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पड़ोस की बहन के साथ सेक्स कहानी

कहानी मैं काफ़ी कॅरेक्टर्स ऐसे हैं जो वक्त आने पर अपनी छाप छोड़ेंगे बट मेन करेक्टर्स आशना और वीरेंदर के ही रहेंगे. तो आइए शुरू करते हैं……….

काफ़ी लंबी कहानी है, धीरज रखेेयगा.

पिछले दस दिनों से बदहाल ज़िंदगी मे फिर से एक किरण आ गई थी. वीरेंदर को होश आ चुका था, उसे आइसीयू से कॅबिन वॉर्ड मे शिफ्ट करने की तैयारियाँ शुरू हो गई थी, आशना की खुशी का ठिकाना ना था, वो जल्द से जल्द वीरेंदर से मिलना चाहती थी, उसे होश मे देखना चाहती थी. उसकी दुआ ने असर दिखाया था. वो उससे मिलके उसे अपनी नाराज़गी बताना चाहती थी. वो पूछना चाहती थी कि ज़िंदगी के इतने ख़तरनाक मोड़ पर आने के बावजूद उसे वीरेंदर ने कुछ बताया क्यूँ नहीं. वो जानना चाहती थी उसकी इस हालत के पीछे के हालात. बहुत कुछ जानना था उसको पर सबसे पहले वो वीरेंदर से मिलना चाहती थी. बस कुछ ही पलों बाद वो उससे मिल सकेगी, अपने भाई को 12 साल बाद देख सकेगी.

जब तक वीरेंदर जी आइक्यू से कॅबिन में शिफ्ट होते हैं, आइए चलते हैं 12 साल पहले. 
आशना तब *****साल की छोटी सी बच्ची थी. अपने माँ-बाप की इक्लोति संतान होने के कारण वो काफ़ी ज़िद्दी थी. ज़िंदगी की हर खुशी उसके कदमों में थी. उसके पिता यूँ तो एक मामूली वकील थे पर अपनी बेटी की हर ज़िद पूरी करना उनका धरम जैसा बन गया था. पत्नी की मौत के बाद वो दोनो एक दूसरे का सहारा थे. आशना की माँ उसे 2 साल पहले ही छोड़ कर चली गई थी. हाइ BP की शिकार थी. जब आशना 8 साल की हुई तो उसके पिता ने उसे डलहोजी मैं एक बोरडिंग स्कूल में दाखिल करवा दिया. आशना की ज़िद के आगे उन्हे झुकना पड़ा और यहाँ से शुरू हुआ आशना की ज़िंदगी का एक नया सफ़र. वो अपने पापा से दूर क्या गई कि उसके पापा हमेशा के लिए उससे दूर हो गई.

हुआ यूँ कि आशना के पिता जी और वीरेंदर के पिता जी सगे भाई थे. वीरेंदर उस वक्त 25 साल का नवयुवक था. मज़बूत बदन और तेज़ दिमाग़ शायद भगवान किसी किसी को ही नसीब मे देता है. वीरेंदर एक ऐसी शक्शियत का मालिक था. मार्केटिंग मे एमबीए करने के बाद उसने पापा के बिज़्नेस को जाय्न कर लिया था. वीरेंदर की माता जी एक ग्रहिणी थी और उसकी छोटी बेहन सीए की तैयारी कर रही थी. पूरा परिवार हसी खुशी ज़िंदगी गुज़ार रहा था पर ऋतु (आशना की माँ) की मौत के बाद उन्होने काफ़ी ज़ोर दिया कि राजन (आशना के पापा) दूसरी शादी कर लें या उनके साथ सेट्ल हो जाए. राजेश दूसरी शादी करना नहीं चाहता था और अपनी वकालत का जो सिक्का उसने अपने शहर मे जमाया था वो दूसरे शहर मे जाके फिर से जमाने का वक्त नहीं था. इसी सिलसिले मे एक बार वीरेंदर के माता-पिता और छोटी बेहन एक बार राजेश के शहर गये ताकि वो किसी तरह उसे मना कर अपने साथ ले आए पर होनी को कुछ और ही मंज़ूर था. उन्होने राजेश को मना तो लिया और अपने साथ लाए भी पर रास्ते मैं एक सड़क दुर्घटना में सब कुछ ख़तम हो गया.

वीरेंदर को जब यह पता चल तो वो अपने आप को संभाल नहीं पाया और एक दम से खामोशी के अंधेरे मे डूब गया. आशना और वीरेंदर ने मिलकर उनका अंतिम संस्कार किया पर वीरेंदर किसी होश-ओ-हवास मे नहीं था. आशना की उम्र छोटी होने के कारण वीरेंदर की कंपनी के पीए ने समझदारी दिखाते हुए उसे जल्दी हुए बोरडिंग भेज दिया ताकि वो इस दुख को भूल सके पर वीरेंदर को तो जैसे होश ही नहीं था कि वो कॉन हैं और उसे उस बच्ची को संभालना है. आशना के दिल-ओ-दिमाग़ पर वीरेंदर की शक्शियत का काफ़ी गहरा असर पड़ा. वो उससे नफ़रत करने लगी और इस नफ़रत का ही असर था कि दोनो भाई बेहन 12 सालो तक एक दूसरे से नहीं मिले या यूँ कहे कि आशना ने कभी मिलने का मोका ही नहीं दिया. धीरे-धीरे वीरेंदर की ज़िंदगी मे ठहराव आता चला गया. वो सब से कटने लगा पर अपने बिज़्नेस को बखूबी अंजाम देता और आशना की फी और बाकी की ज़रूरतों का भी ध्यान रखता पर आशना को इसकी भनक भी नहीं लगने दी.

वो जानता था कि आशना उसे पसंद नहीं करती और उसने भी उसे मनाने की कोशिश नहीं की. ज़िंदगी से कट सा गया था वो उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ता था कोई उसके बारे मैं क्या सोचता है. दिन भर काम और शाम को घर मे जिम यही उसकी रुटीन रह गई थी.

लेकिन उसकी ज़िंदगी मे कोई था जिसे वो अपना हर हाल सुनाता, मेरा मतलब लिख के बताता. जी हां सही समझा आपने वीरेंदर को तन्हाईयो मे डाइयरी लिखने की आदत थी. वो घंटो बैठ कर लिखता रहता. उस डाइयरी मे वो क्या लिखता किसी को भी पता नहीं था. किसी को कुछ पता भी कैसे लगता इतने आलीशान बंग्लॉ मे उसके अलावा उनका पुराना नौकर बिहारी ही रहता था जो कि अनपढ़ था. पहले वो भी बाहर सर्वेंट क्वार्टेर मे रहता था पर अब वो ग्राउंड फ्लोर मे बने एक स्टोर मे सो जाता था ताकि वीरेंदर को रात को भी किसी चीज़ की ज़रूरत पड़े तो वो फॉरन उसे पूरा कर दे. अक्सर वो रात को उठकर वीरेंदर के कमरे तक जाता और अगर वीरेंदर डाइयरी लिखते लिखते सो गया होता तो उसे अच्छे से चादर से धक कर रूम की लाइट बंद कर देता. ऐसा अक्सर होता कि वीरेंदर जिम करने के बाद कुछ देर आराम करता, फोन पर बिज़्नेस की कुछ डील्स करता और फिर डिन्नर के बाद अपने रूम में डाइयरी लिखने बैठ जाता. लोगों की नज़र मे उसकी इतनी ही ज़िंदगी थी पर उसकी ज़िंदगी मे और भी काफ़ी तूफान थे जिनकी सर्द हवा से वीरेंदर ही वाकिफ़ था.

मिस आशना डॉक्टर. आपसे मिलना चाहते हैं……. इस आवाज़ ने आशना की तंद्रा को तोडा.
आशना: भैया को शिफ्ट कर दिया आप ने
वॉर्ड बॉय: हां, वो डॉक्टर. साहब आपसे मिलना चाहते हैं. 
आशना: तुम चलो मैं अभी आती हूँ. वॉर्डबॉय के जाने के बाद आशना ने अपनी जॅकेट की ज़िप बंद की, आज काफ़ी ठंड थी. सर्द हवाए शरीर को झिकज़ोर रही थी. आशना डॉक्टर. रूम की तरफ मूडी ही थी कि उसके कदम रुक गये. वो फिर से मूडी और कॅबिन के ग्लास से उसने वीरेंदर को देखा फिर तेज़ी से मुड़कर डॉक्टर. रूम की तरफ चल दी.

डॉक्टर के कॅबिन से बाहर निकलते ही आशना ने कुछ डिसिशन्स ले लिए थे, वैसे यह उसकी आदत समझ लीजिए या उसकी नेचर कि वो हर डिसिशन खुद ही लेती थी. बचपन मे माँ के गुज़र जाने के बाद और उसके बाद हॉस्टिल की ज़िंदगी ने उसे एक इनडिपेंडेंट लड़की बना दिया था जो कि अपने डिसिशन खुद ले सके और उनपे अमल कर सके. 

सबसे पहला डिसिशन तो उसने अपनी छुट्टी बढ़ाने का सोच लिया था, उसने सोच लिया था कि वो कल ही एरलाइन्स मे फोन करके अपनी लीव एक्सटेंड करवा देगी और अगर लीव एक्सटेंड ना हुई तो वो एयिर्हसटेस्स की नोकरी छोड़ने को तैयार भी थी. आख़िर कितना ग़लत समझा उसने उस इंसान को जिसने उसकी हर खुशी की कीमत चुकाई वो भी बिना उसे किसी भनक लगने के. यह तो डॉक्टर. मिसेज़. & मिस्टर. गुप्ता वीरेंदर की फॅमिली के फॅमिली डॉक्टर. थे तो उन्होने आशना को इस सब की जानकारी दे दी वरना वो तो ज़िंदगी भर इस सच से अंजान रहती. डॉक्टर दंपति से आशना को कुछ ऐसी बातों के बारे मे पता लगा जो शायद उसे कभी मालूम ना पड़ती और वो वीरेंदर को हमेशा ग़लत ही समझती. हॉस्टिल की टफ ज़िंदगी जीने के बाद भी आज आशना की आँखों मे ज़रा सी नमी देखी जा सकती थी. इससे पहले कि वो टूट जाती वो डॉक्टर के. कॅबिन से बाहर निकल आई और सीधा उस कॅबिन वॉर्ड की ओर चल पड़ी जहाँ वीरेंदर अपनी साँसे समेट रहा था. वो अभी भी सोया हुआ था. उसके आस पास की मशीनो की बीप आशना को वहाँ ज़्यादा देर तक ठहरने नहीं देती है और वो कॅबिन से बाहर आ जाती है. बाहर आते ही उसे बिहारी काका दिखे जो कि एक टिफिन में आशना के लिए खाना लेकर आए थे. बिहारी काका ने रोज़ की तरह टिफिन उसके पास रखा और जाने के लिए मुड़े ही थे कि आशना ने उन्हे पुकारा.

आशना: आप कॉन है जो पिछले तीन दिन से मेरे लिए खाना ला रहे हैं. 
बिहारी कुछ देर के लिए थीट्का और फिर आशना की तरफ मुड़ा और बोला, बिटिया मैं छोटे मालिक के घर का नौकर हूँ. जिस दिन आप आई तो डॉक्टर. बाबू ने बताया कि कोई लड़की वीरेंदर बाबू के लिए हॉस्पिटल आई है. मुझे लगा कि उनके क्लाइंट्स में से कोई होगी पर यहाँ आके जब आपका हाल देखा तो लगा कि आप उनकी कोई रिश्तेदार होंगी. आप उस दिन सारा दिन आइक्यू के बाहर खड़ी रहीं, डॉक्टर. ने बताया पर आप ने किसी से कोई बात नहीं की. मैने भी आपको बुलाने की कोशिश की पर आप किसी की आवाज़ सुन ही नहीं रही थी.

आशना: वो मैं परेशान थी पर अब वीरेंदर ठीक है, डॉक्टर. कहते हैं कि अब वो ठीक हैं. 
बिहारी: वीरेंदर बाबू तो पिछले 8 साल से ऐसे ही हैं. किसी से कुछ बोलते नहीं, ना कोई बात करते हैं. सिर्फ़ काम और फिर हवेली आके अपने रूम मे डाइयरी लिखने बैठ जाते हैं और कई बार तो बिना खाना ख़ाके ही सो जाते हैं. अच्छा बिटिया अब मैं चलता हूँ, घर पर कोई नहीं है. किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझे बुला लेना. 

आशना: जी काका.
बिहारी: बिटिया तुम्हारा वीरेंदर बाबू के साथ क्या रिश्ता है ? 
आशना: हड़बड़ाते हुए, जी वो काका मैं आपको फोन करके दूँगी जब कोई काम होगा. पता नहीं क्यूँ पर आशना उसको बताना नहीं चाहती थी कि वो वीरेंदर की छोटी बेहन है.

बिहारी काका जाने के लिए मुड़े ही थे कि आशना ने पूछा: काका, हवेली यहाँ से कितनी दूर है.

बिहारी: बेटा गाड़ी से कोई 15-20 मिनट. लगते हैं और बिटिया तुम हवेली का लॅंडलाइन नंबर. लेलो ताकि कोई भी काम पड़ने पर तुम मुझे बोल सको. 

आशना ने नो. नोट किया और बिहारी वहाँ से चला गया. आशना ने टिफिन की तरफ देखा और उसे उठा कर वेटिंग हॉल मे जाकर लंच करने लगी. आज कितने दिनों बाद उसने मन से खाया था. खाना ख़ाके वो वीरेंदर के कॅबिन मे गई तो पाया वीरेंदर अभी भी सोया हुआ था. आशना ने मोबाइल मे टाइम देखा, 3:30 बजने को आए थे. आशना डॉक्टर. रूम की तरफ चल पड़ी. नॉक करने पर डॉक्टर. मिसेज़. गुप्ता ने उसे अंदर आने के लिए कहा. 

आशना: वीरेंदर को अभी तक होश नहीं आया है डॉक्टर. ?
मिसेज़. गुप्ता: मुस्कुराते हुए, डॉन’ट वरी माइ डियर. ही ईज़ आब्सोल्यूट्ली ओके नाउ. दवाइयों का असर है 15 से 20 घंटो मे वीरेंदर पूरी तरह नॉर्मल हो जाएगा. हां पूरी तरह से नॉर्मल लाइफ जीने के लिए उसे कुछ 8-10 दिन लग जाएँगे. इतने दिन उसका काफ़ी ध्यान रखना होगा. आइ थिंक उसे इतने दिन हॉस्पिटल मे ही रख लेते हैं यहाँ नर्सस उसका ध्यान अच्छे से रख सकेंगी.

आशना: नहीं डॉक्टर. आप जितनी जल्दी हो सके भैया को डिसचार्ज कर दें. मुझे लगता है कि भैया घर पर जल्दी ठीक हो जाएँगे. 

मिसेज़. गुप्ता: ओके तो फिर हम कल सुबह ही वीरेंदर को डिसचार्ज कर देते हैं और उनके साथ एक नर्स अपायंट कर देते हैं जो घर पर उनका ख़याल रखेगी. 
आशना: डॉन’ट वरी डॉक्टर. “भैया का ख़याल मैं रखूँगी”. 

डॉक्टर.: आर यू श्योर? 

आशना: आब्सोल्यूट्ली 
डॉक्टर., आप भूल रहे हैं कि मैं एक एयिर्हसटेस्स हूँ आंड आइ कॅन मॅनेज दट. 
डॉक्टर. ओके देन फाइन, वी विल डिसचार्ज हिम टुमॉरो मॉर्निंग. 
आशना: थॅंक्स डॉक्टर. 
मिसेज़. गुप्ता: आशना, अगर तुम शाम को फ्री हो तो हम दोनो कहीं बाहर कॉफी पीने चलते हैं, तुमसे कुछ बातें भी डिसकस करनी हैं. 
आशना: नो प्राब्लम. डॉक्टर. 
मिसेज़ गुप्ता: ओके देन, ठीक 5:30 मुझे मेरे कॅबिन मे आकर मिलो. आशना बाहर आते हुए सोच रही थी कि मिसेज़. गुप्ता उन्हे क्या बताना चाह रही है. अभी उसे डॉक्टर. कि पिछली मीटिंग मैं खड़े सवालो के जवाब भी ढूँढने थे. यही सोचते सोचते वो वीरेंदर के कॅबिन से बाहर रखे सोफे पे बैठ गई और काफ़ी हल्का महसूस करने पर कुछ ही पलो मे उसकी आँख लग गई.
आशना सपनो की दुनिया से बाहर आई मिसेज़. गुप्ता (डॉक्टर. बीना) की आवाज़ से. 
डॉक्टर. बीना: आशना उठो शाम होने को है. आशना हड़बड़ा के उठ गई और थोड़ा सा जेंप गई.

डॉक्टर. बीना: अरे सोना था तो गेस्ट रूम यूज़ कर लेती, यहाँ सोफे पर बैठ कर थोड़े ही सोया जाता है. 
आशना: नहीं डॉक्टर. वो मैं भैया को देखने आई थी तो सोचा यहीं बैठ कर इंतज़ार कर लूँ, पता नहीं कैसे आँख लग गई. डॉक्टर.: इतने दिन से तुम सोई कहाँ हो. मेरी मानो आज रात को तुम हवेली चली जाओ. सुबह अच्छी तरह से फ्रेश होके वीरेंदर को अपने साथ ले जाना. 

आशना: सोचूँगी डॉक्टर. पहले आप कहीं चलने की बात कर रही थी, क्या 5:30 हो गये है आशना ने उड़ती हुई नज़र अपनी मोबाइल की स्क्रीन पे देखते हुए पूछा. ओह माइ गॉड, 6:00 बज गये. सॉरी डॉक्टर. वो मैं नींद में थी तो पता नहीं चला टाइम का. 

डॉक्टर: मुस्कुराते हुए, इट्स ओके आशना. मैं भी अभी फ्री हुई हूँ. रूम मे जाकर देखा तो तुम वहाँ नहीं मिली, इसीलिए तुम्हे ढूँढती यहाँ आ गई. चलो अब चलते हैं.

दोनो हॉस्पिटल से बाहर आके पार्किंग की तरफ चल देते हैं. डॉक्टर. ने गाड़ी का लॉक खोला और आशना बीना की बगल वाली सीट पेर बैठ गई. बीना ने एंजिन स्टार्ट किया और गियर डाल कर गाड़ी को हॉस्पिटल कॉंपाउंड से बाहर ले गई. लगभग 15 मिनट का रास्ता दोनो ने खामोशी से काटा. आशना के मन मे ढेर सारे सवाल थे. डॉक्टर. ने उसे जो बताया था अभी वो उससे नहीं उभर पाई थी कि डॉक्टर. ने उसे कॉफी शॉप पे चलने के लिए बोल के उसे और परेशान कर दिया था. पता नहीं डॉक्टर. मुझसे क्या डिसकस करना चाहती हैं. वहीं ड्राइवर सीट पर बैठी बीना सोच रही थी कि कैसे मैं आशना को सब कुछ समझाऊ. आख़िर है तो वो वीरेंदर की बेहन ही ना. इसी उधेरबुन मे रास्ता कट गया और आशना अपने ख़यालो की दुनिया से बाहर आई जब कार का एंजिन ऑफ हो गया. गाड़ी बंद होते ही दोनो ने एक दूसरे को देखा, दोनो ने एक दूसरे को हल्की सी स्माइल दी और गाड़ी से उतर गई. आशना डॉक्टर. के चेहरे पे परेशानी सॉफ पढ़ सकती थी वहीं डॉक्टर. भी आशना की आँखो मे उठे सवालो से अंजान नहीं थी. दोनो नेस्केफे कॉफी शॉप पर एंटर करती है. इस ठंडे माहौल मे भी अंदर के गरम वातावरण मे दोनो को सुकून मिला और बीना एक कॉर्नर टेबल की तरफ बढ़ गई. आशना भी उसके पीछे चल पड़ी. दोनो ने अपनी अपनी चेर्स खींची और बैठ गई.

कुछ मिनट्स तक दोनो एक दूसरे की आँखो मे देखती रही फिर जैसे ही आशना कुछ बोलना चाहती थी कि वेटर ने आकर उनका ऑर्डर नोट किया और चला गया.

आशना: डॉक्टर. आप यहाँ अक्सर आती रहती हैं. 
डॉक्टर.: हां मैं अक्सर अभय (डॉक्टर. अभय गुप्ता, बीना के हज़्बेंड) के साथ यहाँ आती हूँ. यहाँ कुछ देर बैठ कर हम हॉस्पिटल के वातावरण से दूर आने की कोशिश करते हैं और दिन भर के केसस की डिस्कशन करते हैं. 

आशना: यहाँ पर भी हॉस्पिटल की ही बातें करते हो आप लोग?. 
डॉक्टर.: रोज़ नहीं पर कुछ ज़रूरी केसस जो उलझे हुए हों जैसे कि वीरेंदर का. आशना के चेहरे का रंग एकदम उड़ गया. आशना: क्या मतलब डॉक्टर. भैया ठीक तो हो जाएँगे ना?

डॉक्टर.: डॉन’ट वरी , ही ईज़ आब्सलूट्ली नॉर्मल नाउ बट उसकी कंडीशन्स फिर से ऐसी हो सकती है, अगर …………

.आशना: डॉक्टर. की तरफ देखते हुए, अगर ?.

डॉक्टर.: बताती हूँ. यह कहकर डॉक्टर. कुछ देर के लिए खामोश हो जाती है और आशना के चेहरे को ध्यान से देखती है. उसके चेहरे से उड़ा हुआ रंग सॉफ बता रहा था कि आशना काफ़ी परेशान है वीरेंदर को लेकर. 

आशना: डॉक्टर. बताइए ना, मेरी जान निकलती जा रही है, आख़िर ऐसा क्या हुआ है भैया को.
डॉक्टर: आशना, यहाँ तक हम (बीना & अभय) जानते हैं कि तुमने वीरेंदर को 12 साल बाद देखा है. इससे पहले तुम कब और कहाँ मिले हमे नहीं पता. क्या तुमने कभी कहीं से यह सुना कि वीरेंदर की ज़िंदगी मे कोई लड़की आई थी? इतना सुनते ही आशना का चेहरा एकदम सफेद पड़ गया. इसका मतलब भैया की यह हालत किसी लड़की के पीछे है. पर आशना को इस सब के बारे मे कुछ भी पता नहीं था. होता भी कैसे, पिछले 12 सालो से तो वो एक बार भी वीरेंदर से नहीं मिली, हालाँकि वीरेंदर ने कई बार कोशिश की पर आशना ने हर बार पढ़ाई का बहाना बना दिया. अभी दो साल पहले ही जब आशना ने 12थ के एग्ज़ॅम्स क्लियर किए तो वीरेंदर ने काफ़ी ज़ोर दिया कि उसका अड्मिषिन मेडिकल कॉलेज मे कर दे पर आशना अपना रास्ता खुद चुनना चाहती थी. उसने फ्रांकफिंन इन्स्टिट्यूट से एयिर्हसटेस्स की ट्रैनिंग ली और पिछले साल ही उसे एक एरलाइन्स का ऑफर मिला तो उसने झट से जाय्न कर लिया.

आशना: डॉक्टर. मुझे इस बारे मे कुछ पता नहीं, क्या भैया की हालत का इससे कोई लिंक है. 

डॉक्टर: है भी और नहीं भी. 

आशना: मैं समझी नहीं डॉक्टर. 

बीना: मे समझाती हूँ आशना. देखो आशना बुरा मत मानना वो तुम्हारा भाई है पर और कोई नहीं है ऐसा जिससे मैं इस बात के बारे मे डिसकस कर सकूँ. अभय ने मुझे मना किया था तुमसे इस बारे मे बात करने से, इसीलिए मे तुम्हे यहाँ लाई हूँ. 

आशना: यू कॅन ट्रस्ट मी डॉक्टर, ( यह कहते हुए आशना का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था) 
बीना: देखो आशना, वीरेंदर एक हेल्ती इंसान है और इस अमर मे आकर इंसान के शरीर की कुछ ज़रूरतें होती हैं जो उस मे एक उमंग, एक नयी उर्जा का संचार करती हैं. यह सुनके आशना की नज़रें नीचे झुक गई. 

बीना: देखो आशना, इस वक़्त तुम्हारे भैया को शादी की शख्त ज़रूरत है. मुझे नहीं लगता कि वो अपने आप को रिलीव करते हैं तभी तो उन्हे यह प्राब्लम हुई. डॉक्टर. बीना ने यह लाइन एक ही सांस मे बोल दी. 

आशना जो कि आँखें झुका के यह सब सुन रही थी, डॉक्टर. कि यह बात सुन के एक दम से डॉक्टर. की तरफ़ देखती है, उसका मूह खुल जाता है और गाल लाल हो जाते हैं. 

बीना: इसीलिए मेने पूछा था कि अगर वीरेंदर की ज़िंदगी मे कोई लड़की है तो जल्द से जल्द उन दोनो की शादी करवा देनी चाहिए. ताकि वीरेंदर की शारीरिक ज़रूरतें पूरी हो और उसके बॉलो की थिकनेस कम हो, जिसकी वजह से यह प्रोबलम हुई है. इसके बाद बीना खामोश हो गई और एकटक आशना को देखने लगी. तभी वेटर उनका ऑर्डर ले आया. दोनो ने अपना अपना कॉफी का मग लिया और वेटर वहाँ से चल दिया. आशना ने चारो तरफ नज़र घुमाई, काफ़ी भीड़ हो गई थी वहाँ, पर उनका टेबल एक कॉर्नर मे होने के कारण उन्हे शायद ही कोई सुन सके.

आशना: ब्लड थिकनेस ? मैं समझी नहीं डॉक्टर. 

बीना: आशना, जैसे हम औरतो मे नये सेल्स बनते हैं और फिर म्सी मे रिलीस होते हैं जिससे बॉडी पार्ट्स सुचारू रूप से काम करते रहते हैं और अक्सर एग्ज़ाइट्मेंट मे हम अपने बॉडी पार्ट्स से खेलते है जब तक हमारी शारीरिक भूख ना मिट जाए, उसी तरह पुरुषो मे भी ऐसा होता है. जब उनके शरीर मे सेमेंस की क्वांटिटी ज़्यादा हो जाती है, वो या तो नाइटफॉल मे रिलीस हो जाते हैं, या सेल्फ़ रिलीफ (मास्टरबेशन) से या फिर किसी के साथ सेक्स के दौरान. और यहाँ तक मुझे लगता है तुम्हारे भैया ने आज तक सेल्फ़ रिलीफ का सहारा नहीं लिया और सेक्स का तो सवाल ही नहीं उठता. यही कारण है कि उनके शरीर मे ब्लड बहुत ज़्यादा थिक हो गया है और उन्हे यह प्राब्लम हुई. इसका सीधा असर हार्ट पर पड़ता है. 

यह सारी बातें सुनकर आशना काफ़ी शरम महसूस कर रही थी पर वो यह भी जानती थी कि वो यह सब एक डॉक्टर. से डिसकस कर रही है. 

आशना: बाकी सब तो ठीक है पर नाइटफॉल से तो कुछ फरक पड़ता ही होगा ब्लड थिकनेस पर. 

डॉक्टर.: ज़रूर पड़ता है, जब शरीर मे सेमेंस ज़्यादा हो जाते है तो उनका बाहर निकल जाना लाज़मी है पर वीरेंदर की तंदुरुस्ती के हिसाब से उतना सीमेन नाइटफॉल मे नहीं निकल पाता शायद तभी उसे यह प्राब्लम हुई. वैसे मैं कोई सेक्स स्पेशलिस्ट नहीं हूँ बट एक फिज़ीशियान होने के नाते इतना तो समझ ही सकती हूँ. 

आशना: तो डॉक्टर. इसका इलाज क्या है. 

बीना आशना की तरफ देखती रही और कुछ समय बाद बोली. सिर्फ़ दो ही इलाज मेरी समझ मे आते हैं या तो वीरेंदर शादी कर ले या फिर मास्टरबेशन. 

इस बार डॉक्टर. ने डाइरेक्ट मास्टरबेशन वर्ड यूज़ किया तो आशना की साँस ही अटक गई कॉफी की चुस्की लेते हुए. बीना ने जल्दी से उसे पानी ऑफर किया जिसे पी कर आशना नॉर्मल हुई. 

बीना: आइ आम सॉरी मुझे तुमसे यह डिसकस नहीं करना चाहिए था बट आइ डॉन’ट हॅव एनी अदर ऑप्षन. वीरेंदर कब तक मेडिसिन्स का सहारा लेगा. कुछ हफ़्तो की बात तो ठीक है पर तुम्हे जल्द ही कोई रास्ता ढूँढना पड़ेगा कि वो शादी के लिए राज़ी हो जाए. बातों- बातों मे दोनो की कोफ़ी ख़तम हो गई थी. बीना ने बिल पे किया और वो दोनो उठकर जाने लगी. 

बीना ने कार अनलॉक की और दोनों उस मे बैठ गई. बीना ने जैसे ही एंजिन स्टार्ट किया तो आशना ने चौंक कर उसकी तरफ देखा जिसे बीना ने नोटीस कर लिया. 

बीना: क्या हुआ आशना, तुम कुछ पूछना चाहती हो. 

आशना का चेहरा सुर्ख लाल हो गया उसने नज़रे नीचे करके ना मे इशारा किया. 

बीना: कम ऑन आशना, टेल मी व्हाट यू वॉंट टू नो. 

आशना: नज़रें नीचे झुकाए हुए, आप इतने यकीन से कैसे कह सकती है कि भैया मास्ट…… मेरा मतलब सेल्फ़ रिलीफ नहीं करते या उनका कभी किसी लड़की से कोई से……क्ष……अल रीलेशन नहीं रहा. 

अब शरमाने की बारी बीना की थी बट उसने अपने आप को संभालते हुए कहा आशना तुम भूल रही हो कि मैं एक डॉक्टर. हूँ. 

आशना उसका जवाब सुनकर चुप चाप उसे देखती रही. दोनो की नज़रें मिली पर बीना ज़्यादा देर तक उसकी नज़रो का सामना नहीं कर पाई और सिर को झुका के बोली: जब अभय ने वीरेंदर की ब्लड रिपोर्ट मुझे दिखाई तो मुझे कुछ समझ नहीं आया कि इतनी थिकनेस ब्लू मे कैसे हो सकती है. फिर अभय ने मुझे इसके रीज़न्स बताए. मैं सुनकेर हैरान थी कि एक 33 साल का सेहतमंद मर्द जिसने कभी मास्टरबेशन ना किया हो और इतना खूबसूरत साथ मे इतना बड़ा बिज़्नेसमॅन जिसका कभी किसी लड़की से कोई रीलेशन ना रहा हो नामुमकिन सा है. वीरेंदर की ब्लड रिपोर्ट पढ़ने के बाद मुझे यकीन तो हो गया पर फिर भी मेरे दिमाग़ मे काफ़ी सवाल थे. इतना कहकर बीना चुप हो गई. 

आशना ने सवालिया नज़रो से उसे देखा, जैसे वो और जानना चाहती हो. 

बीना ने उसकी तरफ देखा फिर सिर झुका के बोली, आशना जो मैं तुम्हे बताने जा रही हूँ वो प्लीज़ किसी को मत बताना.

आशना: यू कॅन ट्रस्ट मी डॉक्टर.

बीना: कल रात को जब वीरेंदर की हालत मे कुछ सुधार आया तो रात को मैं आइक्यू मे चुप चाप चली गई. मैं काफ़ी डरी हुई थी पर अपने दिमाग़ मे उठे सवालो का जवाब पाने के लिए मेने यह रिस्क उठाया. मेने उसके ट्राउज़र को हटा कर देखा तो मुझे उसकी पेनिस नज़र आई. मेने ध्यान से उसे देखा तो मुझे यकीन हुआ कि अभय वाज़ राइट. वीरेंदर ने कभी अपने पेनिस का यूज़ ही नहीं किया. ही ईज़ प्योर वर्जिन मॅन. इतना कहकर बीना ने सिर उठा कर आशना को देखा, जिसकी आँखूं से आँसू मोती बनकर बह रहे थे. बीना का दिल एक दम से धक कर उठा. बीना ने उसे अपने पास खेच कर उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा”आइ आम सॉरी आशना”और वो दोनों एक दूसरे के गले लग कर रो पड़ीं. 

आशना ने अपने आप को संभाला और डॉक्टर. से बोली आप बहुत गंदी हो और हंस दी. 

बीना ने भी मुस्कुरा कर उसे जवाब दिया”वैसे वो जो भी हो पर तुम्हारे भाई से बहुत खुश होगी”. 

आशना ने सवालिया निगाहो से बीना को देखा.

बीना एक शरारती मुस्कान के साथ बोलती है, युवर ब्रो ईज़ वेल एंडोड. 

इस बार शरमाने की बारी आशना की थी. इतनी बातें होने के बाद अब वो दोनो काफ़ी खुल गई थी. 

बीना: रियली मे मेने अपनी ज़िंदगी मे ऐसा इंसान नहीं देखा जो 33 साल तक भी प्योर् वर्जिन हो. 

आशना: पर आपको कैसे पता चल कि भैया वर्जि…..

.बीना: रहने दो तुमसे नहीं बोला जाएगा, मैं ही बोल देती हूँ. तुम्हारे भैयआ इसलिए वर्जिन हैं क्यूंकी अभी उनकी सील इनटॅक्ट है. 

आशना: सील?????. 

बीना: जैसे जब लड़की विर्जिन होती है तो उसकी निशानी है उसकी वेजाइना की सील उसी तरह एक मर्द की पेनिस पर भी एक सील होती है जो कि उसकी चमड़ी को पूरा पीछे नहीं होने देती. 

आशना: धत्त, आप कितनी बेशरम हो. 

बीना: शादी कर लो तुम भी हो जाओगी और दोनो हंस दी.

बीना: मुझे लगता है वीरेंदर का कोई ना कोई राज़ तो होगा नहीं तो अभी तक वो शादी कर चुका होता. 

राज़ का सुनके ही आशना को डाइयरी का ख़याल आया जो बिहारी काका उसे बता रहे थे. 

आशना: चौंकते हुए. आप मुझे हवेली छोड़ दीजिए मैं कुछ पता करने की कोशिश करती हूँ. 

एक बार के लिए तो बीना भी चौंकी पर फिर उसने गियर डाला और 10 मिनट्स मे ही आशना को गेट के बाहर ड्रॉप कर दिया. 

बीना: कुछ पता लगे तो फोन करना, यह कहकर उसने अपना कार्ड आशना की ओर बढ़ाया. 

आशना ने कार्ड अपने हॅंडबॅग मे रखा और डॉक्टर. को बाइ बोला

.डॉक्टर.: बाइ टेक केर आंड प्लीज़ टेक रेस्ट टू. यू नीड इट वेरी बॅड. यह कहकर बीना ने गाड़ी आगे बढ़ा दी.

शाम के 7:30 बज रहे थे , पूरा बंगलो रोशनी से जगमगा रहा था. बाहर से देखने पर कोई नहीं कह सकता था कि इस बंगलो के अंदर रहने वालो पर क्या गुज़री होगी. आस पास का इलाक़ा भी काफ़ी सॉफ सुथरा और शांत था. चारो ओर काफ़ी बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स थी. आशना ने इधर उधर देखा तो उसे गेट के पिल्लर पर मरबेल का साइग्नबोर्ड दिखाई दिया. जिसपर सॉफ लिका था “शर्मा निवास” मार्बल के साइन बोर्ड के लेफ्ट साइड मे लगी बेल पे उसने उंगली दबाई और कुछ सेकेंड्स रुकने पर उसे बंगलो का बड़ा सा दरवाज़ा खुलता हुआ दिखाई दिया. बिहारी काका सिर पर टोपी पहने और एक मोटा सा कंबल ओढ़े गेट की तरफ आए. गेट से बंगलो के दरवाज़े तक का सेफर तय करने मे उन्हे एक मिनट से भी ज़्यादा का समय लगा. काफ़ी ज़मीन खरीद रखी थी वीरेंदर के पिता जी ने. इतनी बड़ी ज़मीन के बीचो बीच एक शानदार बंगलो उनकी शानो शोकत को चीख चीख कर बयान कर रह था.

आशना ने अपने ज़िंदगी मे इतना बड़ा बंगलो कभी नहीं देखा था. उसका अपने घर इस बंगलो के आगे तो कुछ भी नहीं था. जिस स्कूल और हॉस्टिल मे वो पढ़ी वो भी इस बंगलो के आगे छोटा था. और फिर स्कूल के बाद वो किराए का फ्लॅट तो उसके घर से भी छोटा था. तभी बिहारी काका ने थोड़ी डोर से आवाज़ लगाई. कॉन है? 

आशना ने हड़बड़ाते हुए जवाब दिया “जी काका मे हूँ हम हॉस्पिटल मे मिले थे”. बिहारी ने एक नज़र उसपर डाली और फिर दौड़कर गेट खोला.

बिहारी काका: अरे बिटिया, कुछ चाहिए था तो मुझे बुला लेती में तो बस निकलने ही वाला था आपका खाना लेकर.

आशना: नहीं काका, आज मे ख़ान यहीं खाउन्गी और कुछ दिन यहीं रुकूंगी आशना ने अंदर आते हुए कहा.

बिहारी ने गेट बंद किया और पीछे मुड़कर देखा तो आशना काफ़ी आगे निकल गई थी. आशना ने अपनी नज़र चारो तरफ घुमाई. सामने पेव्मेंट के लेफ्ट और राइट साइड दोनों तरफ रंग बिरंगे गार्डेन्स थे. चारदीवारी के चारो तरफ काफ़ी बड़े बड़े अशोका ट्रीस लगे हुए थे. चार दीवारी भी इतनी बड़ी कि बाहर से कुछ मकान ही दिख रहे थे. बंगलो के राइट साइड पर एक बड़ा सा स्विम्मिंग पूल और उसके बॅकसाइड पर बड़ा सा गॅरेज जहाँ 4 चमचमाती गाड़ियाँ खड़ी थी. आशना बाहर से पूरे बंगलो का मुयायना करना चाहती थी लेकिन बाहर की सर्द हवाओं ने उसे ठिठुर कर रख दिया था. तभी बिहारी काका उसके पास पहुँचे और बोले बिटिया बाहर बहुत ठंड है, आप अंदर चलो मैं आग का इंतज़ाम करता हूँ. आशना ने बिना कोई जवाब दिए बंगलो की तरफ अपने कदम मोड़ लिए. पेव्मेंट पर काफ़ी सुंदर मार्बल की परत चढ़ि थी जिसपे चल कर आशना मेन दरवाज़े तक पहुँची. दरवाज़े के अंदर घुसते ही उसे उस बंगलो की भव्यता का पता चला. उसकी आँखें चुन्धिया गई ऐसी नक्काशी देख कर मेन हाल की दीवारो पर. फर्श पर काफ़ी मोटा लेकिन सॉफ और करीने से सज़ा हुआ कालीन और हाल के चारो तरफ फैला फर्निचर देख कर आशना को ऐसा लगा जैसे वो किसी रियासत के महल मे हो. हाल के चारो तरफ12 कमरे, किचन, वॉशरूम्स सब कुछ देख कर वो एक दम से दंग रह गई. हाल की एक दीवार पर इतनी बड़ी एलसीडी को देख कर ऐसा लग रहा था कि वो किसी मिनी थियेटर में आ गई हो. बिल्कुल बीचो बीच सोफो का एक बड़ा से सर्क्युलर अरेंज्मेंट. आशना की तंद्रा टूटी जब बिहारी काका ने कहा बिटिया यहाँ बैठो. आशना ने उस तरफ देखा तो वहाँ हाल के एक कोने मे बिहारी काका ने वहाँ बनी एक अंगीठी मे आग जला दी थी. आशना वही अंगीठी के सामने एक सोफा चेर पर बैठ गई अपनी जॅकेट उतार कर एक साइड पर रखी और अपने ठंडे हो रहे शरीर को गरम करने की कोशिश करने लगी. बैठते ही उसकी नज़र हॉल की छत पर पड़ी जहाँ एक बड़ा सा झूमर झूल रहा था जिसमे लगे छोटे छोटे मोती रोशनी से चमक कर रंग बिरंगी रोशनी चारो और फैला रहे थे.

बिहारी काका वहाँ से चले गये और आशना के लिए एक सॉफ्ट सा शॉल लेकर आ गये. 

बिहारी काका: जब भूख लगे या किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझे बुला लेना, मे उस कमरे मे हूँ. यह कहकेर बिहारी काका ने किचन के साथ बने एक कमरे की तरफ इशारा किया.

आशना ने धीरे से अपनी गर्दन हां मे हिलाई और शॉल अच्छे से ओढ़केर बैठ गई. काफ़ी देर आग के पास बैठने के बाद और दिमाग़ मे काफ़ी सवाल लेकर वो उठी और वॉश रूम में चली गई. इतना बड़ा वॉशरूम उसने आज तक नहीं देखा था. उनके पुराने घर की मेन लॉबी से भी बड़ा बाथरूम देख के वो अपने आप को राजकुमारी समझने लगी. बाथरूम की टाइल्स और वहाँ लगी हर चीज़ को ध्यान से देखने लगी. बाथरूम के लेफ्ट साइड मे जक्कुज़ी को देख कर वो अपने आप को नहाने से रोक नही पाही और जक्कुज़ी का मिक्स्चर ऑन कर दिया. आशना ने वहाँ पर रखे टवल्ज़ मे से एक टवल उठाया और उसे जक्कुज़ी के साथ लगे एक हॅंडल पर टाँग दिया. जक्कुज़ी भर जाने के बाद उसने उस मे लिक्विड सोप डाला और पानी को हिलाकर उस मे काफ़ी झाग बनाया. फिर एक बड़े से शीशे के आगे जाकर उसने अपनी जॅकेट उतारी और फिर अपनी टी-शर्ट उतारने लगी. आईने मे अपनी परछाई देख कर वो शरमा सी गई और फिर पलट कर उसने अपनी टी-शर्ट और फिर अपनी ब्रा और पॅंट उतार दी. आशना ने टी-शर्ट के अंदर एक वाइट कलर का फ्रंट ओपन वॉर्मर पहना था, आशना ने धीरे धीरे से उसके सारे बटन अलग किए. उसे काफ़ी शरम आ रही थी, वो मूड कर शीशे मे अपने आप को देखने लगी और शरमा कर एकदम पलट गई.

फिर उसे ख़याल आया कि वो एक्सट्रा पैंटी तो लाई नहीं अपने साथ इसलिए उसने अपनी पैंटी और फिर बाद मे वाइट अंडरशर्ट भी निकाल दी.

आशना का दिल ज़ोरो से धड़क रहा था, वो अपने आप से ही शरमा रही थी. उसके गाल काफ़ी लाल हो गये थे और उसकी साँसे काफ़ी तेज़ चल रही थी. उसने फिर से पलट कर अपने आप को देखा तो एक पल के लिए वो चौक गई. इस नज़र से शायद ही उसने अपने आप को देखा हो. हाइट तो काफ़ी अच्छी थी आशना की, अब तो शरीर भी अपना आकार ले चुका था. खूब गोरी थी आशना, शरीर पर कोई दाग नहीं. ब्रेस्ट 36 सी इतने बड़े कि दो हाथो मे ना समा पाए और एकदम कड़क. आख़िर हो भी क्यूँ ना, उन्हे आज तक कोई दबा जो नही पाया था. आशना ने पलट कर अपनी आस 36 की तरफ देखा तो धक से उसका दिल धड़क कर रह गया. उसकी विशाल आस, आज पहली बार उसने इतने गौर से उसे देखा. आशना की कुलीग्स हमेशा कहती कि आशना तो हर डिपार्टमेंट (ब्रेस्ट & आस) मे हम से आगे (बड़ी) है तो फिर यह कोई बाय्फ्रेंड क्यूँ नहीं बनाती, आशना हर बार उन्हे टालने के लिए कहती ” यह तो मेने किसी और के नाम कर दिए हैं”. उसकी फ्रेंड्स काफ़ी पूछती पर कोई हो तो आशना बताती पर उसकी सारी फ्रेंड्स यही समझती कि उसका कोई सीक्रेट बाय्फ्रेंड है पर आशना बताती नहीं . आशना भी उनकी ग़लतफहमी को दूर करने की कोशिश नहीं करती क्यूंकी वो जानती थी कि एक बार वो हां कर दे तो उसके मेल कुलीग्स और यहाँ तक कि उसके एरलाइन्स के पाइलट्स भी लाइन मे लग जाएँगे. वो इन सब से दूर ही रहना चाहती थी. यह सोचते सोचते आशना जकुज़ी मे उतर जाती है और इतने दिनों बाद गरम पानी का एहसास उसे अंदर तक रोमांचित कर देता है.

काफ़ी दिनों के बाद अच्छे से नहाने के बाद आशना काफ़ी अच्छा महसूस कर रही थी. टवल से अपने आप को अच्छी तरह से पोछने के बाद उसने वोही अपने कप्पड़े पहने और बाहर आई. वो फिर से जाकर आग के पास बैठ गई. कोई पाँच मिनट के बाद बिहारी काका अपने कमरे से बाहर आए. 

बिहारी काका: नहा लिया बिटिया? 

आशना एक दम चौंक गई. 

बिहारी: वो मे कुछ देर पहले बाहर आया था पर आप यहाँ नहीं मिली. बाथरूम की लाइट जली हुई देखी तो लगा शायद नहा रही होंगी. 

आशना: जी काका. 

बिहारी: अच्छा बिटिया अब खाना खा लो, 9 बज गये हैं. आशना ने चौंक कर दीवार घड़ी की तरफ देखा जो कि 9:10 का टाइम बता रही थी. आशना (मन मे): बाप रे पिछले एक घंटे से नहा रही थी मे.

आशना: जी काका खाना लगा दो और आप भी खा लो. 

बिहारी: आइए बिटिया, आप डाइनिंग टेबल पर बैठें मे खाना परोस देता हूँ. यह कहकर बिहारी आगे आगे चलने लगा और आशना उसके पीछे डाइनिंग रूम की तरफ चल पड़ी. डाइनिंग रूम क्या यह तो एक बहुत बड़ा हाल था कमरे के बीचो बीच एक बड़ा सा टेबल और उसके इर्द-गिर्द 12-15 आरामदायक कुर्सियाँ. हाल के एक साइड पर एक बड़ी सी मेज और उसके इर्द-गिर्द 8 सोफा चेर्स. आशना ने चारो तरफ नज़रें घुमा के देखा. सामने दीवार पर एक बहुत बड़ी एलसीडी लगी थी. 

आशना: काका क्या वीरेंदर भाई……., मेरा मतलब कि क्या वीरेंदर भी खाना यहीं खाते हैं. (आशना ने बड़ी सफाई से काका से वीरेंदर का अपना रिश्ता छुपा लिया था). 

बिहारी काका: नहीं बेटी यहाँ तो आए हुए भी उन्हे 8 साल हो गये. जब से उनके परिवार के साथ यह हादसा हुआ है वो यहाँ आए ही नहीं. अक्सर वो अपना खाना उपर अपने रूम मे खाते हैं. 

आशना: उपर????? 

बिहारी: हां बिटिया यह जो कमरे से बाहर की तरफ सीडीयाँ हैं ना यह उपर के फ्लोर को जाती हैं. वीरेंदर बाबू का कमरा वहीं है. आशना एकदम पलटी और कमरे से बाहर आकर पहली सीडी पर खड़ी हो गई. 

आशना: काका तुम मेरा खाना वीरेंदर के रूम मे ही लेकर आ जाओ. 

बिहारी: नहीं बिटिया वीरेंदर बाबू को अगर पता लगा तो उन्हे बहुत दुख होगा. बोलेंगे तो वो कुछ नहीं पर मे उनका दिल दुखाना नहीं चाहता. 

आशना: आप चिंता ना करिए काका, मे संभाल लूँगी उन्हें. 

बिहारी अजीब सी कशमकश मे पड़ गया और फिर बोला, आप ठहरिए मे उनके रूम की चाबी लेकर आता हूँ. बिहारी यह कहकर अपने रूम मे चला गया और एक बड़ा सा चाबियो का गुच्छा लेकर सीडीयाँ उपर चढ़ने लगा. आशना भी उनके पीछे पीछे सीडीयाँ चढ़ने लगी, उपर पहुँच कर बिहारी काका पाँचवें रूम के दरवाज़े के पास जाकर रुक गये और एक चाभी से ताला खोल दिया. दरवाज़ा खोलने के बाद उन्होने मूड कर आशना की तरफ़ देखा जो कि दूसरी तरफ देख रही थी. 

तभी आशना ने पूछा: काका नीचे की तरह यहाँ भी हर कमरे पर ताला क्यूँ है? 

बिहारी: वीरेंदर बाबू का आदेश है. सारे रूम हफ्ते मे एक ही बार खुलते है वो भी सिर्फ़ सफाई के लिए. 

आशना: काका क्या सारा घर आप अकेले सॉफ करते हो. 

बिहारी: नहीं बिटिया मे तो वीरेंदर बाबू जी का रसोइया हूँ और कभी कभी उनका कमरा साफ कर लेता हूँ क्यूंकी उनके कमरे मे जाने की किसी और को इजाज़त नहीं. बाकी का घर सॉफ करने के लिए 3नौकर हैं जो पहले यहीं पीछे सर्वेंट क्वॉर्टर्स मे रहते थे पर अब वीरेंदर बाबू के कहने पर यहीं पास मे ही रहते हैं. उनके रहने का सारा खर्चा वीरेंदर बाबू ही देखते हैं. वो हफ्ते मे एक बार आकर बाहर स्विम्मिंग पूल, लॉन और बाकी कमरो की सफाई कर देते हैं. 

आशना:हूंम्म्मम. अच्छा काका बहुत भूख लगी है, आप जाकर खाना ले आओ. 

बिहारी: जी बिटिया पर वीरेंदर बाबू जी के आने के बाद आपको ही जवाब देना पड़ेगा कि आप उनके रूम मे क्यूँ ठहरी हैं. 

आशना: आप चिंता ना करें. मे उन्हे कल ही यहाँ ले आउन्गी और हम मिलकर यहाँ उनका ध्यान रखेंगे. 

बिहारी काका ने यह जब सुना कि वीरेंदर बाबू कल आ रहे हैं तो खुशी से उनकी आँखें चमक उठी और आशना से पूछ के क्या तुम भी यही रुकोगी उनका ख़याल रखने के लिए. आशना ने हां मे सिर हिलाया. 

काका: जीती रहो बेटी, मुझे नहीं पता कि तुम वीरेंदर बाबू को कैसे जानती हो पर यह विश्वास हो गया कि अब वो पूरी तरह से ठीक हो जाएँगे. यह कह कर बिहारी नीचे खाना लेने चला गया. आशना ने पूरा कमरा बड़े गौर से देखा. हर एक चीज़ करीने से सजी हुई. आशना ने एलसीडी ऑन की उसपर स्तर स्पोर्ट्स चॅनेल चल रह था. आशना वहीं बेड पर बैठ गई और चारो तरफ देखने लगी. उसकी नज़र बेड पोस्ट पर पड़ी डाइयरी पर पड़ी. वो जैसे ही उसे उठाने के लिए बेड से उठने लगी तभी बिहारी काका खाने की ट्रे लिए कमरे मे आए. आशना वहीं बैठी रही. काका ने खाना परोसा. 

आशना: काका आप भी खा लीजिए कुछ देर बाद बर्तन लेजाइयेगा. बिहारी नीचे चला गया. 

आशना ने खाना खाया. करीब आधे घंटे के बाद बिहारी ने रूम नॉक किया. 

आशना: आ जाइए काका. बिहारी अंदर आया और बर्तन उठाने लगा. 
आशना: क्या वीरेंदर जी स्पोर्ट्स चॅनेल पसंद करते हैं. 

बिहारी: बिटिया भैया को कार रेसिंग और WWF बहुत पसंद थी पर उस हादसे के बाद तो वो सब कुछ भूल ही गये. आज 8 साल बाद आप ने यह टीवी ऑन किया है. 
बिहारी: अच्छा बिटिया अब आप आराम करो मे बर्तन साफ करने के बाद आवने कमरे मे सो जाउन्गा. किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझे बुला लेना. 

आशना: जी काका. 

बिहारी काका: पर बिटिया आप अपने साथ कोई बॅग तो लाई नहीं तो क्या आप यही पहन के सो जाओगी. 

आशना: जी काका आज मॅनेज कर लूँगी, कल कुछ शॉपिंग कर लूँगी. 

बिहारी: बिटिया वैसे मधु (वीरेंदर की छोटी बेहन जो आक्सिडेंट मे मारी गई थी) मेम साहब की अलमारी कपड़ो से भरी पड़ी है पर अगर मेने उस मे से आपको कुछ दे दिया तो साब बुरा लग सकता है.

आशना: कोई बात नहीं काका, आज की रात मे मेनेज कर लूँगी. काका ने अलमारी से आशना को एक क्विल्ट निकाल के दिया और वो नीचे चले गये. आशना ने अंदर से दरवाज़ा बंद किया और अपनी जॅकेट उतार दी. फिर उसने डाइयरी उठाई और बेड पर बैठ गई. उसने पिल्लोस को बेड पोस्ट पर खड़ा करके उससे टेक लगा कर अपने उपर क्विल्ट ले लिया. नरम मुलायम क्विल्ट के गरम एहसास से वो एक दम रोमांचित हो गई. उसने डाइयरी उठाकर कवर खोला, पहले पेज पर वीरेंदर की सारी डीटेल्स थी जैसे नाम, अड्रेस्स, कॉंटॅक्ट नंबर. एट्सेटरा एट्सेटरा. वो अगला पेज पलटने वाली थी कि उसकी नज़र पेज के लास्ट मे पड़ी. वहाँ लिखा था “विथ लव फ्रॉम रूपाली टू वीरू.” यह लाइन पढ़ते ही आशना के दिल की धड़कने तेज़ हो गई. यह रूपाली कॉन हो सकती है उसके मन मे सवाल आया. खैर अगला पन्ना पलटने से पहले आशना ने क्विल्ट के अंदर ही अपनी पॅंट और टी-शर्ट उतार कर एक साइड मे रख दी क्यूंकी वो काफ़ी अनकंफर्टबल फील कर रही थी इतने टाइट कपड़ो मे. अपने आप को पूरी तरह क्विल्ट से कवर करने के बाद उसने डाइयरी पढ़ना शुरू किया.

१स्ट पेज: 20-04 2000.(यह तारीख उस आक्सिडेंट के 3 दिन पहले की है)

वीरू, आज मे बहुत खुश हूँ. मुझे लगा कि लंडन जाने के बाद तुम मुझे भूल जाओगे पर 12-12 1999 को जब तुमने मुझे शादी के लिए प्रपोज़ किया तो मे एक दम हैरान रह गई. मे उस वक्त तुमसे बहुत बातें करना चाहती थी लेकिन मुझे जान पड़ा. मेरा लास्ट सेमेस्टर था और मे मिस नहीं करना चाहती थी. तुम भी तो यही चाहते थे कि मे इंजिनियर बनू. इतने महीनो से ना मे तुमसे कॉंटॅक्ट कर सकी और ना तुमने कोई फोन किया. मे जानती हूँ कि तुम मुझसे नाराज़ होंगे. लेकिन अब मे आ गई हूँ, सारी नाराज़गी दूर करने. मेने अपनी एक मंज़िल पा ली है और अब मे वापिस आ गई हूँ तुम्हे हासिल करने.

यह डाइयरी मेरी तरफ से एक छोटी सी भेंट है. तुम्हारी जो भी नाराज़गी है तुम मुझे इसपर लिख कर बता सकते हो क्यूंकी मुझे पता है तुम मुझे कुछ बोलॉगे नहीं और किसी के सामने बात करने से तो तुम रहे. लगता है हमारी शादी की बात भी मुझे ही अपने घरवालो से करनी पड़ेगी. मे 3 दिन बाद तुम्हारे घर मधु से मिलने आउन्गि, तुम जो लिखना चाहते हो इस डाइयरी मे लिख कर मुझे चोरी से पकड़ देना.
वैसे एक बात बोलूं “आइ लव यू टू वीरू”.
आशना एक एक लफ्ज़ को ध्यान से पढ़ रही थी. उसने अगला पन्ना पलटा.

20-04-2000:

वोहूऊऊऊ, आइ लव यू रूपाली. तुम नहीं जानती आज मे कितना खुश हूँ. तुमको लंडन मे हमेशा मिस किया और घर आने पर पता लगा कि तुम बॅंगलॉर मे इंजीनियरिंग. करने चली गई हो. मे जनता था कि तुम मुझसे प्यार करती हो पर कहने से डरती हो, इसीलिए मेने हिम्मत करके तुम्हे उस दिन प्रपोज़ कर दिया. उस दिन अचानक तुम मिली तो मे रह नहीं पाया, मेने अपने प्यार का इज़हार कर दिया पर तुम बिना कुछ बोले ही चली गई. मैं काफ़ी डर गया था कि शायद तुम मुझसे प्यार नहीं करती. अगर उस दिन तुम्हारे पापा साथ ना होते तो मे भी तुम्हारे साथ बॅंगलॉर आ जाता. खैर कोई बात नहीं, मे तुमसे कभी नाराज़ नहीं था और ना ही कभी होऊँगा. 

कल मोम-डॅड और मधु, चाचू के घर जा रहे हैं, उनके आते ही मे उनसे बात कर लूँगा हमारी शादी की. तुम मेरी हो रूपाली. मे तुम्हे हर हाल मे पा कर रहूँगा. मैने अभी तक अपने आप को संभाल कर रखा है और आशा करता हूँ कि तुम भी मेरे जज़्बातों की कदर करोगी और मुझे रुसवा नहीं करोगी.बस इतना ही लिखूंगा इस डाइयरी मे. अपने दिल का हाल मे तुम्हे मिलके तुम्हारी आँखो मे देख कर कहूँगा . 

और हां हो सके तो यह डाइयरी मुझे जल्द वापिस कर देना ताकि मे उन पलो के बारे मे लिख सकूँ जो अब मुझे तुम्हारे बिन गुज़ारने हैं जब तक तुम मेरी नहीं हो जाती.

आशना ने बेड के साथ रखे स्टूल से पानी का ग्लास उठाया और उसे पीने लगी. पानी इतना ठंडा था कि वो सीप करके उसे पीना पड़ा. आशना का शरीर क्विल्ट की वजह से काफ़ी गरम हो गया था. सीप बाइ सीप पानी पीने से उसे काफ़ी सुकून मिल रहा था आशना ने मोबाइल मे टाइम देखा अभी सिर्फ़ 11:00 ही बजे थे. उसने सारी डाइयरी आज रात ही पढ़ने की ठान ली और फिर से बेड पर क्विल्ट के अंदर घुस कर अगला पन्ना पलटा.

27-05 2000. 

आज काफ़ी दिनो के बाद डाइयरी लिखने बैठा हूँ. इन बीते दिनो मे मेने बहुत कुछ खोया है. मेरे माँ-बाप, मेरी छोटी लाडली बेहन, मेरे चाचू सब मुझे अकेला छोड़ कर हमेशा के लिए इस दुनिया से चले गये हैं. 23-04-2000 का दिन मे कभी नहीं भूल सकता. उस दिन मे काफ़ी खुश था. अपने फॅमिली मेंबर्ज़ का वेट कर रहा था और उन्हें खुशख़बरी देना चाहता था कि मेने उनकी बहू ढूँढ ली है पर शायद भगवान को यह खुशी मंज़ूर नहीं थी. मेरा पूरा परिवार इस हादसे का शिकार हो गया था. वो दिन मुझसे सब कुछ छीन कर गुज़र गया था. मे इस कदर सदमे मे चला गया था कि मेरी चचेरी बेहन आशना का भी मुझे कोई ख़याल ना रहा. मे उसे ज़रा भी संभाल नहीं पाया. 28-04-2010 को वो भी मुझसे नाराज़ होकेर चली गई. मे उसे रोकना चाहता था पर मुझमे इतनी हिम्मत नहीं थी कि मे उसका मासूम चेहरा देख सकता. उस बेचारी ने इतनी छोटी उम्र मे कुछ ही सालो मे अपने माँ- बाप को खो दिया था. मे उसकी हर ज़रूरत तो पूरी कर सकता हूँ पर उसके माँ- बाप की कमी को पूरा नहीं कर सकता. इसीलिए मेने उसे रोकने की कोशिश भी नहीं की. शायद अगर उसे मैं रोक लेता तो उसे मुझे और मुझे उसे संभालना बहुत मुश्किल होता. इतने साल घर से बाहर रहने के कारण मुझ मे कुछ सोशियल कमियाँ थी जिस कारण मे उसे खुश ना रख पाता, इसीलिए उसका दूर जाना ही उसके लिए ठीक था. 

यह पढ़ते पढ़ते आशना की आँखो से आँसू टपक कर डाइयरी पर गिर पड़े. जिस इंसान को वो मतलबी समझती थी वो उसके लिए इतना सोचता है उसे इस चीज़ का कभी एहसास ही नहीं हुआ. जिस गुनाह के लिए वो वीरेंदर को सज़ा दे रही थी वो गुनाह वीरेंदर ने कभी किया ही नहीं और अगर किया भी तो उसकी भलाई के लिए. आशना का मन ज़ोर ज़ोर से रोने को कर रहा था. उसने किसी तरह अपने आप को संभाला और डाइयरी पढ़ने लगी. हर एक पन्ना पढ़ कर वीरेंदर की इज़्ज़त आशना की नज़रो मे बढ़ने लगी. उसे पता चला कि कैसे वीरेंदर ने उसे कई बार मिलने की कोशिश की पर आशना ने हमेशा उसे इग्नोर किया. यहाँ तक कि एक बार वीरेंदर खुद उससे मिलने उसके बोरडिंग स्कूल मे आया पर उसने अपनी सहेली को यह कहके वीरेंदर को वापिस भेज दिया कि आशना एजुकेशनल टूर पर गई है. आशना इन सब के लिए अपने आप को कोसे जा रही थी.कुछ पन्ने पढ़ने के बाद आशना को पता लगा कि रूपाली के बार बार समझाने पर वीरेंदर वो हादसा नहीं भूल पा रहा था. रूपाली ने फिर उससे शादी की बात की तो वीरेंदर ने सॉफ मना कर दिया कि उसे एक साल तक वेट करना पड़ेगा. मगर रूपाली ने उसे 4 महीनो का वक्त दिया और चली गई. वीरेंदर ने काफ़ी बार उससे मिलने की कोशिश की पर वो हर बार शादी की ज़िद करती और इस तरह धीरे- धीरे दोनो मे डिफरेन्सस बढ़ते गये. वीरेंदर को यकीन था कि रूपाली धीरे धीरे मान जाएगी. मगर उसका यकीन उस दिन टूटा जिस दिन रूपाली उसके घर उसे अपनी शादी का कार्ड देने आई. उन लम्हो को वीरेंदर ने कैसे बयान किया उसे पूरा पढ़ना आशना के बस का नहीं था.. वीरेंदर उसे बेन्तेहा मोहब्बत करता था पर रूपाली उसकी मोहब्बत ठुकरा कर किसी और की होने वाली थी. वीरेंदर ने दिल पर पत्थर रखकर उससे शादी करने को भी कहा पर रूपाली ने उसे यह कहकर ठुकरा दिया कि वो एक नॉर्मल ज़िंदगी शायद ही दोबारा जी पाए. वीरेंदर ने उसे लाख समझाने की कोशिश की कि वो धीरे धीरे नॉर्मल हो रहा है और उस हादसे को भूलने की कोशिश कर रहा है. वीरेंदर ने उसे यहाँ तक कहा कि अगर रूपाली साथ दे तो वो जल्द से जल्द एक नॉर्मल ज़िंदगी जी सकेगा. मगर रूपाली ने उसका दिल यह कह कर तोड़ दिया कि वीरेंदर अब काफ़ी देर हो चुकी है. जब तुम मुझसे दूर जाने लगे तो अविनाश( रूपाली’स वुड बी) ने मुझे सहारा दिया. उसने मुझे बताया कि एक नॉर्मल मर्द एक लड़की को कैसे खुश रख सकता है. मुझे तो शक हैं कि तुम इसके लायक भी हो या नहीं. 

चाबी लेकर आशना गॅरेज की तरफ भागी और बिहारी काका ने अपने कमरे से चाबियो का गुच्छा लेकर घर को लॉक करना शुरू कर दिया. गॅरेज पहुँच कर एक पल के लिए आशना के कदम ठितके क्यूंकी यह चाबी किस गाड़ी की थी उसे पता नही था और वहाँ पर 4 गाड़ियाँ खड़ी थी. आशना ने बिना वक्त गवाए सबसे पिछली वाली गाड़ी के लॉक मे चाबी घुसाइ और घुमा दी. गाड़ी अनलॉक कर दी. जब तक आशना गाड़ी को मेन गेट पर लाती बिहारी काका दौड़ते हुए वहाँ पहुँच चुके थे. गाड़ी उनके पास रुकी तो बिहारी काका ने मेन गेट लॉक किया और पिछला दरवाज़ा खोल कर वो उस मे बैठ गये. तभी आशना के फोन की घंटी बजी. आशना ने जल्दी से बॅग खोल कर उस मे नंबर. देखा. डॉक्टर. बीना की कॅल आई थी. आशना ने कॉल पिक की और इससे पहले कि डॉक्टर. कुछ बोलती, आशना ने काका की तरफ देखकर डॉक्टर. से पूछा वीरेंदर को होश आ गया क्या डॉक्टर. 

बीना: हां, वीरेंदर को अभी कुछ देर पहले ही होश आया है बस अभी कुछ देर मे उसका चेकप करने जा रही हूँ. डॉक्टर. अभय कल से आउट ऑफ स्टेशन गये हैं. आशना ने एक गहरी साँस ली और कहा डॉक्टर. एक बहुत ज़रूरी बात करनी है आपसे, इस लिए मेरे आने तक आप उनसे कोई बात नहीं करेंगी, यह कहकर आशना ने फोन काटा और गाड़ी दौड़ा दी.

बिहारी काका रास्ता बताते गये और 15 मिनट मे ही गाड़ी हॉस्पिटल की पार्किंग मे खड़ी थी. बिहारी काका को टॅक्सी का किराया देकर आशना हॉस्पिटल की ओर भागी. एंटर करते ही उसने डॉक्टर. रूम की तरफ अपने कदम मोड़ लिए. कॅबिन मे डॉक्टर. बीना अपनी चेर पर बैठ कर उसका वेट कर रही थी. जैसे ही आशना रूम के अंदर घुसी, बीना उसे देख कर चौंक गई. आशना के बिखरे बाल, लाल आँखें और अस्त व्यस्त हालत यह बता रही थी कि आशना सारी रात सोई नहीं और काफ़ी परेशान भी है. अंदर आते ही आशना ने बीना से कहा डॉक्टर. मुझे आपसे बहुत ज़रूरी बात करनी है. 

बीना: कूल डाउन आशना, वीरेंदर को होश आ गया है और अब उसका हार्ट नॉर्मली वर्क कर रहा है. घबराने की कोई ज़रूरत नहीं. पहले तुम अटॅच वॉशरूम मे जाकर अपनी हालत सुधारो, तब तक मैं चाइ बनाती हूँ. 

आशना बिना कुछ बोले वॉशरूम मे घुस गई और ठंडे पानी के छींटो से अपनी सुस्ती मिटाने लगी. अच्छी तरह से हाथ मूह धोकर और अपने बाल और कपड़ो की हालत सुधारकर वो बाहर आई. बाहर आते ही उसने देखा कि डॉक्टर. बीना चाइ बना रही हैं एक कॉर्नर मे छोटी सी किचन मे. आशना भी उनके साथ उसी किचेन मे आ गई. 

डॉक्टर. बीना: हो गई फ्रेश?, गुड, चलो अब चाइ पीते हैं और मुझे सब कुछ डीटेल मे बताओ. यह कह कर उन्होने एक कप आशना की तरफ बढ़ाया. आशना ने कप पकड़ा और बाहर कॅबिन मे आकर एक चेर पर बैठ गई. बीना भी अपनी चेर पर बैठ गई अपने रूम को लॉक करने के बाद. 

बीना: हां आशना अब बोलो ऐसा क्या हुआ जो तुम इतनी सुबह सुबह परेशान दिख रही हो. जब तुमने मुझे कॉल किया तो मे तब वॉश रूम मे थी, बाहर आकर अननोन नंबर. देखा तो पहले तो इग्नोर कर दिया पर फिर जब मेने कॉल किया तो तुम्हारी डरी हुई आवाज़ ने मुझे चौंका दिया. बोलो क्या बात है. 

आशना: डॉक्टर., वीरेंदर भैया की डाइयरी मेने पढ़ी, उन्हे डाइयरी लिखने का शौक है और इस तरह से आशना ने उन्हे सारी बाते बता दी. सब कुछ जानने के बाद डॉक्टर. के चहरे पर भी चिंता की लकीरें देखी जा सकती थी. 

डॉक्टर.: आशना सब कुछ जानने के बाद मैं बस इतना कह सकती हूँ कि वीरेंदर ने पिछले कुछ सालो मे बहुत कुछ सहा है और शायद उसका दिल अब और दर्द बर्दाश्त ना कर पाए. उसे किसी भी तरह खुश रखना होगा ताकि उसके दिल पर ज़्यादा दवाब ना पड़े और सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि उसकी शादी हो जानी चाहिए जिससे उसके जिस्म मे दौड़ता लहू अपनी लय मे दौड़ सके. 

आशना: लेकिन डॉक्टर., क्या भैया पर शादी के लिए दवाब डालना ठीक रहेगा? 

डॉक्टर. बीना: कुछ देर चुप रहने के बाद, आशना शायद तुम ठीक कह रही हो, दवाब मे हो सकता है कि उसके दिल पर बुरा असर पड़े. लेकिन इसके अलावा कोई चारा भी तो नहीं. उसकी कोई गर्लफ्रेंड भी नहीं है जो उसे एग्ज़ाइट करे और वो मास्तरबेट या सेक्स करने पर मजबूर हो जाए.

आशना: डॉक्टर., आप कैसे कह सकती है कि अगर भैया की कोई गर्लफ्रेंड हो तो वो उसे मास्टरबेशन या सेक्स पर मजबूर कर सकती है? (अब आशना बिल्कुल खुल के डॉक्टर. से बात कर रही थी). 

डॉक्टर. बीना: मुस्कुराते हुए, आशना यह जो औरत का जिस्म होता हैं ना यह तो बूढो मे भी जान देता है और वीरेंदर तो अभी काफ़ी जवान और हॅटा-कटा पुरुष है. मैं यकीन के साथ कह सकती हूँ कि ऐसा ही होगा. 

आशना कुछ देर डॉक्टर. की बातों पर गौर करती रही. 

डॉक्टर.बीना: अच्छा आशना तुम चाहो तो यहाँ बैठो या मेरे साथ चल सकती हो मुझे एमर्जेन्सी वॉर्ड का एक राउंड लेना है उसके बाद वीरेंदर का चेकप करके तुम्हें दवाइयाँ समझाकर उसे डिसचार्ज कर दूँगी. आशना की कोई प्रतिक्रिया ना पाकर बीना ने अपना हाथ आशना के हाथो पर रखा. डॉक्टर. बीना के गरम हाथो हाथो का स्पर्श जब आशना के ठंडे हाथो पर पड़ा तो दोनो ने अपने अपने हाथ खेंच लिए. आशना इस लिए चौंकी कि बीना के गरम हाथो ने उसको ख़यालो की दुनिया से बाहर खैंच लिया और डॉक्टर. बीना इसलिए चौंकी क्यूंकी आशना के हाथ बरफ की तरह ठंडे थे. बीना एक सयानी डॉक्टर. थी वो जानती थी कि आशना या तो डरी हुई है या कुछ नर्वस है. 

बीना: आशना तुम मुझसे कुछ कहना चाहती हो? 

आशना एक दम हड़बड़ाई न..ना..नही डॉक्टर. वो मे सोच रही थी कि . इतना कहकर आशना खामोश हो जाती है. 

डॉक्टर. बीना: बोलो आशना, जो भी बोलना है बोल दो . मुझपर भरोसा रखो मैं तुम्हारी बात सुनूँगी और समझूंगी. 

आशना: डॉक्टर., भैया के साथ जो भी हुआ उस मे कुछ दोष शायद मेरा भी है, मेरे कारण भी उन्होने काफ़ी तकलीफ़ झेली है, में उन्हे इस सिचुयेशन से बाहर निकालना चाहती हूँ पर वो अंजाने मे ही सही मुझ से नफ़रत करने लगे हैं. तो क्या इस वक्त मेरा उनके पास जाना उनकी सेहत के लिए ठीक रहेगा. 

डॉक्टर. बीना उसकी बात सुनकर गहरी सोच मे पड़ गई. कुछ देर सोचने के बाद बीना बोली, आशना तुम आख़िरी बार भैया से कब मिली थी. आशना को कुछ समझ मे नहीं आया पर फिर भी बोली पापा के अंतीमसंस्कार के वक्त. 

डॉक्टर: क्या उस वक्त की तुम्हारे पास तुम्हारी कोई तस्वीर है. 

आशना ने सवालिया नज़रो से उसे देखा और फिर अपने बॅग से एक आल्बम निकाली. आशना ने कुछ पन्ने पलट कर एक पन्ना डॉक्टर. के सामने रखा “यह फोटो तब की है जब पापा मुझे बोरडिंग स्कूल मे अड्मिट करवा के आए थे. यह उनके साथ मेरी आख़िरी फोटो थी. बीना ने फोटो को गौर से देखा फिर आशना की तरफ देखा. बीना की आँखो मे चमक आ गई जिसे आशना ने भी महसूस किया पर कुछ समझ नहीं पाई. बीना ने जल्दी से आल्बम बंद की और आशना की तरफ बढ़ा दी. आशना ने आल्बम लेकर बॅग मे डाल दी और डॉक्टर. की तरफ देखने लगी. डॉक्टर. के चहरे पर मुस्कान देख कर आशना ने उसका कारण पूछा. 

डॉक्टर.: यार तुम तो पहचानी ही नहीं जा रही हो, काफ़ी सेक्सी हो गई हो. 

आशना का चेहरा शरम से लाल हो गया. ऐसा पहली बार नहीं था कि किसी ने उसे सेक्सी बोला हो. उसकी फ्रेंड्स तो हमेशा उसे सेक्सी ही बुलाती पर एक अधेड़ उम्र के मूह से ऐसा सुनने से वो शरम के मारे गढ़ गई. 

बीना: आओ मेरे साथ, इतना कहकर बीना उठ खड़ी हुई. बीना ने वॉशरूम से लेकर उसे एक स्काइ-ब्लू कलर का शॉर्ट गाउन दिया जो कि डॉक्टर. यूज़ करती हैं. आशना ने गाउन पकड़ते हुए डॉक्टर. की तरफ सवालिया नज़रो से देखा. 

बीना: तुम वीरेंदर की मदद करना चाहती हो. 

आशना ने धीरे से सिर हां मे हिलाया. 

बीना: तो इसे पहन लो और मेरे साथ चलो. 

आशना को अभी भी कुछ समझ नहीं आया था. 

बीना ने उसकी मनोदशा को समझते हुए कहा: देखो जब वीरेंदर ने तुम्हे देखा था तुम एक छोटी सी बच्ची थी और आज तो तुम माशा अल्लाह एक कयामत का रूप ले चुकी हो. तो ज़ाहिर सी बात है कि वो तुम को नहीं पहचान पाएगा और मुझे पूरा यकीन है कि तुम भी उससे उसकी बेहन बनके मिलना पसंद नहीं करोगी. इसी लिए यह गाउन पहन लो जिससे तुम इस हॉस्पिटल की एक. डॉक्टर. लगो और मे तुमको वीरेंदर के घर यह कहकर भेज दूँगी कि तुम उसकी केर के लिए वहाँ जा रही है. 

यह सुनते ही आशना की आँखो मे चमक आ गई और उसने झट से अपनी जॅकेट उतार कर वो गाउन पहन लिया. आशना को सब समझ आ गया था. वो डॉक्टर. बीना के एहसान तले दब गई उसकी इस मदद के लिए. दोनो हॉस्पिटल के राउंड के लिए निकल पड़ी. करीब 8:00 बजे वो वीरेंदर के कॅबिन के बाहर पहुँची. 

डॉक्टर. बीना ने नॉक किया. अंदर से वीरेंदर की आवाज़ आई. यस, कम इन. बीना ने दरवाज़ा खोला और अंदर आ गई उसके पीछे-पीछे आशना ने भी धड़कते दिल से अंदर कदम रखा. आशना ने एक नज़र वीरेंदर के चेहरे पर डाली, चेहरे पर दाढ़ी काफ़ी आ गई थी. वीरेंदर काफ़ी बदल गया था इतने सालो मे. उसका शरीर काफ़ी मज़बूत हो गया था रोज़ जिम करने से और हाइट तो उसकी पहले ही काफ़ी थी. कुल मिलाकर वो एक बेहद ही तंदुरुस्त पर कमज़ोर दिल का गबरू जवान था. आशना की तंद्रा टूटी जब बीना ने वीरेंदर से कहा कि डॉक्टर, आशना हैं, मेरी असिस्टेंट हैं. आज हम तुम्हें डिसचार्ज कर रहे हैं यह तुम्हारे साथ कुछ दिन तुम्हारे घर पर रुकेंगी जब तक तुम बिल्कुल ठीक नहीं हो जाते. 

वीरेंदर: क्या डॉक्टर. आंटी मे बिल्कुल ठीक हूँ, आप इन्हें परेशानी मे मत डालिए. इतना सुनते ही आशना एक दम घबरा गई. 

बीना: मुझे पता है तुम कितने ठीक हो, डॉक्टर. मैं हूँ तुम नहीं और तुम्हारे अंकल ने जाने से पहले मुझे ख़ास हिदायत दी है कि कुछ दिनो तक तुमको अब्ज़र्वेशन मे रखना पड़ेगा. 

वीरेंदर: बाप रे अंकल का हुकुम है, फिर तो मानना ही पड़ेगा नहीं तो पता नहीं क्या- क्या पाबंदियाँ लग जाएँगी और उनका बस चले तो मुझे यहीं पर रोक लें. इतना कहते ही बीना और वीरेंदर दोनो हँस पड़े. आशना के चेहरे पर भी स्माइल आ गई. 

बीना: डॉक्टर. आशना आप मेरे साथ चलिए मैं आपको इनकी दवाइयों के बारे मे बता देती हूँ और फिर आप इन्हे डिसचार्ज करवा के इनका चार्ज अपने हाथो मे ले लें. 

आशना: जी डॉक्टर. चलिए.

आशना जाने के लिए मूडी ही थी कि वीरेंदर बोला: एक मिनट डॉक्टर. 

आशना. आशना के कदम ठिठक गये और उसने मुड़ते हुए ही वीरेंदर की तरफ देखा. 

वीरेंदर: डॉक्टर. आशना आप कहाँ की रहने वाली हो. 

इससे पहले कि आशना हड़बड़ाहट मे कोई जवाब देती, बीना बीच मे बोल पड़ी. यह मेरे फ्रेंड की बेटी है. इसके माँ-बाप बचपन मे ही चल बसे. इसीलिए यह बचपन से मेरे पास ही रही और फिर यहाँ के गँवरमेंट. हॉस्पिटल से इसने इसी साल एमबीबीएस किया और अब मुझे असिस्ट कर रही है. आशना ने एक ठंडी सांस छोड़ी और वीरेंदर की तरफ़ देखा. 

वीरेंदर: आइ आम सॉरी डॉक्टर. आशना मेने ऐसी ही पूछा था. आपके पेरेंट्स का सुन के मुझे काफ़ी दुख हुआ. 

बीना: ओके अब तुम आराम करो आज दोपहर तक तुमको डिस्चार्ज कर देंगे, टेक केर. 

वीरेंदर: बाइ डॉक्टर. आंटी, बाइ आशना.

कॅबिन से बाहर आकर आशना ने एक लंबी सांस ली और बीना की तरफ देखा. बीना ने भी उसकी तरफ देखा और उसे आँख मार दी. दोनो हंसते हंसते बीना के रूम तक पहुँचे. चलो एक काम तो हो गया, अब तुम्हे सोचना है कि तुम उसके साथ कितने दिन रह सकती हो और इन दिनों मे कैसे उसे शादी के लिए मना लो. 

आशना: आइ विल डू इट एनी कॉस्ट डॉक्टर. 

.बीना: तुम कितने दिन की छुट्टी लेकर आई हो. 

आशना ने घड़ी की तरफ देखा और बोली रूको अभी पता करती हूँ एरलाइन्स से कि वो कितने दिन की छुट्टी एक्सटेंड कर सकते हैं. आशना ने नंबर. मिलाया और कुछ देर बाद उसके एरलाइन्स ओफीसर से उसके सीनियर ने फोन उठाया. 

आशना: सर, आइ आम आशना शर्मा, फ्लाइट अटेंडेंट फ्रॉम ———-टू ————- ऑफ युवर एरलाइन्स. सर, आइ आम सॉरी टू इनफॉर्म यू बट आइ कॅन’ट रेज़्यूमे माइ ड्यूटी अगेन. आइ हॅव सम फॅमिली प्रॉब्लम्स, बाइ. आशना ने बिना किसी प्रतिक्रिया जानने के पहले ही फोन काट दिया. 

आशना: लो जी डॉक्टर. आंटी छुट्टी मंज़ूर हो गई, अब बोलो क्या करना है? 

डॉक्टर. बीना उसे हैरानी से देखती रह गई. 

बीना: करना क्या है, कुछ दिन तक तुम वीरेंदर की केर टेकर बन कर रहो उस घर मे उसके बाद तो तुम्हें वहाँ रहने का किराया देना पड़ेगा. इतना कहकर आशना और बीना दोनो खिलखिलाकर हंस पड़ी.

दोपहर तक आशना ने अपनी कुछ ज़रूरी शॉपिंग भी कर ली थी. उसने अपनी ज़रूरत के हिसाब से सब कुछ खरीद लिया तह और उसे वीरेंदर की गाड़ी मैं डाल कर उसे हवेली छोड़ आई थी. बिहारी काका को उसने कह दिया थे कि वो उपर वाले फ्लोर मे से कोई एक कमरा उसके लिए तैयार कर दे और उसका सारा समान वहाँ पर रख दे. बिहारी काका को उसने बताया के वो डॉक्टर. बीना के दोस्त की बेटी है और अब वो यहीं रहकर वीरेंदर का इलाज करेगी. बिहारी काका को सब कुछ समझा कर और गाड़ी को अपनी जगह लगाकर वो टॅक्सी से हॉस्पिटल पहुँची तो दोपहर के 12:30 बज गये थे.

हॉस्पिटल पहुँचते ही वो डॉक्टर. बीना के रूम मे गई. बीना: आओ आशना, मैने वीरेंदर की डिसचार्ज स्लिप बना दी है. अब तुम उसे घर ले जा सकती हो. आशना की आँखों में आँसू आ जाते हैं और वो गले लग कर डॉक्टर. बीना को ज़ोर से गले लगा लेती है. आशना: थॅंक यू डॉक्टर. अगर आप नहीं होती तो मेरे लिए यह सब मुमकिन नहीं था.

डॉक्टर. बीना, इट्स ओके आशना, पर तुम्हे किसी तरह वीरेंदर को फिर से नयी ज़िंदगी देनी होगी. 

आशना- मैं ज़रूर ऐसा करूँगी. इतना कहकर उसने स्लिप डॉक्टर. से ली,

डॉक्टर. ने उसे सारी दवाइयों के बारे मे समझा दिया और आशना जैसे ही जाने के लिए मूडी के बीना ने कहा: “आशना काश तुम सचमुच वीरेंदर की बेहन ना होती”. आशना के कदम यह सुनकर एकदम ठिठक गयी पर वो मूडी नहीं, शायद यह बात तो उसने भुला ही दी थी कि वो वीरेंदर की बेहन है. 

हॉस्पिटल से वीरेंदर को लेके वो एक टॅक्सी मे वीरेंदर के घर के बाहर पहुँचे. बिहारी काका उनका गेट खोलकर बाहर ही वेट कर रहे थे. टॅक्सी सीधा कॉंपाउंड मे घुसी और बंग्लॉ के दरवाज़े के पास आकर रुकी. वीरेंदर ने टॅक्सी वाले के पैसे देकर उसे वहाँ से रवाना किया और एक ठंडी सांस छोड़ी. वीरेंदर ने धीरे से कहा “फिर से वही ख़ालीपन मुबारक हो वीरेंदर” और इतना कहकर वो अंदर चला गया. आशना ने उसे सॉफ सुना पर उस वक्त उसने कुछ बोलना ठीक नहीं समझा.

अंदर आने पर वीरेंदर सीधा अपने कमरे मे चला गया और आशना किचन की तरफ चल दी. बिहारी काका ने दोपहर के खाने की तैयारी कर रखी थी. आज बिहारी काका ने चिकन,मटन, डाल, वेजिटेबल,,खीर और चावल बनाए थे. आशना के पीछे पीछे बिहारी काका भी किचन मे आ गये.

काका: बिटिया भूख लगी है क्या. 

आशना ने बिना पीछे देखे जवाब दिया: नहीं काका बस आपके खाने की खुश्बू यहाँ तक खींच लाई. वैसे वीरेंदर के आने पर आज तो अपने पूरी दावत की तैयारी कर रखी है. 

बिहारी काका झेन्प्ते हुए: नहीं बिटिया ऐसी बात नहीं है, आज बड़े दिनो बाद मालिक ठीक होकर घर आए हैं तो सारी उनकी पसंद की चीज़े बनाई हैं. छोटे मालिक को खाने मे मीट-मुर्ग बहुत पसंद है. 

आशना मन मैं सोचते हुए (तभी इतनी सेहत बना रखी है जनाब ने). 

आशना: पर काका कुछ दिन वीरेंदर के खाने का थोड़ा ध्यान रखना पड़ेगा क्यूंकी इस तरह के खाने मे काफ़ी फॅट होता है जो वीरेंदर की सेहत के लिए अच्छा नहीं है. 

काका: पर बिटिया, मालिक तो रोज़ाना शाम को जिम मे खूब कसरत करके सारी चर्बी बहा देते हैं. 

आशना: बहती कहाँ है काका वो तो उनके अंदर ही रहती है. आशना ने यह बोल तो दिया पर उसे इसका एहसास काका के होंठों पर आई कुटिल मुस्कान से हुआ कि उसने अंजाने मे यह क्या कह दिया. आशना का चेहरा शरम से लाल हो गया और आँखें झुक गईं. 

काका ने बात संभालते हुए कहा: पर बिटिया मालिक तो मीट -मुर्ग के बिना खाना खाते ही नहीं 

आशना कुछ ना बोल सकी उसके पास और कुछ बोलने के लिए कुछ बचा ही नहीं था. वो अपनी पिछली बात के बारे मे ही सोच रही थी. 

काका: वैसे भी अब तुम आ ही गई हो तो मालिक का ख़याल तो तुम रख ही लॉगी. यह बात काका ने बड़े ज़ोर देके कही. इससे पहले आशना कुछ समझ पाती, काका ने कहा : जब भूख लगेगी बता देना, मैं रोटियाँ बना दूँगा. आशना ने नज़रें नीचे करके ही हां मैं गर्दन हिलाई. काका वहाँ से चले गये और आशना इन सारी बातों का मतलब निकालने लगी. आशना सोचने लगी कि काका ने कितनी जल्दी मेरी बात पकड़ ली और मुझे वीरेंदर की चर्बी का इलाज भी बता दिया. 

आशना: छि मैं भी क्या सोच रही हूँ, वो मेरे भैया हैं, मैं उनका ख़याल रखूँगी पर एक बहन होने के नाते. मैं उनके लिए खुद एक अच्छी सी लड़की ढूँढ लाउन्गी जो उनकी इस अजीब बीमारी मे इनकी मदद करे. यह सोचते सोचते आशना कब सीडीयाँ चढ़ कर उपर पहुँची उसे पता ही ना लगा. उपर आकर वो अपने कमरे मे चली गई और अपनी न्यू ड्रेस लेकर बाथरूम मे चली गई. यह बाथरूम सेम नीचे वाले बाथरूम जैसा था बस टाइल्स अलग कलर्स और डिज़ाइन की थीं. अच्छे से नहाने के बाद आशना ने नये कपड़े पहने और अपने कमरे से बाहर आकर वीरेंदर के कमरे की तरफ चल दी. आशना ने डोर नॉक किया. उसके कानों मे फिर वोही भारी मर्दाना आवाज़ गूँजी ‘आ जाओ”. 

आशना ने दरवाज़े को हल्का सा धक्का दिया तो वो खुलता गया. अंदर वीरेंदर एक सफेद लोवर और ग्रीन टी-शर्ट मे सोफे पे बैठा कुछ फाइल्स देख रहा था. उसने एक उड़ती सी नज़र आशना पर डाली और फिर फाइल्स मे खो गया. 

आशना: यह क्या वीरेंदर जी, आपने आते ही ओफिसे का काम देखना शुरू कर दिया. 

वीरेंदर ने एक बार उसे देखा और फिर दोबारा फाइल्स पर नज़रें गढ़ा दी. कुछ देर चुप रहने के बाद वीरेंदर बोला, काम की चिंता नहीं है मुझे. मेरा मेनेज़र सब संभाल रहा है. यह तो वो कुछ फाइल्स दे गया है जिसे साइन करना है ताकि डिसट्रिब्युटर्स को उनकी रुकी हुई पेमेंट दे सकें.

आशना: पर काम तो काम ही है ना, आप कुछ दिन सिर्फ़ आराम ही करेंगे और आपका सारा काम उसके बाद. इतना कह कर आशना ने फाइल्स उसके हाथ से ली और उन्हे मेज़ पर रख दिया. 

वीरेंदर हैरानी से उसे देखता रहा. पहली बार उसने आशना के मासूम चेहरे को देखा तो देखता ही रह गया. आशना अपनी ही धुन मे कुछ बड़बड़ाये जा रही थी. फाइल्स को मेज़ पर रखने के बाद उसने वो दवाइयाँ निकाली जो वीरेंदर को दोपहर मे लेनी थी. उसने दवाइयाँ निकाली और जग से ग्लास मे पानी डाल कर वीरेंदर की तरफ़ मूडी. जैसे ही उसने वीरेंदर को देखा उसके कदम वहीं ठिठक गये.वीरेंदर एकटक उसे देखे जा रहा था. आशना एक दम शांत खड़ी हो गई. उसकी इस हरकत से वीरेंदर को होश आया, उसने जल्दी से अपनी नज़रें आशना के चेहरे से घुमाई और ग्लास पकड़ने के लिए हाथ आगे बढ़ाया.

आशना ने उसे ग्लास दिया और दवाइयाँ खिलाने लगी. वीरेंदर एक अच्छे बच्चे की तरह सारी दवाइयाँ खा गया.

आशना(मुस्कुराते हुए): शाबाश, रोज़ ऐसे ही अच्छे बच्चे की तरह दवाई खाओगे तो जल्दी ठीक हो जाओगे. 

वीरेंदर: डॉक्टर. अगर आप इतनी डाँट खिलाने के बाद दवाइयाँ खिलाओगी तो मैं ठीक बेशक हो जाउ पर डर के मारे कमज़ोर ज़रूर हो जाउन्गा. इतना कह कर वीरेंदर हंस पड़ा और आशना के चेहरे पर भी स्माइल आ गई. 

आशना: प्लीज़ आप मुझे आशना कहें, डॉक्टर. ना कहें. वीरेंदर ने उसकी तरफ सवालिया नज़रो से देखा तो आशना बोली. डॉक्टर. वर्ड थोड़ा फॉर्मल हो जाता है ना इसलिए. 

वीरेंदर: जैसा तुम्हे ठीक लगे आशना. 

अपना नाम वीरेंदर के होंठों से सुनकर आशना एक दम सिहर उठी. 

आशना- अच्छा आप जल्दी से फाइल्स साइन कर लीजिए और अपने मेनेज़र को कह दीजिए कि वो अब कुछ दिन आपको आराम करने दें. वीरेंदर सिर्फ़ मुस्कुराया बोला कुछ नहीं. आशना अपने कमरे की तरफ चल दी. रास्ते मे उसने उपर से ही काका को आवाज़ लगा कर बता दिया कि वीरेंदर को दवाइयाँ दे दी हैं, एक घंटे के बाद खाना लगा दें.

अपने रूम मे आने के बाद आशना अपने बेड पर लेट गई और वीरेंदर के साथ होने वाली बातों को सोच कर रोमांचित होने लगी. बीच में उसे काका के साथ हुई किचन की भी बात याद आ गई तो वो और सिहर उठी. ना जाने क्यूँ दिल के किसी एक कोने मे वो उन बातों को सहेज कर रखने लगी. आशना का ध्यान भंग हुआ जब उसके दरवाज़व पर नॉक हुई. आशना ने घड़ी की तरफ देखा, खाने का टाइम हो गया था. 

आशना: काका आप ख़ान लगाइए मैं आती हूँ. 

काका: जी बिटिया.

कुछ देर बाद आशना नीचे पहुँची तो देखा काका खाना लगा रहे थे. आशना ने इधर उधर देखा और फिर काका से पूछा वीरेंदर नहीं आए नीचे. 

काका: उन्होने कहा है कि वो उपर ही खाएँगे. 

इतना सुनते ही आशना सीडीयाँ चढ़कर उपर पहुँची और बिना नॉक किए दरवाज़ खोल दिया. वीरेंदर वहाँ नहीं था. तभी उसे बाथरूम के अंदर से आवाज़ आई, काका आप खाना रख दो मैं अभी आता हूँ. आशना कुछ ना बोली, वो वहीं खड़ी रही. कुछ दो-तीन मिनिट के बाद बाथरूम का दरवाज़ा खुला और वीरेंदर सिर्फ़ लोवर मैं बाहर निकला. बाहर निकलते ही उसने आशना को देखा जो हैरानी से कभी उसकी बालों से भरी चौड़ी छाती देख रही थी तो कभी उसके चेहरे की तरफ. उसके बाल गीले थे शायद वो बाल धोके आया था. इतने दिन हॉस्पिटल रहने के बाद शायद उसे अपने सर से बदबू सी आ रही होगी. कुछ पलों तक दोनो एक दूसरे को देखते रहे उसके बाद पहली हरकत वीरेंदर ने की. वीरेंदेट ने अपने दोनो बाज़ू अपनी छाती पर रख कर उन्हे छुपाने की कोशिश की. 

यह देख कर आशना की हसी छूट गई. वो फॉरन मूडी और कमरे से बाहर भागी. दरवाज़े पर पहुँच कर उसने धीरे से पीछे देखा और मुस्कुराते हुए बोली: क्या लड़कियो की तरह खड़े हो. जल्दी से कपड़े पहनो और नीचे आ जाओ, आज खाना नीचे ही मिलेगा. वीरेंदर ने अग्याकारी बच्चे की तरह हां में गर्दन हिलाई और लपक कर अलमारी खोली. आशना नीचे पहुँची तो उसके होंठों पर मुस्कान अभी भी थी जिसे देख कर बिहारी काका ने पूछा “क्यूँ देख लिया वीरेंदर बाबू को टॉपलेस. आशना ने हैरानी से काका को देखा जैसे पूछ रही हो उन्हे कैसे मालूम. 

काका: यह तो मालिक की पुरानी आदत है, जब भी वो दोपहर को घर पर होते है, खाना खाने से पहले वो अपनी टी-शर्ट उतार देते हैं. 

आशना: बाप रे, फिर तो रात के खाने में तो…….इतना कहना था कि दोनो खिलखिला कर हंस दिए. तभी वीरेंदर ने डाइनिंग हॉल में कदम रखा. दोनो एकदम चुप हो गये.

वीरेंदर अंदर आते ही: काका तुमने तो पता है ना, फिर तुमने इसे रोका क्यूँ नहीं. 

काका: मुझे पता ही कब लगा यह कब उपर गई, मैं तो इसे बता रह था कि तुमने खाना उपर मँगवाया है, ये तो पलक झपकते ही उपर पहुँच गई. 

वीरेंदर: आशना , आइ आम सॉरी. 

आशना: आइ आम सॉरी, मुझे नॉक कर के आना चाहिए था. 

बिहारी काका: चलो आप बैठ जाएँ मैं खाना परोस देता हूँ. 

आशना: काका, तुम जाकर खाना खा लो आज इनको खाना मैं परोसुन्गि. काका चले गये तो वीरेंदर बोला: देखो डॉक्टर. बन कर आई थी और क्या क्या करना पड़ रहा है? 

आशना: देखते जाओ अभी और क्या क्या करूँगी और हँस दी.

आशना ने दो प्लेट्स में खाना डाला और दोनो खाना खाने लगे. खाना कहते हुए बार बार दोनो की नज़रें मिल रही थी.आशना टाइट पिंक स्वेट शर्ट और ब्लॅक स्किन टाइट जीन्स में काफ़ी सेक्सी लग रही थी और वीरेंदर भी आशना से नज़रें चुराकर बार बार उसकी खूबसूरती का रस पी रहा था. आशना पूछना तो चाहती थी वीरेंदर से कि वो खाना इस डाइनिंग हॉल में ना ख़ाके अपने रूम मे क्यूँ ख़ाता है पर फिर उसे उसकी आदत (टी-शर्ट उतारकर खाना खाने की आदत) याद आ गई और उसने अपने दिमाग़ से वो सवाल झटक दिया. लेकिन आशना ने एक और सवाल वीरेंदर से कर दिया. 

आशना: वीरेंदर जी बुरा मत मानीएगा पर यह टी-शर्ट उतार कर खाना खाने की आदत कुछ समझ नही आई और यह सवाल पूछ कर वो हँस दी. 

वीरेंदर आशना के इस सवाल से झेंप गया और हड़बड़ाते हुए जवाब दिया “अक्सर जब मैं घर होता था और दोपहर का खाना खाने बैठता था तो खाना खाते खाते मुझे बड़ी बेचैनी सी होती थी, मेरा शरीर एकदम पसीने से नहा जाता, मेरा गला सूखने लगता तो फिर मैं अपनी कमीज़ या टी-शर्ट उतार फेंकता. बस अब आदत सी हो गई है. जब भी घर पर होता हूँ तो दोपहर को खाना ऐसे ही ख़ाता हूँ. 

आशना: क्या आज भी ऐसा ही फील हो रहा है खाना खाते वक्त. 

वीरेंदर: तुम तो पूरी जासूस की तरह पीछे पड़ गई हो. तुम्हे डॉक्टर. नहीं जासूस होना चाहिए. 

आशना: वोही समझ लो पर अभी तक आपने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया. 

वीरेंदर कुछ देर उसको देखता रहा फिर बोला ऐसा कभी कभी ही होता है और फिर तो मुझे उसके बाद कुछ होश ही नहीं रहता. उसके बाद तो कई घंटो तक मैं सोया ही रहता हूँ. 

आशना (चिंता भरे स्वर में): क्या अपने कभी डॉक्टर. से कन्सल्ट नहीं किया? 

वीरेंदर: डॉक्टर. आंटी को एक बार मैने अपनी बेचैनी के बारे मे बताया तो उन्होने चेकप किया और बताया कि सब नॉर्मल है बस थकान से ऐसा होता है. 

आशना को कुछ गड़बड़ लग रही थी पर वो डॉक्टर. तो थी नहीं जो इस बीमारी का कारण जान सकती. उसने खाना खाने के बाद प्लेट्स संभाली और काका को आवाज़ लगा कर कहा कि बर्तन उठा कर सॉफ कर दें. फिर वीरेंदर अपने कमरे की तरफ चल पड़ा और आशना अपने कमरे में चली गई.

काफ़ी दिनो से थकि होने के कारण आशना को बेड पर लेटते ही गहरी नींद ने अपने आगोश में ले लिया. आशना की नींद खराब की उसके मोबाइल की रिंगटोन ने ” ज़रा-ज़रा टच मी टच मी टच मी ओ ज़रा- ज़रा किस मी किस मी किस मी”. आशना ने अलसाए हुए रज़ाई(क्विल्ट) से अपने चेहरे को कस के ढक लिया ताकि रिंगटोन की आवाज़ उसके कानों तक ना पड़े मगर मोबाइल लगातार बजे जा रहा था. कुछ देर बाद झल्ला कर उसने फोन उठाया और स्क्रीन पर नंबर. देखने लगी. जैसे ही उसकी नज़र स्क्रीन पर पड़ी कॉल डिसकनेक्ट हो गई. आशना का मन आनंदित हो गया. आशना ने मोबाइल तकिये के पास रखा और सोने के लिए आँखें बंद ही की थी कि एक बार फिर से मोबाइल बजने लगा. अब तक आशना की नींद टूट चुकी थी, उसने स्क्रीन पर नंबर. देखा, डॉक्टर. बीना का फोन था. फिर आशना ने घड़ी की तरफ देखा, 7:00 बज चुके थे. आशना ने कॉल रिसीव की और बीना ने उसका और वीरेंदर का हाल जानने के बाद फोन काट दिया. हालाँकि उनकी बातचीत कुछ ज़्यादा देर नहीं चली पर बीना ने उसे एक हिदायत देते हुए कहा कि जो भी करना है जल्द से जल्द और सोच समझ कर करना. उसने इस बात पर खास ज़ोर दिया कि वीरेंदर को ना पता चले कि वो उसकी बेहन है क्यूंकी हो सकता है वीरेंदर ज़्यादा गुस्से में आ जाए और उसकी सेहत पर इसका उल्टा असर पड़े.

फोन अपनी पॅंट की पॉकेट मे रखने के बाद आशना ने अपनी न्यू जॅकेट जो कि लाइट ब्राउन कलर की थी उसे पहन लिया. शाम को काफ़ी ठंड हो गई थी. आशना अपने कमरे से बाहर नहीं निकली, वो अपने रूम मे ही बैठ कर टीवी देखने लगी और आगे क्या करना है वो सोचने लगी. करीब 2 घंटे तक काफ़ी सोचने के बाद उसके सिर में दर्दे होने लगा. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वो अब क्या करे. कैसे वीरेंदर भैया से उनकी शादी की बात करे और सबसे बड़ा सवाल कि शादी करने के लिए लड़की कहाँ से लाई जाए. अंत में आशना ने वीरेंदर को ही कुरेदना ठीक समझा और उसके कमरे में जाने की सोची. 

आशना टीवी ऑफ करके अपने कमरे से बाहर निकली ही थी के उसे बिहारी काका वीरेंदर के रूम से खाने की ट्रे लिए निकलते हुए दिखे. 

आशना: काका वीरेंदर ने खाना खा लिया क्या?

काका: हां बिटिया, तुम्हारे लिए भी उपर ही ले आउ. आज बहुत ठंड है, अपने कमरे में ही खा लो. 

आशना कुछ देर सोचती रही फिर बोली ठीक है काका, आप खाने मेरे रूम में लगा दें, मैं थोड़ी देर वीरेंदर के रूम से होके आती हूँ, उन्हे दवाई खिला दूं. 

काका: ठीक है. 

आशना आगे बढ़ी ही थी कि उसके पैर एक दम रुक गये, 

उसके रुके कदमों को देख कर काका ने उसे सवालिया नज़रो से देखते हुए इशारे से पूछा कि क्या हुआ. 

आशना: वो काका वीरेंदर जी पूरे कपड़े तो पहने हैं ना? 

काका: हां तुम सुरक्षित हो जाओ. काका के इस जवाब से आशना शरम के मारे ज़मीन मे गढ़ी जा रही थी. उसके बाप समान एक आदमी उसे यह समझा रहा था कि जिस आदमी के पास वो जा रही है वो उसे कुछ भी नहीं करेगा. 

काका: बिटिया, जब वीरेंदर बाबू का हो जाए तो हमारा भी एक काम करना.

आशना एक दम चौंकी काका की बात सुनकर. बिहारी ने बहुत जल्दी बात संभालते हुए कहा कि बिटिया मेरा मतलब है कि जब वीरेंदर बाबू दवाइयाँ खा लें तो तुम मेरे कमरे में नीचे आना, तुमसे कुछ ज़रूरी बातें करनी हैं. आशना जल्द से जल्द यहाँ से निकलना चाहती थी उसने अपनी गर्दन हां में हिलाई और वीरेंदर के रूम की तरफ चल दी. 

बिहारी नीचे आ गया और अपने मोबाइल को ऑन करके एक नंबर. डाइयल किया. कुछ देर बाद वहाँ से किसी ने फोन उठाया. बिहारी धीमी आवाज़ में “चिड़िया के मन में आग डाल रहा हूँ, अब आगे बोलो जब वो मेरे कमरे में आए तो क्या करना है. कुछ देर बिहारी चुप चाप उसकी बात सुनता रहा और फिर बोला ऐसा ही होगा. फिर बिहारी बोला: बहुत दिन हो गये हैं, अब तो दिन में मिलना भी मुस्किल है जब तक इस चिड़िया के पर ना कट जाएँ, अगर मूड है तो आज रात को आ जाओ नहीं तो मुझे आज फिर से हिलाकर ही सोना पड़ेगा. थोड़ी देर सामने वाले की बात सुनकर बिहारी बोला: तो मैं क्या यहाँ ऐश कर रहा हूँ. पिछले 10 दिन तो खूब ऐश की हम दोनो ने. कभी तुम यहाँ तो कभी मैं वहाँ. पर अब मेरा घर से निकलना ख़तरे से खाली नहीं होगा. चिड़िया चालाक लगती है, थोड़ा सा भी इधर उधर हुआ तो ख़तरा होगा, इसी लिए अब कुछ दिन तो तुमको ही यहाँ पर आना होगा. बिहारी ने कुछ देर सुनने के बाद सामने वाले को बोला: मैं दरवाज़ा खोल दूँगा तुम सेधे मेरे कमरे में आ जाना. वीरेंदर को तो नींद की गोलियाँ दे चुका हूँ दूध में. चिड़िया को भी दूध पिलाकर सुला दूँगा फिर जशन होगा. तुम ठीक 12:00 बजे पहुँच जाना. इतना कह कर उसने फोन काटा, उसे स्विचऑफ किया और आशना के लिए खाना लेने किचन में चला गया. 

बिहारी काका पिछले 25 साल से शर्मा परिवार के घर पर नौकर था, काफ़ी ईमानदार और काम मे लगन होने के कारण उसके साथ शर्मा परिवार में एक फॅमिली मेंबर की तरह बिहेव किया जाता. वो कभी किसी को कोई शिकायत का मोका नहीं देता. दिखने मे कोई 45 का एक तगड़े शरीर का मालिक था. बचपन मे गाँव मे पला बढ़ा होने के कारण मेहनत उसके खून मे थी और वो थोड़ी मेहनत अपने शरीर पर भी किया करता. इस उम्र मे भी वो सुबह जल्दी उठ कर घर मे बने पीछे जिम मे कुछ देर शरीर के लिए मेहनत करता और काफ़ी हेल्ती भी ख़ाता. बस उसकी यही आदत के कारण वो आज भी किसी भी औरत या लड़की पे भारी पड़ता. उसने शादी नहीं की क्यूंकी उसे शादी की ज़रूरत ही नहीं पड़ी, क्यूंकी जब तक शर्मा परिवार मे सब ठीक था, वो घर की नौकरानियों को खूब रगड़ता. फिर उस आक्सिडेंट के बाद वीरेंदर ने घर के सभी नौकर नोकारानियों को घर से दूर एक बस्ती मे बसा दिया जिससे बिहारी वीरेंदर से नफ़रत करने लगा था. उसने वीरेंदर को बहुत समझाया कि कम से कम एक नौकरानी को यहीं रहने दे ताकि वो घर के काम मे उसकी मदद करे पर कोई भी नौकरानी रुकने को तैयार नहीं हुई. उन्हे रहने के लिए बस्ती मे मकान, वीरेंदर से पगार और बिहारी से छुटकारा जो मिल रहा था.

बिहारी तो पहले, पूरा दिन भर सर्वेंट क्वॉर्टर्स मे ही रहता. कभी किसी नोकरानी को तो कभी किसी नोकरानी को अपने कमरे मे बुलाकर बहाल कर रहा होता. वो घर मे सर्वेंट्स का हेड था तो कभी किसी की हिम्मत नहीं हुई उसकी शिकायत करने की. एक बार एक नोकरानी ने शिकायत करके उसे घर से निकालने की कोशिश भी की पर बिहारी ने उसके पति को पैसे देके उसी नोकरानी को बदचलन साबित करके घर से धक्के देके निकलवा दिया था. बाद मे पता लगा कि उसके पति ने भी उसे तलाक़ दे दिया था. इस डर से कोई भी उसके खिलाफ नहीं बोलता. सारे नोकरो के जाने के बाद बिहारी तो जैसे भूखे शेर की तरह हो गया था. वो रोज़ रात को अपना पानी निकाल कर सो जाता पर इस से उसकी आग और भड़क रही थी. लेकिन जल्द ही उसकी ज़िंदगी मे एक ऐसी औरत आई जो अपनी नज़र शर्मा परिवार की जायदाद पर रखती थी. एक बार वो हवेली मे आई तो बिहारी से उसकी मुलाकात हुई. उस औरत ने जल्द ही बिहारी की आँखों मे हवस देख ली और उसे फसा लिया. 

बस यहाँ से शुरू हुआ उनका वीरेंदर की जायदाद को हथियाने का एक चक्रव्यूह. वो औरत भी बिहारी जैसा दमदार मर्द पाकर खुश थी. दोनो अक्सर घर पर मिलने लगे जब वीरेंदर ऑफीस होता और धीरे धीरे उन्होने वीरेंदर की जायदाद हड़पने के प्लान पर अमल करना शुरू कर दिया. लेकिन आशना के यूँ अचानक आ जाने से उन्हे अपना प्लान असफल होता नज़र आ रहा था क्यूंकी वीरेंदर की वसीयत के मुताभिक अगर आशना घर वापिस लौट आती है तो 50% शेर उसका होगा और अगर वो लौट के ना आए तो सारा शेयर वीरेंदर की वाइफ और बच्चों को जाएगा (यह वसीयत वीरेंदर ने अपने परिवार की मौत के तुरंत बाद बनवा ली थी और तब तक उसे यही लगता था कि रूपाली उससे शादी करेगी). वसीयत मे एक यह क्लॉज़ भी था कि अगर किसी कारण वीरेंदर की मौत आशना के लौटने से पहले या वीरेंदर की शादी होने से पहले हो जाती है तो सारी ज़ायदाद एक ट्रस्ट को सौंप दी जाएगी. 

आशना के आ जाने से बिहारी और उस औरत की एक मुश्किल बढ़ गई थी और एक आसानी भी हो गई थी. मुश्किल यह थी कि अगर आशना वीरेंदर के सामने उसकी बेहन बनकर जाएगी तो 50% शेयर उसका हो जाएगा और तब उनका सारी जायदाद पर हाथ सॉफ करने का सपना अधूरा रह जाएगा पर आसानी यह हो गई कि आशना वीरेंदर के सामने उसकी बेहन बनकर नहीं जाना चाहती थी (जी हां, ठीक सोचा अपने, बिहारी जानता है कि आशना वीरेंदर की बेहन है. वो यह सब कैसे जानता है उसके लिए पढ़ते रहिए), जिस कारण उनके दिमाग़ में एक नया प्लान बना. वीरेंदर जैसे चालाक और समझदार आदमी को तो अपने बस मे करना उनके लिए नामुमकिन था पर आशना को इस झूठ के ज़रिए वो ब्लॅकमेल कर सकते थे. तो उन दोनो ने प्लान किया कि किसी तरह आशना वीरेंदर की सेक्षुयल नीड्स को पूरा करे या वो ऐसे हालत पैदा करें कि आशना मजबूर हो जाए अपने भैया का बिस्तर गरम करने के लिए तो फिर वो वीरेंदर का काम तमाम करके आशना को वीरेंदर की बीवी साबित करके उससे वसीयत बदलवा सकते हैं. इससे दो फ़ायदे होंगे, एक तो यह कि आशना कभी अपना मूह नहीं खोल पाएगी और दूसरा यह कि अगर आशना ना होती तो उन्हे किसी और लड़की की मदद लेनी पड़ती जो कि ख़तरनाक भी साबित हो सकता था.

तो यह था उनका नया प्लान, जो उन्होने आशना के आने के बाद बनाया, उनका पहले का प्लान भी काफ़ी ख़तरनाक और दमदार था. वीरेंदर के खाने में वो कभी कभी कुछ अफ़रोडियासिक का एक मिश्रण मिला दिया करते थे जिससे वीरेंदर की सेक्स करने की इच्छा भड़क उठे और वो फ्रस्टेट होके किसी भी औरत या लड़की को अपना शिकार बना डाले. इस से यह होता कि सेक्षुयल असॉल्ट के जुर्म में वीरेंदर जैल जाता और यह दोनो पीछे से सारा माल सॉफ कर जाते मगर इस में किस्मत उनका साथ नहीं दे रही थी क्यूंकी वीरेंदर ऑफीस से घर और घर से ऑफीस बस इन्ही दो जगह जाता था और दोनो ही जगह कोई भी लड़की काम नहीं करती थी. बिहारी ने कई बार वीरेंदर को किसी औरत या लड़की को नौकरानी रखने के लिया मनाना चाहा पर वीरेंदर ने हर बार मना कर दिया. वीरेंदर अपनी सेक्षुयल ज़रूरतें खुद भी पूरी करने में असमर्थ था, शुरू शुरू में एक बार उसने काफ़ी एग्ज़ाइटेड होकर अपने लिंग को हाथो से ठंडा करने की कोशिश भी की पर उसके लिंग की सील बरकरार होने से यह उसके लिए काफ़ी कष्टदायक रहा. उसके बाद तो वीरेंदर ने तोबा कर ली थी. जिस भी दिन बिहारी काका को उस दवाई की डोज दे देते, वो काफ़ी उत्तेजित रहता और यही वजह है कि कई बार उसे दोपहर का खाना खाते खाते एकदम बैचनी होने लगती और वो अपने कपड़े उतार फैंकता. बिहारी काका अक्सर उसे 10-15 दिन बाद एक डोज दोपहर के खाने में दे देते जब भी कभी वीरेंदर घर पर लंच करता. उन्होने दोपहर का ही वक्त इसलिए चुना था कि जब डेढ़ दो घंटे बाद इसका असर बिल्कुल ज़्यादा हो तो उस वक्त वीरेंदर के बाहर जाकर कोई ग़लती करने के चान्सस ज़्यादा रहते पर वीरेंदर पर तो रूपाली का धोखा इस कदर हावी हो चुका था के वो घंटो अपने कमरे में ही खोया खोया बैठा रहता और अपनी उत्तेजना को दबाने की कोशिश करता रहता.इसी फ्रस्टेशन के चलते ही कुछ दिन पहले उसे एक माइनर सा अटॅक आया था जिस कारण वो हॉस्पिटल पहुँचा. दवाइयों के सहारे कुछ दिन तक तो उसे ठीक रखा जा सकता था पर अब यह सिचुयेशन उसके लिए काफ़ी ख़तरनाक साबित हो रही थी. बिहारी जानता था अगर इससे पहले कुछ ना किया तो वीरेंदर की वसीयत के मुताबिक उसका सारा पैसा एक ट्रस्ट में चला जाएगा जिसे वो हरगिज़ मंजूर नहीं करता. उसी चाल के सिलसिले में उसने आशना को उसने अपने कमरे में बात करने के लिए बुलाया था.

आशना को वीरेंदर के कमरे से अपने कमरे मे आए हुए एक घंटे के करीब हो गया था. बिहारी सोच रहा था कि अब तक आशना ने खाना खा लिया होगा. बिहारी अपने कमरे के दरवाज़े पर खड़ा होकर उपर की तरफ ही देख रहा था कि उसे आशना के रूम का दरवाज़ा खुलने का आभास हुआ, वो फॉरन अपने कमरे में घुस गया और दरवाज़ा धीरे से बंद कर दिया. करीब पाँच मिनिट तक वेट करने के बाद भी जब आशना उसके रूम मे नहीं आई तो उसे हैरानी और परेशानी दोनो होने लगी. अब तो बिहारी को डर भी लगने लगा था क्यूंकी 11 बजने वाले थे और करीब 12 बजे उस औरत ने भी आना था.

बिहारी अजीब की कशमकश में था कि उसका दरवाज़ा धीरे से नॉक हुआ. बिहारी एक दम अपनी जगह से उठा और दरवाज़ा खोल दिया जो कि पहले से ही थोड़ा खुला था. 

बिहारी: नॉक करके क्यूँ शर्मिंदा करती हो बिटिया यह तुम्हारा ही कमरा, मेरा मतलब घर है जब चाहे किसी भी कमरे में आ- जा सकती हो. आशना को झटका लगा जब बिहारी ने उसे कहा कि यह उसका ही घर है. बिहारी को भी अपनी ग़लती का एहसास हो चुका था. उसने जल्दी से बात बदलते हुए कहा कि कुछ दिनो तक जब तक मालिक ठीक नहीं हो जाते तब तक तो तुम यहीं पर रुकेगी तो तब तक यह घर उसी का हुआ ना. बिहारी ने बड़ी चालाकी से अपनी बात पलट दी थी.

अंदर आते ही आशना की नज़र बिहारी के कमरे पर पड़ी, बड़ा ही सॉफ सुथरा और घर के बाकी कमरो की तरह काफ़ी आकर्षक कमरा था. सुख-सुविधाओ से सुसज्जित कमरे मे हर एक वस्तु मौजूद थी. हर एक चीज़ जो इंसान की ज़रूरत होती है वो सब उस कमरे मे मौजूद थी जो कि बिहारी का रुतबा इस घर मे बयान कर रही थी. आशना हैरान थी कि एक नौकर का कमरा भी इतना सुंदर हो सकता है. खैर वीरेंदर को इसका होश ही कहाँ था कि घर मे क्या हो रहा है, उसे तो बस काम और सिर्फ़ काम से मतलब था. 

बिहारी: बैठो बिटिया मैं तुम्हारे लिए पानी लाता हूँ. 

आशना: नहीं काका अभी पीकर ही आई हूँ. 

बिहारी: बहुत लेट हो गई तुम, मुझे लगा शायद सो गई होगी. मैं भी सोने ही वाला था कि तुम आ गई. 

आशना: नहीं काका वो डॉक्टर. बीना का फोन आया था, वीरेंदर के ट्रीटमेंट के बारे मे समझा रही थी.. आशना ने बड़ी सफाई से झूठ बोल दिया जबकि वो यही सोचे जा रही थी कि बिहारी काका ने उसे अपने कमरे मे क्यूँ बुलाया है. 

बिहारी: कोई बात नहीं, बैठो. 

आशना बेड के पास लगे सोफे पर बैठ गई. उसके आगे मेज़ पर एक शराब की बोतल और खाली ग्लास रखा था. शराब काफ़ी महँगी लगती थी और ग्लास में कुछ शराब होने के कारण आशना समझ चुकी थी कि काका शराब पी रहे थे. आशना बड़ा अनकंफर्टबल फील कर रही थी काका के आगे. वो डर रही थी कि अगर काका ने कोई ग़लत हरकत की तो वो कैसे अपने आप को सच्चा साबित कर पाएगी क्यूंकी वीरेंदर तो उस से यही पूछेगा इतनी रात को आशना उसके कमरे मे क्या कर रही थी. 

बिहारी: वो माफ़ करना बिटिया कभी कभी पी लेता हूँ जब बहुत ज़्यादा खुश होता हूँ या बहुत ज़्यादा उदास. आज तो मेरी लिए खुशी का दिन है, मालिक ठीक होकर घर पर आ चुके हैं. 

आशना: कोई बात नहीं काका. 

बिहारी उसके लेफ्ट साइड पर आके सोफे के साथ लगे बेड पर बैठ गया. आशना ने वोही दोपहर वाली पिंक टी-शर्ट पहनी थी और जॅकेट वो उपर ही भूल आई थी. बिहारी उसके लेफ्ट साइड पर बैठा था जिस से बिहारी की नज़र आशना के क्लीवेज पर पड़ी जो कि आशना के बैठने से बाहर की तरफ उभर आई थी. आशना ने झट से काका की नज़रें पढ़ ली पर वो इसी वक्त कुछ रियेक्शन करती तो उसे खुद भी ज़िल्लत उठानी पड़ती और काका भी झेन्प जाते. 

आशना: बोलिए काका, क्या कम था आपको मुझसे. 

बिहारी उसकी आवाज़ सुनकर एक दम अपना ध्यान आशना के बूब्स से हटाता है और बोलता है. 

बिहारी: अब तुम्हें ही कुछ करना होगा मालिक के लिए. 

आशना: मैं समझी नहीं. 

बिहारी: देखो मैं ज़्यादा पढ़ा लिखा तो नहीं पर जितना डॉक्टर. ने मुझे बताया उससे मैं यह अंदाज़ा तो लगा ही सकता हूँ कि वीरेंदर बाबू को कोई बीमारी नहीं है. बस उनकी कुछ ज़रूरतें हैं जो पूरी नही हो रही. 

आशना ने सिर झुका कर कहा: लेकिन काका मैं इस बारे मे उनकी क्या मदद कर सकती हूँ. 

बिहारी: देखो आशना, इतनी नासमझ तो तुम हो नहीं कि मेरी बात का मतलब ना समझो पर खैर कोई बात नहीं मैं तुम्हे समझाता हूँ. आशना एक दम हैरान होकर बिहारी काका की तरफ देखने लगी क्यूंकी दिन भर बिटिया-बिटिया बुलाने वाले काका एकदम उसका नाम लेकर बात कर रहे थे.
आशना डर के मारे काँपने लगी. बिहारी उसकी हालत समझते हुए बोला: डरो नहीं, मैं तुमसे कोई भी काम ज़बरदस्ती नहीं करवाउंगा पर अगर तुम वीरेंदर बाबू को पूरी तरह ठीक करने मे मेरी मदद करो तो मैं वादा करता हूँ कि तुम्हें ज़िंदगी भर काम करने की ज़रूरत ही नहीं रहेगी. आशना मूह फाडे बिहारी की बातें सुन रही थी, उसके गले से शब्द ही नही निकल पा रहे थे. वो काका की बातों का मतलब भली भाँति समझ रही थी. उसके दिल के किसी कोने में यह ख़याल तो कुछ दिनों से घर कर ही गया था पर वो इसे नकार रही थी, आख़िर वीरेंदर भाई था उसका. पता नहीं काका क्या क्या बोले जा रहे थे पर उनकी आख़िरी बात ने उसे चौंका दिया “आशना अगर तुमने मेरी बात मान ली तो मैं वादा करता हूँ कि वीरेंदर बाबू तुम्हे अपनाए या ना अपनाए पर मैं तुम्हें समाज मे इज़्ज़त दिलवाउन्गा और ज़रूरत पड़ने पर तुम्हारे बच्चो को मैं अपना नाम देने को तैयार हूँ. आशना का पहले तो मन किया कि खैंच के एक ज़ोरदार थप्पड़ बिहारी के गाल पर मारे पर उसने अपने आप को रोक लिया, क्यूंकी अगर बात बिगड़ गई तो फिर आशना को अपनी सफाई देनी मुश्किल हो जाएगी कि वो इतनी रात को बिहारी के कमरे में बिहारी काका से साथ क्या कर रही थी जब कि बिहारी इस समय शराब पी कर धुत था. 

बिहारी अपनीी बात बोलकर चुप हो गया और आशना की तरफ देखने लगा. आशना की साँसे तेज़ चल रही थी जिससे उसके उन्नत वक्ष उसकी टी-शर्ट मे हिल रहे थे. बिहारी बड़े ही ध्यान से उन्हे एकटक देखे जा रहा था. आशना ज़्यादा देर तक वहाँ बैठ ना सकी क्यूंकी अब उसे बिहारी काका की हवस भरी नज़रो मे उतावलापन नज़र आ रहा था. वो उठकर जैसे ही जाने को हुई. बिहारी बोला: कोई जल्दी नहीं है, तुम सोच समझ कर फ़ैसले लो. लेकिन इतना याद रखना कि तुम्हे मालामाल कर देंगे और तुम्हे अपनाने के लिए मैं तो हूँ ही ना अगर वीरेंदर बाबू ने तुम्हे बाद मे ठुकरा भी दिया तो. एक एक शब्द आशना की आत्मा को छल्नि कर रहा था. आशना दौड़ कर सीडीयाँ चढ़ने लगी तो बिहारी ने आवाज़ लगा कर कहा कि उपर आपके रूम मे दूध भी रखा है. अगर पिया नहीं तो अब पीकर सो जाना, नींद अच्छी आ जाएगी. आशना ने कोई जवाब नहीं दिया और भाग कर अपने कमरे मे आई और अंदर आते ही आशना धडाम से बेड पर पेट के बल गिरी और सिसक उठी. 

यह उसके साथ क्या हो रहा है. क्यूँ वो इस जगह आई, वो तो बहुत खुश थी अपनी उस छोटी सी दुनिया मे. वहाँ उसे कोई पाबंदी नहीं थी, वो वहाँ पर एक आज़ाद ज़िंदगी जी रही थी मगर यहाँ आते ही उसकी ज़िंदगी ने एक अलगा ही रुख़ ले लिया था. पहले उसे अपने ही भाई के घर मे झूठ बोलकर घुसना पड़ा और फिर अब वो अपनी नौकरी भी छोड़ चुकी थी. हालाँकि आशना के लिए नयी नौकरी ढूँढना कोई बड़ा मुश्किल काम नहीं था. अभी भी एक एरलाइन्स का ऑफर उसके पास था मगर वो यहाँ से जा भी तो नहीं सकती थी वीरेंदर को इस हालत मे छोड़कर. वो यह भी जानती थी कि यहाँ रुकना भी उसके लिए ठीक नहीं रहेगा. आख़िर वो कब तक वीरेंदर से सच छुपाकर रखेगी. उसे वीरेंदर से सच बोलने मे भी अब कोई प्राब्लम नहीं थी पर वो परेशान थी तो बिहारी की बातों से. कैसे उस इंसान ने सॉफ शब्दों मे आशना को समझा दिया कि उसे वीरेंदर की रखैल बनकर इस घर में रहना पड़ेगा और अगर वीरेंदर ने आशना से बेवफ़ाई की और इस सौदे मे वो प्रेग्नेंट हो गई तो बिहारी उससे शादी करके उसके बच्चों को अपना नाम दे देगा आशना काफ़ी देर तक सोचती रही और घुट घुट कर रोती रही. फिर उसे नीचे मैन दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई. आशना ने सोचा बुड्ढ़ा शराब पीकर कहीं जा रहा होगा. आशना जो कि बिहारी की इज़्ज़त करती थी उसकी इस हरकत से बिहारी उसकी नज़रो से गिर चुका था. वो जान चुकी थी बिहारी की गंदी नज़र उसके जिस्म पर है. उसने बिहारी की आँखों मे हवस के लाल डोरे तैरते देखे थे जब वो उससे बात कर रहा था. आशना मन मैं सोचने लगी कि हवस इंसान को कितना अँधा बना देती है. वो इंसान यह भी नही सोचता कि सामने उसकी बेटी है या बेटी जैसी कोई और. 

काफ़ी देर यूँही अपना मन हल्का करने के बाद आशना उठी और मूह धोने के लिए बातरूम मे चली गई. वॉशरूम मे मूह धोते हुए उसकी नज़र अपने चेहरे पर पड़ी. उसने अपने आप को ध्यान से देखा और सोचने लगी : क्या मैं इतनी खूबसूरत हूँ कि एक बूढ़ा इंसान भी मेरी तरफ आकर्षित हो सकता है. ऐसा सोचते सोचते आशना रूम मे आई और शीशे के सामने खड़ी होकर अपने आप को देखने लगी. अपने जिस्म को प्यासी नज़रो से देखते हुए उसके गाल लाल होने लगे और उसकी साँसे भारी होने लगी. आज कितने दिन हो गये थे उसे अपने आप से प्यार किए हुए. यह सोचते ही आशना के शरीर मे एक बिजली की लहर सी दौड़ गई और अनायास ही उसके हाथ अपनी टी-शर्ट के सिरो को पकड़ कर उपर उठाते चले गये.

आशना ने टी-शर्ट सिर से निकाल कर उसे एक तरफ़ उछाल दिया और फिर अपनी पॅंट के बटन खोलने लगी. आशना का दिल काफ़ी ज़ोरों से धड़क रहा था, उसने पॅंट भी टी-शर्ट के पास उछाल दी और टेबल पर रखे दूध को एक ही घूँट मे पीकर रज़ाई मे घुस गई. आशना ने जैसे ही आँखे बंद की उसके हाथ अपने आप ही उसके अन्छुए कुंवारे बदन पर हर जगह छाप छोड़ने लगे. आशना की एग्ज़ाइट्मेंट बढ़ती ही जा रही थी. अपने ब्रा कप अपने बूब्स से हटा कर उसने अपने गुलाबी निपल्स को अपनी उंगलियो मे कस लिया जिससे वो और भी तन कर खड़े हो गये जैसे चीख चीख कर बोल रहे हों कि आओ और घोंट दो हमारा गला. जैसे ही आशना ने निपल्स पर अपनी गिरफ़्त बढ़ाई उसके गले से एक आह निकली जो कि एक घुटि चीख का रूप लेकर उसके होंठों तक आ पहुँची. आशना बहुत ही ज़्यादा एग्ज़ाइटेड हो चुकी थी. वो सेक्स के नशे मे अपने बूब्स को लगातार मरोड़ रही थी. आशना ने हाथ पीछे लेजाते हुए अपने ब्रा के हुक्स खोल दिए और ब्रा को अपने कंधे से निकाल कर एक ओर उछाल दिया. अब आशना केवल एक पैंटी मे रज़ाई के अंदर रह गई थी. आशना ने अपने पैर के पंजो पर वेट डाल कर अपनी आस को हवा मे उठाया और धीरे धीरे से अपनी पैंटी भी उतार दी. जैसे जैसे पैंटी उसके बदन का साथ छोड़ रही थी आशना की साँसें तेज़ होने लगी. पैंटी को एक साइड पर फैंकते ही उसने अपनी दोनो टाँगे ज़ोरे से भींच ली जैसे कोई उसकी इस हरकत को देख रहा हो.वो इस वक्त ऐसा महसूस कर रही थी कि वो इस कमरे मे अकेली नहीं कोई और भी उसके साथ है. इस सोच ने उसे और भी रोमांचित कर दिया. उसका चेहरा एक दम आग उगल रहा था और निपल्स तन कर डाइमंड की तरह हार्ड हो गये थे. आशना जानती थी कि अब वो नहीं रुक पाएगी. धीरे धीरे आशना के थाइस का फासला बढ़ता गया और एक वक्त ऐसा आया कि आशना की दोनो टाँगो के बीच काफ़ी जगह बन गई. आशना ने अपने बाएँ हाथ की छोटी उंगली अपनी पुसी की दर्रार मे चलानी शुरू कर दी. लेकिन उसकी पुसी के बाल उसे पूरी तरह उलझाए हुए थे. धीरे धीरे उसने बालों को एक साइड करके अपनी उंगली के लिए जगह बनाई और जैसे ही उसने दरार मे उंगली उतारने की कोशिश की वो दर्द से कराह उठी. एग्ज़ाइट्मेंट मे उसने उंगली ज़्यादा अंदर घुसा दी थी. आशना ने फॉरन उंगली बाहर निकाली और उंगली की तरफ देखने लगी. आशना मन मे सोचते हुए: यह छोटी सी उंगली अंदर घुसने मे इतनी तकलीफ़ करती है तो तब क्या होगा जब इस मे कोई अपना पेनिस डालेगा. यह ख़याल आते ही उसे वीरेंदर की याद आ गई. आज तक आशना ने सिर्फ़ अपने आप को ही प्यार किया था पर आज उसे एक दम वीरेंदर की याद आ जाने से उसके तन बदन मे आग बढ़ने लगी. आशना ने लाख कोशिश की कि वो वीरेंदर के बारे मे ना सोचे पर इस वक्त दिल- दिमाग़ पर हावी हो रहा था. वीरेंदर का ख़याल आते ही उसकी हथेली अपनी पुसी पर चलने लगी. जैसे ही आशना ने अपनी आँखें बंद की उसे वीरेंदर का चेहरा दिखाई दिया और बस इतना काफ़ी था उसे उसके अंजाम तक पहुँचाने के लिए. उसकी आस हवा मे 5-6 बार उठी और फिर धीरे धीरे उसका शरीर ठंडा पड़ने लगा. जैसे ही आख़िरी धार उसकी पुसी ने छोड़ी आशना की आँखों के आगे बिहारी का चेहरा घूम गया. आशना ने डर कर एकदम आँखे खोल दी. धीरे धीरे उसने अपनी सांसो पर काबू पाया और फिर अच्छे से रज़ाई लेकर नींद की आगोश मे चली गई. 

अपने ही घर मे आशना का अपने साथ यह पहला प्यार था. वो जानती थी कि ऐसे कई दिन आएँगे जब उसे अपना सहारा बनना पड़ेगा क्यूंकी आशना जब भी फ्री होती उसे मास्टरबेशन करने का मन करता. उसे देख कर कोई सोच भी नहीं सकता था कि इतनी भोली भली सी दिखने वाली लड़की सेक्स मे इतना इंटेरेस्ट रखती होगी.

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पहला तो यह कि जब आशना ने रात को मैन दरवाज़े के खुलने की आवाज़ सुनी तो उस वक्त वो औरत दबे पाँव बिहारी के रूम मे घुस गई. उस औरत के रूम मे घुसते ही बिहारी ने जल्दी से कमरे का दरवाज़ा बंद किया और फिर टूट पड़ा उस औरत पर. बिहारी केवल एक अंडरवेर मे बैठ कर शराब पी रहा था और शराब के नशे मे चूर था. उसका लिंग तो आशना के झूलते हुए वक्षों को देख कर ही अकड़ने लग गया था.जब उस औरत ने कमरे में कदम रखा था तो बिहारी दरवाज़े की तरफ लपका और जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ उस औरत को अपनी गोद मे उठा कर नरम मुलायम बेड पर पटक दिया. दिखने मे वो औरत ज़्यादा उम्र की नहीं थी. कोई 36-37 साल की उम्र की वो औरत दिखने मे एक अच्छे घर से लगती थी. उसके ड्रेसिंग स्टाइल से यही लगता था कि वो काफ़ी मॉडर्न फॅमिली से बिलॉंग करती होगी. उस औरत ने बिहारी को रोकते हुआ कहा कि पहले काम की बात कर लें मेरे राजा. 

फ्रेंड्स यहाँ से आगे मैं कुछ ऐसे वर्ड्स यूज़ करने जा रही हूँ जो मेरे नेचर मे तो नहीं पर कहानी को देखते हुए या आपके टेस्ट को ध्यान मे रखते हुए उन्हे यूज़ करना पड़ेगा. शायद इसके द्वारा मैं आप सब को बिहारी और उस औरत की मानसिक स्तिथि के अवगत करवा सकूँ और आप अपने मन मे उनकी एक छवि बनाने मे कामयाब हो सकें.

बिहारी: वो बातें भी होती रहेंगी, पहले इसे तो संभाल, यह कहते ही उसने अपना अंडरवेर उतार फैंका और उस औरत के मूह पर दे मारा. 

बिहारी: देख साली पिछले दो दिन से तेरे नाम की मूठ मार मार कर यह अंडरवेर भी भर दिया पर तुझे इस पर दया नहीं आई.

उस औरत ने मुस्कुराते हुए कहा: तुम्हे देख कर लगता है कि तुम्हारा हमेशा खड़ा ही रहता है और यह कहकर बिहारी के आधे खड़े लंड को पकड़ कर कहने लगी, देखो तो क्या हाल बना रखा है तुमने इसका. बिहारी ने एक गरम सांस छोड़ी और उसकी ओर एक कदम बढ़ाया. एक कदम आगे आने से उसका लंड उस औरत के मूह से थोड़ा ही दूर रह गया. बिहारी अपना हाथ उसके सिर पर रखते हुए उसके मूह को अपने लंड के पास खींचने की कोशिस करने लगा. उस औरत ने कामुक नज़रों से बिहारी को देखा और फिर नज़रें उसके लंड पर रखकर अपने होंठों पर जीभ फेरने लगी. 

बिहारी: ले खा जा साली, पूरा खा ले.

इतना सुनते ही उस औरत ने अपना मूह खोला और गप्प से उसका लंड अपने मूह मे ले लिया. बिहारी खड़े खड़े ही काँप गया. उसका लंड उस औरत के मूह मे अपनी औकात दिखाने लगा और कुछ ही सेकेंड्स मे वो अपनी पूरी औकात मे आ गया. उस औरत को लंड मूह मे रखने मे काफ़ी कठिनाई हो रही थी. 4″ मूह के अंदर और करीब 2-2.5″ बाहर रखते हुए वो अपना मूह आगे पीछे करने लगी. बिहारी तो जैसे सातवें आसमान मे उड़ रहा था. उसने आगे झुक कर उस औरत की कमीज़ मे हाथ डाल कर उसकी 36″ तनी हुई चूचियाँ कस कर पकड़ ली. उस औरत ने भी पैंतरा बदला और उसके टॅट्टो को हाथो से मरोड़ने लगी. 

बिहारी: धीरे से साली, 

उस औरत ने लंड मूह से बाहर निकालते हुए कहा: इतने से ही डर गये क्या. फोन पर तो बड़ी बातें छोड़ रहा था. 

बिहारी: फोन पर बातें छोड़ रहा था साली अब तुझे चोदुन्गा फिर देखता हूँ तेरा दम. यह कह कर उसने उस औरत को बेड से उठाया और उसकी कमीज़ का सिरा पकड़ कर उसे उतार दिया. कमीज़ के बाद उसने उस औरत को बाहों मे भर कर उसके ब्रा स्ट्रॅप्स को नीचे सरका दिया.कुछ पलों के लिए वो औरत थोड़ी कसमसाई और फिर अपने आप को ढीला छोड़ दिया. बिहारी ने धीरे धीरे स्ट्रॅप्स पर दबाव बनाते हुए उसकी सफेद ब्रा उसकी कमर तक पहुँचा दी और उसके नंगे सीने मे उस औरत की चुचियों के नुकेले निपल्स धँस गये. बिहारी ने उसे और कस कर पकड़ लिया और उस औरत ने भी अपनी बाहों की गिरफात में उसे बाँध लिया. बिहारी ने पीछे से उसकी 38″ गान्ड पर अपने हाथ रख लिए और उसे अपनी तरफ दबाने लगा. जिससे उसका 8″ का लोड्‍ा उस औरत की चूत पर अपनी दस्तक देने लगा. वो औरत पूरी तरह से गीली हो गई थी. उसकी चूत से रस टपक कर उसकी पैंटी पूरी भिगो चुका था. बिहारी ने उसे एकदम पलटा दिया और उसकी पीठ से चिपक गया. उसने अपने होंठ उस औरत के कान के पिछले हिस्से पर रखे तो वो औरत और सिहर गई. उसकी आँखें बंद हो गई थी और होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान तैर रही थी. बिहारी ने उसकी सलवार का नाडा खोल कर ढीला किया तो उसकी सलवार एक दम से उसके पैरो में गिर पड़ी. उस औरत ने एक कदम आगे बढ़ाया और सलवार को पैरों से आज़ाद कर के वो बेड की तरफ चल दी. अब वो सिर्फ़ एक लसेदर पैंटी मे रह गई और उसकी ब्रा उसकी कमर मे झूल रही थी.बिहारी ने उसे पीछे से पकड़ा और घुमा कर बाहों मे उठा लिया. बिहारी की ताक़त का अंदाज़ा इस से ही लग जाता है कि कैसे उसने एक औरत को अपनी बाहों मे उठा रखा था. उसे बेड तक लेजाने मे उसे थोड़ी भी दिक्कत ना हुई और फिर उसने उसे बेड पर पटक दिया. वो औरत तो बस किसी दासी की तरह उसकी हर हर्केत बर्दाश्त कर रही थी. बिहारी ने उसे बेड के किनारे पर खींच कर उसकी टाँगे घुटनो से मोड़ दी और खुद उसकी टाँगो के बीच मूह रखकर फरश पर बैठ गया.

बिहारी ने उसकी चूत की खुसबु की एक लंबी सांस ली और फिर धीरे से उसकी सफेद पैंटी को उसकी चूत के एक साइड पर कर दिया. एक बार के लिए तो वो औरत थोड़ा चिहुनकि पर फिर शांत पड़ गई. उसे आने वाले क्षण का इंतज़ार था. बिहारी को चूत चूसना सबसे ज़्यादा पसंद था. उसका बस चले तो वो पूरी रात चूत ही चूस्ता रहे. तभी उस औरत के हलक से एक छोटी सी चीख निकली जब उसे महसूस हुआ कि बिहारी ने अपने होंठ उसकी तपती हुई चूत पर रख दिए हैं. बिहारी पहले तो होंठों से उसकी चूत चूस्ता रहा और वो औरत अपनी सिसकारिओ को रोकने की नाकाम कोशिश करती रही. काफ़ी देर तक चूत चूसने के बाद वो औरत बोली ” 69 मे आओ”. बिहारी उसकी बात सुनकर ज़मीन से उठा और अपने कपबोर्ड से वीडियो कॅमरा लेकर उसके सर के पीछे आ गया. वो औरत भी सीधा हुई और अपनी टांगे खोल कर घुटनो से मोड़ ली. बिहारी बिल्कुल उसके सिर से पीछे खड़ा था. उस औरत ने अपने शरीर को थोड़ा पीछे खिसकाया और अपना मूह उसकी टाँगो मे फसा दिया. उस औरत ने झट से अपना मूह खोला और बिहारी के टॅट्टो को अपने मूह मे ले लिया. बिहारी इस के लिए तैयार नही था वो तो वीडियो कॅमरा की सेट्टिंग मे लगा था.

कॅमरा अड्जस्ट करने के बाद बिहारी ने उसे टेबल पर बेड की तरफ ज़ूम करके रखा और बेड के पास आकर बिहारी ने अपने दोनो पैर उसके कंधो के इर्द गिर्द रखे और अपने शरीर को झुकाने लगा. अपने लोड्‍े को ठीक उसके होंठों पर रखकर उसने अपना मूह उसकी चूत की तरफ बढ़ा दिया. बिहारी का लोड्‍ा अपने मूह मे लेते ही वो औरत किसी कुतिया की तरह उस पर बुरी तरह से टूट पड़ी. बिहारी ने भी अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत पर हमला शुरू कर दिया. काफ़ी देर तक एक दूसरे को चूसने के बाद बिहारी बोला. क्या लगती हो चूत पर आज भी वैसे की वैसे ही टाइट माल है साली. 

उस औरत ने मूह से लंड निकालते हुए कहा कि मेरी चूत टाइट नहीं है यह तो तुम्हारा लोड्‍ा ही इतना बड़ा और मोटा है कि हर बार ऐसा लगता है कि मैं पहली बार चुद रही हूँ. बिहारी काफ़ी देर उसे इस मुद्रा मे चूस्ता रहा. उसके लंड मे उबाल आने लगा तो वो उसके उपर से हट गया और उसे उठाकर सोफे की दोनो साइड्स पर उसके घुटने रखकर उसे उल्टा बिठा दिया. बिहारी ने पलट कर अपने चेहरे को उसकी गान्ड के नीचे रखा और उसकी बड़ी गान्ड का सहारा लेकर सोफे से अपनी पीठ की टेक लगा ली जिस से उसका चेहरा सीधा उस औरत की चूत तक पहुँच गया. वो औरत तो बिहारी के इस आसन से निढाल हो गई और लगातार अपनी चूत उसके होंठों पर रगड़ने लगी.

करीब पाँच मिनिट तक ऐसे ही उसकी चूत चूसने के बाद जब वो औरत और बर्दाश्त ना कर सकी तो वो वहाँ से उठ खड़ी हो गई. बिहारी भी मन मार कर उठ गया. चूत चुसाइ से उसका मन कभी भरता ही नहीं. उस औरत ने बिहारी का लंड पकड़ा और उसे बेड की तरफ ले गई. बेड के पास उसे लेजा कर उसे पीठ के बल लिटा दिया और अपने होंठों पर जीब फिरने लगी. फिर उसने भी बेड पर अपने लिए जगह बनाई और बिहारी के लंड को चूसना शुरू कर दिया. बिहारी की आँखें बंद होने लगी. उसका लंड काफ़ी सख़्त हो गया और नसें भी उभर आई.

चूत चुसाइ से वो औरत तो पहले से ही बहाल थी. बिहारी भी अब और तड़पेने के मूड मे नहीं था. उसने बालो से पकड़ कर उसे अपने उपर खींच लिया और उस औरत ने अपने नाज़ुक हाथो से रास्ता दिखाते हुए उसका लंड अपनी चूत मे प्रवेश करवाना शुरू किया. लंड को अंदर लेते ही उस औरत ने ज़ोरदार तरीके से उसकी सवारी करनी शुरू कर दी पर बिहारी जैसे चूत के रसिया पर इसका कोई असर ना हुआ.

करीब 10 मिनिट की ज़ोरदार चुदाई के बाद वो औरत थकने लगी तो बोली,”मुझे अपने नीचे लो मैं थक गई हूँ”.

इतना सुनकर बिहारी उपर से हटा और उसकी टाँगों मे आकर अपनी पोज़िशन ले ली. बिहारी ने अपने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रखा और एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया. यह तो शूकर है कि उपर दोनो नीद की गोलियाँ खाकर सो चुके थे वरना इस चीख से तो अब तक उनकी नींद टूट चुकी होती. 

औरत: हरामी थोड़ा धीरे कर ना, बीवी थोड़े हूँ तेरी. 

बिहारी: रानी कुछ टाइम की ही बात रह गई है फिर तू मेरी बीवी भी बनेगी. 

औरत: ऐसा सोचना भी मत. मैं तो अपने पति के साथ ही रहूंगी. काम होने के बाद हम दोनो अलग हो जाएँगे. और फिर तभी मिला करेंगे जब मुझे तुम्हारे लोड्‍े की ज़रूरत पड़ेगी. 

बिहारी: वाह साली, तुझे तो तेरे पति का लंड मिल जाएगा पर मेरा क्या. मुझे इस उम्र मे अब लड़की कहाँ से मिलेगी. चल कोई बात नहीं मैं अपना जुगाड़ कर ही लूँगा लेकिन कभी कभी टेस्ट चेंज करने तुझे बुला लिया करूँगा. 

औरत: मेरे बस मे होता तो तुझे कभी छोड़ कर नहीं जाती पर समाज का क्या करूँ. इतनी इज़्ज़त कमाने के बाद ऐसी कोई हरकत करूँगी तो लोगों को शक हो सकता है हम दोनो पर, इसीलिए हम मिला तो करेंगे मगर ऐसे ही जैसे अभी मिलते हैं.

बिहारी लगातार धक्के लगाए जा रहा था. उस औरत ने भी अपनी गान्ड उठाकर उसके धक्कों का जवाब देना शुरू कर दिया था. 

औरत: आज का दिन कैसा रहा हमारे प्लान का. 

बिहारी: मैने उसके दिमाग़ मे बात डाल दी है, कुछ दिन तो वो नकारेगी फिर वो ज़रूर मान जाएगी, मुझे पूरा यकीन हैं.

औरत: इतना आसान नहीं है, वो भाई है उसका. इसके लिए हमे कल से ही एक और प्लान पर अमल करना होगा और उसने सारा प्लान बिहारी को समझा दिया. 

बिहारी: साली तू बड़ी छिनाल है. बेहन को भाई से चुदवाकर ही रहेगी. 

औरत: तभी तो हमारा सपना पूरा होगा. लेकिन मुझे एक बात का डर है

बिहारी ने सवालिया नज़रो से उसे देखा और धक्के लगाने जारी रखे

औरत: आशना अभी बहुत छोटी है या यूँ समझ लो कि वो अभी बच्ची है, सिर्फ़ 20 साल की ही तो है वो और वीरेंदर एक पागल घोड़ा. क्या आशना वीरेंदर को झेल पाएगी ? 

बिहारी ने हैरानी से उसे देखते हुए पूछा ” क्या मतलब”?

औरत: मैने खुद अपनी आँखों से हॉस्पिटल मे उसका ट्राउज़र उतार कर उसका लोड्‍ा देखा था ( जी हां वो औरत कोई और नहीं बीना ही है, डॉक्टर, बीना. आगे से मैं उसका नाम ही यूज़ करूँगी). 

बिहारी: साली छीनाल, अपने सारे पेशेंट्स के लोड्‍े चेक करती हो क्या. 

बीना: नहीं वो तो अभय ने मुझे बताया कि वीरेंदर के लोड्‍े की सील अभी तक टूटी नहीं है तो मुझे यकीन नहीं हुआ. इसलिए एक रात को मैने चेक किया तो वाकई उसके लोड्‍े की सील अब तक बरकरार है. इससे यह साफ पता चलती है कि ना तो उसने अभी तक मूठ मारी है ना ही कभी किसी लड़की को चोदा है.

बिहारी: मुझे तो लगा था कि वीरेंदर ने रूपाली को चोद दिया होगा पर वो तो ऐसे ही हाथ से निकल गई साली. (जी हां बिहारी जो के अनपढ़ होने का नाटक करता था उसने वीरेंदर की सारी डाइयरी पढ़ी थी और उस दिन भी जान भुज कर उसने यह डाइयरी वीरेंदर के कमरे मे बेड पोस्ट पर रख दी थी कि जब आशना वहाँ आए तो वो उसे पढ़े और वीरेंदर की ऐसी हालत जान कर वो उसके लिए परेशान हो ताकि बिहारी और बीना उसे अपने प्लान के मुताबिक ढाल सकें). बिहारी अब तक बीना को चोदे जा रहा था. बीना दो बार झाड़ चुकी थी पर बिहारी था कि रुकने का नाम नहीं ले रहा था. 

बीना: आज क्या बात है आधा घंटा हो गया तुम रुकने का नाम नहीं ले रहे. 

बिहारी अपने चेहरे पे कुटिल मुस्कान लाते हुए: जो दवाई मैं अपने दुश्मन को खिलाता हूँ आज थोड़ी सी मैने भी चख ली है.

बीना: क्या?.

बिहारी: हां, मेरी जान आज तो तेरा बॅंड बजा कर छोड़ूँगा. 

बीना जानती थी कि बिहारी अभी जल्दी झड़ने वाला नहीं है. वो दवाई थी ही ऐसी कि एक मामूली आदमी भी बिना रुके किसी भी औरत को घंटो चोद सकता था. 

बीना: मेरा तो बुरा हाल हो गया है. थोड़ी देर रुक जाओ, फिर बाद में कर लेना.

बिहारी: चुप चाप लेटी रह नहीं तो गान्ड भी चोद दूँगा. याद है ना वो दिन जब मैने पहली बार तेरी गान्ड मारी थी, उस दिन से लेकर आज तक तूने गान्ड को हाथ भी नही लगाने दिया. 

बीना: गान्ड कोई ऐसे मारी जाती है जैसे तू उस दिन मार रहा था. कितनी बुरी तरह रगडी थी मेरी गान्ड तूने, मैं तो 4-5 दिन ठीक से बैठ भी नहीं पाई थी.

बिहारी: आज तो हमे अपने प्लान की ढाल भी मिल गई है, आज तो तेरी गान्ड बनती ही है.

बीना जो कि काफ़ी थक गई थी और उसकी चूत भी छीलनी शुरू हो गई थी अजीब सी कशमकश में पड़ गई थी. अगर “ना” करती है तो चूत का बुरा हाल हो जाता और अगर “हां” करती है तो गान्ड का. लेकिन उसकी चूत मे उठ रहे दर्द को देखते हुए उसे अपनी गान्ड देना ही बेहतर समझा. 

बीना: चल आज इस खुशी के मोके पर तू मेरी गान्ड भी मार ले मगर तेल लगा कर और प्यार से, नहीं तो आज के बाद मेरी गान्ड को भूल ही जाना. 

बिहारी तो जैसे एकदम खिल उठा. उसे गान्ड मारना बहुत पसंद था और वैसे भी बीना की गान्ड एकदम38″ की गोल गदराई हुई गान्ड थी, 

बिहारी: ठीक है चल कुतिया बन जा मैं तेल लेकर आता हूँ. इतना कह कर बिहारी उसके उपर से उठा और अपना लंड बीना की चूत से खींच लिया. 

बीना ने राहत की साँस ली. बिहारी नंगा ही किचन मे गया और तेल एक कटोरी मे डाल कर ले आया. बिहारी ने ढेर सारा तेल उसकी गान्ड में डालकर उंगली से उसे खूब चिकना किया और फिर अपने लोड्‍े को तेल लगा कर भिड़ा दिया उसे बीना की गान्ड से. बीना का पहला गान्ड एक्सपीरियंस भी बिहारी के साथ काफ़ी दर्दनाक था उसे अपनी गान्ड को रिलॅक्स रखने में मुश्किल आ रही थी. 

बिहारी: थोड़ा रिलॅक्स करो और यकीन रखो आज मैं तुम्हें गान्ड मे वो मज़ा दूँगा कि तुम हर बार मुझसे अपनी गान्ड मरवाने की विनती करोगी. बीना ने अपनी गान्ड के सुराख को ढीला छोड़ा और तकिये मे मूह छिपा लिया. उसने दाँतों से बेड की चद्दर को पकड़ रखा था और अपने हाथो से कस कर तकिये को पड़के हुए वो आने वाले पल के लिए तैयार थी. 

बिहारी ने लंड का सुपाडा बीना की गान्ड के सुराख मे लगा कर हल्के हल्के दबाव डालना शुरू किया. हल्का हल्का दबाव डालने से और तेल की चिकनाहट से उसका सुपाडा बीना की टाइट गान्ड मे उतारने लगा. बीना दर्द से छटपटाने लगी पर यह दर्द अब तक सहन करने लायक था. जैसे ही लंड का सुपाडा एक दम से उसके गान्ड मे घुसा बीना का सर उछल कर उपर को हुआ और गान्ड पीछे दब गई जिससे बिहारी का लोड्‍ा और अंदर घुस गया. 

बीना: बिहारी बस ऐसे ही आहिस्ता-आहिस्ता उफुफूफफफफफफफफ्फ़. थोड़ा रूको, सांस लेने दो अहााहह.

इस बार बिहारी ने कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखाई और वहीं रुक गया. वो बीना की गान्ड से हाथ नहीं धोना चाहता था. उसे बीना की गान्ड से बेहद प्यार था. ऐसी फैली हुई गान्ड देख कर एक बार अपने होश खो चुका था लेकिन इस बार वो काफ़ी सावधान था, बीना को थोड़ा रिलॅक्स होते देख कर उसने एक ज़ोर का झटका मारा और आधा लंड उसकी गान्ड की गहराई मे उतार दिया. बीना का सिर से लेकर कमर तक का हिस्सा कुछ देर हवा मे झूल गया मगर उसने कोई शिकायत नहीं की, शायद उसे भी मज़ा आना शुरू हो गया था. 

बिहारी ने ज़्यादा देर ना करते हुए एक और ज़ोरदार शॉट मारा और जड तक अपने पूरा लंड बीना की तंग गान्ड मे घुसा दिया. बिहारी के बड़े बड़े टटटे बीना की चूत को चूम रहे थे. इस आख़िरी धक्के से बीना की गान्ड मे एक तेज़ दर्द की लहर दौड़ गई मगर इस मीठे दर्द ने उसे स्वर्ग मे पहुँचा दिया और वो एक बार फिर से झड़ने लगी. बीना तो पहले ही बिहारी के चोदने की कला की कायल थी लेकिन आज जिस तरह से बिहारी ने ताक़त और सूझबूझ से बीना की गान्ड मे अपना लंड उतारा था बीना तो जैसे स्वर्ग मे ही पहुँच गई. कुछ देर बाद बीना की गान्ड से सुपाडे तक लंड निकाल कर बिहारी ने एक और ज़ोरदार शॉट के साथ पूरा लंड पेल दिया. बीना तो हर धक्के के साथ आगे को खिसक जाती. बिहारी ने उसकी नाज़ुक गोल गान्ड को अपने हाथो से थाम कर उसकी सवारी करनी शुरू कर दी. बीना के टाइट छेद ने उसका लंड फँसा कर रखा था और उस पर बीना ने अपने सुराख को खोलना सिकोड़ना शुरू कर दिया जिससे बिहारी भी पागल हो उठा और उसने बीना की ज़ोरदार चुदाई शुरू कर दी. बीना मस्ती में कराह रही थी. अगर बिहारी पहली बार ही इतना सयम बरतते हुए उसकी गान्ड चोदता तो अब तक बीना कई बार उसे अपनी गान्ड दे चुकी होती. 

बिहारी जैसा दमदार मर्द पाकर बीना धन्य हो गई थी. वहीं बिहारी भी बीना जैसी हसीन और हाइ सोसाइटी की औरत को पा कर सातवें आसमान पर था. उसने कभी सोचा भी नहीं था कि उसे कभी कोई हाइ सोसाइटी की औरत भी मिलेगी, वो तो बस नौकरानियो को चोद कर ही खुश था, बीना जैसी औरत के बारे मे तो उसने सोचा भी नही था.

बीना: अब हमे जल्द ही कुछ करना पड़ेगा ताकि हम सारा माल हथिया सकें, मैं अब तंग आ गई हूँ इस रोज़ की ज़िंदगी से. उमर ढलती जा रही है, अब बस ऐश करनी है. 

बिहारी: काम हो जाने के बाद आशना का क्या करना है? 

बीना: तुम क्या कहते हो?

बिहारी: मैं तो चाहता हूँ कि वीरेंदर की मौत के बाद मैं उसे अपनी रखैल बना कर रखूं, साली बहुत गरम चीज़ है. क्या मम्मे और गान्ड पाई है साली ने. 

बीना: कुत्ता कहीं का, जहाँ हड्डी देखी वहीं लार टपकना शुरू. 

बिहारी: डार्लिंग तुम्हे जलने की ज़रूरत नहीं है, तुम्हारे हिस्से का प्यार तुम्हे मिलता रहेगा. 

बीना: अपने हिस्से का प्यार तो मैं छीन ही लूँगी मगर मुझे इस बात का डर है कि कहीं वीरेंदर का लोड्‍ा लेने के बाद वो वीरेंदर से पहले ही ना मर जाए. उसका साइज़ कोई मामूली नहीं है.

बिहारी: अरे यार तुम बार बार उसके साइज़ को लेकर डर क्यूँ रही हो, कहीं तुम्हे उसे लेने का मन तो नहीं कर रहा. वैसे भी आज तक कोई औरत चुदने से मरी है क्या?

बीना: मैं तो मर ही जाउ उसके साइज़ से. ढीलेपन में भी कोई 6 इंच लंबा और 3.5″ मोटा था. मैं यकीन के साथ कह सकती हूँ कि खड़ा होने के बाद कम से कम 8-9″ लंबा और 4-4.5″ मोटा ज़रूर होगा. आशना की उम्र के हिसाब से यह उसके लिए बहुत बड़ा होगा. हां अगर वो पहले से खेली खाई होती तो फिर डरने की कोई बात नही होती, मगर मुझे यकीन है कि भाई की तरह बेहन भी पूरी कुँवारी है.

बिहारी: फिर तो आशना मेरे किसी काम की नहीं रहेगी.

बीना: क्या तुम सचमुच में आशना को रखैल बना कर रखना चाहते हो.

बिहारी: मैं तो यह सोच कर ही रोमांचित हो जाता हूँ कि एक 20 साल की लड़की जो कि एयिर्हसटेस्स है मेरे नीचे होगी और मैं उसे चोदुन्गा. 

बीना की गान्ड चोदते चोदते बिहारी को करीब आधा घंटा हो चुका था. आशना का ख़याल आते ही वो उसे मन ही मन नंगा करने लगता है और बीना की ज़ोरदार चुदाई शुरू कर देता है. पिछले एक, सवा एक घंटे की चुदाई से बीना बहाल सी हो गई थी. उसमे अब बोलने की हिम्मत भी नहीं बची थी. वो बस गान्ड हवा मे उठाए बिहारी के झड़ने का इंतज़ार कर रही थी. बिहारी की स्पीड से वो समझ गई कि बिहारी करीब है.

बीना: यॅ, कम ऑन, कम ऑन रज्जा, भर दो अपना सारा रस आशना की गान्ड मे( बीना जैसी खेली खाई औरत ने ताड़ लिया था कि बिहारी के मन मे इस वक्त आशना का जिस्म घूम रहा है). मार लो उसकी कुँवारी नरम गान्ड और बना लो उसे अपनी रंडी. 

इतना सुनते ही बिहारी के वीर्य का बाँध टूट गया और वो झर झर करता बीना की गान्ड में अपना लावा उगलने लगा. करीब डेढ़ मिनिट तक उसके लंड से वीर्य निकल कर बीना की गान्ड भरता रहा और फिर उसके बाद पहले बीना बेड पर और फिर उसके उपर बिहारी धडाम से गिर गया. इतनी ठंड में भी दोनो के शरीर पसीने से नहा गये थे. 10 मिनिट तक दोनो अपनी अपनी साँसे ठीक करने में लगे रहे. थोड़ी देर बाद बीना उठी और अटॅच्ड बाथरूम मे घुस गई. उसने अच्छे से अपने आपको को सॉफ किया. गान्ड और चूत को धोया और बाहर आ गई.

बिहारी उसे देखते हुए सोच रहा था कि कैसी किस्मत पाई है उसने पहले तो एक डॉक्टर. मिली चोदने को और अब कुछ ही दिनों मे उसकी झोली मे एक 20 साल की लड़की होगी जिसे वो दिन रात चोदता ही रहेगा. 

बीना बाथरूम से बाहर आने के बाद अपने कपड़े पहनने लगी. बिहारी उसे देखे जा रहा था. एकदम साफ रंग और दाग रहित शरीर की मल्लिका अभी कुछ देर पहले उसके बेड पर नंगी लेटी हुई थी और वो उसे चोद रहा था. उसे अपनी किस्मत पर गुरूर हो रहा था. कपड़े पहनने के बाद बीना ने अपने बॅग से एक पॅकेट निकाल कर बिहारी को दे दिया.

बीना: यह लो और कल से काम शुरू कर दो. वीरेंदर की तरह आशना को भी इस पाउडर की पहले थोड़ी थोड़ी सी डोज ही देना ताकि कुछ ही दिनों में वो इसकी आदि हो जाए और फिर जैसे ही इसकी डोज बढ़ाई जाए तो उसके पास नंगी होकर वीरेंदर के पास जाने के सिवा और कोई रास्ता ही ना रहे. कुछ ही दिनों मे वीरेंदर के दमदार लोड्‍े से तुम्हे एक सील पॅक चूत चुदते हुए देखने को मिलेगी, और हां मुझे सारी रेकॉर्डिंग चाहिए आशना की चूत उधघाटन की.

बिहारी: जो हुकुम मेरी सरकार और उसने वो पॅकेट उससे ले लिया. 

बीना: अभय 15 दिन के टूर पर है, तब तक मैं रोज़ कुछ रातो के लिए तुम्हारे पास आउन्गी तुम्हे अपनी गान्ड देने और अगर इस बीच ही हमारा प्लान काम कर गया तो हम दोनो ही मिलकर उनके मिलन को अपनी आँखों से देखेंगे और रेकॉर्ड करेंगे. 

बिहारी केवल मुस्कुरा कर रह गया आने वाले दिनों को सोच कर. 

बीना 3:30 बजे तक हॉस्पिटल मे अपने रूम मे लेटी हुई आगे के प्लान के बारे मे सोच रही थी.

अगली सुबह सबसे पहले जागने वालो मे बिहारी था बाकी दोनो तो नींद की गोलियो के असर से अभी भी सपनो की दुनिया में खोए हुए थे. जहाँ वीरेंदर पिल्लो को अपने साथ ऐसे चिपकाए सोया था जैसे कि वो किसी लड़की को अपने बदन के अंदर समा लेना चाहता हो वहीं आशना ने भी एक पिल्लो अपनी टाँगों के दरमियाँ ऐसे जाकड़ रखा था जैसे वो उसे अपना सारा रस पिला देना चाहती हो. सुबह के करीब 7:00 बजे बिहारी की नींद खुली. घड़ी की तरफ देखते ही वो हड़बड़ा कर उठा और नंगा ही बाथरूम में जाकर अपने सुबह के कृत्य करने मे मसरूफ़ हो गया. करीब 20 मिनिट मे वो नहा धो कर बाथरूम से बाहर निकला और कपड़े पहन कर कमरे को अस्त-व्यस्त छोड़ कर किचन की तरफ चल दिया चाइ बनाने.

बिहारी के कमरे मे कोई जाता नहीं था सो इसलिए उसने कमरे की हालत सुधारने का नहीं सोचा. चाइ को गॅस पर रखने के बाद वो उपर की तरफ पहुँचा वीरेंदर को जगाने. 

जैसे ही वो वीरेंदर के दरवाज़े को नॉक करने को हुआ, उसे एक झटका लगा. उसने देखा कि आशना का दरवाज़ा हल्का सा खुला है (आपने पढ़ा ही होगा कि रात को जब आशना अपने कमरे मे आई तो वो सीधा आकर बेड पर लेट गई थी. वो दरवाज़ा लॉक करना भूल गई थी). बिहारी के चेहरे पर कुटिल मुस्कान आ गई और वो दबे पावं वहाँ पहुँचा. उसने धीरे से दरवाज़े को धकेला तो दरवाज़ा खुलता चला गया. बिहारी ने झाँक कर देखा तो पाया कि आशना बेसूध होकर सोई है.

उसका पूरा शरीर रज़ाई से ढका है और वो काफ़ी सिकुड कर सो रही है. शायद ठंड के कारण वो ऐसी हालत मे सोई थी. बिहारी के दिमाग़ मे रात को बीना के द्वारा बताया हुआ प्लान दौड़ गया और वो फॉरन कमरे मे प्रवेश कर गया. तेज़ी से आगे बढ़ते हुए उसके पैर किसी चीज़ मे फँसे और वो मूह के बल गिरते गिरते बचा. लेकिन फिर भी वो हाथो के बल नीचे गिर ही गया .गिरते ही उसके हाथो मे किसी चीज़ का एहसाह हुआ.रूम मे हल्की हल्की रोशनी थी, उसने अपने हाथ से उस चीज़ को पकड़ा तो उसके हाथो मे एक ऐसी चीज़ लगी जिस से उसकी आँखें चमक उठी और उसने उस चीज़ को पास ले जा कर उसे चूम लिया. जी हां, वो आशना की ब्रा थी जो रात को उसने उतार कर फैंक दी थी. काफ़ी देर उसे चूसने के बाद उसे ध्यान आया कि वो गिरा कैसे.

तेज़ी से उठ कर देखा तो उसके लंड मे करेंट दौड़ गया. उसके पैरों मे पड़ी आशना की पैंटी चीख चीख पर गवाही दे रही थी कि आशना रज़ाई के अंदर बिल्कुल नंगी सोई है. बिहारी के दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया. उसका मन हुआ कि अभी रज़ाई मे घुस कर आशना से लिपट जाए और उस कमसिन कली को फूल बनाकर उसके जिस्म पर अपनी पहली मोहर लगा दे पर किसी तरह उसने अपने आप पर काबू पाया. पहले वो काम तो कर ले जो वो करने आया है. 

उसने इधर उधर नज़र घुमाई और जल्द ही उसे अपनी मंज़िल मिल गई. एक मेज़ पर पड़े आशना के बॅग की तरफ वो लपका और उसके पास पड़े हॅंडबॅग को उठा कर उसने उसकी ज़िप खोली और उसके अंदर से एक छोटा सा हॅंड बॅग निकाल कर अपने कुर्ते की जेब मे रख लिया. बॅग की ज़िप बंद करके उसने वो बॅग दोबारा वही उसी जगह रख दिया. काम हो जाने के बाद बिहारी आशना के बेड की ओर मुड़ा तो उसे झटका सा लगा. आशना ने रज़ाई से अपनी गोरी बाजुए बाहर निकाल ली थी, कंधे से थोड़ा से नीचे तक उसका मखमली शरीर बिहारी की आँखों के सामने था. ऐसा पहली बार हो रहा था कि बिहारी के सामने एक खूबसूरत लड़की रज़ाई के अंदर बिल्कुल नंगी पड़ी थी पर वो हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था आगे बढ़ने की. बिहारी का पूरा शरीर काँपने लगा और इस से पहले कि वो अपने होश खो देता उसने तेज़ी से आशना की ब्रा और पैंटी उठाई और झट से कमरे के बाहर आकर धीरे से कमरे का दरवाज़ा वैसे ही बंद कर दिया जैसे वो पहले था. वो जानता था कि सुबह की ठंडी हवा मे आशना अब ज़्यादा देर तक सो नहीं सकेगी. दरवाज़ा बंद करके वो नीचे किचन मे आया तो चाइ तैयार थी. उसने गॅस बंद की और अपने कमरे मे जाकर अपनी अलमारी की सेफ मे वो हॅंड बॅग रख दिया और साथ ही अपने साथ लाई हुई आशना की पिंक जालीदार पैंटी और ब्रा भी रख दी.

अलमारी को बंद करके उसने सेफ की चाबी छुपा दी और दो कप मे चाइ डाल कर, कप को ट्रे मे रखकर वो उपर की तरफ चल पड़ा. वीरेंदर के दरवाज़े की ओर जाकर उसने वीरेंदर को आवाज़ लगाई. 

बिहारी: छोटे मलिक उठिए चाइ तैयार है. कुछ देर वहाँ खड़े रहने के बाद उसने फिर आवाज़ लगाई और फिर धीरे से दरवाज़े पर नॉक की पर उसे कोई हलचल महसूस नहीं हुई. उसने इस बार ज़ोर से दरवाज़ा पीटा तो वीरेंदर की अलसाई भरी आवाज़ आई, काका “एक मिनिट अभी खोलता हूँ”. इतना कहकर जब वीरेंदर उठा तो एक बार तो सर्द लहर से वो वहीं तिठुर कर रह गया. फिर उसे ख़याल आया कि रात को बाथरूम से आके तो वो बिल्कुल नंगा ही सो गया था. उसने झट से अलमारी से एक पॅंट और टी-शर्ट निकाली और उसे पहन कर दरवाज़ा खोल दिया. 

वीरेंदर: आइए काका, वो आज नींद बहुत गहरी आई थी इस लिए आपकी आवाज़ सुन नही पाया. 

बिहारी: कोई बात नहीं मालिक, यह लीजिए चाइ पीजिए मैं आशना बिटिया को भी जगा कर आता हूँ. 

वीरेंदर: काका तुम ट्रे मुझे दे दो आशना को चाइ मैं दे देता हूँ.

इतना सुनते हे बिहारी को जैसे साँप सूंघ गया. उसने तो सोचा था कि वीरेंदर चाइ पीने के बाद बाथरूम चला जाएगा और वो आशना के कमरे मे जाके पहले तो उसके रूप को निहारेगा और फिर उसे जगा कर उसके नंगे शरीर का मुयायना करेगा पर यहाँ तो सारा खेल ही उलट गया. 

वीरेंदर: क्या हुआ काका? 

बिहारी (वर्तमान मे आते हुए): कुछ नहीं मालिक, जैसा आपको ठीक लगे और यह कह कर उसने चाइ की ट्रे वीरेंदर को थम दी. 

वीरेंदर ने ट्रे साइड मे रखी और जल्दी से बाथरूम मे घुस गया. जैसे ही वीरेंदर बाथरूम मे घुसा, बिहारी मन मार कर नीचे जाने को हुआ तो एक बार फिर वो लड़खड़ाते हुए नीचे गिरने ही वाला था के उसने अपने आप को संभाल लिया. उसने सीधे खड़ा होकर देखा तो वीरेंदर के अंडरवेर मे उसका पैर फँसा हुआ था. बिहारी ने झल्ला कर अपने पैर को हवा मे उछाल दिया जिससे वीरेंदर का अंडरवेर सीधा एक मेज़ के उपर जाकर गिरा, आधा मेज़ पर आधा हवा मे झूलने लगा. बिहारी (मन में): साले दोनो रात को अंडरवेर उतार कर सोते हैं, क्या भाई -बेहन की जोड़ी है? बाथरूम मे पानी की आवाज़ बंद हुई ही थी कि बिहारी लपक कर कमरे से बाहर आ गया और चुपके से सीडीयो के पास बने एक छोटे से स्टोर मे जाकर वीरेंदर का आशना के कमरे मे घुसने का इंतज़ार करने लगा. वो देखना चाहता था कि वीरेंदर कैसा रिएक्ट करता है जब वो आशना को नंगी सोते हुए देखेगा

उधर जिस वक्त बिहारी वीरेंदर के रूम का डोर नॉक कर रहा था, उसी वक्त आशना की नींद खुल गई थी. उसका सिर काफ़ी दर्द कर रहा था. नींद खुलते ही उसे कल रात वाले सारे वाक्यात याद आ गये. उसका दिल बिहारी के लिए नफ़रत से भर गया और फिर रात को अपने शरीर के साथ खेली प्रेम क्रीड़ा का ख़याल आते ही उसे एक झटका लगा. वो तो बिल्कुल नंगी ही सो गई थी. वो फॉरन बेड से उठी और अपने कपड़े ढूँडने लगी. जैसे ही उसकी नज़र दरवाज़े पर पड़ी. आशना के दिल ने धड़कना बंद कर दिया था, उसे याद आया कि कैसे वो रात को कमरे मे आते ही बिस्तर पर गिर पड़ी और फुट-फुट कर रोने लगी थी. वो इतनी लापरवाह कैसे हो गई कि उसे दरवाज़ा लॉक करने का ख़याल ही नहीं रहा. कहीं कोई आ जाता तो?. 

आशना ने झट से दरवाज़ा लॉक किया और अपने कपड़े ढूँडने लगी. सर्दी और शरम की वजह से वो कांप रही थी. आशना ने रात को उतारे कपड़ो पर ध्यान ना देते हुए जल्दी से बॅग से दो एक जोड़ी नये कपड़े और अंडरगार्मेंट्स का सेट निकाला और बाथरूम की तरफ भागी. बाथरूम मैं आकर उसने जल्दी से टवल लपेटा और चैन की सांस ली. आशना का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था. वो सोच रही थी कि आज ना जाने क्या हो जाता अगर वो टाइम पर ना जागती तो. अभी वो ब्रश करके टाय्लेट यूज़ करने ही वाली थी कि उसके दरवाज़े पर नॉक हुआ. 

आशना ने गुस्से से चिल्लाकर कहा: क्या है काका? 

एक पल के लिए तो वीरेंदर भी सहम गया, लेकिन फिर उसने कहा. आशना दरवाज़ा खोलो मैं हूँ “वीरेंदर”, आओ दोनो चाइ पीते हैं. वीरेंदर की आवाज़ सुनते ही आशना का मन खिल उठा. आज वीरेंदर खुद उसके लिए चाइ लाया था. उसका चेहरा शरम से लाल हो उठा. उसने बड़े शर्मीले अंदाज़ मे कहा, ” वीरेंदर मैं नहा रही हूँ थोड़ी देर मे तुम्हारे रूम मे ही आती हूँ. वीरेंदर उसे बाइ बोल कर अपने रूम मे चला गया. 

वहाँ बिहारी की हालत ना खुश होने लायक थी और ना दुखी होने लायक. खुश वो इसलिए नहीं था क्यूंकी आशना ने दरवाज़े पर वीरेंदर को बिहारी समझ कर काफ़ी गुस्से से बात की थी और दुखी वो इस लिए नहीं था क्यूंकी जो वो देखना चाहता था वो वीरेंदर भी नहीं देख पाया था क्यूंकी आशना नींद से जाग चुकी थी और उसने दरवाज़ा भी लॉक कर दिया था. 

बिहारी ने मन मे सोचा: फुदक ले साली अगर अपने लंड पर तुझे ना नचाया तो मेरा भी नाम बिहारी नहीं और वैसे भी कुछ दिन की बात ही रह गई है तब तक तो तेरी पैंटी मे ही मूठ मारूँगा और तेरे मम्मों से लगी तेरी अंगिया को चूस चूस कर खा जाउन्गा. बिहारी नीचे चला गया और थोड़ी देर बाद आशना भी तैयार होकर वीरेंदर के रूम मे चली आई.

आशना ने दरवाज़ा नॉक किया तो वीरेंदर ने उसे कहा कि ” अंदर आ जाओ आशना, दरवाज़ा खुला है”. आशना ने दरवाज़ा खोला और अंदर आ गई. आज वीरेंदर ने फुल स्लेव वाइट टी-शर्ट और ब्लॅक जीन्स पहनी थी और आशना भी एक टाइट वाइट टी-शर्ट और स्किन टाइट ब्लॅक जीन्स मे थी. दोनो एक दूसरे को देख कर चौंके और दोनो ही मुस्कुरा दिए. 

आशना: लगता है आज सनडे के दिन यह हमारा ड्रेस कोड है. 

वीरेंदर, जो कि टाइट कपड़ों मे आशना के हुश्न को निहार रहा था, आशना को सुनकर भी इग्नोर कर दिया और एकटक उसे देखता ही रहा. वीरेंदर के ज़हन मे रात वाली बात आ गई कि कैसे ज़िंदगी मे पहली बार इस लड़की ने उसे मास्टरबेट करने पर मजबूर कर दिया. आशना ने जब वीरेंदर की नज़रों का पीछा किया तो उसका दिल ज़ोरो से धड़कने लगा और उसका गुलाबी रंग और निखर गया. उसकी नज़रें नीचे को झुक गई और होंठों पर हल्की सी शर्मीली मुस्कान तैर गई. आशना ने जैसे ही फिर से नज़रें उठानी चाही तो उसे एक और झटका लगा, उसकी नज़र वीरेंदर के पीछे पड़े मेज़ पर गई जहाँ पर उसका अंडरवेर झूल रहा था (याद है ना बिहारी ने झल्ला के जब पैर हवा मे उछाला था).. आशना की साँसें तेज़ चलने लगी और वो मूह फेर कर वीरेंदर की तरफ पीठ करके खड़ी हो गई. वीरेंदर की तो जैसे सांस ही अटक गई. कहाँ पहले उसकी नज़रें आशना के गोल सुढ़ॉल उभारों का जायज़ा ले रही थी और कहाँ अब उसकी नज़रें आशना के गोल भारी नितंबो पर आकर अटक गई थी. वीरेंदर के लिंग मे हलचल होनी शुरू हुई तो उसे ख़याल आया कि वो तो जल्दी मे अंडरवेर पहनना ही भूल गया है. वीरेंदर को इसका आभास होते ही वो शरम से आँखें झुका कर वहीं बैठा रहा, लेकिन आशना के नितंब बार बार उसे न्योता दे रहे थे. जब काफ़ी देर तक कोई कुछ ना बोला तो आशना को अपनी ग़लती का एहसास हुआ, उसे एकदम वीरेंदर की नज़रें अपने नितंबों में गढ़ती हुई महसूस हुई और पहली बार उसकी पुसी ने अपने भाई के कारण एक छोटी सी लहर बहा दी.

वहीं वीरेंदर का लिंग भी कहाँ पीछे रहने वाला था, वो भी प्रेकुं की बूँदें टपकाने लगा. कुछ ऐसे ही थोड़ी देर सब शांत रहा. वो दोनो होश मे आए जब वीरेंदर के मोबाइल की घंटी बजी “कहता है पल-पल तुमसे होके दिल यह दीवाना, एक पल भी जान-ए-जाना मुझसे मुझसे दूर नहीं जाना. प्यार किया तो निभाना”. वीरेंदर ने हड़बड़ाहट मे फोन उठाया (तब तक आशना भी सम्भल चुकी थी और वीरेंदर के सामने वाले सोफे पर बैठ चुकी थी).

वीरेंदर: हेलो डॉक्टर. आंटी, ……………..,जी हां मैं बिल्कुल ठीक महसूस कर रहा हूँ. …………….हां-हां आइए ना, आज लंच साथ ही करते हैं. जी वो अपने रूम मे होगी, मैं बात कर्वाऊ आपसे…….ओके आंटी सी यू लेटर, और फोन काट दिया. 

वीरेंदर आशना की तरफ देखते हुए: वो डॉक्टर. आंटी का फोन आया था, वो कह रही थी कि आज दोपहर को वो आएँगी, चेकप भी हो जाएगा और साथ मे लंच भी कर लेंगी. 

आशना: आप उन्हें डॉक्टर. आंटी क्यूँ कहते है, वो इतनी एज्ड थोड़े ही हैं( आशना ने बात पलटते हुए कहा). इस बार वीरेंदर मुस्कुरा पड़ा जिस से कमरे मे फैला तनाव थोड़ा हल्का होने लगा. 

वीरेंदर: यह तो मैं उन्हें चिडाने के लिए कहता था, लेकिन अब तो आदत हो गई है. ऐकचुली जब वो अभय अंकल से शादी करके नयी नयी आई थी तो मैं उन्हें आंटी कहता था और वो काफ़ी चिड़ती थी. बस उनको चिडाने के चक्कर मे मेरे मुँह पर यह शब्द बैठ सा गया है. 

आशना(स्माइल करते हुए): आप ऐसे ही हँसते रहा करो, आप पर स्माइल बहुत सूट करती है. 

वीरेंदर उसके चेहरे की तरफ देखता रह जाता है. वो सोचने लगता है कि जब से आशना से उसकी मुलाकात हुई है वो काफ़ी खुश रहने लगा है और रात को तो उसने आशना के बारे मे सोच कर वो कर दिया जो उसने कभी सोचा भी ना था. वीरेंदर के दिल मे आया कि कहीं रात को आशना ने उसकी दर्द भरी चीख और आहें सुन तो नहीं ली तभी आज वो इतना शरमा रही है जबकि आशना यह सोच कर शर्मिंदा थी कि शायद रात को वीरेंदर ने उसे देख लिया था वो सब करते हुए, क्यूंकी दरवाज़ा तो खुला ही रह गया था, इसीलिए वीरेंदर इतनी बेशर्मी से उसे घूर रहा था. 

काफ़ी देर तक फिर कोई कुछ ना बोला. उनकी चुप्पी को आशना ने तोड़ते हुए कहा कि आपने डॉक्टर. बीना को झूठ क्यूँ बोला कि मैं अपने रूम मे हूँ.वीरेंदर आशना का सवाल सुन कर हड़बड़ा गया और इस से पहले कुछ जवाब देता , आशना का फोन बज उठा ” ज़रा-ज़रा टच मी टच मी टच मी ओ ज़रा- ज़रा किस मी किस मी किस मी”. आशना ने फॉरन अपनी पॅंट की जेब से मोबाइल निकाला और उसे ऑन कर दिया. हेलो डॉक्टर. आंट……….मेरा मतलब डॉक्टर. बीना (वीरेंदर ने उसकी तरफ देखा और दोनो के चेहरे खिल उठे)………..जी हां मैं ठीक हूँ, आप बताइए. ………………….ओह यह तो काफ़ी अच्छा है, नहीं अभी मैं अपने रूम मे ही हूँ, आप आ जाइए फिर मिलकर बात करेंगे. …………………. ओके यू टू, बाइ और यह कह कर फोन काट दिया. 

इस बार वीरेंदर ने गला सॉफ करते हुए कहा “आहें…आहेंम…. तो आप अपने कमरे मे हो”. 

आशना को कोई जवाब देते नहीं बना. आशना थोड़ी देर बाद चुप्पी तोड़ते हुए बोलती है: आपने झूठ बोला तो आपको बचाने के लिए मुझे भी झूठ बोलना पड़ा और शिकायत भरी नज़रो से वीरेंदर को देखने लगी. 

वीरेंदर आशना की इस मासूमियत से निहाल हो उठा. पता नहीं क्यूँ पर पिछले कुछ ही घंटो मे वो उसकी तरफ तेज़ी से आकर्षित हो रहा था. आशना ने जब उसे यूँ घूरते पाया तो जल्दी से सोफे से उठ खड़ी हुई और बोली” चाइ तो ठंडी हो गई, चलिए आप नहा लीजिए मैं आपके लिए दूसरी चाइ बना देती हूँ. 

वीरेंदर: तुम क्यूँ बनाओगी, काका को बोल दो वो बना देंगे. आशना ने राहत के सांस ली वो भी अकेले नीचे नहीं जाना चाहती थी. 

आशना वीरेंदर के रूम से बाहर निकली और तेज़ आवाज़ मे कहा “काका 15- 20 मिनिट मे दो कप चाइ लेकर उपर साहब के रूम मे आ जाना”. 

तभी उसे अपने पीछे से कुछ आवाज़ आई. वीरेंदर बिल्कुल उसके करीब आ खड़ा हुआ था, वो एक दम सहम गई तभी वीरेंदर बोला: काका चाइ बाहर लॉन मे ले आना आज हम लॉन मे बैठ कर सनडे एंजाय करेंगे और फिर धीरे से बोला “इन नज़ारो का जी भर कर लुफ्त लेंगे”. 

इतना सुनते ही आशना के जिस्म मे एक और लहर दौड़ी और उसकी पैंटी थोड़ी सी और गीली हो गई. वो तेज़ी से अपने रूम के दरवाज़े के पास पहुँची और फिर मूड कर देखते हुआ बड़ी अदा से कहा “बड़े आए लुफ्त लेने वाले”. इतना कह कर आशना ने अपने रूम का दरवाज़ा खोला और वीरेंदर की तरफ देखता हुए कहा ” अंदर से कुछ पहन लेना, सुबह सुबह काफ़ी ठंड होगी बाहर”. आशना ने तो वीरेंदर की केर करते हुए यह कहा था पर उसे नहीं पता था कि जब वीरेंदर अपने रूम मे जाएगा तो उसे एक झटका लगने वाला है.

वीरेंदर अभी उसकी बात का कुछ मतलब निकालता हुआ अपने रूम मे घुसा ही था कि उसका ध्यान अपने झूलते हुए अंडरवेर पर गया और वो एकदम चकरा सा गया. अच्छा तो आशना ने इसलिए यह कहा था. लड़की काफ़ी स्मार्ट है वीरेंदर ने सोचा. 

वो नहाने के लिए बाथरूम मे घुस गया. नहाने के बाद उसने जान बूझ कर अंडरवेर नहीं पहना और फिर वोही कपड़े पहन कर तैयार होने लगा. आज वो बहुत खुश था, काफ़ी हल्का महसूस कर रह था अपने आप को. शीशे के सामने बाल बनाते हुए वो गुनगुनाने लगा “कितना प्यारा वादा है इन मतवाली आँखों का”.

वहीं दूसरी तरफ आशना ने रूम मे आते ही रात के बिखरे हुए अपने कपड़े उठाना शुरू किया. अपनी पॅंट और शर्ट उठा कर उसने उन्हे अलमारी मे हॅंगर मे टांगा और फिर उसे ख़याल आया कि उसकी पैंटी काफ़ी भीग चुकी है वीरेंदर की शरारतों से तो वो शरम से लाल हो गई. वो काफ़ी अनकंफर्टबल फील कर रही थी गीली पैंटी मे. उसने दो सेट पैंटीज ही ली थी. एक उसने पहन रखी थी और एक उसने रात को ही उतारी थी जो कि इस पहनी हुई पैंटी के मुक़ाबले पहनने लायक तो थी ही पर वो मिल नहीं रही थी. सारा कमरा छानने के बाद भी आशना को अपनी रात को उतारी हुई ब्रा और पैंटी नहीं दिखी. फिर उसने बाथरूम मे जाकर चेक किया पर वहाँ भी उसे वोही पैंटी मिली जो उसने 10 दिन से पहन रखी थी. उसे पहनना भी बेकार था. आशना ने सबसे पहले तो अपनी जीन्स खोल कर अपनी पैंटी उतारी और फिर पुरानी पैंटी के साथ उसे भी धो दिया. फिर आशना ने टवल लपेटा और रूम मे आकर फिर से पैंटी खोजने लगी पर पैंटी वहाँ होती तो उसे मिलती ना. 

आशना को तभी याद आया कि रात को वो दरवाज़ा बंद करना ही भूल गई थी. तो क्या उसकी पैंटी किसी ने? यह ख़याल आते ही उसे एक झटका सा लगा. कही बिहारी उसके रूम मे तो नही आया था? आशना ने खुद को ही इसका जवाब दिया” नहीं, नहीं अगर वो कमीना इस कमरे मे आया होता तो वो ज़रूर कोई ऐसी वैसी हरकत करता क्यूंकी मैं तो बिल्कुल नंगी सो रही थी” तो क्या फिर वीरेंदर ने? यह ख़याल आते ही उसके चेहरे पर शरम और हया के मिले झूले भाव आने लगे. हां ज़रूर रात को वीरेंदर मेरे कमरे मे आया होगा और हो सकता है उसने मुझे मास्टरबेट करते देख भी लिया हो और एग्ज़ाइट्मेंट मे वो मेरी ब्रा और पैंटी अपने साथ ले गया हो, मुझे होश ही कहाँ रहता है मास्टरबेट करते हुए. आशना का शक़ यकीन मे तब बदला जब उसे ख़याल आया कि इसीलिए वीरेंदर उसे सुबह सुबह चाइ देने के लिए आया होगा क्यूंकी वो जानता था कि मैं बिल्कुल नंगी सो रही हूँ तो मुझे काका की नज़रो मे शर्मिंदा होने से बचाने के लिए वो खुद चाइ देने आया होगा. आशना (मन मे सोचते हुए): मिस्टर. वीरेंदर अब मैं क्या पहनुँगी?.अभी आशना इस सब का निचोड़ निकाल ही रही थी कि उसके रूम का डोर नॉक हुआ. 

वीरेंदर: डॉक्टर. साहिबा का मूड हो तो अब चाइ पीने चलें. 

आशना ने अपनी कमर पर बँधे टवल की ओर देखते हुए कहा “आप चलिए मैं अभी आती हूँ” 

वीरेंदर: जल्दी आना कहीं चाइ फिर से ठंडी ना हो जाए. 

आशना: इन जस्ट 5 मिनिट्स. 

आशना जल्दी से बाथरूम मे घुसी और अपनी टी-शर्ट उतार कर अपनी ब्रा भी उतार दी. फिर से टी-शर्ट पहनी और टवल उतार कर पॅंट पहन ली. बिना पैंटी के पॅंट पहनना उसे काफ़ी अनकंफर्टबल लग रहा था पर अब और कोई चारा ही नहीं था. दोनो पॅंटीस धोने से गीली थी और एक पर तो जनाब ने क़ब्ज़ा कर रखा था. आशना मन ही मन मुस्कुरा रही थी वीरेंदर की इस हरकत पर फिर भी उसे यकीन नहीं हो रहा था. बिना ब्रा के उसके ब्रेस्ट पर कुछ ज़्यादा असर नहीं पड़ा था वो अभी भी एग्ज़ाइट्मेंट के कारण सिर उठा कर खड़े थे बस अब उनके निपल्स आसानी से देखे जा सकते थे. आशना ने सोचा कि अगर जॅकेट ना पहनूं तो जनाब को इस बार मेजर हार्ट अटॅक ना आ जाए इस लिए जॅकेट पहन ही लेती हूँ. वैसे भी बिहारी भी नीचे ही होगा इसलिए उसने जॅकेट पहनना ही बेहतर समझा..आशना ने लाइट पिंक लीप ग्लॉस लगाई और अपने बालों और मेकप को फाइनल टच दिया और अपने रूम से बाहर आकर वो वीरेंदर के रूम की तरफ गई और वहाँ से वीरेंदर की दवाइयाँ अपनी जॅकेट मे डाल कर नीचे को आ गई. आशना ने किचन की तरफ झाँक कर देखा तो बिहारी को वहाँ ना पा कर उसने राहत की सांस ली. वो तेज़ी से मैन डोर से बाहर को निकली और बाहर खिली धूप को देखकर उसमे एक नयी खुशी का संचार हुआ. 

सर्दी के इस मौसम मे खिली धूप का अपना ही मज़ा होता है. आज मौसम भी काफ़ी खुश दिख रहा था. शर्मा निवास के हर एक शख्स की तरह. सबके अपने अपने खुश होने के अलग अलग कारण थे. आशना लॉन मे पहुँची तो वहाँ वीरेंदर उसे झूले के पास रखी चेर्स पर बैठा मिला. दोनो की नज़रें मिली और दोनो ने एक दूसरे को जी भर कर स्माइल दी और एक दूसरे की गेटअप को नज़रों से सराहा. वहीं पास मे खड़े बिहारी ने भी आशना का खिला हुआ चेहरा देखा तो उसके जिस्म का X-रे कर डाला. उसकी पैनी नज़रों ने एकदम पहचान लिया कि आशना ने पैंटी नहीं पहनी क्यूंकी टाइट जीन्स मे पैंटी लाइन मिस्सिंग थी और फिर उसके चलने से हुए झूलते उभारों से यह भी पुख़्ता हो गया कि उसने ब्रा भी नही पहनी है.

बिहारी(मन मे सोचते हुए): लगता है साली के पास एक ही सेट है. कोई बात नहीं कुछ ही दिनों मे तो उसे दिन भर नंगी ही रखना है. आशना वीरेंदर के सामने वाली चेयर पर बैठ गई और एक टाँग पर दूसरी टाँग चढ़ा कर बैठ गई. वीरेंदर भी उसके नितंबों की गोलाईयों को देखकर प्रभावित हुए बिना ना रह सका. उस जगह आशना के सामने दो मर्द थे दोनो की आँखों मे हवस थी लेकिन एक को वो खुद सब कुछ सौंप सकती थी ज़रूरत पड़ने पर और एक को तो वो देखना भी पसंद नहीं करती थी. 

वीरेंदर: काका चाइ डाल दें और मेरे रूम की सफाई कर दें. 

आशना: काका गॅरेज की सफाई कर दें काफ़ी गंदा हो गया है. चाइ मैं डाल देती हूँ और रही बात रूम की तो मैने उसे सही कर दिया है आप बस उसे बाद मे झाड़ दें. 

बिहारी ने मन पर पत्थर रखते हुए हां बोला और वहाँ से चल दिया. बिहारी(मन मे सोचते हुए, फुदक ले चिड़िया. तेरे तो ऐसे पर काटुंगा कि तू दिन भर मेरे ही नीचे लेट कर चुदती रहेगी).आशना ने चाइ डाली और एक कप वीरेंदर की ओर बढ़ा दिया. वीरेंदर ने मुस्कुराते हुए आशना से कप लिया और दोनो चाइ पीने लगे. थोड़ी देर दोनो चुप चाप चाइ पीते रहे. दोनो अपने अपने ख्यालों मे गुम थे. आशना, वीरेंदर द्वारा अपनी ब्रा-पैंटी को चुराने के बारे मे सोच रही थी और वीरेंदर, आशना द्वारा अपने अंडरवेर की बात को लेकर सोच रहा था. सच तो यह था कि दोनो ही अपने उपर लगे इल्ज़ामो से अंजान थे और एक दूसरे को मन ही मन कसूरवार बना बैठे थे. उनकी इस चुप्पी को वीरेंदर ने तोड़ा. 

वीरेंदर: आपने मेरा कमरा कब ठीक किया. 

आशना: वो आते हुए मैं आपके रूम मे दवाइयाँ लेने गई तो आते हुए ठीक कर दिया. 

वीरेंदर:ओह, अच्छा. लेकिन रहने देती ना, आपने क्यूँ तकलीफ़ की. 

आशना (मन मैं सोचते हुए) शायद जनाब इसलिए डर रहे हैं कि मैने उनके पास अपनी ब्रा-पैंटी तो नही देख ली. काश मैं जनाब का बाथरूम भी चेक कर लेती तो जनाब की चोरी पकड़ी जाती.

वीरेंदर: क्या हुआ? कहाँ खो गई आप? 

आशना ने एकदम से अपने आप को संभाला और पूछा “अब कैसा फील कर रहे हैं आप”? 

वीरेंदर उसका मतलब तो समझ गया लेकिन फिर भी उसको चिडाने के लिए बोला “काफ़ी कंफर्टबल फील कर रहा हूँ मैं तो और लगता है कि तुम भी काफ़ी कंफर्टबल हो गई हो अब”. वीरेंदर ने यह बात इस लिए कही कि उसे लगा कि काका की मौजूदगी मैं शायद आशना कंफर्टबल फील नही कर रही थी और अब उनके जाने के बाद तो वो ज़रूर अच्छा महसूस कर रही होगी लेकिन 

आशना ने सोचा कि शायद वीरेंदर ने भाँप लिया है कि उसने ब्रा-पैंटी नही पहनी है क्यूंकी उसकी ब्रा-पैंटी तो उसने चुरा ली है. आशना को वीरेंदर का यह बिहेवियर काफ़ी अजीब लग रहा था. उसे मज़ा भी आ रहा था और शरम भी. आशना ने नज़रें नीचे झुका कर एक बार वीरेंदर की टाँगों के बीच देखा कि क्या उसने भी अंडरवेर नहीं पहना है लेकिन उसे कोई पुख़्ता यकीन नहीं हुआ. आशना के मन मे एक शरारत आई. उसने यह कहकर अपनी जॅकेट उतार दी कि धूप बहुत तेज़ है. 

आशना की जॅकेट उतरने की देर थी कि वीरेंदर की नज़र उसके उन्नत आज़ाद उभारों की तरफ पड़ी. बिना ब्रा के उसके उरोज ऐसे झूल रहे थे जैसे पके हुए आम टहनियो पर झूलते हैं. वीरेंदर आशना के निपल्स साफ महसूस कर सकता था. आशना चोर नज़रों से वीरेंदर के चेहरे पर आए इस बदलाव को देख कर मन ही मन खिलखिला कर हंस दी. उसने वीरेंदर की पॅंट मे सॉफ हलचल महसूस की. कुछ देर तक वीरेंदर को अपने उन्नत वक्ष दिखाने के बाद आशना ने बड़ी अदा से कहा” मुझे नहीं दिखाओगे”. 

वीरेंदर आशना के इस सवाल से चौंका और हैरानी से पूछा “क्या”? 

आशना मुस्कुराते हुए अपना पूरा बंगला. 

वीरेंदर भी आशना की चालाकी समझ गया और कुछ सोच कर बोला ” बहुत बड़ा है”. 

इस बार चौंकने की बारी आशना की थी. वो हैरानी से उसे देखती हुई बोली”क्या”?

वीरेंदर: बंगला. 

इतना सुनते ही आशना का चेहरा सफेद पड़ गया और वीरेंदर खिलखिलाकर हंस दिया. आशना अपनी हार को देखते हुए बोली”वो तो देखने से ही पता लग रहा है कि कितना बड़ा होगा, लेकिन मुझे पूरा देखना है”. 

वीरेंदर: दिखा दूँगा, इतनी जल्दी भी क्या है. अब दोनो मे खुल कर डबल मीनिंग बातें हो रही थी पर पीछे हटने वाला कोई नहीं था. तभी बिहारी काका वहाँ आ गये और वीरेंदर से बोले मालिक आप गाड़ियाँ अगर गॅरेज से हटा दें तो गॅरेज सॉफ करने मे आसानी होगी. 

वीरेंदर: जाओ और अंदर से सारी चाबियाँ ले आओ. बिहारी ने एक नज़र भर कर आशना को देखा जो कि जॅकेट उतार कर बैठी थी. उसके खड़े निपल्स देख कर उसके पाजामे मे भी हलचल होने लगी. वो मन मार कर वहाँ से चल दिया. 

वीरेंदर: आओ आशना पहले गाड़ियाँ निकाल लेता हूँ फिर तुम्हे सारे शर्मा निवास की सैर करवाता हूँ. आशना भी वीरेंदर के पीछे चल दी. वीरेंदर की मर्दाना चाल पर आशना फिदा हो गई. 5.11″ हाइट और सेहतमंद शरीर का मालिक उसका भाई उससे डबल मीनिंग बातें कर रहा है और वो भी उसका साथ बखूबी निभा रही है. यह सोच कर ही आशना के जिस्म मे एक तरंग सी उठने लगी. 

बिहारी ने वीरेंदर को गाडियो की चाबियाँ लाकर दी और वीरेंदर ने एक एक करके सारी गाड़ियाँ गॅरेज से निकाल कर एक लाइन मे लगा दी. 

वीरेंदर: आइए राजकुमारी जी अब आपको दिखाते हैं अपना…………बंगलो. 

आशना ने वीरेंदर की तरफ एक स्माइल दी और चल पड़ी उसके साथ. करीब दो घंटे तक वो दोनो बंगलो के चारो ओर चक्कर लगाते रहे. बंगलो जितना शानदार आगे से देखने मे था उतना ही खूबसूरत पीछे से भी था. चारो तरफ फैले अशोका ट्रीस उसे एक मॉडर्न फार्महाउस का एहसास करा रहे थे और हर तरफ फैले रंग-बिरंगे फुलो के पौधे और नरम घास उसके मन को आनंदित कर रहे थे. चलते चलते आशना कभी अपनी जॅकेट लेफ्ट हाथ मे पकड़ती तो कभी राइट हाथ मे. 

वीरेंदर: इसे पहनना ही नहीं चाहिए था तुमको, देखो कितनी तेज़ धूप है. 

आशना शिकायत भारी नज़रो से उसे देखते हुए सोचने लगी “एक तो आप ने मेरी ब्रा-पैंटी का सेट चुरा लिया और उपर से मुझे जॅकेट पहनने के लिए भी मना कर रहे हैं, इरादे नेक नहीं लगते इनके” 

वीरेंदर: क्या सोचने लगती हो यार तुम. 

आशना ने चौंक कर वीरेंदर की तरफ देखा. 

वीरेंदर: सॉरी आक्च्युयली यार नहीं डॉक्टर. आशना. 

आशना वहीं रुक गई और वीरेंदर की तरफ देखते हुए बोली “यार शब्द गंदा सा लगता है, तुम मुझे “फ्रेंड का दर्जा दे सकते हो”.

वीरेंदर चलते चलते रुक गया और बोला. वीरेंदर: फ्रेंड क्यूँ, गर्लफ्रेंड क्यूँ नही? यह कह कर वीरेंदर उसकी तरफ देखता रहा और आशना वहाँ से शरमा कर चली गई. वीरेंदर उसे जाते हुए देखता रहा, उसका दिमाग़ काम करना बंद कर गया था.उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि यह उसके मूह से क्या निकल गया. इसी उधेड़बुन मे वो काफ़ी देर तक वहीं खड़ा रहा और जब उसे होश आया तो आशना काफ़ी दूर निकल गई थी. वो दौड़ कर उसका पीछा करने लगा पर आशना ने अपने कदम और तेज़ कर लिए. चलते चलते जब वो थक गई तो एक जगह नरम घास पर बैठ गई. थोड़ी देर के बाद वीरेंदर भी हांफता हुआ वहाँ पहुँचा और वही बैठ गया. उसकी साँस काफ़ी फूली हुई थी. दोनो ने एक दूसरे को देखा तो आशना की आँखे शरम से झुक गई.

वीरेंदर: आशना तुम बहुत खूबसूरत हो. 

आशना ने नज़रें उठाकर वीरेंदर की तरफ देखा. अगर वीरेंदर उसका भाई ना होता तो अब तक वो उसके सीने से लिपट गई होती ऐसा असर था वीरेंदर की शक्शियत का आशना पर. मगर वो अपने आप को काबू मे रखने की कोशिश कर रही थी. 

वीरेंदर उसकी चुप्पी को देखते हुए सोचने लगा शायद वो जल्दबाज़ी कर रहा है. उसने बात पलटते हुए कहा देखो कितना थका दिया तुमने मुझे. मैं तुम्हारी तरह जवान नही हूँ अब बुढ़ापा आ गया है मुझमे. 

आशना ने फॉरन उसके होंठों को अपने हाथ से बंद कर दिया और उसकी आँखों मे देखते हुए उसे “ना” का इशारा किया. उस एक पल मे दोनो की आँखों ने एक दूसरे मे क्या देखा कोई नहीं समझ सकता था. आशना ने उसे खींच कर अपनी गोद मे उसका सिर रख दिया और उसके बालों मे उंगलियाँ फिराने लगी. काफ़ी देर तक कोई कुछ ना बोला. जहाँ वीरेंदर को आशना की गोद मे सिर रखकर काफ़ी आराम मिल रहा था वही आशना यह सोच कर परेशान थी कि क्या वो सही कर रही है. क्या उसे आगे बढ़ने से पहले वीरेंदर को सच बता देना चाहिए. 

उनके ख्यालो की दुनिया टूटी वीरेंदर का मोबाइल बजने से “कहता है पल-पल………….” वीरेंदर ने स्क्रीन पर नंबर. देखा तो एक दम हड़बड़ा कर उठ खड़ा हुआ. वीरेंदर: हेलो, डॉक्टर. आंटीयीईयियैआइयैआइयैयाइयैआइ. …………….हां, हां बिल्कुल मैं आपका ही वेट कर रह हूँ. ……..ओके, बाइ टेक केयर. 

वीरेंदर: आशना, डॉक्टर. आंटी आने वाली थी मेरे तो दिमाग़ से ही निकल गया था. 

आशना को भी एकदम अचानक याद आया. आशना: क्या टाइम हुआ है? 

वीरेंदर: 12:00 बजने वाले हैं. वो 2-2:30 बजे तक आ जाएँगी. काका तो आज सारा दिन गॅरेज ही सॉफ करते रहेंगे. चलो हम खाना होटेल से ऑर्डर कर देते हैं.

आशना: होटेल से क्यूँ? मैं बनाती हूँ ना. 

वीरेंदर: तुम? 

आशना: हां जी, मैं? 
आशना: बोलो क्या खाना पसंद करोगे. 

वीरेंदर: जो आप प्यार से खिलाएँगी हम खा लेंगे. 

आशना का दिल खुश हो गया वीरेंदर के इस जवाब से और चेहरा शरम से लाल हो गया. 
आशना : तो चलें. 

वीरेंदर: चलो, फिर तो हमे भी आपकी हेल्प करनी चाहिए. कुछ ही मिनिट्स मैं दोनो किचन मे पहुँच चुके थे. आशना ने देखा कि मटर छिले हुए हैं तो उसने आलू-मटर, चिकन और चावल बनाने की सोच ली. आशना को पता था कि वीरेंदर को नोन-वेग बहुत पसंद है. जहाँ वीरेंदर आशना को काम करते हुए देखे जा रहा था वहीं आशना पूरा मन लगा कर खाना बना रही थी, आख़िर वो पहल बार वीरेंदर को अपने हाथों से बना कर खाना खिलाने वाली थी.
मीठे मे उसने ड्राइ फ्रूट्स और दूध का एक लज़ीज़ मिक्स्चर तैयार किया.

एक- डेढ़ घंटे मे खाना तैयार करके दोनो अपने अपने रूम मे चले गये फ्रेश होने के लिए. इस दौरान दोनो के बीच नॉर्मल बातें ही होती रहीं.

जब वो दोनो खाना बना रहे थे तभी बाहर बीना आ चुकी थी और अपनी गाड़ी पार्क करके जैसे ही गाड़ी से उतरी तो उसे बिहारी गॅरेज मे दिखा जो कि उसकी गाड़ी की आवाज़ सुनकर गॅरेज से बाहर आ गया था. 

बीना: आज बूढ़ा बड़ा काम कर रहा है, क्या बात है, नयी मालकिन ने हुकुम दिया है क्या? 

बिहारी: चुप कर रांड़, मालकिन होगी वो तेरी मेरी तो लंड की गुड़िया है जिसे मैं जल्द से जल्द चोद कर बच्चे पैदा करने की मशीन बना दूँगा. 

बीना: ओहो, मेरे रात के सैयाँ, गुस्सा थुको और मेरी बात ध्यान से सुनो, काम का क्या हुआ. 

बिहायर: बिहारी ने कोई काम अधूरा नहीं छोड़ा आजकल जानेमन. 

बीना: शाबाश तो लाओ वो हॅंडबॅग मुझे देदो. 

बिहारी: तो चलो मेरे कमरे मैं. 

बीना: रात को आती हूँ ना राजा उतावला पन ठीक नहीं, तब तक छोटी मालकिन के नाम की मूठ मार लो. 

बिहारी: तुझे तो रात को ही बजाउन्गा और रही बात मेरे मूठ मारने की उसकी तू चिंता मत कर मैने उसका इंतज़ाम भी कर लिया है. बिहारी ने उसे बता दिया कि कैसे उसने उसकी ब्रा-पैंटी चुराई है.

बीना: साले तू कमीना पन नही छोड़ेगा. ऐसा करने से पहले अपने लंड से ही सोचा होगा ना तूने , ज़रा दिमाग़ से सोच अगर आशना को शक हो गया तो हमारा बना बनाया खेल बिगड़ जाएगा. इस घर में दो ही तो मर्द हैं, यह काम करने के लिए. एक तो वीरेंदर जो ऐसा घिरा हुआ काम करेगा नहीं तो सोच आशना का शक़ तेरे उपर ही जाएगा ना और वो तुझसे चौकान्नी हो जाएगी. 

बिहारी: साला उस वक्त मैं होश मे ही नही रहा, साली मेरे बिल्कुल करीब बिल्कुल नंगी पड़ी थी. मुझे और कुछ सूझा नहीं तो मैं उसकी ब्रा-पैंटी ही उठा लाया. अब क्या करें? 

बीना: रुक मैं कुछ सोचती हूँ. थोड़ी देर बाद बीना बोली: अभी कहाँ है दोनो भाई -बेहन. 

बिहारी: दोनो कुछ देर पहले ही अंदर गये है. आज खाना शायद आशना बना रही है.

बीना: अच्छा एक काम कर. अपने कमरे मे जा और वो बॅग और वो ब्रा-पैंटी का सेट उठा ला. 

बिहारी: उस सेट का तू क्या करेगी. 

बीना: रत को पहन कर आउन्गी, मुझे आशना समझ कर मेरी चूत और गान्ड दोनो चोद लेना मेरे राजा, जा अब. 

बिहारी ने उसे घूर कर देखा और वहाँ से चल दिया. अपने हाथ पावं धोकर वो हाल मे घुसा और सीधा अपने कमरे मे चला गया. आशना- वीरेंदर मे से किसी ने भी उसे अंदर जाते नहीं देखा. बिहारी ने जल्दी से सारा समान लिया और बाहर की तरफ आया. चुपके से वो घर से बाहर आया और हॅंडबॅग बीना को थमा दिया. 

बीना ने हॅंडबॅग उससे लेकर गाड़ी मे रखा और फिर हाथ आगे बढ़ा दिया. बिहारी ने आशना की पिंक ब्रा उसके हाथों मे थमा दी. बीना ने उसे पलट कर देखा और बोली “ह्म्म्म्म 36” और फिर उसके हुक लगा कर चेक करने लगी.पहली जगह हुक मुश्किल से फँसी पर दूसरी जगह हुक आसानी से लग गई. बीना: 36″बी, नाइस साइज़. बिहारी हैरानी से उसे देख रहा था. बीना ने फिर से हाथ आगे बढ़ाया. 

बिहारी: अब क्या है? 

बीना: उस कच्ची कली की कच्छी भी दे दे मेरे साईयाँ. 

बिहारी: वो तो मैने टाँग रखी है. 

बीना ने बिहारी की तरफ सवालिया नज़रों से देखा तो बिहारी ने उसे अपनी टाँगों की तरफ इशारा किया. बीना ने बिहारी की टाँगों की तरफ देखा तो बिहारी ने अपने खड़े लंड पर आशना की पिंक पैंटी टाँग रखी है. 

बीना: यह तो बिल्कुल सॉफ है. 

बिहारी: मतलब? 

बीना: साले इसपर मूठ तेरा बाप मारेगा?.

बिहारी की आँखों मे चमक आ गई. 
बिहारी: मेरा बाप क्यूँ मारेगा, मैं मर गया हूँ क्या?. चल गॅरेज मे और मेरी मदद कर. उसने बीना का हाथ पकड़ा और उसे गॅरेज मे लेगया. 

बीना: मेरे कपड़े गंदे हो जाएँगे. तू एक काम कर इसपर ढेर सारी मूठ मार कर इसे धूप मे सूखा कर अंदर ले आना. तब तक मैं अंदर का हाल जानती हूँ. बिहारी उसकी बात नहीं समझा पर वो तो आशना की मुलायम पैंटी का एहसास अपने सख़्त लंड पर पा कर पागल हो गया था. उसने बीना के हाथ से ब्रा छीनी और बोला. साली उसके मम्मे तो देती जा. बीना मुस्कुराते हुए वहाँ से गान्ड मटकाती हुई चली गई और बिहारी अपने काम मे मसरूफ़ हो गया. 

अभी बीना अंदर भी नही पहुँची थी कि बिहारी के लंड ने वीर्य की झड़ी लगा दी और उस नन्ही सी पैंटी को पूरा अपने रस से भिगो दिया. बिहारी के लंड ने इतना माल छोड़ा कि बिहारी की आँखों के आगे अंधेरा छा गया.

अंदर आते ही बीना को खाने की खुश्बू किचन तक खींच लाई, लेकिन किचन खाली था. वो दबे पावं उपर की तरफ गई ताकि वो देख सके कि दोनो क्या कर रहे हैं. वीरेंदर के कमरे के बाहर कुछ देर खड़े रहने के बाद जब उसे कुछ सुनाई नही दिया तो उसने डोर का नॉब मरोड़ा और दरवाज़ा खुल गया. अंदर कोई नही था. बीना के चेहरे पर शरारती स्माइल आ गई.

बीना(मन मे सोचते हुए): यहाँ तो बिना कुछ किए ही प्लान सफल होता नज़र आ रहा है. बीना जाने के लिए जैसे ही मूडी कि उसके कदम वहीं रुक गये. शायद बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी. बीना ने दबे कदमों से वहाँ तक का रास्ता तय किया और वहाँ तक पहुँची. वहाँ पहुँचते ही उसे ज़ोर का झटका लगा जब उसने देखा कि अंदर से दरवाज़ा बंद है. बीना मन मसोस कर रह गई और वो निराश मन से वहीं रूम मे सोफे पर बैठ गई. सोफे पर बैठते ही उसकी नज़र बेड पर रखे कपड़ों पर पड़ी जो कि शायद वीरेंदर ने अभी पहननने के लिए निकाले होंगे. बीना को यह तो यकीन हो गया कि अंदर वीरेंदर अकेला ही है नहीं तो अंदर से कुछ ना कुछ आवाज़ तो आती ही. कोई 10 मिनट. बाद पानी की आवाज़ बंद हुई तो बीना उठकर सोफे के पीछे छुप गई. वो देखना चाहती थी कि कपड़े बदलने के बाद वीरेंदर आशना के रूम की तरफ जाता है या नहीं. थोड़ी देर बाद वीरेंदर बाथरूम से निकला और शीशे का सामने खड़े होकर अपने बाल संवार रहा था. वो बाथरूम से हाथ मूह धोकर निकला था और उसने कमर पर टवल लपेट रखा था. 

आगे से टवल उपर उठा हुआ था जो कि सॉफ बता रहा था कि वीरेंदर कुछ सोच कर एग्ज़ाइटेड था. वीरेंदर ने झटके से अपना टवल खोल दिया और अपने लिंग को हाथ मे पकड़ते हुए बोला” यार तू फिर खड़ा हो गया, अभी रात को ही तो सुलाया था” बीना उसकी बातें सुन कर हैरान थी, अभी भी वो सोफे के पीछे छुपी हुई थी. उसे पता ना लगा कि वीरेंदर किस से बातें कर रहा है. \\

उसने धीरे से अपनी गर्दन उपर उठा कर देखा तो उसके होश ही उड़ गये. सामने वीरेंदर बिल्कुल नंगा उसके सामने खड़ा था. उसके हाथ मे उसका विकराल लिंग था और वो अपने लिंग से बातें कर रह था. वीरेंदर की नज़र अपने लिंग पर थी इस लिए उसे बीना का अपने रूम मे होने का आभास नहीं हुआ. वीरेंदर (अपने लिंग से बात करते हुए): थोड़े दिन की बात है साले, धीरज रख और मुझे इंप्रेशन बनाने दे उसके उपर. अगर वो मान गई तो तुझे रात-दिन उसकी गहराईयो की सैर कर्वाउन्गा. बीना उसकी बातें सुनकर एकदम हैरान थी. वीरेंदर जैसा दिखता था वैसा नहीं था. उसे तो वो हमेशा एक सभ्य और सुशील लड़का ही लगता था मगर वीरेंदर के मूह से ऐसी बातें सुनकर बीना एकदम हैरान थी. 

वीरेंदर( अपने आप से बात करते हुए): चल बेटा अब जल्दी से कपड़े पहन ले और चल नीचे, तेरी रानी भी तैयार होके नीचे ही आने वाली होगी. नीचे चलते हैं और फिर उछल लेना उसे देख कर जितना उछलना है. यह कह कर वीरेंदर कपड़े पहनने लगा. वीरेंदर ने अंडरवेर पहना, फिर शर्ट पहनी और फिर पॅंट पहन कर अपने आप को आईने मे देख कर बोला “आज तो बहुत चमक रहा है यार तू, बस यार वो एक बार हां कर दे तो फिर अपने तो वारे-न्यारे और हमारा लंड उसकी चूत के सहारे”. 

बीना ने वीरेंदर के मूह से ऐसे शब्दो की कभी कल्पना भी नहीं की थी. वो तो उसे एक बेहद ही डिसिप्लिंड और बेरूख़ा इंसान समझती थी. उसे यह तो कुछ दिन पहले पता लग ही चुका था कि वीरेंदर के पास लौडा बहुत ही तगड़ा है पर आज पहली बार एहसास हुआ कि वो जल्द से जल्द इसका इस्तेमाल भी करना चाहता है.
बीना(मन मे खुश होते हुए): आशना तो हिल भी नहीं पाएगी इस सांड के नीचे. 

वीरेनेदर भी अपने आप से बातें करते हुए: लेकिन यार एक प्राब्लम है, मेरा लंड इतना क्यूँ दुख़्ता है जब फूल जाता है, अब यह किसी से पूछ भी नही सकता. यार अपना साला कोई दोस्त भी डॉक्टर. नहीं है जो उसकी राय लेता. फिर वीरेंदर कुछ ऐसा बोल देता है जिस से बीना की चूत एकदम रस छोड़ देती है. 

वीरेंदर: किसी तरह आज बीना को बातों ही बातों मे पूछ ही लूँगा इसका इलाज और अगर ज़रूरत पड़ी तो सबसे पहले अपने लंड का उद्घाटन उसकी चूत से ही करूँगा. साली मुझे देखती भी ललचाई नज़रों से है, ज़्यादा नखरे किए तो पटक कर चोद दूँगा सबके सामने. 

बीना वीरेंदर की यह बात सुनकर एक दम हैरान रह जाती है, बीना ने शुरू शुरू मे वीरेंदर पर भी डोरे डालने चाहे थे पर वो उसे हर बार बीना आंटी कह कर चिड़ाता रहता था. अगर बीना को पता होता कि वीरेंदर की फीलिंग्स उसके लिए इतनी हॉट है तो वो तो कब की टाँगे खोल कर उसके सामने नंगी लेट गई होती. इतना सोच कर ही उसका स्खलन हो गया). 

वीरेंदर तैयार होकर नीचे चला गया. बीना कुछ देर वहीं बैठी रही और जो कुछ उसने सुना उसके के बारे मे सोचने लगी. उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वीरेंदर जैसा इंसान भी ऐसी गंदी बातें बोल सकता है. उसे तो लगता था कि गंदी गालियाँ बकने मे उसका और बिहारी का कोई मुकाबला नहीं कर सकता मगर वीरेंदर के इस रूप से वो बिल्कुल अंजान थी.वो हर हाल मे वीरेंदर-आशना को एक करना चाहती थी ताकि वो पूरी जायदाद को हथिया सके लेकिन साथ ही उसे वीरेंदर के लौडे का सुख भी चाहिए था. एक बार तो उसके मन मे आया कि क्यूँ ना वीरेंदर को फँसा कर उससे शादी कर लूँ लेकिन फिर उसे ख़याल आया अपनी रेप्युटेशन का, अपने पति अभय का. अगर वो वीरेंदर के साथ कहीं भाग भी जाती है तो बिहारी या अभय कहीं ना कहीं उन्हे ढूँढ ही लेते और वैसे भी उसकी प्यास भुजाने को बिहारी तो था ही. वो यह रिस्क लेने का सोच भी नहीं सकती थी. वीरेंदर के साथ भागने मे उसे एक रिस्क और था. हो सकता वीरेंदर उसे अपना दिल बहला कर अपनाता या नहीं और फिर उस वक्त वो कहाँ जाती. उसने अपने दिमाग़ से बातों को झाड़ा और सोफे के पीछे से खड़ी होकर वीरेंदर के कमरे से निकल आई. 

अभी वो कमरे से निकली ही थी कि उसे बिहारी सीडीयाँ चढ़ता हुआ दिखा. बीना ने उसे अंदर आने का इशारा किया. 
बिहारी (अंदर आकर): यहाँ क्या कर रही है साली, कहीं वीरेंदर का लंड तो नहीं चूस रही थी, अभी अभी उसे बाहर जाते हुए देखा वो अपना लंड अड्जस्ट कर करता हुआ बाहर निकला है. बीना ने मुस्कुराते हुए बिहारी की तरफ देखा और बोली: मेरे सैयाँ उसका लंड तो मैं झट से चूस लूँ वो कहे तो सही, अभी अभी उसका लंड देखा है. कम से कम 8-9″लंबा और4.5′-5′ मोटा तो होगा ही. 

बिहारी: तो तू यहाँ उसका लंड नापने आई थी. 

बीना: नहीं मेरे रज्जा, आई तो उस से मिलने थी पर …….और फिर उसे सब कुछ बता दिया. 

बिहारी: साला, दिखने मे तो ऐसा नहीं लगता पर वो भी क्या करे, लंड तो भगवान ने उसे भी दिया है और वो भी तगड़ा. माल तो तू भी कुछ कम नहीं है और आशना जैसा टाइट माल घर मे हो तो कौन साला साधु बना रह सकता है.बिहारी, बीना को देखते हुए: अब तेरी चूत मे तो लार टपक रही होगी कि वो भी तुझे चोदना चाहता है. 

बीना: अभी इसके बारे मे मैने कुछ सोचा नहीं है, पर इतना यकीन रखो जो भी करूँगी तुम्हारा कोई नुकसान नहीं होगा. जायदाद तो हमारे बीच ही बँटेगी. अच्छा सुन, मैने तुझे आशना की पैंटी दी थी, क्या हुआ उसका. 

बिहारी ने जेब से ब्रा और पैंटी निकाल कर बीना को देते हुए: यह ले, मगर तू इसका करेगी क्या. 

बीना ने आशना की पैंटी देखी जो कि अब सूखने लगी थी और मुस्कुरा कर बिहारी की ओर देख कर बोली: क्या हाल किया है बेचारी की कच्छी का.लगता है तू उस बच्ची की जान लेकर ही रहेगा अपने मूसल से. 

बिहारी: मैं तुझे नहीं रोकुंगा वीरेंदर से चुदने से तो तू मुझे मत रोकना आशना को चोदने से, हिसाब बराबर. 

बीना: चल देखते हैं क्या होता है. कुछ सोच कर तुझे बताती हूँ कि क्या करना है. 

बिहारी: तूने बताया नहीं कि इस पैंटी का क्या करेगी?. 

बीना: बता दूँगी रज्जा, तेरी रानी की कच्छी उसे ही देने जा रही हूँ, बाकी सब बाद मे समझा दूँगी. अच्छा एक कम कर, तू मुझे आशना का कमरा बता और नीचे जा , मुझे अपना काम करने दे. बिहारी ने गंदी स्माइल उसे दी और उसके मम्मों को कस कर दबाते हुए कहा “तू साली बहुत बड़ी छीनाल है, पता नहीं डॉक्टर. कैसे बन गई” और यह कह कर वहाँ से चला गया.जाते-जाते उसने इशारे से बीना को आशना का कमरा दिखा दिया. 

बीना उसे जाते हुए मुस्कुराते हुए देखती रही. उसे फकर हो रह था अपनी किस्मत पर. उसका प्लान अपने आप ही सफल हो रहा था. 
बिहारी के सीडीयाँ उतरते ही बीना आशना के रूम की तरफ चल दी. नॉक करने से पहले उसने आशना की ब्रा-पैंटी अपने बॅग मे रखी और डोर नॉक किया.

आशना: आती हूँ मेरे बाय्फ्रेंड जी. 

इतना सुनते ही बीना का सिर चकराने लगा, उसे लगा जैसे आशना उसकी सौत बनने की राह मे काफ़ी आगे निकल गई है. 
उसने अपने आप को संभालते हुए कहा “आशना दरवाज़ा खोलो, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है”. 

अब बारी आशना के चौंकने की थी, उसने सोचा था कि वीरेंदर उसे नीचे जाने के लिए लेने आया होगा मगर उसने तो डॉक्टर. बीना को वीरेंदर समझ कर मज़ाक मे यह क्या कह दिया, आशना को अपने आप पर गुस्सा आने लगा. उसे काफ़ी शरम आ रही थी कि डॉक्टर. बीना उसके बारे मे क्या सोचेगी क्यूंकी वो तो यह जानती थी कि वीरेंदर उसका भाई है. उसने शरमाते हुए दरवाज़ा खोला और एक तरफ सहम कर खड़ी हो गई. 

बीना (अंदर आते हुए): अब तुम्हें क्या हुआ?

आशना ने कोई जवाब नहीं दिया, वो चुप चाप नज़रें नीचे झुका कर खड़ी रही. 

बीना: मैं तुमसे बात कर रही हूँ आशना. 

आशना: जी कुछ नहीं, वो मुझे लगा के वीरेंदर होगा तो मैने ग़लती से…… 

बीना: ग़लती से क्या? तुमने क्या कहा था ज़रा फिर से बोलना. 

आशना को लगा शायद डॉक्टर. बीना ने उसकी बात नहीं सुनी थी. उसने तेज़ी से दिमाग़ लगाया और बोली: मुझे लगा के वीरेंदर नॉक कर रहे हैं तो मैने कहा “अभी खोलती हूँ, दरवाज़ा पीटो मत”. 

बीना आशना के झूठ पर मुस्कुरा दी. 
बीना: घर के मालिक से इस तरह की बात, ओह मैं तो भूल ही गई थी कि तुम भी तो घर की मालकिन हो. 

आशना कुछ नॉर्मल हुई और बोली: कहिए डॉक्टर. कब आईं आप?. 

बीना: अभी कुछ देर पहले ही आई हूँ, नीचे हॉल के बाथरूम मे हाथ मूह धो रही थी तो बाहर आकर बिहारी काका ने बताया कि वीरेंदर अभी अभी तैयार हो कर बाहर खड़ी गाड़ियाँ गॅरेज मे पार्क करने के लिए गया है तो मैं उपर चली आई. वीरेंदर के रूम का दरवाज़ा खुला देखा तो अंदर चली गई. वहाँ से सीधा तुम्हारे कमरे मे आई हूँ. 

आशना: वीरेंदर तैयार हो भी गये? हे भगवान मैने तो अभी कपड़े ही पहने हैं बस. आशना ने एक लाइट ऑरेंज कलर ली लोंग स्कर्ट और स्काइ कलर की स्लीवेलेस्स टी-शर्ट पहनी थी.उसने अंदर से वाइट ब्रा पहन रखी थी जिसके स्टारप्स उसके शोल्डर पर दिख रहे थे. आशना ने जल्दी से ब्लॅक कलर की शॉर्ट जॅकेट पहनी और अपने आप को शीशे में देखने लगी. इस ड्रेस मे आशना काफ़ी हॉट लग रही थी. उसके लंबे बाल खुले हुए थे, उसने झट से रब्बर बॅंड से उन्हे संभाला और डॉक्टर. बीना की तरफ देख कर बोली चलें. बीना उसे घूर कर देख रही थी और हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी. आशना ने बीना की तरफ देखा तो शरमा कर वहीं खड़ी हो गई. \

बीना: सोच रही हूँ कि तुम वीरेंदर की कितनी केयर करती हो, उसके लिए फटाफट तैयार हो गई. उसके लिए इस घर मे आई और अब उसकी बीमारी का इलाज करने मे भी मेरी मदद कर रही हो. काश तुम सच मुच उसकी बेहन ना होती तो मैं वीरेंदर की शादी तुमसे ही करवा देती. बीना की इस तरह की बात से आशना एक दम शरमा गई और उसके गाल एक दम लाल हो गये. थोड़े देर कोई कुछ ना बोला. फिर बीना बोली: मगर लगता है कि वीरेंदर की ज़िंदगी मे कोई और लड़की आ गई है. इतना सुनते ही आशना के दिल को ज़ोर का झटका लगा. उसकी आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा. उसने बड़ी मुश्किल से अपने आप को गिरने से बचाया. उसके मूह से कुछ ना निकला. उसकी हालत देख कर बीना मन ही मन मुस्कुरा उठी. 

बीना: श्योर नहीं हूँ पर लगता है ऐसा. आशना के चेहरे के भाव को देखता हुए वो बोली: अभी जब मैं उसके रूम मे गई तो मुझे वहाँ उसके बाथरूम से पानी चलने की आवाज़ आ रही थी. मैने अंदर जा कर देखा तो वॉश-बेसिन का नल पूरी तरह से बंद नहीं था. मैं उसे बंद करके जैसे ही मूडी तो हॅंगर पर कुछ देख कर एक दम हैरान रह गई. आशना सवालिया नज़रों से बीना को देखने लगी. बीना ने अपने बॅग की ज़िप खोली और उसमें से आशना की ब्रा- पैंटी निकाल कर आशना को दिखाई और पूछा. 

बीना: इन्हे पहचानती हो? 

आशना का दिल एक दम धड़कना रुक गया और खुशी के मारे उसकी आँखों मे पानी आ गया मगर उसने ना में सिर हिलाया. आशना का जवाब सुनकर बीना भी मन ही मन मुस्कुरा उठी. 

बीना: यह उसके बाथरूम से मिले हैं. वो तो इसे पहनता नही होगा तो ज़रूर रात को कोई लड़की यहाँ आई होगी और फिर जाते हुए वीरेंदर को गिफ्ट कर गई होगी. बीना बेशर्मी से उसे आशना की आँखों के आगे लहरा रही थी. 

आशना शरम से गढ़ी जा रही थी. आशना ने हाथ आगे बढ़ाकर उसे पकड़ लिया. जैसे ही उसने अपनी पैंटी हा हाल देखा, उसे अपनी पुसी मे गीलेपन का एहसास हुआ. (आशना सोचने लगी, की वीरेंदर कितने लापरवाह हैं, इन्हे यूज़ कर के उन्हे वहीं बाथरूम मे टाँग दिया. कहीं छुपा देना चाहिए था.) 

बीना: इसका मतलब जनाब कहीं अपना दिल खो बैठे हैं और रात को उन्होने अपनी हसरतें भी पूरी कर ले होंगी क्यूंकी इस से पहले की तो मैं गॅरेंटी लेती हूँ कि “ही वाज़ प्योर वर्जिन”. 

आशना ने ब्रा-पैंटी को फोल्ड करके अपने पास रख लिया, यह सोच कर के इसमे उसके भाई उसके प्रेमी का पहला वीर्य गिरा है. 

बीना: इसे वहीं रख देते हैं, हो सकता है आज रात को फिर वो लड़की आए और अपने कपड़े वहाँ ना पाकर वीरेंदर से पूछेगी तो उसे कहीं शक ना हो जाए. 

आशना: आप फिकर ना करें, मैं बाद मे रख दूँगी. 

बीना मन में सोचते हुए: रख ले साली, यह तेरे होने वाले बच्चो के पिता के लंड से निकला वीर्य है, संभाल के रख ले. वीरेंदर की एक बात जो आशना ग़लती से जान चुकी थी , बीना अभी भी नहीं जानती थी कि वीरेंदर ने सच मूच रात मे आशना का नाम लेकर मास्टरबेट किया था.

बीना: चलो अब नीचे चलें, बहुत भूक लगी है. 

आशना: आप चलिए मैं अभी आती हूँ. बीना के जाते ही आशना ने ब्रा-पैंटी का सेट आलामरी मे रखा और अलमारी लॉक कर के रूम बंद करके नीचे आ गई. सबने डाइनिंग हॉल मे बैठ कर खाना खाया और बीना-वीरेंदर ने आशना के खाने की काफ़ी तारीफ भी की. आशना काफ़ी खुश हुई जब वीरेंदर ने खाने की इतनी तारीफ की.खाने के बाद वीरेंदर ने डॉक्टर. बीना को अपने रूम मे आने को कहा. 

वीरेंदर: डॉक्टर. आंटी, मुझे आप से कुछ बात करनी है, आप मेरे रूम में आ सकती हैं.

बीना की चूत यह सुनकर रिसने लगी और बोली: हां, हां क्यूँ नहीं. हम अभी आते हैं. 

वीरेंदर: मुझे सिर्फ़ आपसे बात करनी है. आशना को यह सुनकर अजीब सा लगा मगर उसने ज़्यादा ज़ोर नहीं दिया अपने दिमाग़ पर. उसे लगा कि शायद वीरेंदर उसके सामने कंफर्टबल फील नहीं कर रहा होगा, आख़िर जनाब ने रात को उसके कमरे मे आकर चोरी जो की है. 

आशना: डॉक्टर. बीना आप ही जाइए, मुझे वैसे भी बड़ी नींद आ रही है, मैं अब थोड़ी देर सोउंगी. 

बीना:ओके, तो वीरेंदर तुम चलो, मैं अभी आती हूँ कुछ ज़रूरी कॉल्स करनी हैं. हॉस्पिटल से पेशेंट्स की जानकारी ले लेती हूँ.

आशना उपर जाने लगी तो वीरेंदर भी उसके पीछे पीछे सीडीयाँ चढ़ने लगा. आगे जाती हुई आशना की बलखाती कमर पर नज़र रखकर वीरेंदर सीडीया चढ़ने लगा और चक्की की तरह घूमती हुई उसकी मांसल गान्ड देख मन मे सोचने लगा “तेरे लिए ही साली डॉक्टर. से सलाह लेने वाला हूँ, कुछ ही दिनो मैं इसकी थिरकन और बढ़ा दूँगा मेरी रानी”. 

उपर पहुँचते ही आशना ने पीछे मूड कर देखा और अपनी आस पर वीरेंदर की नज़र महसूस करते ही उसके होंठों पर मुस्कान तैर गई और उसके दिल से आवाज़ निकली “कमीना, अपनी ही बेहन के जिस्म को घूर रहा है”.

नीचे खड़े बिहारी और बीना यह देख कर मुस्कुरा रहे थे. वीरेंदर और आशना अपने अपने रूम मे घुस गये. 

बीना: कितनी डोज डाली थी?

बिहारी: 10-15 मिनिट रुक जा साली तब तक वो शायद तेरे आने से पहले ही अपने कपड़े उतार कर तेरा इंतज़ार कर रहा होगा.

इतना सुनते ही बीना की चूत मे चीटियाँ रेंगना शुरू हो गई. 

बीना: मैं वॉशरूम होकर आती हूँ, क्या पता साला सीधा मेरी गान्ड पर ही अटॅक ना करे, आशना की गान्ड को तो बड़े चाव से देख रहा था.

जब तक बीना वॉश रूम यूज़ करती, बिहारी ने बर्तन सॉफ कर दिए और उस अफ़रोडियासिक की थोड़ी डोज खुद खा ली. जैसे ही वो बाहर हॉल मे आया, बीना भी वॉशरूम से बाहर निकली. 

बीना: मैं उपर जा रही हूँ, तुम ध्यान रखना, कहीं आशना बीच मे ना टपक पड़े.

बिहारी: तू बेफिकर होकर चुदवा उसके मूसल से, वो अब शाम तक नहीं उठेगी. मैने उसे नींद की गोलियाँ दे दी हैं पानी में. 
बीना:ओह, बिहारी तुम मेरे लिए कितना कुछ रहे हो और यह कहकर बिहारी के गले मे बाहें डाल दी. 

बिहारी ने उसकी बाहें झटक कर कहा: साली तेरे लिए नहीं अपने लिए खिलाई है गोली उसे. जब तू अपने यार से चुदेगि, मैं उसके कमरे में जाकर उसकी सील तोड़ूँगा, मैने तो डोज भी ले ली है. \

बीना(घबराते हुए): ऐसा मत करना मेरे सैयाँ,उस नाज़ुक कली के साथ, उसकी सील तो वीरेंदर को ही तोड़ने देना और मैं वादा करती हूँ कि मैं भी वीरेंदर से चुदवाउन्गी नहीं बस उसे तडपा कर इतना बेबस और ख़ूँख़ार बना दूँगी कि वो आशना पर झपट पड़े. अगर तूने उसकी सील पहले ही तोड़ दी और आशना ने हंगामा कर दिया तो सारा प्लान फैल हो जाएगा. 

बिहारी: अब आई ना लाइन पर साली, मुझे पता था तू ऐसे नहीं मानेगी. जा तू बेफिकर होके उसका लौडा चूस , मैं भी अपना माल आशना को पिला कर आता हूँ. 

दोनो सीडीयाँ चढ़ने लगे और उपर जाकर बीना बोली: हो सके तो एक ही बार झड़ना तू, वीरेंदर को गरम करके अगर मैं भी गरम हो गई तो तेरे कमरे मे आ जाउन्गी. 

बिहारी ने कुटिल मुस्कान के साथ उसे देखा और बोला “कुतिया कहीं की”. 

बीना ने वीरेंदर का डोर नॉक किया. 
वीरेंदर: एक मिनिट डॉक्टर., अभी खोलता हूँ, वीरेंदर की आवाज़ से लग रहा था कि वो काफ़ी पीड़ा मे है. दो मिनिट के बाद वीरेंदर ने दरवाज़ा खोला और बीना अंदर आई और कमरे मे वीरेंदर के बिखरे कपड़े देख कर हैरान हो गई. वीरेंदर के सारे कपड़े बेड पर बिखरे पड़े थे. उसने फॉरन वीरेंदर की तरफ देखा जो कि एक वाइट पाजामे कुर्ते मे खड़ा हुआ था और उसकी आँखें काफ़ी लाल हो रखी थी. 

बीना ने अंजान बनते ह्यू पूछा “अरे योउ ओक वीरेंदर”? बीना ने अपने चेहरे पर चिंता की लाकारीन लाकर उसकी तरफ देखा. 
वीरेंदर: नहीं डॉक्टर. कुछ ठीक नहीं है. (वीरेंदर ने डॉक्टर. आंटी की बजाए सिर्फ़ डॉक्टर. बोला जिसे बीना जैसी चालाक औरत ने एक दम उसकी मनोदशा भाँप ली). उसने झट से दरवाज़ा बंद करके लॉक किया और वीरेंदर का हाथ पकड़ कर उसे बेड पर बिठाया. बीना फॉरन उसके कपड़े बेड से उठा कर सोफे पर रखती है और उसके पास जाकर बैठ जाती है. 

बीना उसकी आँखों मे देखते हुए: बोलो वीरेंदर क्या बात है. 

वीरेंदर ने अपनी निगाहें झुका ली और चुप रहा.

बीना ने देखा के पाजामे मे वीरेंदर का लौडा विकराल रूप ले चुका था, वो जानती थी कि अब वीरेंदर दिमाग़ से ज़्यादा लंड की बात सुनेगा. 

बीना: बोलो वीरेंदर आख़िर बात क्या है, कुछ बताओ तो सही. आख़िर मैं तुम्हारी डॉक्टर. हूँ, मुझसे छिपाओ नहीं. 

वीरेंदर ने निगाहें उठाकर बीना की तरफ देखा और कहते कहते खामोश हो गया. 

बीना ने देखा के वीरेंदर की आँखों मे खून आ गया है. वो जानती थी कि लोहा गरम हो चुका है, किसी भी वक्त पिघल सकता है. आशना की तरफ से वो निसचिंत थी. उसे पता था कि अब तक वो सपनो की दुनिया मे काफ़ी आगे निकल गई होगी. बीना ने फिर से वीरेंदर को कुरेदना शुरू किया. 
बीना: वीरेंदर मूज़े बताओ क्या हो गया है तुम्हें, क्यूँ इतना परेशान हो. तुम्हारी आँखे इतनी लाल क्यूँ हैं, क्या तुम रो रहे थे.बताओ मुझे, आज मैं जान कर ही रहूंगी. 

इतना सुनते ही वीरेंदर एक दम पागलो सा खड़ा हुआ और अपने पाजामे को एक ही झटके मे नीचे करके अपनी कमीज़ उठा ली. और……..

वीरेंदर(चिल्लाते हुए): यह प्राब्लम है मुझे. 

बीना उसके लंड को देखती ही रह गई, 9″ लंबा और करीब 5″ मोटा लौडा उसकी आँखों के आगे कुतुबमीनार की तरह खड़ा था. उस पर नसें ऐसे उभर आई थी कि थोड़ा सा दबाने से ही फट पड़ता.उसने अपनी पूरी ज़िंदगी मे कभी इतने बड़े लंड की कल्पना भी नहीं की थी. उसका हाथ अनायास ही उसके मूह पर चला गया. 

बीना( बनावटी गुस्सा दिखाते हुए): यह क्या बदतमीज़ी है वीरेंदर. 

बीना के रियेक्शन से वीरेंदर को अपनी ग़लती का एहसास हुआ. वीरेंदर धम्म से फिर से बेड पर बैठ गया. 

वीरेंदर: डॉक्टर. मैं क्या करूँ, यह मुझे हमेशा परेशन करता है. देखो इसे कैसे अकड़ गया है. मुझे दर्द हो रहा है, मैं क्या करूँ इसका. 

बीना( चोर नज़रो से उसके लौडे को निहारते हुए): तुम जवान हो वीरेंदर और काफ़ी सेहतमंद शरीर के मालिक हो और सबसे बड़ी बात अभी तक कुंवारे हो, इसलिए ऐसा है. मेरी बात मानो जल्द से जल्द शादी कर लो, इसका इलाज करने वाली ढूँढ लो. 

बीना के इस जवाब से वीरेंदर थोड़ा नॉर्मल हुआ, उसे लगा कि बीना ने शायद उसकी ग़लती माफ़ कर दी है. 

वीरेंदर: प्राब्लम इसका खड़ा होना नहीं है डॉक्टर., प्राब्लम है इस मे उठ रहा दर्द जब यह हार्ड हो जाता है. पता नहीं क्यूँ यह ऐसे ही दर्द करता रहता है. घंटो तक यह खड़ा ही रहता है और दर्द होता रहता है. मुझे तो लगता है मुझे कोई बीमारी है, तभी तो मैं शादी करने से डरता हूँ. 

बीना: इसका खड़ा होना तो तुम्हें हेल्ती प्रूव करता है और रही दर्द की बात तो तुम इसकी सफाई तो करते ही हो ना. 

वीरेंदर ने सवालिया नज़रो से बीना को देखा. 

बीना: मेरा मतलब, इसकी चमड़ी के अंदर गंदगी जमा हो जाती है जिसे अगर टाइम टाइम पर सॉफ ना किया जाए तो इन्फेक्षन हो सकती है. जिस कारण खारिश या दर्द होता है. 

वीरेंदर: इसकी चमड़ी ही तो पीछे नहीं होती, बहुत दर्द होता है यहाँ. 

बीना अंजान बनते हुए उसे देखती रहती है. 

वीरेंदर: डॉक्टर. प्लीज़ इसका कुछ इलाज करो, देखो इसकी चमड़ी पूरी पीछे नहीं होती. यह कह कर उसने अपने सुपाडे की चमड़ी को पीछे करने की कोशिश की . थोड़ा सा ही लाल सुपाडा बाहर आया था कि वीरेंदर के मूह से एक दर्द भरी आह निकली. 

बीना ने मोके का फ़ायदा उठाते हुए फॉरन अपना हाथ उसके लंड पर रख दिया जैसे जताना चाहती हो कि वो उसके दर्द को दूर करने की कोशिश मे इसे पकड़ बैठी. बीना ने जितनी तेज़ी से उस लौडे को पकड़ा उतनी ही तेज़ी से अपना हाथ पीछे भी खैंच लिया. बीना की चूत रस बहा बहा कर बहाल हो गई थी पर वो इस लौडे से चुद नही सकती थी अभी. उसने बहुत कोशिश की अपने आप को रोकने की. 

बीना ने अपना हाथ पीछे खैंचते ही वीरेंदर की तरफ देखा और धीरे से बोली “आइ आम सॉरी”. 

वीरेंदर: इट्स ओके, आप ही बताइए के अब इसका मैं क्या करूँ. 

बीना ने मुस्कुरा कर उसे देखा और बोली: तुम तो एक दम वर्जिन हो. 

इतना सुनते ही वीरेंदर की आँखें शरम के मारे झुक गईं. 

बीना: शरमाओ मत, इसका इलाज है पागल लड़के. पहले बता देते तो अब तक यह कई घोड़ियो की सवारी कर चुका होता.

वीरेंदर शरम के मारे अपना चेहरे भी नहीं उठा पा रहा था. 

बीना: शरमाने से काम नहीं चलेगा मिस्टर. वीरेंदर. 

वीरेंदर ने अपना चेहरा उठाकर बीना की तरफ देखा जो कि उसके लंड को ललचाई नज़रो से देख रही थी. 
वीरेंदर: तो क्या मैं ठीक हो सकता हूँ. मेरा मतलब है कि इसका दर्द ठीक हो सकता है. 

बीना: बिल्कुल ठीक हो सकता है. आक्च्युयली मैं तुम्हें समझाती हूँ. शरमाना मत कोई भी सवाल मन मे उठे तो बेहिचक पूछ लेना, मुझे अपना दोस्त समझना. 

वीरेंदर ने हां मे गर्दन हिलाई

बीना–.ऐसा है कि जब तक लड़की कुँवारी (वर्जिन)होती है तो उसकी वेजाइना मे एक परदा जैसा होता है, जिसे “हाइमेन” कहते हैं. जब उनकी शादी होती है या शादी से पहले अगर वो किसी के साथ सेक्स करती हैं तो वो परदा फट जाता है जिस से उन्हें थोड़ी देर तेज़ दर्द होता है और खून भी निकलता है. ठीक उसी तरस मर्दों के पेनिस मे भी एक फ्लेशी सील होती है जो कि पेनिस के अगले हिस्से पर होती है जैसे कि तुम्हारी है. यह सील ना टूटने के कारण तुम्हारी पेनिस की चमड़ी पीछे तक नहीं जा पाती और अगर तुम कोशिश भी करते हो तो तुम्हें तेज़ दर्द होता है. 

वीरेंदर: तो इसका इलाज? मेरा मतलब यह कैसे टूटेगी. 

बीना(मुस्कुराते हुए): बड़ी जल्दी है तुम्हें अपनी सील तुड़वाने की. 

वीरेंदर बीना के इस जवाब से झेंप गया. 
वीरेंदर: नहीं मेरा मतलब वो….. 

बीना(हंसते हुए): कोई बात नहीं, मैं तुम्हें इसका इलाज बताती हूँ.
बीना: शादी के बाद जब तुम सुहागरात मे अपनी अपनी वाइफ की सील तोड़ोगे तो तुम्हारी भी सील टूट जाएगी, सिंपल. 

वीरेंदर(शरमाते हुए): इतना सिंपल नहीं है. मैं तो दर्द के मारे कुछ कर भी नही पाउन्गा. 

बीना: रहने दो यह सब. जब तुम्हारी बीवी तुम्हारे सामने बेड पर नंगी लेटी होगी ना तो तुम सब दर्द भूल जाओगे और उसे चोद…….. 
बीना: आइ आम सॉरी. 

वीरेंदर: बोलो ना बीना. 
बीना हैरानी से उसकी आँखों मे देखती है. आज पहली बार वीरेंदर ने उसे सिर्फ़ बीना कह कर पुकारा था. बीना एक दम ताड़ गई कि बकरा घास खाने को तैयार है. बीना ने शरमाने का नाटक करते हुए अपने हाथ अपने चेहरे पर रख दिए और धीरे से बोली: मुझे शरम आती है. 

वीरेंदर को बीना की यह अदा घायल कर गई. 
वीरेंदर: बोलो ना बीना, जब मेरी बीवी नंगी होगी तो क्या? 

बीना ने हाथो से चेहरा छुपाकर ना मे गर्दन हिलाई. बीना जानती थी कि वीरेंदर को जितना तडपाया जाएगा वो उतना ही ख़ूँख़ार होगा. 

वीरेंदर: बताओ ना, प्रॉमिस मैं यह बातें किसी से नहीं कहूँगा. 

बीना ने अपनी आँखों से अपने हाथो की उंगलियाँ खोल कर देखा और बड़ी अदा से पूछा कि” अभय को भी नहीं बताओगे ना”? 

वीरेंदर: नहीं, गॉड प्रॉमिस. 

बीना: पर मुझे शरम आती है.वीरेंदर 

एकदम भड़क उठा और बोला: तो मुझसे सुन मैं बताता हूँ. जब सुहागरात पर मेरी दुल्हन नंगी लेटी होगी तो मैं उसे चोदे बिना रह नहीं पाउन्गा, यही कहना चाहती थी ना तू. 

बीना ने एकदम से अपने हाथ चेहरे से हटा कर अपना बायाँ हाथ अपने मूह पर रख दिया. 

वीरेंदर: क्यूँ अब क्या हुआ, तू बोले तो सब सही, मैं बोलूं तो इतना बड़ा मूह खुल गया. 

बीना: यह बातें कहने की होती हैं क्या (बीना हर बात बड़ी अदा से बोल रही थी और वीरेंदर उसके जाल मे फँसता जा रहा था). 
बीना: वीरेंदर को उकसाना चाहती थी, वो चाहती थी कि वीरेंदर एक बार उसे पकड़े तो सही, उसके बाद तो उसके लंड को छोड़ेगी ही नहीं. 

वीरेंदर: बाकी सब रहने दो मगर जब तक मेरी शादी नहीं हो जाती, तब तक इसका क्या करूँ. यह बात वीरेंदर ने अपने लंड की तरफ इशारा कर के कही. 

बीना: वोही जो अभी तक करते आए हो. 

वीरेंदर: खाक किया है अभी तक कुछ, कल पहली बार तो मूठ मारी रात को मैने, वो भी दर्द के मारे जान निकल गई. 

बीना ने देखा वीरेंदर अब खुलने लगा है तो उसने भी शरम का नाटक चोएड दिया. बीना ने उसकी आग को हवा देते हुए कहा: क्या कल पहली बार मूठ मारी तुमने?. 

बीना के मूह से ऐसी बातें सुनकर वीरेंदर के लंड मे और जोश आ गया. 

वीरेंदर: हां, प्लीज़ कुछ कर दे ना. 

बीना: मैं क्या करूँ, मैं कोई तेरी गर्लफ्रेंड या बीवी थोड़ी हूँ जो इसे ठंडा करूँ (यह बात बीना ने उसके लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा), मैं तो तेरी बीना आंटी हूँ ना. 

वीरेंदर: बीवी तो तू अभय की है तो मेरी गर्लफ्रेंड बन जा ना. 

बीना: अच्छा जी अब मतलब निकालने के लिए बीना आंटी को गर्लफ्रेंड बना रहे हो. 

वीरेंदर: बन जा ना क्या फरक पड़ता है. तेरी कॉन सी सील है जो अभय को पता चल जाएगा. 

बीना: ना बाबा ना, इतने बड़े ल…….वाले की गर्लफ्रेंड नहीं बनना मुझे. मैं तो मर ही जाउन्गी. 

वीरेंदर: क्यूँ, क्या अभय का लंड ऐसा नहीं है क्या?. अब वीरेंदर बिल्कुल गंदे वर्ड्स पर उतार आया था तो बीना भी कहाँ पीछे हटने वाली थी.

बीना: अभय का क्या मुझे तो लगता है तेरे से बड़ा लंड शायद ही किसी का हो. तेरी दुल्हन तो शायद ही झेल पाए तुझे अगर वो वर्जिन हुई तो. 

वीरेंदर: क्या सच मुच मेरा बहुत बड़ा है. 

बीना: इतना बड़ा कि मुझ जैसी औरत भी मुश्किल से ले पाए बिना तेल लगाए. 

वीरेंदर की आँखों मे चमक आ गई. वीरेंदर(शरारती लहजे मे): तैल तो है मेरे पास बाथरूम, तू तैल की चिंता ना कर. 

बीना: अच्छा बच्चू, मुझ से सीख रहे हो और मुझ पर ही प्रॅक्टिकल भी करना चाहते हो. 

वीरेंदर बीना को बाहों मे भरते हुए: तूने ही तो कहा है कि कुँवारी लड़की मेरा लौडा शायद झेल ना पाए. तू चिल्लाएगी सही पर मेरा ले तो लेगी ना अपनी चूत में. 

बीना: हट बेशरम कहीं का, कितनी गंदी लॅंग्वेज यूज़ करता है अपनी माँ समान चाची के साथ. 

वीरेंदर: चाची?

बीना: और नहीं तो क्या?, तुम अभय को चाचू नहीं बोलते हो क्या. 

वीरेंदर: वो तो मैं ऐसे ही बोलता हूँ. तुम तो मेरी रानी हो. 

बीना: मुझे भी तो बीना आंटी बुलाते थे. 

वीरेंदर: सबके सामने बुलाना पड़ता है, दिल मे तो तू हमेशा मेरी रानी बनके रही है. 

बीना: अच्छा, फिर रूपाली का क्या?

वीरेंदर ने एक दम उसे झटका देकर अपने से दूर कर दिया. 
वीरेंदर: तू रूपाली के बारे में कैसे जानती है. 

बीना एकदम घबरा गई, यह उसने क्या कह दिया. वीरेंदर ने तो कभी बीना से या किसी से रूपाली का ज़िक्र किया ही नहीं. 

बीना: हड़बड़ाते हुए वो …वो..वो. रूपाली की सहेली मेरी मौसी के बेटे की बीवी है. उसी ने मुझे तुम्हारे और रूपाली के बारे मे बताया था. 

रूपाली का नाम आने से वीरेंदर काफ़ी उखड़ गया था. बीना ने मोके की नज़ाकत को समझते हुए वीरेंदर का लंड पकड़ लिया और बोली बेचारा देखो अभी तक सलामी दे रहा है. इसका कुछ करना ही पड़ेगा. वीरेंदर के लौडे पर पहली बार किसी औरत का हाथ लगते ही उसके दिमाग़ के सारे फ्यूज़ उड़ गये और उसके मूह से एक आह निकली. 

बीना: अगर मेरे पीरियड्स ना होते तो मैं आज इसे बिना तेल लिए भी अपने अंदर लेने को तैयार थी लेकिन कोई बात नहीं मैं इसे ठंडा तो कर ही सकती हूँ. 

वीरेंदर: क्या यार तेरे पीरियड्स बीच मे कहाँ से आ गये. 

बीना: क्या करूँ रोमीयो आज से ही स्टार्ट हुए हैं. अब तो 4-5 दिन किसी तरह से निकाल लो उसके बाद तो तेरी सील मैं अपनी चूत से ही तोड़ूँगी. 

वीरेंदर(खुशी से चहकते हुए): सच. 

बीना: मुच.
बीना: अच्छा एक काम करो तुम आराम से बेड पर बैठ जाओ, मैं अभी आती हूँ. वीरेंदर बेड पर टेक लगाकर बैठ गया और बीना बाथरूम मे चली गई. थोड़ी देर बाद बीना अपने हाथ मे हेर आयिल की बॉटल लेकर आ गई. 

वीरेंदर तैल की बॉटल देख कर बोलता है: यह तैल किस लिए, चूत का लाल दिवस है तो क्या गान्ड देने का इरादा है.

बीना(शरमाते हुए): वो भी ले लीजिएगा पर पहले चोदने के लायक तो बन जाइए जनाब. 

वीरेंदर: हाए कुर्बान जाउ तेरी इस अदा पर रानी. 

बीना: तुम लेट जाओ, और देखो मेरा जादू. 

वीरेंदर: दिखाएगी तो देखूँगा ना. 

बीना:क्या मतलब? 

वीरेंदर अपने कपड़े तो उतार. 

बीना: नहीं मुझे शरम आती है. 

वीरेंदर: तो चूत क्या कपड़े लगा कर देगी. 

बीना: जाओ मैं नहीं करती कुछ. तुम इतने बेशरम बनजाओगे मुझे पता भी ना था. 

वीरेंदर: अभी तुमने मेरी बेशर्मी देखी कहाँ है. एक बार तुम्हारी चूत ग्रीन सिग्नल दे दे, सारे घर मैं नंगी घुमा-घुमा कर चोदुन्गा. 

बीना: जब घूमाओगे तब देखेंगे. अब तुम लेट जाओ जल्दी से, मुझे क्लिनिक भी जाना है. 

वीरेंदर: अच्छा अपनी कमीज़ तो उतार दो. कम से कम अपने मम्मों से तो खेलने दो. 

बीना जानती थी कि एक बार वो गरम हो गई तो उसे अपने आप को रोकना थोड़ा मुश्किल हो जाएगा. वो नहीं चाहती थी कि आशना से पहले वो वीरेंदर से चुदे. 

बीना: जानू प्लीज़ समझा करो, 4-5 दिन की बात है, फिर सब देख लेना. 

वीरेंदर: चल जा, तू भी क्या याद करेगी. आ जा और कर ठंडा मेरा लौडा. 

बीना ने बॉटल से तैल निकाल कर अपनी हथेलियो पर लिया और उन्हे अच्छी तरह से तर कर दिया. फिर बेड पर आकर वो वीरेंदर की टाँगो के बीच बैठ गई और बोली ” जानू देखो जब होने लगे तो बता देना. मेरे उपर मत कर देना, यहाँ से सीधा हॉस्पिटल जाना है. 

वीरेंदर: तो एक काम कर मेरा मूह मे ले ले और सारा माल पी जा. 

बीना: छी, छी कितने गंदे हो तुम. इसे कोई मुँह मे लेता है क्या? 

वीरेंदर: रानी इसे मूह मे लेकर तो प्यार किया जाता है, क्या तुम्हे नहीं पता. 

बीना: लेकिन मैने कभी भी नहीं लिया, अभय ने मुझे कभी कहा ही नहीं. 

वीरेंदर : तो आज ट्राइ कर ले. 

बीना: आज नहीं, मेरा मन खराब हो जाएगा, मुझे पारीोड्स चल रहे हैं. 

वीरेंदर मन मार कर रह गया और बोला: चल झट से ही झाड़ दे. 

बीना ने उसके सुलगते हुए लौडे को अपने हाथों से पकड़ा तो एक पल के लिए उसके हाथ कांप गये. वीरेंदर का लौडा आग उगल रहा था. गरम लोहे की सलाख के जैसे वो एक दम आकड़ा खड़ा था. बीना ने उसके सुपाडे की चमड़ी को अच्छी तरह तैल से चुपडा और धीरे धीरे उसका सारा लंड तैल से चुपड दिया. 

वीरेंदर: अरे वाह बड़ा मज़ा आ रह है. 

बीना: अब थोड़ा दर्द होगा, जहाँ तक हो सके बर्दाश्त करना और अगर ज़्यादा हो तो बता देना.

वीरेंदर ने हां मे गर्दन हिलाई. 

बीना ने एक हाथ से उसके लौडे की जड़ मे छल्ला बनाया और एक हाथ से उसके सुपाडे से चमड़ी हटाने लगी. बीना धीरे धीरे से दवाब बनाती रही और जैसे ही सूपड़ा बाहर निकलने को हुआ, वीरेंदर कराह पड़ा “बस”. 
बीना ने हाथ वहीं रोक लिया पर चमड़ी उपर नहीं की. 

बीना: शाबाश, लंबी सांस लो और फिर छोड़ो. वीरेंदर ने वैसा ही किया.
बीना: हां ऐसे ही, बिल्कुल ठीक. बीना उतनी ही चमड़ी को उपर करती और फिर नीचे दबाती, जिस से वीरेंदर का सुपाडा कभी चमड़ी से बाहर झाँक रहा होता तो कभी चमड़ी मे छुप जाता. वीरेंदर को मज़ा आने लगा. कुछ देर बाद जब वीरेंदर नॉर्मल हुआ तो बीना ने उसकी चमडी नीचे दबा कर वीरेंदर को उसकी सील के बारे मे बताया. वीरेंदर ध्यान से सब देख रहा था. 

वीरेंदर: तो तोड़ दे ना इसे, आज ही सह लेता हूँ यह दर्द. 4-5 दिन बाद तो ऐश कर सकते हैं. 

बीना ने इस बार एक चाल चली. 
बीना: कैसा लगेगा अगर तुम्हें एक ऐसी बीवी मिले जिसकी सील पहले से टूटी हो. 

वीरेंदर: मैं उस साली की गान्ड की सील तोड़कर उसे घर से बाहर निकाल दूँगा. 

बीना: इसीलिए कहती हूँ कि अपनी सील तुम उसे गिफ्ट करना जो तुम्हें अपने सील गिफ्ट करे. 

वीरेंदर: इसका मतलब 4-5 दिन बाद वाला प्रोग्राम कॅन्सल. 

बीना: केन्सल क्यूँ? 4-5 दिनों मे अपने लिए कोई दुल्हन ढूंड लो ना, तुम्हारे लिए तो लड़कियो की लाइन लग जाएगी एक बार हां तो करो, शादी चाहे बाद मे करना मगर उस से सेक्स तो कर ही सकते हो. 

वीरेंदर: इतनी जल्दी कोई लड़की सेक्स के लिए तैयार होगी क्या? चाहे उस से शादी का वादा कर लूँ पर कोई भी लड़की सेक्स के लिए इतनी जल्दी तैयार नहीं होगी. 

बीना: तुम जानते नहीं आजकल की लड़कियाँ सेक्स के प्रति काफ़ी इंट्रेस्टेड हैं. 

बीना: एक अड्वाइज़ फ्री मे देती हूँ,हो सके तो 20-21 साल की लड़की ढूंडना, क्यूंकी एक तो उनका बदन करारा बड़ा होगा और नयी नयी जवानी के चलते उसमे सेक्स के प्रति इंटेरेस्ट बहुत होता है, मुझे पूरा यकीन है वो मना नहीं करेगी. 

वीरेंदर:20-21 साल की लड़की कहाँ से मिलेगी मेरे लिए तुम्हें पता है मैं 33+ हूँ. इतनी छोटी लड़की मेरे से क्यूँ पटेगी. 

बीना वीरेंदर के लंड को लगातार मुठियाए जा रही थी और बोली:इसलिए, आज कल की लड़कियो को लंबे लंड का बहुत शोक होता है. बस एक बार उसे दिखा देना, फिर देखना कैसे तेरे पीछे भागेगी. 

वीरेंदर कुछ देर खामोश रहा और कुछ सोचने लगा. बीना जानती थी कि वीरेंदर क्या और किसके बारे मे सोच रहा है.

बीना: क्या सोच रहे हो. क्या कोई लड़की है तुम्हारी नज़र मे. 

वीरेंदर(एक दम से अपने ख्यालों की दुनिया से बाहर आते हुए): क्या?….. ना…….नहीं तो.

बीना ने उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा दिया और बोली: तो फिर यह (वीरेंदर के लंड को देखते हुए) इतना ठुमक क्यूँ रहा है. 

दरअसल वीरेंदर आशना के बारे मे सोच रहा था तो उसके लौडे ने ठुमक कर वीरेंदर को शाबाशी दे दी. 
वीरेंदर: ऐसी कोई बात नहीं बस ऐसे ही.

बीना: अरे यार बोलो, अब मुझ से क्या शरमाना. कुछ दिनों की बात है फिर तो हम दोनो एक हो ही जाएँगे. 

वीरेंदर: आक्च्युयली, वो एक लड़की है पर शायद वो माने या ना माने. 

बीना: मानेगी क्यूँ नहीं? तुमने उसे बोला क्या?. 

वीरेंदर: नहीं, वो, आक्च्युयली अभी हम कुछ दिन पहले ही मिले हैं तो इतनी ज़्यादा बात नहीं हो पाई. 

बीना: कॉन है वो मेरे राजा मुझे भी तो बताओ. 

वीरेंदर: नहीं, शायद आपको बुरा लगे.

बीना ने वीरेंदर के लंड को दबा दिया, जिस से वो बुरी तरह तड़प उठा. बीना ने उसके लौडे से अपने हाथ खींच लिए और बोली: नहीं बताओगे तो मैं इसे नहीं पाकडूँगी. 

वीरेंदर काफ़ी करीब आ चुका था झड़ने के. बीना की इस बात से उसे काफ़ी गुस्सा आया पर वो अभी बात को बिगाड़ना नहीं चाहता था. 

वीरेंदर: पहले प्रॉमिस करो कि तुम मेरी हेल्प करोगी. 

बीना: अगर मेरे बस मे हुआ तो मैं तुम्हारी हेल्प क्यूँ नहीं करूँगी, तुम बताओ तो सही कि वो कॉन है ?. 

वीरेंदर:मुझे आशना अच्छी लगने लगी है और उस से शादी करना चाहता हूँ,वीरेंदर ने एक ही सांस मे सारी बात बोल दी. 

बीना ने एक दम हैरानी के भाव अपने चेहरे पर लाते हुए गुस्से से वीरेंदर को देखा. बीना बेड से उठ कर खड़ी हो गई और बोली: मिस्टर. वीरेंदर आप होश मे तो हैं, वो मेरी दोस्त की इक्लोति निशानी है, वो मेरी बेटी समान है, अभी उसकी उम्र ही क्या है. 

वीरेंदर: तो तेरी बेटी की शादी नहीं करनी क्या तूने? मुझमे क्या कमी है. 

बीना ने कुछ देर तक कुछ ना बोला बस वीरेंदर के चेहरे की भावनाओं को पढ़ती रही. 
बीना: ऐसा नहीं हो सकता. अगर वो मेरी बेटी जैसी है तो तुम्हे भी मैने अपने बेटे जैसा ही माना है. इस रिश्ते से आशना तुम्हारी बेहन लगी ना. 

वीरेंदर: तुम हाँ कर दो मैं बेहन्चोद बनने को भी तैयार हूँ. 

बीना के चेहरे पर मुस्कान आ गई और बोली: माँ समान चाची को चोद कर मदर्चोद तो बनोगे ही, बेहन्चोद भी बनना चाहते हो. 

वीरेंदर: हां मुझे बेहन्चोद भी बनना हैं. 

बीना: लेकिन वो अभी बहुत छोटी है, शायद शादी के लिए ना माने. यह फ़ैसला मैने उस पर छोड़ा है. यह भी हो सकता है कि वो किसी और को चाहती हो. 

वीरेंदर: तुम यह कैसे कह सकती हो कि वो किसी और को चाहती होगी. 

बीना: मैने बहुत दुनिया देखी है. आशना अभी सिर्फ़ 20 साल की है पर उसका जिस्म देखा है कभी. उसके बूब्स और गान्ड कितने भरे हैं, मुझे तो शक है कि कोई तो उन्हे मसलता ही होगा. 

यह सुनकर वीरेंदर की आँखों के आगे आशना का जिस्म नाच उठा. बीना का कहना तो ठीक ही था, 20 साल की उम्र मे ही आशना काफ़ी ग्रूम कर चुकी थी लेकिन यह ग्रूमिंग उसकी एयिर्हसटेस्स ट्रैनिंग के दौरान हुई थी. जिस से वो एक परफ़ेक्ट एयिर्हसटेस्स बन सके. 

बीना ने वीरेंदर को ख्यालों मे खोया देखा तो उसने अपना पैंतरा बदला और बोली: यह सिर्फ़ मेरा शक है. हो सकता है कि ऐसा ना हो. आशना की माँ भी ऐसी ही थी. छोटी सी उम्र मे ही उस पर जवानी कहर बनकर टूटी थी. आशना आख़िर अपनी माँ पर ही तो जाएगी ना. 

वीरेंदर: यार मुझे सही सही बताओ, गुमराह मत करो. 

बीना: उसके दिल मे कोई है या नहीं इसका तो पता नहीं मगर इतना मैं यकीन के साथ कह सकती हूँ कि वो अभी तक बिल्कुल कुँवारी है. 

वीरेंदर: वो कैसे?

बीना: डॉक्टर. हूँ, उड़ती चिड़िया के पर गिन सकती हूँ. जितना कसाव आशना के जिस्म मे है, उतना कसाव चुदि हुई लड़की के जिस्म मे देखने को नहीं मिलता. चुदि हुई लड़की का पेट अक्सर थुलथुला हो जाता है, जैसे कि मेरा और मम्मे भी झूल जाते है. मैं यकीन के साथ कह सकती हूँ कि आशना के मम्मे बिना ब्रा के भी वैसे ही खड़े रहते होंगे जैसे ब्रा के अंदर. 

वीरेंदर उसका यह तर्क सुन कर बहुत खुश हुआ. उसने भी तो आज आशना को बिना ब्रा के देखा था और काफ़ी कसाव था उसके मम्मो मे. 
वीरेंदर: चल मान लेते हैं कि वो कुँवारी है, लेकिन उसके दिल मे कोई और होगा तो. 

बीना: क्या तुम वाकई आशना से शादी करना चाहते हो या सिर्फ़ कुछ दिन तक खेलना चाहते हो. बीना के इस सवाल से वीरेंदर सोच में पड़ गया और फिर बोला. 

वीरेंदर: अगर मैं उस से केवल मन बहलाना चाहूं तो? 

बीना: यह तो मैं समझ सकती हूँ कि तुम जो दिखते हो वैसे हो नहीं मगर इतने बड़े कमीने होंगे मैने कभी सोचा भी नहीं था. 

वीरेंदर: इतनी तारीफ मत करो कि मैं खुद को भगवान समझ बैठू, चलो तेरी बेटी से शादी करके उसे अपनी पत्नी बना लूँगा. 

बीना: तो ठीक है, आज ही उस से बात कर लो शादी की. मैं नहीं कर सकता, तुम करके देख लो. 

बीना: बेटा मेहनत मैं करूँ और अनार तुम खाओ.मैने उसे उसके माँ-बाप के बाद संभाला है, मेरा कहा तो वो टाल नहीं पाएगी. मैं यह भी नहीं चाहती कि वो किसी दबाव मे आकर हां करे, इसलिए ठीक यही रहेगा कि तुम उसे प्रपोज़ करो. अगर वो मान गई तो ठीक नहीं तो मैं बात करके देखूँगी. तुम्हारे लिए इतना तो कर ही सकती हूँ. 

वीरेंदर: अभी नहीं. मैं उस से शादी की बात अभी नहीं कर सकता. 

बीना: क्यूँ? 

वीरेंदर: बस ऐसे ही, 3-4 महीने तक मैं उसे अपनी गर्लफ्रेंड बना कर रखना चाहता हूँ ताकि उसे भी सोचने और परखने का समय मिल जाए. 

बीना: लेकिन मैं कैसे यकीन करूँ कि तुम 3-4 महीनो के बाद उस से शादी करोगे.हो सकता है तुम उसे यूज़ करने बाद मे धोखा दे दो. 

वीरेंदर कुछ देर सोचता रहा और फिर बोला तो तुम बताओ कि तुम्हें कैसे यकीन आए. 

बीना: यकीन तुम्हें दिलाना है, तुम बताओ. 

वीरेंदर: एक काम करता हूँ, अपने हिस्से की प्रॉपर्टी उसके नाम कर देता हूँ, फिर तो तुम्हें यकीन हो जाएगा. 

बीना के मन मे लड्डू फुट पड़े यह सुनकर. अपने चेहरे के भावों को छुपाते हुए बीना बोली: इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है क्या?. 

वीरेंदर: अगर हो तो भी मुझे यही रास्ता सही लगता है. प्रॉपर्टी उसके नाम हो या मेरे, रहेगी तो हमारी ही ना.वैसे भी मेरे बाद मेरी प्रॉपर्टी पर मेरी बीवी का ही हक होगा ना.

बीना ने सहमति मे सिर हिलाया. 

वीरेंदर: मगर मेरी एक शर्त है कि आशना को इस बारे मे हमारी शादी के बाद ही पता चले. 

बीना भी तो यही चाहती थी कि आशना के इसके बारे मे पता ही ना लगे. वीरेंदर ने तो उसका काम आसान कर दिया था. आधी प्रॉपर्टी तो वैसे भी आशना के नाम की थी और वीरेंदर द्वारा अपने हिस्से की प्रॉपर्टी भी उसके नाम कर देने से आशना पूरी प्रॉपर्टी की मालकिन बन जाती. उसके बाद वीरेंदर चाहे आशना से शादी करे या ना करे सारी प्रॉपर्टी तो आशना के नाम ही रहने वाली थी. बीना और बिहारी आशना को ब्लॅकमेल करके उस से सारी प्रॉपर्टी हथिया सकते थे. यह भी हो सकता था कि आशना वीरेंदर को सब कुछ सच सच बता दे इस लिए बीना और बिहारी के लिए अब सब से ज़रूरी यह था कि वीरेंदर को आशना का सच पता चलने से पहले वो उन्दोनो को सेक्षुयली इतना फ्रस्टेट कर दें कि वो एक दूसरे के अलावा कुछ सोच ही ना पाएँ. 

बीना:ऐसी शर्त क्यूँ? 

वीरेंदर:क्यूंकी मैं आशना का सच्चा प्यार पाना चाहता हूँ.यह भी हो सकता है कि दौलत के लालच मे आकर वो मुझसे शादी कर ले. इस लिए यह राज़ सिर्फ़ मेरे और आपके बीच ही रहेगा. 

बीना: इज़ राज़ को मैं अपनी चूत मे छुपाकर रखूँगी जिसे तुम अपने लौडे से अंदर ही दफ़न कर देना. 

वीरेंदर: तो उसके लिए तो मुझे तेरी चूत मे अपना लौडा घुसाना पड़ेगा ना. 

बीना: मन तो मेरा भी बहुत है पर क्या करूँ अगर पारीोड्स ना होते तो आज मैं तुमसे ज़रूर चुदवाती, फिर चाहे तुम चचिचोद बनते, चाहे मदर्चोद या सासू चोद. क्यूंकी चाची तो मैं तेरी पहले से हूँ तो माँ के बराबर ही हुई ना और आशना मेरी बेटी जैसी है तो मैं तुम्हारी सास भी हुई. 

वीरेंदर: मैं तुम्हें तीनों रूपों मे चोदुन्गा लेकिन तेरी शर्त के मुताबिक पहले मुझे बेहन्चोद बनना पड़ेगा. 

बीना: बस एक बार तू उस से अपने लौडे की सील तुड़वा ले फिर देख मैं कैसे तेरा लौडा अपनी चूत और गान्ड मे लेती हूँ. 

वीरेंदर की आँखें चमक उठी बीना के ऐसा कहने से. 

वीरेंदर: क्या तू मुझे अपनी गान्ड भी देगी. 

बीना: अपने प्यारे बेटे और जवाई के लिए मैं अपनी गंद भी कुर्बान कर दूँगी.

वीरेंदर का लौडा इतना सुनते ही फिर से अकड़ गया. 
वीरेंदर: चल पहले आज तो इसे ठंडा कर दे. 
बीना: अब तो मैं इसे देख कितना प्यार करती हूँ यह मेरी बेटी की चूत में जो जाने वाला है. 
वीरेंदर के लौडे ने एक ठुमका लगाया इतना सुनते ही. 
वीरेंदर: चल अब जल्दी कर वरना तेरी बातों से ही मेरा रस निकल जाएगा. 
बीना: चल फिर आराम से बेड पर लेट जा और देख मेरा कमाल. 
वीरेंदर के लंड पर लगा तैल सुख गया था. 
बीना: यह तो सारा तैल पी गया. 
वीरेंदर: बहुत प्यासा है यह, चूत रस नहीं मिलेगा तो तैल ही पिएगा ना. बीना: चल अब मैं इसका ही तैल निकलती हूँ, देखें ज़रा कितना तैल भरा है तेरे टट्टो मे. 
वीरेंदर: तैल तो तेरी और तेरी बेटी की चूत भरने के लिए ही बचा रखा है, आ जा देख ले कितना तैल है मेरे टट्टो मे. वीरेंदर बेड पर लेट गया और बीना बेड पर चढ़ कर उसकी टाँगो के बीच आ गई. बीना ने अपने मुलायम हाथो से उसका लौडा पकड़ा तो वीरेंदर की कमर अपने आप उठ गई. 
वीरेंदर: इतने मुलायम हाथ हैं तेरे तो पहले तैल क्यूँ लगाया था. 
बीना तेरे लौडे की चमड़ी को ज़्यादा दर्द ना हो इस लिए इसे गीला करना ज़रूरी था. 

वीरेंदर: लेकिन अब तो तैल सूख गया है, अब क्या करेगी. 
बीना: सोचती हूँ कुछ, तुम बस आँखें बंद कर के लेट जाओ और मेरा कमाल देखो. वीरेंदर को लगा शायद अब बीना उसका लौडा मूह में लेगी. वीरेंदर के दिल की धड़कने बढ़ गई और उसने आँखें बंद कर ली, उसे लगा कि शाया बीना उसका लौडा मूह मे लेने से शरमा रही है इसलिए उसे आँखे बंद करने के लिए बोल रही है. 
काफ़ी देर तक बीना उसे अपने हाथो से हिलाती रही और जब वीरेंदर को लगा कि शायद उसने ग़लत सोचा है, उसे अपने लंड पर गरम सांसो का एहसास हुआ.
बीना: तुम्हारे लिए मैं सिर्फ़ इन्हें (वीरेंदर की टेस्ट्स पर हाथ रख कर) एक बार चूस लेती हूँ, लेकिन प्लीज़ इस से आगे कुछ भी करने के लिए मत बोलना. 
वीरेंदर ने हां मे गर्दन हिलाई.
बीना ने हाथ से पकड़ कर वीरेंदर के नरम पड़ रहे लंड को उपर की ओर उठाया और उसके टेस्ट्स पर मूह लगाया.

बीना के ऐसा करने से ही वीरेंदर का लंड जो कि थोड़ा नरम पड़ गया था एक दम से ख़ूँख़ार हो गया और बीना की गिरफत से छूटने लगा. बीना: यह तो एक दम से ही तन गया, अभी तो बस एक ही बार इसको मूह लगाया है.
वीरेंदर: बस बीना एक बार मूह मैं ले ले ना, मैं ज़िंदगी भर तेरा गुलाम बन कर रहूँगा.
बीना यह बात सुनकर काफ़ी खुश हो गई.
बीना: तुम कुछ बोलो मत और मुझे अपना काम करने दो. इतना कहते ही बीना ने अपना मूह वीरेंदर के सुपाडे के बिल्कुल करीब कर दिया.
वीरेंदर के दिल की धड़कनें रुक गई. वो बीना की गरम साँसें सॉफ महसूस कर सकता था अपने लौडे के सिरे पर. बीना भी जानती थी कि वीरेंदर के मन में क्या चल रहा है. वो उसे पहली बार मे ही अपना दीवाना बना देना चाहती थी ताकि आगे आने पर वो उसकी कोई भी बात टाल ना सके. उसने अपनी जीब बाहर निकाली और वीरेंदर के सुपाडे पर फेर दी. वीरेंदर की कमर उछल गई और उसके मूह से सिसकारी निकल गई.

बीना: प्लीज़ अपनी आँखे मत खोलना, मुझे शरम आती है. 
वीरेंदर कुछ ना बोला, वो सातवे आसमान में उड़ रहा था. बीना ने अपनी जीभ निकाल और अपना मूह उसके लौडे की जड पर ले गई. बीना ने अपनी जीब से उसके लौडे की जड से लेकर सिरे तक एक लंबी चुस्की ली.

वीरेंदर की तो मानो मन की मुराद पूरी होने वाली थी. उसके लंड को किसी और्त या लड़की ने आज तक पकड़ा भी नही था और आज पहली ही बार मे कोई औरत उसे अपने मूह में लेकर चूसने वाली थी. वीरेंदर की साँसें तेज़ चलने लगी, बीना का भी बुरा हाल था. आज उसे पहली बार एक लंड को केवल सुख देना था, वो उस लौडे से सुख नहीं पा सकती थी.

बीना: वीरेंदर तुम्हारे लिए मैं आज यह सब पहली बार करने जा रही हूँ, लेकिन प्लीज़ जब निकलने वाला होगा तो बता देना(बीना ने वैसे तो कई बार अभय और बिहारी का लंड चूसा था मगर उसने कभी भी किसी के लंड का माल पिया नहीं था).

वीरेंदर ने बस हां मैं हामी भरी.

बीना ने अपने मन को काबू मे रखकर अपना मूह खोला, जीब अंदर ली और वीरेंदर के सुपाडे को अपने लाल होंठों की गिरफ़्त में ले लिया. वीरेंदर ने कस कर बोस्टर को पकड़ लिया. उसे समझ मे नहीं आया कि वो स्वर्ग मे है या ज़मीन पर, उसकी टाँगे अपने आप और खुलती गई, उपर उठी और बीना की कमर पर लिपट गई. बीना ने अपनी जीभ से उसका सुपाडे को चुबलाना शुरू किया, वीरेंदर किसी मछली की तराहा तड़प रहा था. बीना ने धीरे धीरे वीरेंदर का लंड गटकाना शुरू किया और जितना हिस्सा अंदर जा रहा था उसपर जीभ फिराना शुरू कर दिया.वीरेंदर जन्नत मे हिचकोले खा रहा था, उसकी कमर बेड पर टिक ही नहीं रही थी. काफ़ी देर तक चूसने के बाद बीना के मूह मे दर्द होने लगा. इतना मोटा लंड बीना ने आज तक नहीं चूसा था. आधे से भी कम लंड ही उसके मूह मे जाकर उसके गले मे ठोकरें मार रहा था. बीना जल्द से जल्द वीरेंदर को सखलित करना चाहती थी, उसके जबड़े दुखने लगे थे.

बीना ने वीरेंदर के लंड को मूह मे रखते हुए उसपर जीब चलाना जारी रखा और अपने लेफ्ट हॅंड से उसके टोस्टिस को आराम से पकड़कर सहलाने लगी. 

वीरेंदर जैसे कच्चे खिलाड़ी के लिए इतना काफ़ी था. उसे अपने लंड मे उबाल महसूस हुआ. इस से पहले कि वो कुछ समझ पाता या बीना को बोल पाता उसके पहले ही उसके लंड से वीर्य की ज़ोरदार एक धार बीना के हलक मे गिर गई. पिचकारी इतनी ज़ोरदार थी कि बीना की सांस ही रुक गई. बीना की आँखें बाहर को निकल आई, वो पीछे हटना चाहती थी मगर उसकी कमर पर बनी वीरेंदर की टाँगो की कैंची और मज़बूत हो गई. इसके पहले कि वो अपने हाथो का ज़ोर लगा कर उठने की कोशिश करती, वीर्य की एक और धार उसके मूह मे गिरी. बीना को सांस लेना भी मुश्किल हो गया. सांस लेने के लिए जैसे ही उसने प्रयास किया उसी वक्त वीरेंदर और बीना ने एक आवाज़ सुनी “उउल्क”, फिर दोबारा उउल्क और फिर 7-8 बार उउल्क,उउल्क की आवाज़ के बाद सब कुछ शांत पड़ गया. 

बीना , वीरेंदर के लंड से निकला सारा वीर्य पी गई. बीना ने उसके लंड की एक एक बूँद पी ली. वीरेंदर ने अपनी टाँगे उसकी कमर से निकाली और बीना ने अपने मूह से उसका लंड निकाला और थोड़ा आगे होकर धडाम से उसके उपर गिर गई. बीना गहरी साँसें लेती हुई उसके उपर कुछ देर पड़ी रही और फिर सांसो को संभाल कर वीरेंदर की ओर नज़र उठा कर देखा और अपनी मुट्ठी से उसकी छाती पर धीरे से एक मुक्का मार दिये. 

बीना: तुम बहुत गंदे हो, मेरे से वो काम करवाया जो मैने कभी सपने मे भी नहीं सोचा था और सारा माल भी पिला दिया. 

वीरेंदर: बीना अगर तू मेरे चाचा की बीवी ना होती तो मैं तुझ से शादी कर लेता, कसम से तूने जो मज़ा आज दिया है मैने वो कभी सोचा भी नहीं था. 

बीना मुस्कुरा कर वीरेंदर की तरफ देखती है और कहती है:तुम खुश हो ना, तुम्हें अच्छा लगा? 

वीरेंदर ने उसे अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों पर एक ज़ोरदार किस कर दिया.

बीना ने शरमा कर अपना चेहरा छुपा लिया. 

वीरेंदर: आइ लव यू बीना, आइ लव यू. 

बीना:अच्छा अच्छा अब छोड़ो, मुझे क्लिनिक भी जाना है. 

वीरेंदर: अगर आज तुम्हारे पारीोड्स ना होते तो आज की रात तो तुम्हें कही जाने नहीं देता मगर आज तू बच गई. तुझे तो बाद मैं निपट ही लूँगा. 

बीना: अब तुम आराम करो, कुछ देर और कुछ देर के लिए सो जाओ,मैं चलती हूँ. 

वीरेंदर: बाइ बीना, टेक केर ऑफ युवर चूत. 

बीना: तुम भी जल्दी से इसकी सील तुडवाओ आशना से, फिर तो मैं सारी सारी रात तुम्हें छोड़ने वाली नहीं हूँ. 

वीरेंदर खामोश रहा बस मुस्कुराता रहा. बीना ने उसकी आँखों मे सॉफ संतुष्टि देखी थी लेकिन बीना की चूत मे आग लगी थी जिसे ठंडा करने के लिए अब उसे बिहारी की बहुत ज़्यादा ज़रूरत थी. 

वहीं दूसरी ओर जब बिहारी आशना के रूम के पास पहुँचा तो उसे बहुत बड़ा झटका लगा. आशना ने दरवाज़ा अंदर से बंद कर रखा था. बिहारी ने काफ़ी कोशिश की पर दरवाज़ा नहीं खुला. वो आशना को गालियाँ देता हुआ वीरेंदर के रूम के बाहर ही खड़ा होकर वीरेंदर और बीना की बातें सुनकर मूठ मारने लगा.

जैसे ही बीना बाहर आई, बिहारी उसके पीछे हो गया. बीना बिना पीछे देखे ही सीडीयूं की तरफ चल दी. पीछे से बिहारी ने उसे धीमे से पुकारा तो बीना ने हड़बड़ा कर पीछे देखा. 

बिहारी (धीमी आवाज़ मैं): क्यूँ खल्लास कर दिया साले को. 

बीना ने बड़ी अदा से एक अंगड़ाई ली और धीमे से बोली साला बहुत दमदार है, खूब चूसाया उसने, अब तो मूह भी दर्द कर रहा है. बीना सीडीयाँ उतरने लगी तो बिहारी भी उसके पीछे पीछे नीचे चल दिया.

बिहारी: तो नये लौडे का सारा माल पी कर आ रही है छीनाल. 

बीना: माँ का पहला दूध और लौडे का पहला माल बहुत पौष्टिक और स्वादिष्ट होता है रज्जा. 

बिहारी: साली तुझे तो नया लौडा मिल गया हिलाने को और कुछ ही दिनो मैं तू उसे अपनी चूत से निगल भी लेगी पर मेरा तो कलपद हो गया. 

बीना: तुम्हें किसने बताया कि कुछ दिनों मे मैं उसका लौडा लेने वाली हूँ और तेरा चेहरा क्यूँ उतरा है. 

बिहारी ने उसे सारी कहानी बता दी. बीना का हंस-हंस कर बुरा हाल था. 

बिहारी: हँस ल्ले साली जितना हँसना है. मेरा लौडा एक बार माल उगल चुका है, इस बार तेरी चूत की धज्जियाँ ना उड़ाई तो मेरा नाम भी बिहारी नहीं. 

बीना: चूत तो कब से गीली हो रखी है यह सोच कर. उसका माल निगलते निगलते मेरी भी चूत पानी छोड़ चुकी है. मेरी चूत की धज्जियाँ उड़ा या गान्ड की मगर सच मे आज अगर तुझसे वादा ना किया होता तो वीरेंदर से चुद कर मैं दुनिया की सबसे खुशकिस्मत औरत बन जाती. ऐसा लौडा तो नसीब वालियों को ही नसीब होता है. 

बिहारी: बड़ी जल्द तेरी बेटी यानी वीरेंदर की बेहन नसीब वाली बनने वाली है फिर तो. 

बीना: जलन होती है मुझे उस से मगर एक बार उनकी चुदाई का वीडियो हमें मिल जाए तो फिर आशना को ब्लॅकमेल करके सारी जायदाद अपने नाम करवा दूँगी और अगर वीरेंदर ने आशना को सच जानने के बाद ज़िंदा छोड़ दिया तो वो हमेशा के लिए तेरी और वीरेंदर को तो मैं मुट्ठी में कर ही लूँगी. 

आगे की कहानी अगले पार्ट मे…………….