना: तुम तो कोर्ट मॅरेज करने वाले थे. 

वीरेंदर: एक ही तो शादी करनी है तो सोचा क्यूँ ना धूम धाम से करूँ. 

आशना: वैसे ख़याल बुरा नहीं है. 

वीरेंदर: तो कब की तारीख निकलवाऊ?. 

आशना ने वीरेंदर की बात सुनी तो एकदम धड़कने एकदम बढ़ने लगी और काँपते हुए उसने जवाब दिया “उसी से पूछ लेना फोन पर”. 

वीरेंदर: यह भी ठीक रहेगा, हो सकता है सामने वो कुछ बोल ना पाए, शाम को फोन पर ही उस से बात कर लूँगा. आशना जान गई थी कि आज शाम को कुछ ना कुछ होने वाला है. शाम के बारे मे सोच कर वो घबराई भी थी और रोमांच भी महसूस कर रही थी. उसने सोचा कि अगर वीरेंदर ने शाम को उसे प्रपोज़ कर दिया तो वो क्या करेगी, क्या जवाब देगी उसको. एक तरफ से उसे अपने पर गुस्सा भी आ रहा था और एक तरफ वो वीरेंदर को खोना भी नहीं चाहती थी. इस घर मे आई तो वीरेंदर की ज़रूरत बनकर थी मगर अब उसे लग रहा था कि वीरेंदर ही उसकी ज़रूरत बन गया है.

आशना ने दिमाग़ मे उठ रहे सवालों को झटका और बोली: मुझे भूख लगी है. 

वीरेंदर: शूकर है तुम्हें भी भूख लगी, मुझे तो लगा कि तुम डाइयेटिंग पर हो. मेरा तो भूख के मारे बुरा हाल है. वीरेंदर ने होटेल की तरफ गाड़ी दौड़ा दी और करीब 15 मिंटो मे वो एक बड़े से होटेल “दा लयंज़” की पार्किंग मे गाड़ी खड़ी करके उतर गये. 

आशना: यही होटेल क्यूँ????
वीरेंदर: इस होटेल का नोन-वेज बहुत मशहूर है. 

आशना: आज फिर से नोन-वेज, ना बाबा ना, तुम ही खाओ. मैं तो कुछ वेज ही खाउन्गी. 

वीरेंदर:अरे एक बार टेस्ट करके तो देखो, खाने वाले की उंगलियाँ ना चाट जाओ तो बोलना. 

आशना:खाने वाली की उंगलियाँ चाटूँगी तो खिलाने वाले का क्या क्या चाटना पड़ेगा. यह बात आशना के मूह से एकाएक निकल गई. अपनी बात समझ मे आते ही उसकी आँखें झुक गई और वो शरम से दोहरी हो गई. 

वीरेंदर: बड़ी जल्दी है तुम्हें, सबर रखो, सबर का फल मीठा होता है. 

आशना ने वीरेंदर की तरफ देखा और शरमा कर अपने चेहरे को अपने हाथों से ढक लिया. 

वीरेंदर: अभी से इतना शरमाना, उस वक्त क्या होगा? 

आशना: वीरेंदर प्लीज़, मैं मर जाउन्गी. 

वीरेंदर: मैं तुम्हें मरने नहीं दूँगा, बिल्कुल प्यार से करूँगा. 

वीरेंदर की बात सुनकर आशना ने अपने चेहरे से अपने हाथ हटाए और उसकी छाती पर प्यार से मुक्के मारने लगी और बोली: तुम बड़े गंदे हो. उस फोन वाली से ही करना जो करना है, मैं तो कल वापिस जा रही हूँ. 

वीरेंदर उसकी बात सुनकर एकदम निराश हो गया. 

आशना: हां वीरेंदर, मैं कल वापिस जा रही हूँ. 

वीरेंदर: लेकिन क्यूँ?. 

आशना: वीरेंदर अभी मुझे और पढ़ना है, तुम भूल रहे हो मैं कुछ दिन की छुट्टी पे आई थी. कुछ ही दिनों मे मेरी 5थ सेम की क्लासस शुरू होने वाली है. डॉक्टर. बीना के कहने पर मैं कुछ दिनों तक तुम्हारी हेल्प की है मगर अब मुझे जाना है. 

आशना का एक एक शब्द वीरेंदर की आत्मा को झिंजोड़ रहा था. वीरेंदर ने सोचा कि वो भी कितना पागल है. बिना कोई रिश्ता बनाए वो इस लड़की पर अपना हक़ मानने लगा था. उसका खाना खाने का दिल ज़रा सा भी नहीं था लेकिन आशना को भूख लगी थी तो उसने भी उसे कंपनी दी. खाना खाते हुए दोनो ही अपने अपने ख़यालो मे खोए थे. आशना यह सोच रही थी कि क्या उसे वीरेंदर को सच बता देना चाहिए कि वो बस एक-दो दिन के लिए वहाँ जा रही है ताकि अपना समान वहाँ से ला सके. फिर उसके मन मे वीरेंदर को थोड़ा और तड़पाने का ख़याल आया

वहीं वीरेंदर यह सोच कर परेशान था कि आशना के चले जाने के बाद वो फिर से तन्हा हो जाएगा. कितने सालों बाद उसे फिर से जीने की चाह जागी थी और फिर कुछ ही दिनो की खुशी के बाद उसकी ज़िंदगी अंधेरे मे डूबने वाली थी. वीरेंदर ज़ोर ज़ोर से रोना चाहता था, वो किसी की बाहों मे सुकून पाना चाहता था मगर वो बिल्कुल अकेला हो गया था. वीरेंदर अपने ख़यालों से बाहर आता है जब वेटर बिल के लिए पूछता है. वीरेंदर ने बिल पे किया और दोनो होटेल से बाहर आ गये. 

आशना: तुम मुझे किसी शॉपिंग माल मे ले चलोगे? मुझे अपनी फ्रेंड के लिए कुछ शॉपिंग करनी है. जब जाउन्गी तो मेरा दिमाग़ चाट देगी अगर उसके लिए कुछ ना लिया तो. 

वीरेंदर: हां माल्स तो काफ़ी हैं, लेकिन यहाँ पास मे ही एक नया माल खुला है, मैं भी कभी नहीं गया, चलो वहीं चलते हैं. 

आशना: तो चलो. 

माल मे पहुँच कर आशना ने कुछ शॉपिंग की जिसकी पेमेंट वीरेंदर ने की. आशना ने अपनी फ्रेंड के लिए एक ड्रेस और वीरेंदर के लिए एक ब्लेज़र खरीदा. वीरेंदर से नज़रें बचा कर उसने दो सेट ब्रा-पैंटी के भी लिए. एक बार तो उसके मन मे आया कि वीरेंदर से पूछ लूँ कि एक सेट तुम्हें भी लेकर दे दूं ताकि तुमको चुराने की ज़रूरत ना पड़े लेकिन फिर उसने कुछ सोच कर यह ख़याल मन से झटक दिया. उसे लगा कि शायद माल मे वीरेंदर को शर्मिंदा करना ठीक नहीं होगा, पहले ही काफ़ी परेशान कर चुकी हूँ. आशना ने क्या क्या शॉपिंग की वीरेंदर ने भी नहीं देखा उसका ध्यान तो कहीं और ही था. आशना जानती थी कि वो उसके जाने को लेकर परेशान है. आशना ने सोचा घर पहुँच कर उसे सच बता देगी कि वो जल्द ही वापिस आ जाएगी. शॉपिंग के बाद आशना ने वीरेंदर को घर चलने के लिए बोला. जैसे ही आशना ने गाड़ी का पीछे का दरवाज़ा खोल कर समान रखना चाहा, वहाँ पड़े समान को देख कर हैरान रह गई. 

आशना: यह किसका समान है. 

वीरेंदर: घर के लिए थोड़ा समान लिया था अपने शोरुम से. 

आशना: सब कुछ तो है तुम्हारे पास, फिर और समान की क्या ज़रूरत है. 

वीरेंदर: “हां सब कुछ तो है मेरे पास” और यह कहकर गाड़ी मैं बैठ गया. 

आशना ने महसूस किया कि वीरेंदर काफ़ी परेशन है, वो उसे और परेशान नहीं करना चाहती थी मगर वो उसे इतनी जल्दी बताना भी नहीं चाहती थी कि वो तो सिर्फ़ अपना समान लेने जा रही है. 

आशना: अच्छा एक काम करो मेरे लिए बॅंगलॉर की कल शाम की टिकेट बुक करवा दो. वीरेंदर ने दुखी मन से फोन मिलाया और बॅंगलॉर की एक एरटिकिट बुक करवा दी. 

आशना: एर-टिकेट क्यूँ करवाई, ट्रेन से जाती तो परसों सुबह आराम से पहुँच जाती. 

वीरेंदर: ट्रेन मे रात के सफ़र से अच्छा है कि तुम फ्लाइट से जाओ. कल शाम 6:00 बजे की फ्लाइट है. अपनी फ्रेंड को कॉल करके बता देना कि तुम्हे टाइम पर रिसीव कर ले. 

आशना: थॅंक यू. 

वीरेंदर भारी मन से घर की ओर चल दिया. घर मे आते ही वीरेंदर गाड़ी पार्क करके गाड़ी से उतरा और सीधा अंदर की तरफ चल दिया. आशना ने अपना समान उठाया और वीरेंदर को आवाज़ देकर पूछा: आपका समान तो गाड़ी में ही रह गया. 

वीरेंदर: रहने दो, अब इसकी कोई ज़रूरत नहीं है. आशना को वीरेंदर का जवाब बड़ा अजीब सा लगा. 

उसने अपना समान लिया और घर के अंदर आ गई. अंदर आते ही उसने देखा कि वीरेंदर अपने रूम मे घुस रहा है. आशना ने सोचा कि वीरेंदर को थोड़ी देर अकेला छोड़ना ठीक रहेगा. आशना ने हाल मे समान रखा और किचन की तरफ चल दी जहाँ बिहारी दो ग्लासो मे ऑरेंज जूस डाल रह था. 

बिहारी: आ गये बिटिया तुम दोनो. 

आशना: जी काका. 

बिहारी: छोटे मालिक को क्या हुआ, बड़े गंभीर लग रहे हैं. 

आशना: शायद थक गये हैं, आप जाकर उन्हे जूस दे दीजिए. 

बिहारी ने आशना को जूस का एक ग्लास पकड़ाते हुए कहा “जी बिटिया”. 

आशना ने बिहारी की तरफ देखा तो उसे देख कर बोली:काका, आपकी तबीयत तो ठीक है ना. 

बिहारी आशना के इस सवाल से हड़बड़ा गया. 

बिहारी: हां, हां बस थोडा थक गया हूँ बेटी. 

आशना: आप आराम कीजिए, रात का खाना मैं बना लूँगी. 

बिहारी भी दिन भर बीना की चुदाई करके काफ़ी थक चुका था. आशना के ऐसा कहने पर वो जूस का ग्लास लेकर उपर चला गया वीरेंदर को देने और फिर अपने रूम मे जाकर बेड पर लेट गया. आशना ने अपना समान उठा कर अपने रूम मे रखा और फ्रेश होकर रात के खाने की तैयारी शुरू कर दी. फ्रिड्ज से कुछ सब्ज़ियाँ निकाल कर उसने वेज- बिरयानी के लिए समान इकट्ठा कर लिए और सोचा कि जब खाने का टाइम होगा उस से पहले गरम-गरम बना देगी. रात के खाने की सारी तैयारी करके वो अपने रूम मे चली आई. उसे चैन नहीं आ रहा था कि वो वीरेंदर को कैसे बताए लेकिन फिर भी उसने आज की रात एक बार फिर से पूरे घटनाक्रम के बारे मे सोचने का फ़ैसला किया. 

बिहारी अपने कमरे मे लेटा काफ़ी खुश था. उसने सोच रखा था कि वीरेंदर जैसे ही आशना से शादी कर लेगा, वो रागिनी को अपने घर ले आएगा. बिहारी, बीना के साथ हुई आज की मुलाकात के बारे मे सोचने लगा. 

सुबह करीब 10:15 बजे बीना की गाड़ी वीरेंदर के गॅरेज मे खड़ी थी. बीना ने हॉर्न दबाया तो बिहारी दौड़ता हुआ गाड़ी की तरफ आया और जैसे ही बीना गाड़ी से बाहर निकली, बिहारी ने उसे गोद मे उठा लिया और घर के अंदर आ गया.

बीना: नीचे तो उतार, आज क्या पूरा दिन गोदी मे ही उठाकर रखोगे.

बिहारी: आज तो पूरा दिन तुझे नंगा करके कुतिया की तरह चोदुन्गा.

बीना: मैं तो कब से तैयार हूँ राजा, मगर पहले एक काम की बात सुनो. तुमने रागिनी के लिए बोला था तो मुझे तुमपर तरस आ गया, अब सोच रही हूँ कि उस कली को फूल बनाने का जिम्मा तुझे जल्द ही दे दूं. 

बिहारी: वाह रे मेरी छमिया, यह हुई ना बात. लेकिन यह तो बता, माल असली है या किसी ने चख लिया है. 

बीना: अब यह तो तू ही चेक कर लेना, तुझे कॉन सा पैसे देकर खरीदना है. फ्री का माल है, जब तक मन चाहे दिल बहला लेना और फिर दोबारा मेरे पास छोड़ देना. 

बिहारी: अरे बच्ची है, 3-4 साल तो रागडूंगा ही उसे. इतनी जल्दी थोड़े ही छोड़ दूँगा. 

बीना: तो फिर आशना का क्या होगा. 

बिहारी: आशना को तो मैं पूरी उम्र अपने साथ रख सकता हूँ लेकिन अपनी रखैल बना कर. 

बीना: साले तू मर्द है या टार्ज़ॅन. 

बिहारी: घोड़ा जब बूढ़ा होने लगता है तो और ताकतवर हो जाता है. तू तो मेरी प्रेमिका रहेगी, रागिनी को मैं अपनी बीवी बना कर रखूँगा और रही बात आशना की तो वो बस मेरे बच्चों की माँ कहलाएगी मगर मैं उसे दर्जा रखैल का दूँगा. 

बीना: तो सुन फिर राघिनी के लिए क्या प्लान है. बीना जैसे जैसे उसे रागिनी के प्लान के लिए बता रही थी, बिहारी उसके दिमाग़ की दाद देते जा रहा था. 

बिहारी: साली उसे मालकिन बनाने के खवाब दिखाकर एक नौकर की बीवी बना देगी तू तो.

बीना: दो दिन बाद मैं उसे लेकर आउन्गि, आगे तू संभाल लेना. 

बिहारी: आने दे साली को, उसे ऐसा फसाउन्गा कि वो मेरे टटटे पकड़ कर रहम की भीख माँगेगी. 

उसके बाद बिहारी और बीना की चुदाई का जो सिलसिला शुरू हुआ वो शाम के करीब 4:00 बजे तक चला. इस दौरान बिहारी ने 4 बार बीना के जिस्म को रौंदा और बीना के सारे कस बल ढीले कर दिए. जाते जाते बीना कह गई, मैं आज ही अपना काम शुरू कर देती हूँ, तुम किसी तरह दो दिन बाद इन दोनो को कहीं बाहर भेज देना थोड़ी देर के लिए. 

बिहारी: तू उसकी चिंता ना कर, बस भगवान से दुआ कर कि माल असली हो. साला 40 साल हो गये लेकिन कोई कुँवारी चूत नहीं खोली. 

बीना: साले चूत नहीं खोली तो क्या, गांडे तो बहुत खोली हैं इन सालों मे. 

बिहारी: हां यह बात तो है तुझे मिलाकर करीब 8 गान्डो पर अपनी मुहर लगा चुका हूँ.अब लग रहा है कि जल्द ही इस गिनती मे दो गांडे और जुड़ने वाली है. 

बीना: बच्चियों की गान्डो को ध्यान से चोदना, नहीं तो अगली बार थूकने भी नहीं देंगी. 

बिहारी: एक बार ग़लती कर चुका हूँ, बार बार थोड़े करूँगा.

रात करीब 8:00 बजे वीरेंदर के सेल पर बीना की कॉल आई. वीरेंदर ने नंबर. देखा तो झट से फोन उठा लिया. 

बीना: क्या हुआ रोमीयो, सुबह तुम्हे कॉल किया था, तुमने रिसीव ही नहीं किया. 

वीरेंदर: वो मैं तब उस समय ऑफीस मे था, पता ही नहीं लगा. 

बीना: क्या??? तुमने ऑफीस शुरू कर दिया? देखो जानू अभी तुम्हें आराम की ज़रूरत है, वैसे भी अभी तुम्हारे लिए आशना है, काम तो होता ही रहेगा. थोड़ा टाइम उसे भी दो ताकि वो तुम्हारे करीब आ सके. 

वीरेंदर: उसे ही घुमाने के लिए ले गया था और जाते जाते शोरुम पर थोड़ी देर रुक कर वहाँ के काम का जायज़ा लिया.

बीना: ओके, तो कहाँ तक बात पहुँची. 

वीरेंदर:आ जाएगी धीरे धीरे लाइन पर, टाइम तो लगेगा थोड़ा सा. 

बीना: जल्दी से मना ले ना उसे राजा, मैं अब तेरे बिना नहीं रह सकती. 

वीरेंदर: मेरा हाल भी तेरे जैसा है मगर मुझे नहीं लगता कि वो इतनी जल्दी हां करेगी. 

बीना: खैर तुम लगे रहो, मुझे पूरा यकीन है कि वो तुम्हे ना नही करेगी, कोशिश करते रहो, फल ज़रूर मिलेगा. 

वीरेंदर जो कि आज आशना के जाने की बात सुनकर टूट गया था, बीना की बातें सुनकर उसे थोड़ा हॉंसला हुआ. 

वीरेंदर:मैं कल शाम को बॅंगलॉर जा रहा हूँ कुछ बिज़्नेस डील है, सोच रहा हूँ कि आशना को भी साथ ले जाऊ. 

बीना एक दम खुश होते हुए:यह तो बड़ी अच्छी बात है. हो सकता है इसी ट्रिप में वो तुम्हे आक्सेप्ट करले. ऑल दा बेस्ट, लेकिन एक बात याद रखना, जल्दी आ जाना और अपनी सुहागरात अपने घर पर ही आकर मानना, कहीं बॅंगलॉर मे ही हनिमून शुरू ना कर देना. 

वीरेंदर: डॉन’त वरी,, तुम्हारी बेटी के साथ जो कुछ भी करूँगा, सबसे पहले “शर्मा निवास” में ही करूँगा. 

बीना: अच्छा चल बाइ, टेक केर ऑफ युवरसेल्फ आंड आशना इन जर्नी. 

वीरेंदर ने फोन काट दिया. वीरेंदर आशना को इतनी आसानी से अपनी ज़िंदगी से जाने नहीं देना चाहता था. उसने ठान लिया था कि वो भी आशना को बिना बताए बॅंगलॉर चला जाएगा और उसे मनाने की कोशिश करेगा. वो कम से कम एक बार तो आशना को अपने दिल की बात बताना ही चाहता था.

उधर बीना को अपने हर प्लान मे कामयाबी मिलने से वो काफ़ी खुश थी. वीरेंदर कुछ दिनो के लिए बॅंगलॉर जा रहा था, जिस से बिहारी का रास्ता सॉफ था. बीना की इतनी मदद करने के लिए वो बिहारी से काफ़ी खुश थी और तोहफे के रूप मे रागिनी को उसके लिए परोसने वाली थी. बीना का इस मे भी स्वार्थ था. वो बिहारी के उपर एहसान करके उसे अपने काबू मे करना चाहती थी ताकि वक़्त आने पर वो बिहारी से वीरेंदर का कत्ल करवा सके. बीना जानती थी कि बिहारी चाहे कितना भी कमीना क्यूँ ना हो लेकिन एक वक़्त ऐसा था कि वो “शर्मा निवास” का एक वफ़ादार कुत्ता था तो उसके लिए वीरेंदर को अपने हाथो से मारना इतना आसान नहीं होगा. रागिनी द्वारा वो बिहारी को इस काम के लिए मनाने वाली थी. बीना जानती थी कि वीरेंदर को अगर यह पता चल गया कि रागिनी बिहारी के साथ उसके घर मे रह रही है तो वीरेंदर और बिहारी के बीच झगड़ा होना निश्चित है, वो इसे झगड़े मे घी का कम करेगी और बिहारी को भड़का कर वीरेंदर का कत्ल करवा देगी. इस से दो फ़ायदे होते एक तो वीरेंदर के कत्ल के इल्ज़ाम मे बिहारी या तो कहीं छुप जाता या पोलीस उसे पकड़ लेती तो दोनो ही सुरतों मे बीना उसकी मदद करती तो बिहारी हमेशा बीना का गुलाम बना रहता. बीना नहीं चाहती थी कि काम हो जाने के बाद बिहारी उस पर हावी रहे.

बीना ने एक नर्स के द्वारा रागिनी को मेसेज भिजवा दिया कि खाना खाने के बाद वो यहीं आ जाए, उसके कॅबिन मे. 

उधर आशना को अपने रूम मे आए काफ़ी समय हो चुका था. वीरेंदर के लिए सोच कर उसका बुरा हाल था. वो वीरेंदर को बताना चाहती थी कि वो कुछ दिनों के लिए जा रही है ताकि हमेशा के लिए उसके पास आ सके लेकिन वीरेंदर ने उसे एक बार भी रुकने को नहीं कहा. आशना चाहती थी कि एक बार बस एक बार वीरेंदर उसे रुकने के लिए तो बोले वो हमेशा के लिए उसके पास ही रहेगी उसकी आँखों के सामने. आशना लड़की थी इसलिए पहल वीरेंदर से चाहती थी और वीरेंदर यह सोच रहा था कि आशना अपने कॅरियर को दाव पर लगाकर उसके लिए यहाँ कैसे रुक सकती थी. वो जानता था कि आशना एक बहुत ही महत्वाकान्छि लड़की है वो किसी भी कीमत पर अपनी पड़ाई अधूरी छोड़ कर यहाँ नहीं रुक सकती. फिर वीरेंदर ने अपने आप से हे सवाल किया “आशना यहाँ रुके भी तो किसके लिए, क्या मैने एक बार भी उसको रुकने के लिए बोला, क्या हमारा रिश्ता यहाँ तक पहुँचा है कि मैं उसपे हक़ जता कर रोक लूँ”. 

वीरेंदर भी सोच सोच कर परेशान था मगर उसका कोई हल नहीं निकल रहा था. वो बार बार अपने आप को दोष दे रहा था कि शायद अगर कल उसने बीना के साथ वो सब ना किया होता और आशना को इसका पता ना लगता तो ऐसे उसे छोड़ कर नहीं जाती. वीरेंदर उसे किसी भी तरह मना लेता मगर वो यह भी जानता था कि किसी भी लड़की के लिए यह बात बर्दाश्त करना बहुत मुश्किल है. वीरेंदर ने सोचा कि एक बार आशना से बात कर लूँ उसके बाद जो उसका फ़ैसला होगा वो उसे मंज़ूर कर लेगा. यही सोच कर वीरेंदर आशना के रूम की तरफ चल दिया. आशना के रूम के दरवाज़े के पास पहुँच कर उसे नॉक करने ही वाला था तो उसने सोच कर वो आशना के सामने बीना के साथ गुज़ारे लम्हे कैसे कन्फेस कर पाएगा और अगर आशना ने उसे माफ़ नहीं किया तो वो क्या करेगा. यही सोच कर वीरेंदर अपने कमरे मे आया और अपना मोबाइल उठाकर आशना का नंबर. मिला दिया. उसे यह जानकार गहरा आघात पहुँचा कि आशना ने अपना मोबाइल स्विचऑफ कर रखा है. उसे पता था एक आशना समझ चुकी है कि उसने आशना से नंबर. क्यूँ लिया, लेकिन आशना ने मोबाइल ही स्विचऑफ कर दिया. क्या आशना सच मे उस से नफ़रत करने लगी है?? क्या वो अब कभी उसे माफ़ नहीं करेगी?? यह सोचते सोचते उसका मन काफ़ी उदास हो गया. 

थोड़ी देर बाद बिहारी ने वीरेंदर का दरवाज़ा नॉक कर के कहा कि आशना बिटिया ने खाना बना दिया है, आ कर खा लीजिए. 

वीरेंदर: काका मुझे भूख नहीं है और नींद भी बड़ी आ रही है, आप खा लीजिए. 

आशना को जब यह पता लगा कि वीरेंदर खाना नहीं खाएगा तो उसका दिल और उदास हो गया. वो भी बिना खाना खाए उपर आ गई और काका को बोल दिया कि आप खाना खा कर बर्तन समेट लेना. 

बिहारी दोनो के इस रवैये से परेशान हो उठा. उसने तो सोचा था कि आज के खाने मे इतनी डोज डालूँगा कि दोनो सेक्स किए बिना रह नहीं पाएँगे लेकिन यहाँ तो सारा काम उल्टा हो गया. उसने झट से अपने कमरे मे जाकर मोबाइल ऑन किया और बीना का नंबर. लगा दिया. 

बीना: बोलो राजा, आज भी मन नहीं भरा क्या. 

बिहारी: मन तो मेरा कभी नहीं भरता लेकिन लगता है कि उन दोनो का मन एक दूसरे से भर गया है. यह कह कर बिहारी ने बीना को सारी बात बता दी. 

बीना: तू भी ना कितनी फिकर करता है अपनी होने वाली रखैल की. अरे आज दोनो घूमने गये थे तो हो सकता है वीरेंदर ने उसे अपने दिल का हाल कहा हो. यह तो तू भी जानता है कि आशना उसकी सग़ी बेहन है तो उसे थोड़ा तो अटपटा लगेगा ही ना. तू टेन्षन मत ले, मेरे पास तेरे लिए एक बहुत अच्छी खबर है. 

बिहारी: रागिनी मान गई क्या? 

बीना: वो भी मान जाएगी, लेकिन अच्छी खबर यह है कि भाई -बेहन कल दोनो बॅंगलॉर जा रहे हैं 2-3 दिन के लिए. मैं शाम को रागिनी को लेकर आ जाउन्गी, बाकी तू वही करना जैसा बताया गया था. 

बिहारी(खुश होते हुए): यह तो बड़ी अच्छी खबर है. 

मैं तो बेकार ही इनकी परेशानी ले रहा था, इन भाई-बहनो ने तो हनिमून का प्रोग्राम भी बना लिया. मुझे यकीन है कि बॅंगलॉर मे कुछ ना कुछ तो ज़रूर होगा. 

बीना: मुझे भी यही लगता है, चल अब रखती हूँ तेरी चिड़िया को बुलाया है आज अपने कमरे मे. आज रात ही उस से बात करके तेरे लिए तैयार कर लेता हूँ.

बिहारी: ओके, ऑल दा बेस्ट ऑफ लक. 

बीना: चल गँवार कहीं का और फोन काट दिया. 

उधर आशना और वीरेंदर दोनो ही अपने अपने बेड पर लेटे हुए करवटें बदल रहे थे, नींद दोनो की आँखों से दूर थी. आज भी आशना ने अपने रूम का दरवाज़ा बंद नहीं किया था लेकिन आज उसने अपनी पैंटी नहीं उतारी थी. वो चाहती थी कि जब वीरेंदर उस के रूम मे आए तो वो उस से बात करेगी, उसका मन हल्का करने की कोशिश करेगी. उसे यह सोच कर वीरेंदर पर गुस्सा आ रहा था कि उसने वीरेंदर को अपना नंबर. भी दिया था मगर वो उसे फोन क्यूँ नहीं कर रहा. मानती हूँ कि वो मेरे कमरे मे आकर मुझसे बात करने मे हिचकिचाएगा मगर फोन पर तो बात कर ही सकता है. आशना बार बार अपने सेल को देखे जा रही थी. काश उसने भी दिन मैं वीरेंदर का नो. ले लिया होता तो दिल के हाथून मजबूर होकर वो उसे फोन कर ही देती.ऐसे ही काफ़ी रात बीत गई मगर किसी को नींद नहीं आ रही थी. अजीब बात थी कि दो रातों से जागने वाला बिहारी आज चैन की नींद सो रहा था और आने वाले कल के हसीन सपने देख रहा था और दो दिल इस काली रात मे चैन से सांस भी नहीं ले पा रहे थे. 

काफ़ी देर करवटें बदलते हहे अचानक आशना को याद आया कि वीरेंदर ने गाड़ी मे कुछ समान रखा था. उसके दिल मे बेचैनी होने लगी कि ऐसा क्या था उसमे जो वीरेंदर ने कहा था कि “अब इसकी ज़रूरत नहीं है” आशना को पता था कि वीरेंदर उस से पहले ही घर मे दाखिल हो गया था तो गाड़ी तो खुली ही होगी. इतनी सर्दी मे और इतनी गहरी रात मे उसे बाहर जाते डर भी लग रहा था लेकिन उसने हिम्मत करके बाहर जाकर देखने की सोची. उसके जॅकेट पहनी और दबे पावं नीचे सीडीयाँ उतरने लगी. हाल मे काफ़ी अंधेरा था, वो अंदाज़ा लगाकर आगे बढ़ने लगी तो बिहारी के कमरे से उसे रोशनी आती दिखाई दी. वो वही ठिठक कर रुक गई. उसे लगा कि बिहारी अभी भी शायद जाग रहा है या शायद आज फिर से शराब पी रहा है. आशना दबे पाँव उसके कमरे के पास पहुँची, कमरे का दरवाज़ा थोड़ा सा खुला था. उसने झाँक कर देखा तो बिहारी अपने बेड पर आँखें मून्दे हुआ दिखाई दिया. आशना ने राहत की सांस ली. उसने सिर अंदर करके देखा तो काका के कमरे की एलसीडी चल रही थी, उसी की रोशनी बाहर हाल मे आ रही थी. आशना ने पहले तो एलसीडी बंद करने की सोची मगर यह सोच कर रहने दी कि शायद सुबह काका को शक़ हो जाए कि उनके रूम मे कोई आया था. आशना ने धीरे से दरवाज़ा फिर से वैसे हे बंद किया और मेन दरवाज़े की तरफ चल दी. 

जैसे ही आशना ने दरवाज़ा खोला, ठंडी हवा की एक तेज़ लहर उस से टकरा गई. एक बार के लिए तो आशना का शरीर वहीं जम गया. उसने झट से बाहर आकर दरवाज़ा बंद किया और अपने हाथ जॅकेट मे डाल कर जॅकेट की कॅप पहन ली. काफ़ी डरते हुए वो गाड़ी तक पहुँची और डोर का हॅंडल पकड़ कर उसे खींचा. क्लिक की आवाज़ के साथ गाड़ी का दरवाज़ा खुल गया. आशना फ्रंट सीट पर घुटनों के बल बैठ गई और गाड़ी के अंदर की टॉप लाइट ऑन कर दी और पीछे रखे समान को देखने लगी. समान देखते देखते उसकी आँखें फटी की फटी रह गई. आशना को याद आया कि जिस जिस चीज़ को उसने वीरेंदर के शोरुम मे हाथ लगा कर देखा और सराहा था वो सब वहाँ मौजूद थी. आशना की आँखों मे आँसू आ गये.

आशना(मन मे सोचते हुए): इतना प्यार करते हैं आप मुझे वीरेंदर कि हर वो चीज़ जिसे मैने सिर्फ़ हाथ लगाया आपने मेरे कदमों मे रख दी. ऐसा मत करो वीरेंदर, शायद मेरी असलियत जानने के बाद आप मुझसे उतनी ही नफ़रत करोगे. मैं सब कुछ बर्दाश्त कर सकती हूँ पर आपकी आँखों मे मेरे लिए नफ़रत नहीं देख पाउन्गी. वीरेंदर अगर आप मेरे भाई ना होते तो मैं आपको इतना प्यार देती कि आप के सब गम भुला देती. आप मुझसे प्यार करते हैं तो मैं भी तो आप से प्यार करने लगी हूँ यह जानते हुए भी कि आप मेरे कॉन हैं. आइ लव यू वीरेंदर, आइ लव यू वेरी मच. आशना काफ़ी एमोशनल हो गई थी. उसका दिल किया कि अभी वीरेंदर के कमरे मे जाकर उस से लिपट जाए और उस से अपने दिल का हाल बयान कर दे. फिर उसने डिसाइड किया कि यह सारा समान अपने रूम मे रखकर वो सुबह वीरेंदर को अपने रूम मे बुलाएगी और उसकी मोहब्बत को स्वीकार करेगी. तीन फेरों मे आशना ने सारा समान अपने कमरे मे एक टेबल पर रख दिया. 

फिर उसने उस समान से वो मोबाइल उठाया जो वीरेंदर उसके लिए लाया था. उसने अपने पुराने मोबाइल से सिम निकाल कर नये मोबाइल मे डाली और मुस्कुराने लगी. वो मन मे सोचने लगी “जनाब ने मेरे लिए सर्प्राइज़ रखा था, सुबह उनके रूम मे जाकर उनसे उनका नंबर. लूँगी और जब उनके सामने इस मोबाइल में फीड करूँगी वो खुद ही सर्प्राइज़ हो जाएँगे”. आशना के सीने से कुछ बोझ तो हल्का हो ही गया था और रज़ाई के गरम एहसास ने उसे सपनों की दुनिया मे धकेल दिया.

वहीं रागिनी खाना खा कर और पेशेंट्स को दवाई वगेरह देकर जब बीना के कॅबिन मे आई तो बीना अपने टेबल पर बैठी किसी फाइल को पढ़ रही थी. 

बीना:आओ रागिनी, मैं तुम्हारा हे वेट कर रही थी, उसने फाइल हो एक साइड रख के कहा. 

रागिनी: जी मॅम बोलिए. 

बीना:तुम फ्री हो ना अभी? मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है.

रागिनी: जी मॅम मैने सभी पेशेंट्स को स्टडी कर लिया है और उन्हें दवाइयाँ भी दे दी हैं. 

बीना: गुड, तुम्हारे रहते मुझे कोई चिंता नहीं. 

रागिनी: ऐसा कह कर आप मुझे शर्मिंदा कर रही हैं मॅम, अगर आप उस दिन मेरी हेल्प ना करती तो आज मैं शायद ज़िंदा भी ना होती. 

बीना: अब कभी दोबारा मरने की बात भी मत करना, तुम मेरी बेटी जैसी हो. मैने तुम पर कोई एहसान नहीं किया बस तुम्हे काम दिया है जिस से तुम आत्म-निर्भर बन सको. 
रागिनी खामोश रही. 

बीना: रागिनी एक बात पूछूँ बुरा तो नहीं मनोगी?

रागिनी: पूछिए ना, मुझे आपकी किसी भी बात का कभी बुरा नहीं लगेगा. 

बीना ने अपने चेहरे पर गंभीरता लाते हुए पूछा: रागिनी देखो मेरी बात का बुरा मत मानना मगर तुम एक अच्छे घर की लड़की लगती हो तो फिर यह सब क्यूँ किया. 

रागिनी जानती थी कि कभी ना कभी उस से यह सवाल ज़रूर पूछा जाएगा, वो इस के लिए तैयार थी. आख़िर कोई लड़की जब अपने घर से भागने का सोचती है तो वो आगे होने वाले सारे ख़तरों का सोच कर ही निकलती है. 

रागिनी: मॅम, मैने यह फ़ैसला काफ़ी सोच समझ कर लिया था. मैं और जावेद एक दूसरे से प्यार करते थे मगर मेरे माँ-बाप कभी हमारी शादी नहीं करवाते. मैं एक हिंदू लड़की और वो एक मुस्लिम. मॅम हम जे&के मे रहकर शादी नहीं कर सकते थे, इसलिए हमने भाग कर शादी करने की सोची मगर मुझे क्या पता था कि जावेद भी मुझे धोखा दे जाएगा.

बीना बड़े ध्यान से उसे सुन रही थी. 

बीना: तो इसका मतलब तुम जे&के से बिलॉंग करती हो. 

रागिनी: जी मॅम. 

बीना: तभी तुम इतनी सुन्दर हो. मैने सुना था कि जे&के की लड़कियाँ काफ़ी सुंदर होती है, आज देख भी लिया. बीना के ऐसा कहने से रागिनी शरमा जाती है. 

बीना: अच्छा यह बताओ कि क्या तुम्हारे घर वालों को पता है कि तुम जावेद के साथ भागी हो. 

रागिनी: शायद अब तक पता लग गया होगा. मेरे भाई ने एक दिन हमे घूमते हुए देख लिया था और उसने रास्ते मे ही जावेद की काफ़ी पिटाई भी की थी. घर लाकर मुझे भी काफ़ी मारा गया और मुझे एक कमरे मे बंद करके यह फ़ैसला सुनाया गया कि आज से मेरा बाहर निकलना बंद.मेरे पापा और भाई कट्टर राजपूत हैं, वो किसी भी कीमत पर हमारा मिलना बर्दाश्त नहीं कर सकते थे. उन्होने मेरी शादी करने का भी फ़ैसला कर लिया था लेकिन मैं उस वक़्त 18 साल की नहीं हुई थी तो उन्होने मेरे 18 साल पूरे होने का वेट किया. उस घटना के दो महीने बाद जब मैं 18 की हुई तो उन्होने मेरा रिश्ता एक राजपूताना घर मे कर दिया. अगर मैं वहाँ से भागी ना होती तो आज तक मेरी शादी हो चुकी होती. 

मगर मैने तो जावेद को ही अपना सब कुछ मान लिया था. एक रात जब सब घरवाले कहीं शादी पर गये थे तो जावेद दीवार फाँद कर हमारे घर मे आ गया. उसने मुझे बंद कमरे से बाहर निकाला और बोला कि मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता, मैं भी इतने दिनों मे उस से मिले बिना पागल हो गई थी. मैने घर से जेवरात (जो उन्होने मेरी शादी के लिए बनवा रखे थे) और कैफ़ सारे पैसे लिए और जावेद के साथ घर से भाग गई. वहाँ से हम सीधा बस स्टॅंड से बस पकड़ कर देल्ही आ गये. हम जानते थे कि अगर हम जे&के मे रहेंगे तो कभी ना कभी पकड़े जाएँगे. वहाँ से वो मुझे रेलवे स्टेशन के पास एक होटेल मे छोड़ गया और मेरा सारा समान लेकर यह कह कर चला गया कि वो टिकेट्स अरेंज करने के लिए जा रहा है. शाम तक हम यहाँ से निकल कर भोपाल चले जाएँगे.उसने बताया कि भोपाल मे उसका एक दोस्त रहता है कुछ दिन हम वहीं रुकेंगे.उसने कहा कि मैं अच्छी तरह से नहा लूँ और अपनी सफाई वागेहरा कर लूँ वो कुछ ही देर मे आएगा और इसी होटेल मे हम अपनी सुहागरात मनाएँगे और फिर भोपाल जाकर हम शादी कर लेंगे.

इतना कह कर रागिनी के गाल सुर्ख लाल हो गये और जैसे ही बीना ने उसे देखा रागिनी ने नज़रें झुका ली. 

बीना: तो इसका मतलब कि तुम तब तक कुँवारी……, मेरा मतलब कि उसने कभी तुम्हारे साथ………. 

इस से पहले कि बीना अपना सेंटेन्स पूरा करती, रागिनी बोल पड़ी: जी मॅम तब तक मैने उसे कुछ भी नहीं करने दिया था. हालाँकि हमारा अफेर पिछले दो साल से चल रहा था, उसने काफ़ी बार मुझे टच करने की कोशिश की मगर अपने भाई और पापा के डर से मैं हमेशा उसे रोक देती. मैं उसे हर बार यही कहती कि शादी के बाद तो मैं हमेशा के लिए तुम्हारी हो ही जाउन्गी और वो हर बार मुझे कहता कि हमारी शादी हो कर रहेगी. इतना कह कर रागिनी चुप हो गई. 

बीना: लेकिन तुम उसके चुंगल मे फसी कैसे, तब तो तुम काफ़ी छोटी थी. 

रागिनी: वो हमारे घर के ड्राइवर का बेटा था, कभी कभी अपने पापा के साथ हमारे घर आ जाता था. भैया की शादी के दौरान वो हमारे घर मे ही रुका और इसी दौरान हमारी नज़दीकियाँ बढ़ी. 

बीना: ह्म्म्म्म मम, छोटी उम्र की अट्रॅक्षन. 

रागिनी चुप रही. 

बीना: तो फिर वो उस दिन वापिस नहीं आया क्या? 

रागिनी: उसके जाने के बाद मैं नहाने चली गई और उसके कहे अनुसार अपने आप को अच्छी तरह सॉफ किया. उस दिन पहली बार मैने अपने बदन को हेर रिमूवर क्रीम से सॉफ किया और उसके बाद के रेशमी एहसास से रोमांचित होने लगी. काफ़ी देर तक मैं कमरा सजाती रही और उसके बाद खुद भी तैयार हो गई. दोपहर को करीब 2:00 बजे मेरे मोबाइल पर उसका फोन आया कि उसे शायद थोड़ा टाइम और लग जाएगा, उसने कहा कि तुम खाना खा लो और अगर मैं नहीं आ पाया तो अपने एक दोस्त को भेजूँगा जो तुम्हें लेकर रेलवे स्टेशन आ जाएगा. अपनी सुहागरात हम भोपाल में जाकर शादी के बाद ही मनाएँगे. उस वक़्त उसकी आवाज़ कुछ कुछ बहक रही थी, ऐसा लग रहा था कि वो नशे मे है लेकिन मैने इस पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया.